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सलाखों में स्वयंभू भगवान

सलाखों में स्वयंभू भगवान

भारत देश में धर्म के ठेकेदारों की बहार है ऐसा इसलिए कि लोगों में बड़े पैमाने पर सोचने और समझने की मानसिक और वैचारिक शक्ति का घोर अभाव है। जबकि भक्त हैं कि मानते नहीं। बाबाओं के चरणों में खुद को अर्पित कर देते हैं। अंधभक्ति का ये सिलसिला जारी है ऐसे में प्रतिदिन नये-नये बाबा भी अवतरित हो रहे हैं। स्वयंभू संत आसाराम, राधे मां और रामपाल के बाद एक और कलयुगी स्वयंभू भगवान भयंकर विवादों और कानूनी पचड़ों में हंै। इस नये स्वयंभू भगवान का नाम सारथी बाबा है। उड़ीसा के केंद्रापाड़ा जिले के बरिमूला स्थित उसके आश्रम से उड़ीसा पुलिस की क्राइम ब्रांच ने बीते 8 अगस्त को गिरफ्तार किया था। सारथी के खिलाफ धोखाधड़ी, चोरी, आपराधिक साजिश रचने और जान से मारने की धमकी देने सहित कई मामलों में केस दर्ज किया गया है। सारथी बाबा पर लड़कियों की तस्करी और यौन उत्पीडऩ के भी बेहद ही संगीन आरोप लगे हैं।

स्वयंभू भगवान की अय्याशी

खुद को भगवान बताने वाले सारथी बाबा उर्फ संतोष राउल पर आरोप है कि वह हैदराबाद के एक चार सितारा होटल में एक एमबीबीएस की छात्रा के साथ तीन दिनों से रंगरलियां मना रहा था। आरोप तो बाबा पर यहां तक लगे हैं कि बाबा के साथ होटल के एक कमरे में रहने वाली छात्रा कथित तौर पर सारथी बाबा की पत्नी बनकर रह रही थी। इस दौरान बाबा ने जमकर शराब पी और मुर्गे का मांस खाया और जींस-पैंट और शर्ट पहनकर पोज देता रहा। सारथी बाबा की इन सभी करतूतों को वहां के एक टी.वी. चैनल ने कुछ तस्वीरों के साथ प्रसारित भी किया। सबूत के तौर पर पुलिस ने हैदराबाद के अमुक होटल से सारथी बाबा का परिचय पत्र भी होटल प्रबंधन से हासिल किया था। इसके बाद तो उसके अनुयायियों और सारथी से प्रताडि़त गुस्साए लोगों ने हिंसक प्रदर्शन किये। इस दौरान पुलिस से उनकी खूब भिड़ंत भी हुई। वहीं सारथी बाबा ने खुद के ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को विरोधियों की साजिश बताया है। कलयुगी स्वयंभू भगवान सारथी बाबा उर्फ संतोष राउल की करतूतों की लिस्ट बड़ी लंबी है।

स्वयंभू भगवान पर दर्ज मुकदमे

पुलिस ने इस स्वयंभू भगवान और संत के खिलाफ कई संगीन धाराओं, धोखा देने के आरोप में आईपीसी की धारा 420, धोखाधड़ी के आरोप में आईपीसी की धारा 467, फर्जी दस्तावेजों को बनवाने के आरोप में आईपीसी की धारा 468, दूसरे को धोखा देने के लिये फर्जीवाड़ा करने के आरोप में आईपीसी की धारा 471, जान से मारने की धमकी देने के आरोप में आईपीसी की धारा 506, चोट पहुंचाने के आरोप में आईपीसी की धारा 321, आपराधिक साजिश रचने के आरोप में आईपीसी की धारा 120 (बी) और अवैध हथियार रखने के आरोप में सेक्शन 25 आम्र्स एक्ट के तहत मुकदमा कायम किया गया है। बाबा पर लगे आरोपों की जांच उड़ीसा पुलिस की क्राइम ब्रांच कर रही है। जांच में क्राइम ब्रांच ने सारथी बाबा और उसके सत्यम ट्रस्ट के पांच बैंक खातोंं, भारतीय स्टेट बैंक, इलाहाबाद बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, यूनाइटेड बैंक और अर्बन कॉपरेटिव बैंक, केंद्रापाड़ा का पता चला है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि फरेबी सारथी बाबा एक सप्ताह पहले ही अपने सभी बैक खातों से बड़ी रकम निकाल चुका था।

29-08-2015

मंत्री और विधायक लोटते थे पैरों पर

स्वयंभू भगवान सारथी बाबा का राजनीतिक रुतबा भी इस कदर था कि विधायक, मंत्री से लेकर संतरी तक उसके कदमों में अपना सिर झुकाते थे। उसके पैरों के पास मुस्कुराते हुए फोटो खिचवाते थे। करीब दो साल पहले बीजू जनता दल के 12 विधायक सारथी बाबा के चरण छूने पहुंचे थे। इसमें केंद्रापाड़ा की विधायक शिप्रा मलिक, राजनगर विधायक अलेखा जेना, रमेश चंद्र, छऊ पटनायक और विधानसभा की एथिक्स कमेटी के चेयरमैन भी सारथी बाबा के चरणों का आशीर्वाद पाने उसके बरिमूला आश्रम आए थे। इस बात की तस्दीक सारथी बाबा के बरिमूला आश्रम के मुख्य कार्यालय में लटकती एक बड़ी तस्वीर भी करती है। वहीं अब स्वयंभू भगवान सारथी बाबा का भेद खुलने के बाद बीजेपी, कांग्रेस और सीपीएम के नेताओं ने उसकी सभी जायदाद जब्त करने की मांग की है। सारथी बाबा ने अपने आश्रम के संचालन के लिये सत्यम चैरिटेबल ट्रस्ट भी बनाया। ट्रस्ट के सदस्य सरत पात्रा की दलील है कि सारथी बाबा पर लगे आरोप झूठे हैं उनका कहना है कि सच तो यह है कि उन्होंने सामाजिक कार्यों के जरिये लोगों का भला किया।

