ब्रेकिंग न्यूज़ 

उत्तम पुरूष, विचारधारा और संगठन का स्वरूप हैं अशोक सिंघल

उत्तम पुरूष, विचारधारा और संगठन का स्वरूप हैं अशोक सिंघल

विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष अशोक सिंघल के जीवन के 90वें वर्ष में प्रवेश के अवसर पर दिल्ली में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संगठन से जुड़े कई पदाधिकारी, संत-महात्मा और राजनीतिक विभूतियां शामिल हुईं। कार्यक्रम 01 अक्टूबर 2015 को दिल्ली स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविक सेंटर के केदारनाथ साहनी सभागर में सम्पन्न हुआ। अशोक सिंघल ने अपना जीवन देश और हिन्दुत्व के लिये समर्पित किया है। उनके कर्मठ और सक्रिय जीवन के साथ-साथ उनके धार्मिक जीवन और उन सभी पहलूओं को केन्द्रित करते हुए जो लोगों के लिए अनछुए हैं पर एक पुस्तक ”अशोक सिंहल हिन्दुत्व के पुरोधा’’ का लोकार्पण संघ प्रमुख मोहनराव भागवत के कर कमलों द्वारा किया गया। ग्रंथ में अशोकजी की बाल्यावस्था से लेकर अब तक की जीवनयात्रा का वर्णन है। जिसमें राम मंदिर, गौ रक्षा, धर्मांतरण जैसे मुद्दों का वर्णन किया गया है। कार्यक्रम का शुभारंभ संघ प्रमुख मोहनराव भागवत, केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और कई सम्माननीय संतगणों की उपस्थिति मे शंखनाद और मंत्रोच्चारण के साथ द्वीप प्रज्जवलित कर किया गया। दीप प्रज्जवलित करने के बाद अशोक सिंघल को संगठन के सभी पदाधिकारियों, संत-महात्माओं और राजनीतिक विभूतियों द्वारा जन्मदिन की बधाई, बहुत ही सांस्कृतिक तरीके से वाद्यय यंत्रों, नगाड़ों और शंख की ध्वनि के बीच आयुषमंत्रों के साथ दी गई। मंच पर मौजूद लोगों ने अशोक सिंघल को बधाई देने के साथ ही पगड़ी और दुसाला भेंट की और विहिप को लंबे वक्त तक ऐसी महान विभूति का सान्निध प्राप्त हो ऐसी इच्छा के साथ उनकी लंबी उम्र की कामना की। रंगारंग कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति के साथ-साथ हिंदुत्व की छटा साफ झलक रही थी।

कार्यक्रम में मौजूद रहे निवर्तमान शंकराचार्य और हरिद्वार स्थित भारत माता मंदिर के संस्थापक स्वामी सत्यामित्रानंद गिरीजी महाराज ने अशोक सिंहल को हिन्दुत्व के पुरोधा के साथ-साथ महात्मा अशोक की उपाधि से विभूषित करते हुए कहा कि ”मैं इन्हें युवा काल से जानता हूं। उस समय इनकी पूज्य माताजी मेरे प्रवचन सुनने आती थीं। बड़े-बड़े आंदोलन अशोकजी के मार्गदर्शन में हुए और मुलायम सिंह यादव की कृपा से मुझे भी रामलला की जन्म-भूमि की आजादी हेतु जेल जाने का अनुभव प्राप्त हुआ। साथ ही महाराजजी ने कहा कि महात्मा कौन है? इसके जवाब में उन्होंने बताया कि महात्मा वही है जो विपरीत परिस्थतियों में धैर्य रखे और क्षमा करने की ताकत रखे। अशोक सिंघल ने विपरीत वक्त में जैसा धैर्य रखा है और उनका एक ही सिद्धांत है स्वीकार, स्वीकार और स्वीकार। सिंघल में सुख-दुख, हर चीज को स्वीकार करने की अद्भुत क्षमता है, जो उन्हें महात्मा बनाता है।’’

