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श्रीरामचरितमानस पर विवादित बयान देने के मामले में स्वामी प्रसाद मौर्य पर केस दर्ज

श्रीरामचरितमानस पर विवादित बयान देने के मामले में स्वामी प्रसाद मौर्य पर केस दर्ज

पिछले हफ्ते बिहार के शिक्षा मंत्री के रामचरितमानस पर विवादित बयान देने के बाद अब उत्तर प्रदेश के प्रमु्ख पार्टी सपा के वरिष्ठ नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने हाल ही में हिन्दु धार्मिक ग्रंथ श्रीरामचरितमानस  पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इसे बैन कर देना चाहिए क्योंकि यह एक समाज के तबके की भावनाओं को आहत करता है। जिसके बाद ही उनके द्वारा दिये गये इस बयान पर काफी कहा सूनी हुई। साथ ही उनके इस व्यवहार के लिए हिन्दु सांप्रदायिक दलों ने उन्हें इनके इस बयान के लिए घेरे में ले लिया। भाजपा के कई प्रमुख नेताओं ने भी स्वामी प्रसाद के इस विवादित बयान के लिए उन्हें इस मामले में माफी तक मांगने को कहा।

बता दें कि इसे लेकर मंगलवार की शाम सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य और बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर के खिलाफ चित्रकुट जिले के राजापुर थाने मेंं इस बेहद गंभीर मामले को लेकर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया।

अनुज हनुमंत की तहरीर पर आईपीसी के 153- A, 295-A, तथा 505(2) जैसी गंभीर धाराओं  में उनके उपर केश दर्ज किया गया। बता दें कि अनुज हनुमंत ने कहा कि “सपा नेता  स्वामी प्रसाद  के नाम के दो शब्द स्वामी और प्रसाद ये ऐसे शब्द हैं जो रामचरितमानस के दोहा और कई चौपाई में प्रयोग किये गये हैं। फिर भी उन्होंने श्रीरामचरितमानस पर गलत टिप्पणी की।”

हनुमंत ने कहा कि मैनेें केस इसलिए दर्ज कराय है क्योंकि चित्रकुट गोश्वामी तुलशीदास की जन्मस्थली है, साथ ही यहां के लोगों की भावना को ठेस पहुंचा है। उनका यह भी कहना है कि ऐसे नेता लगातार बयान दे कर धार्मिक भावनाएं आहत करने के बाद लोगों को जातिगत तौर पर बांटना चाहते हैं। बता दें कि 22 जनवरी को स्वामी प्रसाद मौर्य ने एक निजी चैनल पर श्रीरामचरितमानस की कुछ पंक्तियों का हवाला देते हु्ए कहा था, कि सरकार को इस बात पर गौर फरमाते हुए रामचरितमानस से उस अंश को बाहर कर देना चाहिए जो एक विशेष वर्ग के खिलाफ है। और साथ ही उसे पूरी तरह से बैन करने की बात कही थी। उन्होंने यह भी कहा था कि इस बात से समाज के दलितों, आदिवासियों, व पिछड़े वर्ग के लोगों को आहत होता है।

12 जनवरी को ठीक कुछ ऐसा ही बयान बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने दिया था।  जिसमें उन्होंने कहा था कि “मनुस्मृति ने समाज में नफ़रत का बीज बोया।  फिर उसके बाद रामचरित मानस ने समाज में नफ़रत पैदा की।” उसके बाद उन्हें काफी बड़े पैमाने पर कटाक्ष का सामना करना पड़ा था।

लेखक- सात्विक उपाध्याय

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