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भारत को विश्व प्रसिद्ध बनाना मेरा लक्ष्य–सुकेत धीर

भारत को विश्व प्रसिद्ध बनाना मेरा लक्ष्य–सुकेत धीर

फैशन इंडस्ट्री का हर इंसान, चाहे वह बच्चा हो या जवान सभी के लिये आकर्षण का केन्द्र हैं। सभी कुछ नया और हटकर करना चाहते हैं। जो उनकी खूबसूरती को और निखार दे। ऐसा ही एक प्रसिद्ध नाम है फैशन डिजाइनर सुकेत धीर का जो हर वक्त लोगों के लिए कुछ नया करने की कोशिश में रहते हैं। इन्होंने हाल ही में ‘इंटरनेशनल वूलमार्क प्राइज रीजनल अवॉर्ड’ मेन्स वियर में जीता । जीत के बाद सुकेत धीर से सविस्तार बातचीत की उदय इंडिया की संवाददाता प्रीति ठाकुर ने। पेश हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश:-

जब आपको इंटरनेशनल वूलमार्क प्राइज रीजनल अवॉर्ड में हिस्सा लेने के लिये इनविटेशन मिला, उस वक्त आपने खुद को अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए कैसे तैयार किया?

मेरी तनिक भी तैयारी नहीं थी, मुझे तो अंदाजा तक नहीं था कि इतने बड़े स्तर की प्रतियोगिता के लिए मुझे इनविटेशन मिलेगा और जब मुझे इनविटेशन मिला तो शुरू में तो मुझे विश्वास ही नहीं हुआ कि मुझे इतने बड़े स्तर पर इनविटेशन मिला है। शुरू में तो मुझे काफी घबराहट भी हुई की इतनी बड़ी प्रतियोगिता के लिए हमें इनविटेशन मिला है। लेकिन, जब आपका काम अच्छा होता है तो जाहिर सी बात है कि लोग नोटिस करते हैं। खासतौर पर जो लोग टैलेंट हंट करते हैं वो लोग तो इस बात को ध्यान रखते ही है कि कौन अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। मुझे लगता है कि इनकी नजर हम पर और हमारे काम पर थी। इसके आधार पर ही हमें इंटरनेशनल वूलमार्क प्राइज रीजनल अवॉर्ड के लिए चुना गया। पहले हमने एक स्केच बना कर अपना कॉसेप्ट पे्रजेंट किया कि हम क्या करेंगे। इस शो में जिससे हम इस कॉम्पटीशन में चुन लिये जाएं। ये एक ग्लोबल कॉम्पटीशन था, जिसे छह रीजन में बांटा गया था। इसमें हर रीजन से 10-12 लोगों को चुना जाता है। इंडिया से मेन्स वियर कैटेगरी को रिपे्रजेंट करने के लिए हमें चुना गया था। पहली बार ही मेन्स वियर कैटेगरी के लिये किसी को चुना गया था। वो हम थे। जितने भी लोगों को इनविटेशन भेजा गया था, उनमें से हमें चुना गया। जिसके बाद दुबई में आयोजित रीजनल कॉम्पटीशन में भारत, पाकिस्तान, मध्य पूर्व की जो अंतरिक प्रतियोगिता रही उसके लिये हमें दुबई बुलाया गया। हमारा कॉम्पटीशन पाकिस्तान और मध्य पूर्व के प्रतियोगियों से हुआ, जिसमें से हमें फाइनल में जाने के लिए चुना गया।

फाइनल कॉम्पटीशन जो कि जनवरी 2016 में इटली में होने वाला है, उसके लिए आपकी क्या खास तैयारियां हैं?

फाइनल की तैयारी के लिए हम पूरे जोर-शोर से लगे हुए हैं, कुछ भी चांस पर नहीं छोड़ा जा सकता। भारतीय फैब्रिक, टेक्सटाइल हमारी धरोहर हैं। हमने दुनिया को अपना टेक्सटाइल और फैब्रिक दिया है। टेक्सटाइल पूरी दुनिया को हिन्दुस्तान से ही मिला है। पहले के वक्त में सबसे खूबसूरत टेक्सटाइल हिन्दुस्तान में ही बनते थे। मिलों के आने से पहले हाथ के बुनकर काफी प्रसिद्ध थे। आज भी भारत में ही सबसे बढिय़ा हाथ के बुनकर मौजूद हैं। फाइनल कॉम्पटीशन के लिये ये भी हमारा एक कान्सेप्ट है। ये हमारे दिमाग में पहले से ही था कि भारत में कोई ऐसी चीज बनें जो पूरे विश्व में प्रसिद्ध हो। हम अपना प्रोड्क्ट ऐसा बनाना चाह रहे हैं जो विश्व स्तर पर भी हमारे काम का लोहा मनवा सके, सबसे बेहतरीन प्रोड्क्ट हमारा हो ऐसी हमारी कोशिश है।

दुबई में कॉम्पटीशन जीतने के बाद इटली में होने वाले कॉम्पटीशन के लिए लोगों की उम्मीदें आप से बढ़ गईं हैं। ऐसे में आप दबाव तो महसूस नहीं कर रहे हैं?

