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पंचायत चुनावों के परचम तले मिशन-2017 रक्तरंजित है इतिहास कैसे निपटेगी सरकार

पंचायत चुनावों के परचम तले मिशन-2017 रक्तरंजित है इतिहास कैसे निपटेगी सरकार

उत्तर प्रदेश के गावों की आबोहवा में पंचायत चुनावों की खुमारी तैरने लगी है। ग्राम्य समाज अपने नये नुमाइंदों की तलाश में एकाएक जागृत हो गया है। बाग और खेत की मेढ़ों पर बैठकर गोलाबंदी शुरू हो गई है, तो बरसों पुरानी शिकायतें फिर से पिटारों से बाहर आने लगी हैं। चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों द्वारा जातीय और सामाजिक स्तर पर नये-नये समीकरणों के निर्माण करने की कोशिशें भी हो रही हैं। वर्तमान में गांव-गांव आधार कार्ड बन रहे हैं, कहीं स्वयं प्रधान तो कहीं संभावित उम्मीदवार बाकायदा अपनी ओर से कैंप लगवाकर लोगों का आधार कार्ड बनवा रहे हैं, इससे पहले राशन कार्ड प्रक्रिया में ऐसे लोगों की प्रक्रिया बड़ी तेज दिखी।

इसके अतिरिक्त बीमार मरीजों को बोलेरो आदि की व्यवस्था कराकर उनके साथ अस्पताल तक जाने की भी होड़ लग रही है। वर्तमान प्रधानों के लिए सबसे बड़ी ङ्क्षचता समाजवादी पेंशन एवं विरोधी साथियों द्वारा शिकायती पत्रों से हैं। पेंशन में जिन पात्रों का नाम नहीं है, उसे मुद्दा बनाया जा रहा है, वहीं छोटी-छोटी शिकायतों के अलावा जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत मांगी जाने वाली सूचनाओं में भी वृद्धि देखी जा रही है। वहीं संभावित (आरक्षण कई लोगों के अरमानों पर वज्रपात करेगा।) प्रत्याशी मतदाताओं को शराब-मुर्गा और साड़ी, सहित अन्य तरह के घूस दे रहे हैं। एक जमाना था, जब जिला पंचायत और ग्राम पंचायत के चुनाव बिना किसी शोर-शराबे के पूरे हो जाते थे, लेकिन अब बिना ‘शोर’ और ‘शराब’ के पूरे नहीं होते दिख रहे हैं। ‘कच्ची दारू कच्चा वोट, पक्की दारू पक्का वोट’ मुर्गा-दारू खुला वोट’ का सूत्र बुलंदियों पर चल रहा है। आबकारी विभाग का कहना है कि जितना राजस्व तीन महीने में आता है, पंचायत चुनावों में एक महीने में ही आ जाता है। विडंबना है कि कभी लोक मंगल का अधिष्ठान कहलाने वाली हमारी पंचायते भ्रष्टाचार का मकडज़ाल बनकर रह गईं हैं।

24-10-2015जो पंचायत चुनाव कभी गांवों की सामाजिक समरसता को मजबूत करने की एक सीढ़ी थे, वही आज कानून और व्यवस्था के लिये चुनौती बन चुके हैं। हाल के कुछ सालों में ग्राम पंचायत चुनावों के दौरान हत्याओं, फर्जी मुकदमों, बलात्कार के प्रयास जैसे संगीन किन्तु फर्जी आरोपों की बाढ़ सी आई है। पुलिस के लिये कानून-व्यवस्था संभालना एक चुनौती बन चुका है। इस बात की तथ्यात्मक विवेचना आवश्यक है कि आखिर आज चुनाव होने के छह माह पहले से ही धमकियों, हत्याओं और फर्जी मुकदमों की बाढ़ सी क्यों दिख रही है? खैर पंचायतों के खूनी इतिहास को देखते हुए, क्या उत्तर प्रदेश सरकार शांति पूर्वक चुनाव कराने के दावे पर खरी उतर पायेगी? चुनाव आयोग ने माना है कि लोकसभा और विधानसभा की अपेक्षा पंचायत चुनाव में अधिक खून खराबे की आशंका रहती है। अत: चुनाव आयोग ने सुरक्षा बलों की कुल 361 कंपनियों की जरूरत आंकी है, लेकिन अन्य पहलुओं को ध्यान में रखने के बाद आयोग को ऐसा लगता है कि उसे 423 कंपनियों की जरूरत पड़ेगी। आयोग ने संवेदनशीलता की दृष्टि से मेरठ जोन के लिये 83, बरेली जोन के लिये 75, वाराणसी के लिये 60, लखनऊ के लिये 52, गोरखपुर के लिए 45, कानपुर के लिये 32 और इलाहाबाद के लिये 30 कंपनी केन्द्रीय बल की जरूरत बताई है, लेकिन बिहार चुनाव के कारण गृह मंत्रालय द्वारा सुरक्षा बल उपलब्ध कराने में व्यक्त की गई असर्मथता ने शांतिपूर्वक पंचायत चुनाव के संपादन के सवाल पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। हालांकि पंचायत चुनाव को सकुशल निपटाने के लिए पुलिस महकमें की ओर से तैयारी तेज कर दी गई है। कच्ची शराब के कारोबार एवं अपराधियों पर अंकुश लगाने के साथ-साथ पुलिस की निगाह खुद के असलहों पर है। चुनाव के दौरान पुलिस के सामने असलहों में खामी रोड़ा न बन जाए, इसके लिए जिलों में असलहों की साफ-सफाई अभियान चलाया जा रहा है, जिसके अंतर्गत पुलिस अधिकारी स्वयं मौजूद रहकर असलहों की फिटनेस को भांपने में जुटे रहे। जनपद उन्नाव के पुलिस अधीक्षक, पवन कुमार ने बताया कि पंचायत चुनाव को लेकर असलहों की मरम्मत एवं वास्तविक स्थिति चेक कराई गई है। सामने आई कमियों को दूर कराया जा रहा है।

