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बलि के बकरे की तलाश जा सकती है खान राज्यमंत्री राजकुमार रिणवा की कुर्सी

बलि के बकरे की तलाश जा सकती है खान राज्यमंत्री राजकुमार रिणवा की कुर्सी

राजस्थान में महाघूसखोरी के मामले में जो कुछ भी सामने आया है, उससे यह तो साफ हो गया है कि सर्वोच्च स्तर से मिली मौन मंजूरी के बगैर इतना बड़ा घपला हो ही नहीं सकता था। इस मामले में अब बलि के लिये बकरा ढूंढा जा रहा है और गाज खान राज्यमंत्री राजकुमार रिणवा पर गिरने की संभावना बलवती होती जा रही है। उनकी कुर्सी जाने के आसार बन रहे हैं। खबर है कि रिणवा को विभागीय कामकाज में ढीलापन और लापरवाही बरतने जैसे रवैये के लिए मुख्यमंत्री ने सीधा जिम्मेदार माना है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे इस मामले में रिणवा के अलावा पार्टी के कई अहम नेताओं से भी चर्चा कर चुकी हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री राजे को भी इस मामले में आरोपों के घेरे में लिया जा रहा है, क्योंकि खान विभाग का मुख्य जिम्मा उनके पास ही है और सारे दस्तावेज उनकी निगरानी में ही निकले हैं। रिणवा की छुट्टी किये जाने से पहले पार्टी में जातीय समीकरणों को भी देखा जा रहा है। यह भी माना जा रहा है कि रिणवा के खिलाफ कार्यवाही के कारण पार्टी में सरकार विरोधी आवाज उठाने वाले ग्रुप को ताकत मिल सकती है।

24-10-2015गौरतलब है कि घूसखोरी प्रकरण में रिणवा की भूमिका संदिग्ध नजर आई है। तमाम दस्तावेजों पर मंत्री के नाते उनकी सहमति ली गई है, जबकि खुद रिणवा ने कहा था कि सचिव अशोक सिंघवी उनकी सुनते ही नहीं थे। यहां तक की फैसलों की जानकारी से भी उन्हें गुमराह करते रहे हैं। रिणवा ने यह भी कहा था कि विभाग में खान आवंटन प्रक्रिया में लम्बे समय से भ्रष्टाचार का बोलबाला है। अब रिणवा सफाई देते घूम रहे हैं कि मैंने कोई पाप नहीं किया। परमात्मा के यहां पाप और पुण्य का हिसाब है। जिसने भी पाप किया है, उसे परमात्मा के दरबार में भी जवाब देना पड़ेगा। इस मामले में रिणवा अपने पिछले बयान से भी मुकर गए और कहा कि मेरे पास 5 हैक्टेयर से बड़ी खानों की फाइल आती थी, जबकि यह मामला सामने आने पर मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा था कि उनके पास तो फाइलें ही नहीं भेजी जाती थी। रिणवा ने कहा, मेरे पास 5 हैक्टेयर से ज्यादा के खान आवंटन की फाइलें आती थीं, 5 हैक्टेयर तक की फाइलें, खान निदेशालय उदयपुर से क्लीयर होती थीं। खान आवंटन में गड़बड़ी के आरोपों पर रिणवा का कहना है कि खान आवंटन में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। कांग्रेस को तो सभी कामों में भ्रष्टाचार दिखता है, लेकिन कहीं नियमों की अवहेलना हुई है तो खान निरस्त कर देंगे। आवंटन से पहले केंद्र से राय ली गई थी, अलॉटमेंट के बाद भी केंद्र को लिस्ट भेजी गई थी, अगर कोई गलत है तो निरस्त कर दीजिए।

उधर खान राज्यमंत्री राजकुमार रिणवा का बचाव राज्य के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया भी करते दिख रहे हैं। कटारिया का कहना है कि जब खान राज्यमंत्री रिणवा के पास फाइल ही नहीं गई तो वे क्या जाने और उनका कोई दोष नहीं है। कटारिया का यह भी कहना है कि मामले में जिनके भी नाम आएंगे और जो भी दोषी होंगे, वे बचेंगे नहीं चाहे विधायक हो या स्वयं गुलाबचंद कटारिया।

