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गिलोय: प्रकृति का अमूल्य तोहफा

गिलोय: प्रकृति का अमूल्य तोहफा

प्रकृति ने हमें बहुत से उपहार दिये हैं। उसने हमें फल-फूल, सब्जियां, और न जाने कितने प्रकार की जड़ी-बूटियां प्रदान की है, जो इंसान की सेहत के लिये अत्यंत लाभदायक है। इन्हीं में शामिल है बहुगुणीय गिलोय। गिलोय को आयुर्वेद में कई नामों से जाना जाता है। जैसे- अमृताबेल, गुडुची, छिन्नरूहा, आदि। गिलोय एक औषधि है, जिसके प्रयोग से शरीर के अनेक कष्ट और बीमारियां दूर होती हैं। गिलोय शरीर के त्रि-दोष कफ ,वात और पित्त को संतुलित करती है। गिलोय को उल्टी, बेहोशी, कफ, पीलिया, धातू विकार, सिफलिस, एलर्जी सहित अन्य त्वचा विकार, चर्म रोग, झाइयां, झुर्रियां, कमजोरी, गले के संक्रमण, खांसी-जुकाम, ज्वर, टाइफायड, मलेरिया, डेंगू, पेट के कृमि, पेट के रोग, सीने में जकडऩ, जोडों में दर्द, रक्त विकार, निम्न रक्तचाप, हृदय दुर्बलता, क्षय रोग (टीबी), लीवर, किडनी, मूत्र रोग, मधुमेह, रक्तशोधक, रोग प्रतिरोधक, गैस आदि को दूर करने के लिए खूब प्रयोग किया जाता है। गिलोय के उपयोग यहीं तक सीमित नहीं हंै, बल्कि और भी रोगों में गिलोय का प्रयोग बहुत लाभदायक है। आईये बताते हैं आपको गिलोय रूपी अमृत के बारे में:

  • रक्त कैंसर होने पर गिलोय का रस और गेहूं के ज्वारे के रस को एक कप पानी में बराबर मात्रा में मिलाकर खाली पेट सेवन करें। फायदा होता है।
  • गिलोय, गेहूं के ज्वारे का रस, तुलसी और नीम के 5-7 पत्ते पीसकर सेवन करने से कैंसर में भी लाभ मिलता है।
  • क्षय रोग में गिलोय सत्व, इलायची और वंशलोचन को शहद के साथ लेने से धीरे-धीरे लाभ मिलता है।
  • मिर्गी का दौरा पड़ता हो तो गिलोय और पुनर्नवा का काढ़ा बनाकर रोजाना सेवन करने से कुछ दिनों में ही मिर्गी के दौरे पडऩे बंद हो जाते हैं।
  • 12-09-2015पीलिया होने पर गिलोय के काढ़े में शहद मिलाकर दिन में 3-4 बार पीने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है। गिलोय के पत्तों को पीसकर एक गिलास मट्ठे में मिलाकर सुबह खाली पेट पीने से भी पीलिया ठीक होता है।
  • बांझपन से मुक्ति के लिए गिलोय और अश्वगंधा को दूध में पकाकर नियमित खिलाने से बांझपन से मुक्ति मिलती है।
  • कान में दर्द हो तो गिलोय के रस को गुनगुना कर दोनों कानों में दिन में 2 बार डालने से कान के दर्द से राहत मिलती है।
  • गिलोय की डंडी के छोटे टुकड़े करें, उसे दो गिलास पानी मे उबालें, जब पानी आधा रह जाये तो इस काढ़े को ठंडा कर रोगी को पिलायें। इसके इस्तेमाल से मात्र 45 मिनट बाद ही ब्लड सेल्स बढऩे शुरू हो जाएंगे।
  • डेंगू, मलेरिया होने पर गिलोय का काढ़ा बनाकर पिलाने से रोगी को राहत मिलती है और ब्ल्ड सेल्स में इजाफा होता है।    प्रतिदिन सुबह-शाम गिलोय का रस घी में मिलाकर शहद या मिश्री के साथ सेवन करने से शरीर में खून की कमी दूर होती है।
  • गिलोय के चूर्ण को शहद के साथ खाने से कफ और सोंठ के साथ सेवन करने से आमवात से संबंधित रोगों में फायदा होता है।
  • मट्ठे के साथ गिलोय के चूर्ण का सुबह-शाम सेवन करने से बवासीर में लाभ होता है।
  • एक गिलास पानी में गिलोय के 6 तनों को कुचल कर उसमें 4-5 तुलसी की पत्तियां और तीन चम्मच एलोवेरा का गूदा मिलाकर इसका काढ़ा बनाकर नियमित रूप से सेवन करते रहने से जीवनपर्यन्त कोई बीमारी पास नहीं फटकती।
  • उच्च कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने के लिये, शरीर में शर्करा के स्तर को संतुलित बनाये रखने के लिये भी गिलोय काफी मददगार है। गिलोय शरीर को हृदय संबंधित बीमारियों से भी बचाती है।

प्रीति ठाकुर

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