ब्रेकिंग न्यूज़ 

बहिष्कार के खतरे से बॉलीवुड को बचना होगा

बहिष्कार के खतरे से बॉलीवुड को बचना होगा

बॉलीवुड और विवाद एक दूसरे के पूरक माने जाते हैं। अपनी स्‍थापना से लेकर आजतक कभी पटकथा तो कभी दृश्‍य को लेकर विवाद खड़ा होना आम हो गया है। फिल्‍म निर्माण एक अलग विधा है जिसमे उसे कई अवरोधों को पार करना पडता है और उसका अंतिम लक्ष्य दर्शकों के दिल में उतरना होता है। वह तर्क कुतर्क से परे रहा है और कई बार उसकी आलोचना पर्दे पर उसकी सफलता की कहानी बन जाती है। फिल्‍म को रिलीज होने से पहले सेंसर बोर्ड का इम्‍तहान पास करना होता है और कभी कभी सेंसर बोर्ड भी फिल्‍म रिलीज होने के बाद विवादों के जन्‍म लेने के कारण आलोचना का शिकार हो जाता है।

हाल में प्रदर्शित शाहरूख खान की फिल्‍म पठान में एक विवादित दृश्‍य को लेकर सेंसर बोर्ड को भी आलोचना का पात्र बनना पड़ा है। दरअसल इस फिल्‍म में एक गाने में अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के केसरिया अंगवस्‍त्र को लेकर हिंदू संगठनों ने आपत्ति जताते हुये विरोध प्रदर्शन किये।

दरअसल शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण की फिल्म ‘पठान’ रिलीज होने से पहले ही विवादों के घेरे में में आ गई। फिल्म के गाने ‘बेशरम रंग’ को लेकर विवाद शुरू हो गया और फिल्म का बहिष्‍कार करने की भी मांग सोशल मीडिया पर तेज हो गई। ऐसे में अब दीपिका पादुकोण के समर्थन  में बॉलीवुड के कुछ सितारे भी उतर आए हैं। प्रकाश राज के बाद स्वरा भास्कर  का भी समर्थन मिला जिसने राजनेताओं पर निशाना साधा।

हाल ही में इस विवाद की शुरूआत मध्य प्रदेश के मंत्री नरोत्तम मिश्रा के बयान से हुई जिसमें उन्‍होंने कहा था कि अगर इस गाने के दृश्‍य और परिधान नहीं बदले गए तो वह राज्य में फिल्‍म रिलीज नहीं होने देंगे। नरोत्‍तम मिश्रा के बयान पर प्रतिक्रिया हुई और स्‍वरा ने राजनेताओं पर निशाना साधा। इस बीच सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ आ गई।

कोलकाता फिल्म फेस्टिवल में शाहरुख खान ने भी सोशल मीडिया पर आलोचकों को जवाब दिया और फिल्‍म का बहिष्‍कार करने की अपील करने वालों को नकारात्‍मक प्रवृत्ति का बताते हुये कहा कि उनकी सोच सकारात्मक है और इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। शाहरुख ने कहा, ‘दुनिया क्या कर रही है इससे फर्क नहीं पड़ता, हम जैसे लोग हमेशा सकारात्‍मक रहेंगे चाहे हालात कुछ भी हों। मैं खुश हूं कि हम जिंदा हैं”।

फिल्म को लेकर नेताओं की बयानबाजी को प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने अनावश्‍क बताया है। मोदी ने भारतीय जनता पार्टी की राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी की हाल की बैठक के समापन के मौके पर पार्टी कार्यकर्ताओं से बेवजह बयानबाजी नहीं करने की नसीहत दी। उन्‍होंने हिदायत दी कि किसी को भी फिल्मों जैसे अर्थहीन मसले पर अपनी गैर जरूरी टिप्‍पणी करने की कोई जरूरत नहीं है और इसे मामले से जितना बचा जाए उतना ठीक है। इस हिदायत को देते समय मोदी ने न ही किसी नेता का नाम लिया और न ही फिल्म का। लेकिन उनके इस बयान को फिल्म पठान से जोड़कर देखा जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी के बयान की बाॅलीवुड में तारीफ की जा रही है। इंडियन फिल्म एंड टेलिविजन डायरेक्टर्स असोसिएशन के प्रेसिडेंट और फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने मोदी की नसीहत का स्‍वागत करते हुये कहा कि ये नसीहत बाॅलीवुड  इंडस्ट्री के आत्‍मविश्‍वास को मजबूत करेगी। उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री ने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को प्रचार के लिये विवाद में नहीं पडने के लिये जो कुछ कहा है वह फिल्‍म इंडस्ट्री के बाकी लोगो  के लिए एक संकेत है।