24-10-2015सिंघवी को नकेल से थी नफरत

दरअसल जो जानकारियां सामने आ रही हैं उसके मुताबिक तो निलंबित प्रमुख शासन सचिव अशोक सिंघवी नहीं चाहते थे कि खान मंत्री राजकुमार रिणवा प्रदेश में अवैध खनन और रॉयल्टी ठेकों में चल रही मनमानी को पकड़ें। राज्य के टोंक, बूंदी और अलवर जिलों में कई खदानों, क्रेशर ठेकों, रॉयल्टी नाकों पर ठेकेदारों, खान मालिकों के अवैध खनन और राजस्व वसूली में भयंकर गड़बडिय़ों और भ्रष्टाचार की ढेरों शिकायतें खान मंत्री रिणवा को मिलीं। उन्होंने अधिकारियों की कमेटी बनाकर भेजा और जांचें करवाईं। कमेटी की जांच रिपोर्ट में सभी मामलों में भारी घोटालों का खुलासा हुआ। इसमें स्थानीय खान अधिकारियों की पोलें भी खुल गईं। अपने दबदबे के चलते कमेटी को सिंघवी ने अलवर की 51 खदानों की जांच नहीं करने दी।

दबंग हो गए थे सिंधवी

अशोक सिंघवी ने कथित व्यक्तिगत नाराजगी के चलते अधीनस्थ अधिकारी के खिलाफ अपने स्तर पर दो अलग-अलग कार्रवाई कर दी। खान मंत्रालय व मुख्यमंत्री कार्यालय से आदेश का इंतजार तक नहीं किया। जयपुर में पदस्थापित रहे अतिरिक्त खान निदेशक (सतर्कता) आर. के. नलवाया ने दोनों मामलों को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने नलवाया के खिलाफ जारी निलंबन आदेश रद्द कर कार्मिक और खान सचिव पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाकर राशि वसूलने के आदेश दिए, लेकिन सिंघवी ने पद पर बने रहने के दौरान इस आदेश का पालन नहीं होने दिया। सिंघवी के फंसने के बाद यह मामला सामने आया है। मामले के अनुसार नलवाया पहले कोटा में पदस्थापित थे, तब उनको तीन दिनों के लिये दुबई जाना पड़ा था। यात्रा की स्वीकृति नहीं लेने की सिंघवी ने जिद पकड़ ली और खान मंत्री रिणवा के कार्यालय को फाइल भेज दी। मंत्री ने उल्लेखित किया कि वे नलवाया को मंजूरी दे चुके थे। कार्योत्तर की मंजूरी भी दे दी। नलवाया के खिलाफ मंत्री से आदेश नहीं होने पर सिंघवी ने दूसरी बार फिर फाइल चलाई और सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय भेज दी। नलवाया के खिलाफ कार्रवाई करने की जल्दबाजी में सिंघवी ने सीएमओ से आदेश होने का इंतजार तक नहीं किया। अपने स्तर पर 27 मार्च को आदेश जारी कर नलवाया को एपीओ कर दिया। बाद में सीएमओ और कार्मिक विभाग से बिना आदेश मिले 23 अप्रैल को पदावनत करने का नया आदेश जारी कर दिया। इधर, सीएमओ से फाइल जाने पर कार्मिक विभाग ने 17 जून को नलवाया के निलंबन का आदेश जारी किया।

ये कैसी मेहरबानियां?

सवाल इस पर भी उठाए जा रहे हैं कि खान विभाग के महाघूसकांड के मुख्य आरोपी निलंबित खान विभाग के प्रमुख शासन सचिव डॉ. अशोक सिंघवी को उदयपुर के केंद्रीय कारागार भेजे जाने के बाद भी उन पर आखिर किसकी मेहरबानियां बरस रही थी। अदालती आदेश के बाद जेल अधीक्षक प्रीता भार्गव मानों स्वागत की अवस्था में अदालत के बाहर मौजूद थीं। प्रीता अपनी गाड़ी में बैठाकर सिंघवी को कारागार लेकर गईं। जबकि, आरोपित अतिरिक्त खान निदेशक पंकज गहलोत, खनिज अभियंता पीआर आमेटा, दलाल संजय सेठी व रशीद खां हैरत भरी निगाहों से सिंघवी को देखते रहे, क्योंकि उन्हे सरकारी वैन में ले जाया जा रहा था। प्रीता भार्गव सरकारी गाड़ी को जेल के अंदर तक ले गई। यही नहीं मजिस्ट्रेट के घर पेशी के दौरान भी सिंघवी को लग्जरी गाड़ी में एसी चलाकर बिठाकर रखा गया। अमूमन जेल में सामान लादने व इमरजेंसी गाडिय़ां ही अंदर आती-जाती रही हैं, लेकिन सिंघवी को बकायदा प्रोटोकॉल दिया गया। इससे साफ हो गया कि यह सब कुछ ऊपर के निर्देशों से ही हो रहा था।

नीलाभ कृष्ण

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