24-10-2015

मोहनराव भागवत ने इस खास अवसर पर अपने भाषण में कहा कि अशोक सिंघल दो टूक बोलने वाले व्यक्ति हैं। वह पूर्णत: अनुशासन का पालन करने वाले व्यक्ति हैं। उनके मन में सभी के लिए आत्मीयता है। अशोकजी पूरी शक्ति लगाकर काम करते हैं। संगठन के लिए वह ऐसे ही कार्यरत रहें इसके लिए ईश्वर उन्हें लंबी उम्र दे। लेकिन, अशोकजी को खुशी तब होगी जब सैकड़ों लोग उनके बताये मार्ग पर चलें और भारत माता के सम्मान का हमेशा ध्यान रखें।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वीडियो के माध्यम से अशोक सिंघल को बधाई देते हुए कहा कि किसी विचारधारा से जुड़कर जीवन जीना एक अलग बात है। लेकिन, उस विचारधारा को जीवन में उतार कर जीवन व्यतीत करना दूसरी बात है। अशोक सिंघल की खासियत है कि वह अपने जीवन में ऐसी विचारधारा को उतारकर जीवन व्यतीत करते हंै। अगर देखा जाये तो विश्व हिन्दू परिषद और अशोक सिंघल एक-दूसरे के पर्याय बन गये हैं।

केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा ”सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में कार्यरत व्यक्ति इस उम्र तक सक्रियता बनाये रखें ऐसे विरले ही देखने को मिलते हैं। सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन को जीने का नाम ही अशोक सिंघल है। पहली बार मैं जब 19 वर्ष की आयु में सिंघलजी से मिला था उस समय अशोक सिंघल के माथे पर तेज और उनकी वाणी में जो ओज था, वही तेज और ओज आज भी मौजूद है। हिन्दुत्व जीवन जीने की कला और मानवीय धर्म है। इसी मानवीय सोच को भारत के ऋषियों ने वसुधैव कुटुम्बकम के सूत्र में पिरोया है और इसी सूत्र को अशोक सिंघल ने अपने जीवन में उतारा है।

इस अवसर खुद अशोक सिंघल ने कहा ”संघ में व्यक्ति का महत्तव नहीं होता, बल्कि संगठन का महत्व है। इसलिए मैंने महेश भागचन्दका जिन्होंनेमुझ पर पुस्तक का संकलन किया है, मैंने उन्हें इस समारोह के लिये मना किया था, लेकिन वह नहीं मानें। विश्व हिन्दू परिषद सिर्फ अशोक सिंघल की वजह से नहीं खड़ा है, बल्कि इसे खडा़ करने में विश्व हिन्दू परिषद के लाखों कार्यकर्ताओं ने अपना सहयोग दिया है। संगठन के अधिकारियों के कारण मुझे इस प्रोग्राम के आयोजन का यह कड़वा घूंट पीना पड़ा है। मैं इसे ठीक नहीं समझता। अगर मेरी कोई पहचान है या मुझे श्रेय देना है तो वह मेरे गुरू रामचन्द्र तिवारीजी को दें, जिन्होंने मेरे जीवन का मार्गदर्शन किया है। इस दौरान माननीय अशोक सिंघलजी ने ग्रंथ के संकलनकर्ता महेश भागचन्दका के आग्रह पर अपने बचपन की एक कविता भी अपनी तेजस्वी आवाज में सुनाई जो उनकी माताजी उन्हें सुनाया करतीं थीं।

24-10-2015

सभागार में उपस्थित सभी लोगों ने अशोक सिंघल को अपने मन की गहराई से बधाई देते हुए इस संस्कृतिक कार्यक्रम का आन्नद लिया, और उनके लंबे जीवन की कामना के साथ संगठन को लंबे समय तक उनका सानिध्य प्राप्त हो इसकी कामना की।

इस अवसर पर अनेक साधु-संतों के साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह भैयाजी जोशी व होसबोलेजी समेत संघ के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी, विहिप के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष राघव रेड्डी, नेता डॉ. प्रवीण भाई तोगडिय़ा, केन्द्रीय पदाधिकारियों, अनेक धार्मिक, सामाजिक, राजनैतिक और सांस्कृतिक संगठनों के पदाधिकारियों तथा केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और डॉ. महेश शर्मा समेत भारत सरकार के कई मंत्री, सांसद और मेयर भी उपस्थित रहे।

प्रीति ठाकुर

vsemsmart.ruhindi english

Leave a Reply

Your email address will not be published.