फिलहाल स्वयंभू भगवान सारथी बाबा जेल की सलाखों के पीछे कैद है। सारथी बाबा के गिरफ्तार होने के बाद बरिमूला और उसके आसपास के कई गांवों के लोगों में जश्न का माहौल है। खुशी में ग्रामीणों ने खूब पटाखें भी छोड़ें।

रंक से राजा तक का सफर

सारथी बाबा का काला सच किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। जो कंगाली और फटेहाली के शिकंजे से चालबाजी के बल पर धर्म का ठेकेदार बन बैठा और चंद वर्षों में ही अमीर बन गया। बनिमाला के निवासी मनोज सतपथी ने सारथी बाबा की दुकान पर चाय भी पी थी। उनके मुताबिक सारथी बाबा बनने के पहले संतोष राउल ने पैसा कमाने के लिये 1980 के दशक में एक चाय की दुकान खोली, तीन वर्षों तक उसे चलाया भी। इंटरमीडिएट कला की परीक्षा भी उसने सिफारिश लगाकर जैसे-तैसे पास की। उसकी ख्वाहिश अमीर बनने की थी। सारथी बाबा के पिता उड़ीसा बिजली विभाग में कर्मचारी थे और बनिमाला गांव में तीन कमरों के एक किराये के मकान में रहते थे। धनवान बनने के लिये संतोष राउल वर्ष 1993 में ऋषिकेश चला गया वहां उसने करीब तीन साल एक आश्रम में बिताये। इसके बाद वर्ष 1996 में संतोष राउल नामक इस शख्स ने उड़ीसा के बरिमूला गांव में जमीन खरीदी और उस पर पहले दो कमरों का मकान बनाया।

कलयुगी सारथी बाबा का कपटी जादू

स्वयंभू भगवान सारथी बाबा फरेब का जादू कर भोले-भाले लोगों को अपने जाल में फंसाता था। अपने हाथों को मलकर सांई बाबा की तरह विभूति निकालने का दावा करता था। सारथी बाबा के पास रोज हजारों भक्त आते थे। बनिमाला गांव निवासी निलाद्री त्रिपाठी के मुताबिक इस दौरान सारथी बाबा उडिय़ा, बांग्ला, तेलगु और हिंदी में प्रवचन देने लगा। गानों पर भक्तों को झूमाने लगा। विभूति से जादू दिखाकर सारथी बाबा और स्वयंभू संत बन गया। उसके सैकड़ों भक्त हो गये थे जो दूर-दूर से उसका प्रवचन सुनने आते थे। इससे सारथी बाबा की आय और शोहरत दिन दुनी रात चौगुनी बढ़ी। भक्तों से मिले पैसों के दम पर सारथी बाबा ने वर्ष 2000 में आश्रम को दो मंजिला बनवाया। इस समय कलयुगी सारथी बाबा का आश्रम दो एकड़ में फैला हुआ है जिसमें एक बड़ा मंदिर और 50 कमरे हैं। इसमें उसके सैकड़ों चेले-चपाटे भी रहते हैं। बनिमाला के प्रशांता पात्र के मुताबिक सारथी बाबा का प्रचारतंत्र काफी मजबूत है। भक्त उसे स्वयंभू भगवान के रुप में जानते हैं। केंद्रापाड़ा निवासी वकील उमेश चंद्र सिंह के मुताबिक सारथी बाबा एक माफिया है उसने हैदराबाद के एक होटल में लड़की के साथ रंगरलियां मनाकर यह साबित कर दिया कि वह कोई संन्यासी नहीं वरन एक कपटी है और अब उसके जादू के फरेब का भंडाफोड़ तो होना ही चाहिए। सारथी बाबा पर वर्ष 2005 में गांव की जमीन पर कब्जा करने के आरोप भी लगे थे। इसके बाद गांव के लोगों और बाबा के अनुयायियों के बीच हिंसक संघर्ष भी हुए थे। बरिमूला निवासी बाबाजी प्रधान और अन्य लोगों की मांग है कि अब उड़ीसा की नवीन पटनायक सरकार को इस फरेबी बाबा के हाथों कब्जा की गई जमीन वापस दी जानी

चाहिए। बाबाजी प्रधान का आरोप है कि स्वयंभू बाबा और भगवान बन बैठा सारथी बाबा अपने भक्तों का इस्तेमाल पैसा पाने और राजनीतिक पहुंच के लिए करता था। उसके आश्रम में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता लगातार आते-जाते थे। ऐसे में जरुरत हैं लोगों को बस एक सीख लेने की, फरेबी बाबाओं से बचने की।

केंद्रापाड़ा से आशीष सेनापति

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