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स्वास्थ्य में पानी की भूमिका

स्वास्थ्य में पानी की भूमिका

सभी तरफ है पानी-पानी पर एक बूंद भी पीने को नहीं है। यह प्राचीन कथन एक जहाज के नाविक की दुर्दशा को दर्शाता है। पानी मानव-शरीर के लिये एक बहुत ही आवश्यक तत्व है। हम पानी रोज कई बार पीते हैं, बिना यह सोचे कि उसका महत्व कितना है। यह सत्य है कि पानी के बिना जीवन संभव ही नहीं।

जीवन की शुरूआत एक मांसपेशी से होती है और जिस तरल पदार्थ में वह पनपती है, वह पानी ही है। आठ ग्लास पानी रोज पीएं, यह कहावत अब पुरानी हो चली है। पानी की आवश्यकता हर व्यक्ति पर अलग-अलग निर्भर करती है, जिसमें कई तथ्य है जैसे कि हम किस प्रकार का भोजन खाते हैं, वातावरण में नमी, शारीरिक श्रम कितना करते हैं आदि।

यह माना जाता है कि संयमित पेय पदार्थों का सेवन जैसे चाय व कॉफी (2 या 3 कप प्रतिदिन) ठीक रहता है, परंतु इनकी अधिकता होने पर ज्यादा पानी पीकर ही इनके दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है। हालांकि उससे अधिक मूत्र-विसर्जन की आशंका जताई जा सकती है, परंतु ऐसा होता नहीं है।

यह भी याद रखना फायदेमंद है कि अगर मूत्र का रंग हल्के पीले रंग से ज्यादा गहरा हो तो उस व्यक्ति को अपना तरल पेय पदार्थ लेने की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए। अधिक समय धूप में रहने व ज्यादा पसीना निकलने पर पानी का सेवन बढ़ा देना बहुत ही महत्वपूर्ण है। हम अक्सर यह भूल जाते हैं कि पानी वह तत्व है जो हमारे शरीर व मस्तिष्क को कार्यशील रखता है, जब हम किसी भी काम में कार्यरत रहते हैं। पानी की ऐसी ही अनेक विशेषताएं हैं जो उसे सार्वभौमिक घुलनशील बनाती हैं।

यदि पानी की मात्रा आपके शरीर में सही अनुपात में है तो आपकी पाचन-क्रिया भी सही रहती है और भोजन में मौजूद खनिज पदार्थ व अन्य विटामिन पानी में सरलता से घुलनशील होने के कारण शरीर में सहजता से प्रवेश कर जाते हैं, तथा आपकी त्वचा को भी स्वस्थ्य रखते हैं। पानी विशाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में भी मदद करता है। इसके साथ ही पानी द्वारा आपका पेट भरा होने पर यह ज्यादा खाना खाने से भी हमें रोकता है।

यह भी विडंबना है कि पानी जहां आवश्यक तत्व है, वह कई परिस्थितियों में अधिक नुकसानदेह भी हो सकता है, अगर वह दूषित हो, क्योंकि पानी सार्वभौमिक घुलनशील है जो बहुत से दूषित पदार्थों जैसे- सूक्ष्मजीवों व कठोर-धातुओं को अपने में मिला लेता है। हालांकि इस समस्या के समाधान के कई तरीके हो सकते हैं, जैसे- बहुत सी ऐसी झिल्लियों व यू.वी. किरणों के द्वारा इसके शोधन व स्वच्छता में सहायक बन सकती हैं।

अक्सर लोगों को यह भी डर रहता है कि पानी में क्लोरीन डालकर इस्तेमाल में लाना मानव-स्वास्थ्य के लिये खतरनाक हो सकता है, लेकिन जब तक क्लोरीन का कोई विकल्प नहीं मिलता है, तब तक यही एकमात्र उपाय है। एक बच्चे के तौर पर मुझे बार-बार यह याद दिलाया जाता था कि हम पर्याप्त पानी नहीं पीते हैं, बड़े होने के लिए, लेकिन जब बड़े हुए तो पता चला कि वाटर इन्टॉक्सिकेशन जैसी भी कोई चीज है।

आजकल बोतलबंद पानी ज्यादा लोकप्रिय है, क्योंकि यह पानी का सबसे सुरक्षित साधन माना जाता है, लेकिन यह भी देखा गया है कि इन बोतलों में सामान्य नल का पानी भरा होता है, जबकि दर्शाया यह जाता है कि यह ‘मिनिरल वाटर’ है। सच्चाई यह है कि ‘मिनिरल वाटर’ वह पानी होता है जो किसी झरने या कुंए से लिया गया हो, जिसमें 250-500 पीपीएम मिनिरल हो। बहुत से ‘मिनिरल वाटर’ में सोडियम अधिक होने के कारण ब्लड प्रेशर के मरीजों को सचेत रहने की चेतावनी भी देते हैं।

आजकल बच्चे पानी के विकल्प के रूप में मीठे पेय-पदार्थों का सेवन कर रहे हैं, यह बहुत ही हानिकारक प्रवृति है। इस प्रवृति को युवाओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़ के रूप में देखा जा सकता है । ‘टॉनिक वाटर’ एक ओर भ्रामक नाम है जो कि सही में कार्बोनेटेड पेय है व कानूनी तौर पर ‘सॉफ्ट ड्रिंक’ की श्रेणी में आता है। इसलिए यह ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बात है कि सादा व साधारण पानी का कोई विकल्प नहीं हो सकता।

नीलांजना सिंह

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