उम्मीदों की बात करें तो मेरी खुद से इतनी उम्मीदें हैं कि बाहर की उम्मीदों और प्रेशर का मुझ पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। अगर मुझ पर दबाव होता भी है बाहर का, तो मेरा काम अंडर प्रेशर में अच्छा ही होगा। बाहर का प्रेशर मुझ पर असर इसलिए भी नहीं करेगा, क्योंकि मेरा खुद का मुझ पर बहुत प्रेशर है और मैं जानता हूं कि मुझे भारत को विश्व स्तर पर रिप्रेजेंट करना है तो इससे बड़ा प्रेशर और क्या होगा।

आपने इंटरनेशनल वूलमार्क प्राइज रीजनल अवॉर्ड में अपनी जीत दर्ज करवाई हैं, तो फिर आप शेर-ए-पाकिस्तान जैसे प्लेटफॉर्म पर हिस्सेदारी क्यों नहीं कर रहे?

ये एक अच्छा प्लेटफॉर्म है, लेकिन हमारी तैयारी पूरी तरह से जनवरी में होने वाली इंटरनेशनल वूलमार्क कॉम्पटीशन के लिये है। जो जनवरी 2016 में इटली में होनी है। भारत ने दुनिया को पश्मीना और मलमल जैसे बेहतरीन फैब्रिक्स दिये हैं। जिसे आज तक कोई और देश नहीं बना सका है। हम चाहते हैं कि हम भारत के फैब्रिक्स और टेक्सटाइल्स को विश्व के शिखर पर पहचान दिलाएं। बस इसी पर अभी हमारा ध्यान लगा हुआ है। जिसकी वजह से हम किसी दूसरी तरह के प्लेटफॉर्म पर हिस्सा लेने के बारे में अभी सोच ही नहीं रहे हैं।

अक्सर वीमेन वियर डिजाइन करना आसान होता है, पर मेन्स का कान्सेप्ट थोड़ा मुश्किल होता है ऐसे में आपके लिए दुबई में जीतना कैसे संभव हुआ, क्योंकि आपका कान्सेप्ट मेन्स वियर का है?

ये बहुत अच्छा सवाल है, क्योंकि ये सच है कि वीमेन वियर में डिजाइन तैयार करना काफी हद तक आसान होता है। क्योंकि, वीमेन दस तरह के गारमेंट पहनती हैं। जबकि मेन्स पैंट-शर्ट और कोट ही पहनते हैं। ज्यादा-से-ज्यादा कुर्ता-पायजामा जैसे मेन्स वियर गिने-चुने ही होते हैं, जिनमें एक आदमी शुरू होता है और खत्म हो जाता है। इसलिए मेन्स वियर में फैब्रिक से लेकर टेक्सटाइल तक पर हमारा पूरा ध्यान रहता है। अब शर्ट वगैरह तो रीडिजाइन हो नहीं सकती, तो हमारा ध्यान इस बात पर रहता है कि कैसी बटन लगे, तुरपाई या कुछ भी नया डिजाइन उसी में किया जाए। हर फैशन डिजाइनर का कोई-न-कोई म्यूज (प्रेरणा स्रोत) होता है। मेरा म्यूज मैं खुद हूं, इसलिए मेरे लिए यह काफी आसान रहा।

फैशन फील्ड में आने वाले नए डिजाइनर्स के लिये आपका क्या संदेश है?

मार्केट के प्रेशर में आकर अपने निर्णय न लें। फैशन डिजाइनिंग एक क्रिऐटिव फील्ड है और फैशन डिजाइनर का काम हमेशा कुछ नया और बढिय़ा करने का होता है। ये जरूरी भी नहीं है कि हमेशा कुछ नया ही हो पर जो भी हो वह अच्छा हो। मार्केट में क्या चल रहा है, उसके हिसाब से काम नहीं करना चाहिए। कभी ये नहीं देखना चाहिए की मार्केट में इस रंग की या इस डिजाइन की मांग है तो उस हिसाब से काम करने लगें। जो आपके दिल और दिमाग में कुछ भी नया आये वही करना चाहिए। यही मेरा संदेश है कि अपने मन की सुनें और अपनी एक अलग जगह बनाएं।

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