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दक्षिण में फिर खिला कमल

दक्षिण में फिर खिला कमल

बिहार विधानसभा चुनाव के पहले ही भारतीय जनता पार्टी की झोली में एक साथ तीन खुशियां गिरी हैं। मध्य प्रदेश और राजस्थान के बाद बेंगलुरु के स्थानीय निकायों के चुनाव में उसकी जीत हुई है। तीनों राज्यों के स्थानीय चुनावों में बीजेपी का विजय रथ रोकना कांग्रेस के बूते से बाहर रहा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बेंगलुरु नगर निगम चुनाव में मिली जीत को हैट्रिक करार देते हुए पार्टी नेताओं और जनता को बधाई दी। भाजपा ने सीटों का शतक जड़ते हुए बेंगलुरु नगर निगम की कुल 198 सीटों में से 100 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस को 76, जेडीएस को 14 और अन्य को 08 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा।

जीत से गदगद पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने लगे हाथों कांग्रेस पर जुबानी तंज कसे और सुधर जाने की नसीहत देते हुए कहा, कि कांग्रेस पार्टी संसद को चलने दे। जाहिर है कि भाजपा के लिये यह जीत बड़े मायने रखती है, क्योंकि कुछ ही दिनों बाद बिहार विधानसभा के चुनाव होने हैं। ऐसे में अगर भाजपा हारती तो विपक्षी दल नरेन्द्र मोदी और अमित शाह पर तंज कसते। भाजपा को भी दिमागी और मनोवैज्ञानिक हार का सामना करना पड़ता।

बेंगलुरु नगर निगम चुनाव सही मायनों में राजनीतिक दलों के लिये किसी सबक से कम नहीं और दूसरे मायने में जनता की हार ही हुई है, क्योंकि मतदान में 50 फीसदी से कम मतदाताओं ने ही हिस्सा लिया था। शहर में बढ़ती गंदगी, पानी की कमी तथा बदहाल सड़कों की वजह से भड़के मतदाताओं ने शायद अपने आपको मतदान से दूर रखकर राजनीतिक पार्टियों को सांकेतिक चेतवानी दे दी कि अगर वो ठीक से काम नहीं करेंगे, तो उन्हें जनता जर्नादन के रोष का खामियाजा भुगतने को भी तैयार रहना पड़ेगा। वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के बाद वृहत बेंगलुरु महानगर पालिका के 198 वार्ड्स में से पचास फीसदी यानी 99 वार्ड्स महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए थे।

भाजपा के लिय बीबीएमपी यानी वृहत बेंगलुरु महानगर पालिका चुनाव में मिली जीत इसलिए भी बड़ा महत्व रखती है, क्योंकि वर्ष 2010 में भाजपा की सरकार थी, लेकिन उसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में उसे हार का मुंह देखना पड़ा था। इस जीत को भाजपा कर्नाटक में अपनी वापसी के तौर पर देख रही है। लेकिन, भाजपा के लिए बेंगलुरु की जीत चिंता का सबब भी है, क्योंकि इस चुनाव में उसे पूर्व के मुकाबले घाटा हुआ है, जबकि कांग्रेस फायदे में रही है।

कुमार मयंक

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