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सामाजिक सक्रियता, पारदर्शिता और सोशल मीडिया

सामाजिक सक्रियता, पारदर्शिता और सोशल मीडिया

‘भारत नीति, एक सार्वजनिक नीति मंच’ द्वारा ‘सुशासन और समावेशी विकास के लिए सोशल मीडिया’ पर 12-13 सितंबर, 2015 को दिल्ली में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का आयोजन ‘सम्मेलन केन्द्र, नई दिल्ली सिटी सेन्टर’ में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। इस कार्यक्रम का उद्घाटन जितेंद्र सिंह द्वारा किया गया। इस आयोजन में मुरलीधर राव (भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव), आर.चंद्रशेखर (अध्यक्ष, नैसकॉम और पूर्व सचिव, आईटी विभाग), अरुणा सुंदरराजन (वरिष्ठ आईएएस, अपर सचिव, संचार और आई.टी मंत्रालय) समेत अन्य कई अतिथिगण मौजूद रहे। जिन्होंने अपने-अपने विचारों से इस कार्यक्रम को पोषित करते हुए लोगों को सोशल मीडिया, उसके सही इस्तेमाल और महत्व की जानकारी दी।

दो दिवसीय इस कार्यक्रम को पांच सत्रों में विभाजित किया गया। पहले दिन तीन और दूसरे दिन 2 सत्रों का आयोजन हुआ। प्रत्येक सत्र में अलग-अलग विषयों पर चर्चा की गई। जिसमें पहले सत्र में ‘सोशल मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक जनता और नागरिकों की भागीदारी’ पर चर्चा हुई, तो वहीं दूसरे सत्र में ‘सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता को सुविधाजनक’ कैसे बनाया जाये इस पर चर्चा की गई। तीसरे सत्र में ‘सोशल मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक सेवाओं का वितरण’ पर और चौथे सत्र में ‘ग्रामीण विकास के लिए सोशल मीडिया एक उपकरण’ के रूप में कैसे कार्यरत हो इस विषय पर चर्चा की गई। पांचवें सत्र में सोशल मीडिया और सामाजिक सक्रियता चर्चा का विषय रहा।

सम्मेलन के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव मुरलीधर राव ने कहा कि ”सोशल मीडिया वास्तव में लोकतंत्रिक प्राक्रिया में लोगों कोसशक्त और मजबूत बनाने के लिए एक महत्वपूण उपकरण के रूप में उभर कर सामने आया है। यह केवल दो-तरफा संवाद का माध्यम ही नही है, बल्कि इससे स्थान और समय की सीमाएं भी समाप्त हुई हैं, जिससे पारंपरिक मीडिया ग्रस्त है। सोशल मीडिया के आने से सेवा वितरण, सार्वजनिक क्षेत्र और पारदर्शिता में गुणवत्ता आई है।’’

वरिष्ठ पत्रकार पीयूष पांडेय का कहना था कि ”जब हम दिल्ली में बैठ कर सोशल मीडिया की बात करते हैं तो बहुत सुनहरी बातें लगती हैं पर गांव के लोग ई-मेल नाम की चिडिय़ा का नाम तक नहीं जानते हैं। क्या आम आदमी तक सोशल मीडिया की पहुंच है? क्या एक गरीब व्यक्ति अपनी बात सोशल मीडिया के जरिए पहुंचाना जानता है? आम आदमी के लिये इसका इस्तेमाल उतना आसान नहीं है, क्योंकि इसमें बहुत सी रूकावटें हैं, तकनीक, भाषा आदि-आदि। समाज का निचला तबका सोशल मीडिया तक कैसे पहुंचे, जो सरकार के लिये वाकई ताकतवर हो सकता है। सरकार को इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है।’’

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की ओएसडी निधि कामदार ने कहा कि ”सोशल मीडिया के माध्यम से गृहिणी और विद्यार्थी भी देशभक्ति का हिस्सा बन चुके हैं। एक स्थान पर बैठे-बैठे ही लोगों को सूचनाएं प्राप्त हो जाती हैं। पहले स्कैम टीवी पर दिखाई-सुनाई देते थे, लेकिन अब सोशल मीडिया में पहले देखने और पढऩे को मिलते हैं, जिससे खबरें तैयार की जाती हैं। सोशल मीडिया प्रतिदिन सशक्त होता जा रहा है। अभी तक चौथा स्तंभ मीडिया था और है भी, लेकिन सोशल मीडिया भी अब चौथे स्तंभ का एक हिस्सा ही नहीं है, बल्कि चौथा स्तंभ ही है। लेकिन, इसका इस्तेमाल करके एंटी-सोशल पीपुल्स लोगों को नुकसान न पहुंचाएं, इस ओर खास ध्यान देने की जरूरत है।’’

कार्यक्रम में केन्द्रीय मंत्री, राजनीतिक शख्सियतें, राज्य सरकारों के वरिष्ठ नौकरशाह, शिक्षाविदों, नीति शोधकर्ताओं और मीडिया पेशेवरों ने हिस्सा लिया, इसके साथ ही देश के अलग-अलग हिस्सों से आए लगभग 300 लोगों ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।


प्रीति ठाकुर

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