बाॅलीवुड ही नहीं पूरी दुनिया में अभिनेता और अभिनेत्रियों को लेकर विवाद खड़े होते रहे हैं तथा मीडिया के लिये यह अच्‍छी खुराक बन जाते हैं। दरअसल ऐसे विवादों से जुडी कहानियों को चटपटा बनाने के लिये तड़का लगाया जाता रहा है। स्टार फाइट्स, ड्रग्स, कानूनी केस, एक्सीडेंट जैसे कितने ही मामले इन अभिनेता और अभिनेत्रियों की जिंदगी से जुड़े हैं। कोई किसी कानूनी पचड़े में फंसा है तो कोई दूसरे विवादों में फंसा हुआ है लेकिन कुछ सितारे ऐसे हैं जो एक दो नहीं कई विवादों में फंसे हैं। उनका विवादों से खासा नाता है।

ऐसे ही बाॅलीवुड में कई अभिनेता हैं जो अपने निजी व्‍यवहार के कारण सुर्खियों में रहे हैं जिनमे सबसे चर्चित नाम सलमान खान का है। सलमान अपनी जिंदगी में कई कानूनी मामलों में फंसे हैं। कार दुर्घटना के साथ-साथ काले हिरण के शिकार के चलते वो जेल भी जा चुके हैं। आज भी उन्हें अदालतों में तारीखों पर जाना पड़ता है। इसके अलावा विवेक ओबरॉय से लड़ाई हो या ऋतिक रोशन से कोल्ड वार या शाहरुख खान से जन्मदिन वाले दिन लड़ाई, सलमान के साथ ऐसे कई विवाद जुड़े हैं।

बाॅलीवुड में कंगना रनौत को विवादों की मल्लिका ‘क्‍वीन आफ कॉन्ट्रोवर्सी” कहा जाने लगा है। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से वह लगातार चर्चा में हैं। अपने विरोधाभाषी बयानों के कारण वह अदालत के चक्‍कर काटने के लिये मजबूर हैं। इससे पहले भी वह ऋतिक रोशन के साथ रिश्ते को लेकर काफी विवादों में रहीं। उन्होंने ऋतिक और उनके परिवार पर कई गंभीर आरोप लगाए थे।

फिल्मों में शानदार काॅमेडी किरदार निभाने वाले राजपाल यादव के ऊपर धोखाधड़ी के सात मुकदमे चल रहे हैं। राजपाल पर आरोप है कि उन्होंने एक फिल्म को निर्देशित करने के नाम पर 5 करोड़ रुपए एक व्‍यापारी से लिए थे लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर नहीं चली और राजपाल को नुकसान हुआ। इसके चलते वो ये रकम नहीं चुका पाए और उन्हें जेल की हवा भी खानी पड़ी। बाॅलीवुड में विवादों कोई छोर नहीं है और कब किस बात को लेकर अभिनेता और अभिनेत्री विवाद का कारण बन जायें, यह समझ से परे है। ऐसे ही बाॅलीवुड की कुछ फिल्में और फोटो 90 के दशक में भी सामने आई थी जिन्होंने खूब धमाल मचाया था। एक फोटो जिसमे रेखा और काजोल एक ही टीशर्ट में समाई नजऱ आ रही हैं। ऐसे ही मल्लिका शेरावत की फ़िल्म द डर्टी पोलिटिकल के पोस्टर में तिरंगा पहनें हुए नज़र आई थीं लेकिन उस पोस्टर को देखकर सभी ने काफ़ी आलोचना की थी और अंतत: उसके निर्माताओं को माफ़ी मांगनी पड़ी। ऐसे ही 80 के दशक में एक फोटो चर्चा में रही जिसमें महेशभट्ट अपनी बड़ी बेटी पूजा भट्ट के साथ लिपलाक करते नज़र आये थे। इसे देखकर सभी ने महेशभट्ट की काफ़ी आलोचना की थी। इस तरह के चर्चित तस्‍वीरों की लंबी फेहरिस्‍त है।

पिछले कुछ समय से देश में बाॅलीवुड के प्रति बेहद गुस्सा और नफरत देखने को मिल रही है। जहां बाॅलीवुड फिल्मों की घोषणा होते ही उसका बहिष्‍कार करने की मांग शुरू हो जाती है वहीं दूसरी ओर दक्षिण भारत की फिल्मों और अभिनेता और अभिनेत्रियों का सोशल मीडिया पर खूब महिमामंडन किया जाता है। ऐसा लगता है कि लोग हिंदी फिल्मों को देखे बिना ही उसका पूरी तरह से बहिष्‍कार करने पर तुले हैं। इस बहिष्‍कार की तपन में अब तक आमिर खान की ‘लाल सिंह चड्ढा’ से लेकर अक्षय कुमार की ‘रक्षा बंधन’ और रणबीर-आलिया की ‘ब्रह्मास्त्र’ और तापसी पन्नू की ‘दोबारा’ तक झुलस चुकी हैं।

