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यथार्थ जीवन के लिए प्रेरणा जरूरी

यथार्थ जीवन के लिए प्रेरणा जरूरी

24-10-2015जीवन में ऐसे कई पड़ाव आते हैं, जिनसे व्यक्ति को जीवन में कुछ-न-कुछ सीखने को मिलता है। कई क्षण ऐसे भी आते हैं, जिनसे प्रेरणा लेकर व्यक्ति अपने जीवन की रूपरेखा तैयार करता है। हर नकारात्मक और सकारात्मक घटना से प्रेरणा लेकर आगे बढऩा ही जीवन है। लेखक ‘डॉ. पवन कुमार पोखरियाल’ ने अपने उपन्यास ‘प्रेरणा’ में लोगों को यही समझाने की कोशिश की है कि प्रेरणा, ज्ञान और कला प्राप्ति की प्रथम सीढ़ी है। जीवन में मुश्किल-से-मुश्किल पड़ाव और डगर को पार कर अपनी मंजिल तक पहुंचने में सक्षम हो जाता है।

उपन्यास प्रेरणा एक गूढ़ दार्शनिक विषय को एक सकारात्मक कहानी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में प्रेरणा देने वाले कई पहलुओं का मानवीयकरण करके एक कहानी प्रस्तुत की गई है। यह कहानी मानव जीवन से जुड़े उन तमाम पहलुओं को दर्शाता है, जिनसे हम प्रेरित होते हैं। इन महत्वपूर्ण पहलुओं में हमारे आसपास का वातावरण, संस्कृति, धरोहर में मिली सभ्यता, हमारे माता-पिता का प्रेम, हमारे शिक्षकों से मिला ज्ञान और विद्या, समाज के विचार, हमारे अनुभव और हमारी कल्पनाशक्ति, हमारे मित्रों का साथ और जीवन से जुड़ी हर एक घटना शामिल है। जिनसे हम प्रेरणा प्राप्त करते हैं और जिनसे हमारे जीवन का निर्माण होता है। जीवन से जुड़े इन पहलुओं में ही पुस्तक की प्रेरणा छुपी है। कहानी के सभी पात्र इन्हीं पहलुओं के महत्व को दर्शाने और उजागर करने का प्रयास करते हैं।

उपन्यास के सभी पात्रों के बीच के रिश्ते, जीवन के विभिन्न पहलुओं के बीच के आपसी सामन्जस्य को दर्शाने का प्रयास करते हैं। सभी पात्र अपनी-अपनी प्रेरणाओं के सहारे जीवन पथ पर अग्रसर होकर अपनी मंजिलों तक पहुंचते हैं। लेखक का उपन्यास ‘प्रेरणा’ एक अनोखी और अनुपम रचना है। इसके पात्रों के नाम हमारे विचारों, भावनाओं और परंपरा का स्मरण करके रखे गए हैं। जैसे धरोहर, संस्कृति, विद्या, ज्ञानप्रकाश, प्रेरित, कल्पना और अनुभव ये सभी पात्र अपने व्यवहार और आचरण से यथा नाम तथा गुण को सार्थक करते हैं। उपन्यास में नायक और नायिका के जन्म, शिक्षा, व्यवसाय, विवाह और गृहस्थ जीवन की कथा बड़े सरल, स्वाभाविक और रोचक ढंग से कही गई है। इस उपन्यास में दर्शाया गया है कि कैसे परंपरा और आधुनिकता का मिलन सहजतापूर्वक हुआ है। जिसमें आजकल के लोगों को तालमेल बैठाने में मुश्किलें पेश आती हैं।

उपन्यास में नायक प्रेरित और नायिका रूचि का विवाह उनके माता-पिता द्वारा तय किया जाता है लेकिन, वह प्रेम विवाह भी है। इस विवाह में पुरातन संस्कृति और आधुनिक विचारों का अनोखा तालमेल देखने को मिलता है। उपन्यास में लेखक ने बहुत ही सहज शब्दों में पर्यावरण की रक्षा, नैतिक मूल्यों का सम्मान, संयम और अनुशासन का भी संदेश दिया है। एक के बाद एक दिये गए गीत उपन्यास को और अधिक दिलचस्प बनाते हैं। उपन्यास के पात्र कल्पना और अनुभव के एक-दूसरे के प्रति अव्यक्त प्रेम और आकर्षण, वैचारिक मतभेद और अंत में दोनों का मिलन यह सीख देता है कि यथार्थ जीवन में सफलता के लिए कल्पना और अनुभव में घनिष्ठ सहयोग जरूरी है।

उपन्यास में जिस तरह से जीवन को प्रेरणा देने वाले विभिन्न पहलुओं का मानवीयकरण करके कहानी रूप में प्रस्तुत किया गया है, उससे समाज का युवा वर्ग खासा आकर्षित होगा। ये उपन्यास जहां परंपरागत जीवन और आधुनिकता के तालमेल को कैसे सहजता से स्वीकारा जाना चाहिए, इस विषय में बताता है तो वहीं दूसरी ओर हमारी संस्कृति, धरोहर, सभ्यता को कैसे जीवित रखना है, इसका भी संदेश देता है। लेखक ने बहुत ही सहज और शालीन शब्दों में जीवन के अहम और बहुमूल्य सत्य को पेश किया है। युवकों के लिए ये उपन्यास बहुत प्रेरणादायी है।

प्रीति ठाकुर

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