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संत तुलसीदास आज भी प्रासंगिक

संत तुलसीदास आज भी प्रासंगिक

विकास किसी देश की बपौती नहीं बल्कि, पूरे विश्व का मसला है।

— कप्तान सिंह सोलंकी राज्यपाल, पंजाब एवं हरियाणा

दिल्ली के चिन्मय मिशन सभागर में 22 अगस्त 2015 को तुलसी जंयती के अवसर पर एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन जन भावना समाज सुधार समितिके द्वारा सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर कई महान हस्तियों ने सम्मिलित होकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इन महान हस्तियों ने कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज करा भारतीय संस्कृति और परंपरा को बढ़ावा दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पंजाब एवं हरियाणा के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी, थे। कार्यक्रम में मौजूद विशिष्ट अतिथियों में राजस्थान और जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एस.एन. झा, पूर्व मंत्री और भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, चिन्मय मिशन गुडग़ांव शाखा के अध्यक्ष स्वामी दुर्गेशानन्द जी, वरिष्ठ पत्रकार वेद प्रताप वैदिक और संसद सदस्य रामचरित्र निषाद थे। कार्यक्रम में राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने आचार्य सोहन लाल रामरंग, डॉ. वेद प्रताप वैदिक, राधा बल्लभ शर्मा, गिरिरत्न मिश्र, श्री कृष्ण मुदगिल, स्वामी निखिलानंद सरस्वती, श्रीमती संतोष बंसल, डॉ परमानंद पंचाल, हृशीकेष रथ और अजय तिवारीजी को तुलसी रत्न सम्मान देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर तुलसी जयंती 2015 की स्मारिका का विमोचन राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी के करकमलों द्वारा संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य संयोजक डॉ. अरूण शर्मा रहे।

12-09-2015कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति और आध्यात्म को बढ़ावा देना रहा। गौरतलब है कि विदेशियों ने एक हजार साल पहले भारतीयों को गुलाम बनाया था, उनकी गुलामी से भारत ने खुद को राजनीतिक तौर पर तो आजाद करवा लिया, लेकिन सांस्कृतिक पहचान की तलाश आज भी धाराप्रवाह जारी है। अपनी इसी अनमोल विरासत को महत्व दिलाने के लिए भारत का जनमानस तुलसीदास सरीखे संत के साहित्य से भरे ग्रंथों विशेषकर रामचरितमानस जैसे महाकाव्य को महत्वपूर्ण मानते हैं। अपनी सांस्कृति विरासत को जीवित बनाये रखने के लिए और आगे बढ़ाने की कोशिश में इस कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि ‘आज के पाश्चात्य जगत का अनुकरण हम करें या न करें, भौतिकवाद की तरफ जायें या नहीं, हम अंग्रेजी भाषा जो कि तकनीक की भाषा कही जाती है को अपनायें या नहीं मन में इस तरह के कई प्रश्न उपजते हैं। क्योंकि, अंग्रेजी को अपनाने से हमारी मातृभाषा कहीं दबी-कुचली सी रह जाती है।’ साथ ही उन्होंने कहा कि ‘इलाहबाद हाईकोर्ट ने जो फैसला दिया है कि सरकारी अफसर अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाएं ये फैसला इसलिए दिया क्योंकि सरकारी स्कूलों की हालत बेहद खस्ता है। जिन्हें सरकारी स्कूल के संचालन की जिम्मेदारी दी गई है वह खुद ही अपने बच्चों को वहां नहीं पढ़ा रहे हैं आखिर क्यों? क्योंकि स्कूलों की दशा अच्छी नहीं है। जिन्हें इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है वह इस तरफ अनदेखी करते हैं इसलिए इलाहबाद हाईकोर्ट ने सख्त कदम उठाये।’ उन्होंने कहा कि विकास किसी देश की बपौती नहीं बल्कि, पूरे विश्व का मसला है।’ अर्थात सभी को अपनी भूमिका ठीक से निभानी चाहिए।

कार्यक्रम में शामिल हुए राजस्थान और जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एस.एन. झा ने कहा कि ‘जो साहित्यकार और कवि होते हैं वो किसी भी पात्र का निर्माण करके उनके माध्यम से अपनी बातों को कहते हैं। उनके कहने का तरीका अद्भुत होता है। हम राम को हजारों वर्षों से भगवान के रूप में जानते हैं, लेकिन तुलसीदासजी ने राम के चरित्र का निर्माण कर उन्हें घर-घर पहुंचाया है, आज लोग जैसे राम को पूजते हैं उसमें तुलसीदासजी का बहुत बड़ा योगदान है।’

12-09-2015

वहीं पूर्व मंत्री और भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने अमेरिकी जीवन शैली पर प्रहार करते हुए कहा कि वहां की सभ्यता और संस्कृति की तुलना भारत से करना अपने देश की आलोचना करना है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में जीवन साथी बदलने की परंपरा है, लेकिन हमारे देश में ये जन्म-जन्मांतर का रिश्ता है। इसके साथ ही उन्होंने रामचरित मानस की पंक्तियां ‘मंगल भवन, अमंगल हारी’ सुनाकर वहां मौजूद लोगों को भाव- विभोर कर दिया।

प्रीति ठाकुर

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