हालांकि ब्रह्मास्त्र बहिष्‍कार के नये चलन का शिकार होने से बाल बाल बची लेकिन यह समझ से परे है कि जिन अभिनेता और अभिनेत्रियों की फिल्मों को देखने के लिए जनता दीवानी हो जाती थी आज वही जनता उनकी फिल्मों को देखने तक से मना कर रही है। हाल में सामने आई एक स्टडी से पता चला है कि बाॅलीवुड पर बहिष्‍कार करने का आहवान ज्यादातर उस समय किया गया जब नई फिल्में रिलीज हुईं। लेकिन इसमें छोटी फिल्मों के मुकाबले बड़ी फिल्मों को ज्‍यादा निशाना बनाया गया और उनकी कमाई पर इसका बुरा असर भी पड़ा।

‘लाल सिंह चड्ढा’ और ‘रक्षा बंधन’ का क्या हाल हुआ यह किसी से छुपा नहीं है लेकिन कुछ चीजें और भी सामने आईं कि फिल्मों का बहिष्‍कार करने की मांग करनेवाले ज्यादा ट्विटर अकाउंट्स फर्जी हैं। कुछ ऐसे हैं, जिनकी नाममात्र की फालोईंग है। इससे पता चलता है कि इनका एकमात्र मकसद सिर्फ ट्रेंडिंग टारगेट को हिट करना है और यह मुहिम निहित स्‍वार्थ के लिये भी चलाई जाती है।

फ़िल्म ‘ब्रह्मास्त्र’ को बाॅयकाॅट करने के लिए रणबीर कपूर का 11 साल पहले दिया गया एक बयान सामने लाया गया जिसमें रणबीर ने खुद को बिग बीफ़ ब्‍वाय कहा था। वहीं आलिया भट्ट ने भी एक इंटरव्यू में अंहकारी अंदाज में कहा था कि यदि लोग उन्हें पसंद नहीं करते तो न देखें। वैसे दोनों अभिनेता अपनी नकारात्‍मकता के कारण भी निशाने पर रहे हैं। ब्रह्मास्त्र का बहिष्कार करने के पीछे सोशल मीडिया पर इन्हीं वजहों को बताया गया था।

दीपिका पादुकोण की फ़िल्म छपाक भी नहीं चल पाई थी। जवाहरलाल नेहरू विश्‍वविद्यालय, जेएनयू, में हिंसा के विरोध में वामपंथी युवा नेता कन्हैया कुमार के साथ जेएनयू पहुंचीं दीपिका पादुकोण भाजपा नेताओं और उनके समर्थकों के निशाने पर आ गई थीं। इसके साथ ही ट्विटर पर छपाक का बहिष्कार की अपील की जाने लगी। यह फ़िल्म बुरी तरह फ्लॉप तो नहीं हुई थी लेकिन अच्छी कमाई भी नहीं कर पाई।

दीपिका पादुकोण और शाहरूख खान की नई फिल्‍म पठान को लेकर सोशल मीडिया में बहिष्‍कार करने की मांग की जा रही है और हिंदूवादी संगठनों की आपत्ति के बाद सेंसर बोर्ड ने भी इस फिल्‍म को कुछ बदलाव के बाद रिलीज करने की अनुमति दी है लेकिन वह बेशर्म रंग के गाने को लेकर आपत्ति होने के कारणों को पहले भांप नही पाई। बहिष्‍कार की मांग के नये चलन ने फिल्‍म निर्माताओं और निर्देशकों के लिये नई चुनौती खडी की है।

विरोध के इस नये चलन को प्रोत्‍साहन देने से भी समाज और फिल्‍म उद्योग दोनो को नुकसान होने का बडा खतरा मंडराने लगा है। फिल्‍म को मनोरंजन का बढियां साधन माना जाता है साथ ही वह अपनी कलात्‍मकता की विधा के लिये प्रशंसा का पात्र भी बनता रहा है। बॉलीवुड की फिल्‍में हालीवुड की फिल्‍मों की बराबरी करने लगी हैं। ऐसे में फिल्‍म निर्माता और निर्देशकों का दायित्‍व है कि वह समाज की भावनाओं और इतिहास के तथ्‍यों के साथ किसी भी सूरत में छेड़छाड़ नहीं करें।

 

अशोक उपाध्‍याय
पूर्व संपादक, यूनीवार्ता

Leave a Reply

Your email address will not be published.