24-10-2015दरअसल, मौजूदा ग्राम पंचायतों का कार्यकाल सात नवंबर को पूरा हो रहा है। राज्य निर्वाचन आयुक्त का कहना है कि उत्तर प्रदेश के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव चार चरणों में होंगे। इसके लिए हर जिले को चार से पांच हिस्से में बांटा गया है। चुनाव की तैयारी प्रदेश में एक साथ प्रत्येक चरण के दोनों पदों के लिए हर एक जिले को ब्लॉकवार चार से पांच भागों में बांटकर चुनाव कराया जाएगा। राज्य निर्वाचन आयुक्त एस.के. अग्रवाल ने बताया कि मतदान के लिये 1.85 लाख बूथ बनाए जाएंगे। लगभग डेढ़ महीने तक चलने वाली चुनाव प्रक्रिया में 51 हजार 921 ग्राम प्रधान, छह लाख 41 हजार 441 ग्राम पंचायत सदस्य, 63 हजार 701 जिला पंचायत सदस्य और दो हजार 622 जिला पंचायत सदस्यों का चुनाव होगा। पंचायत चुनाव में 12 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। विश्व में कहीं भी होने वाले पंचायत चुनाव में इतने अधिक मतदाता शामिल नहीं होते।

24-10-2015इस बार ग्राम पंचायत में नहीं होंगे फर्जी वोटर

हर बार पंचायत चुनाव में बड़े पैमाने पर फर्जी वोटों के द्वारा धांधली की जाती हैं और पंचायत चुनाव में इसी कारण कई बार हिंसा भी होती हैं। हर बार निर्वाचन आयोग फर्जी मतदाताओं को रोकने की कवायद करता है। इस बार राज्य निर्वाचन आयोग का यह कार्य एक सॉफ्टवेयर कर रहा हैं। इस बार ऐसे सभी लोगों के मत रद्द हुए हैं, जिनके नाम दो जगह दर्ज हैं। डी-डुप्लीकेट सॉफ्टवेयर के कारण खुलासा हुआ है कि पूरे प्रदेश में कुल 3.73 प्रतिशत वोटर फर्जी मिले हैं। पहली बार चुनाव निर्वाचन आयोग ने राज्य में फर्जी मतदाताओं को पकडऩे के लिए डिजिटल तकनीक का प्रयोग किया है। आयोग ने यह सॉफ्टवेयर माइक्रोसॉफ्ट से बनवाया है। इसमें चार सूचनाओं- नाम, पिता का नाम, उम्र और लिंग का मिलान किया जा रहा है। जिस भी मतदाता की ये चारों सूचनाएं मिल जाती हैं, उन्हें फर्जी वोटर मानते हुए अलग रख लिया गया है। इसके बाद बीएलओ से इनकी जांच कराई गई। प्रदेश में डी-डुप्लीकेट साफ्टवेयर के जरिए सूची की जांच करने पर रिकार्ड 1.85 करोड़ पाए गए फर्जी व अयोग्य मतदाताओं को सूची से बाहर कर दिया गया है। हालांकि 2.13 करोड़ नये मतदाता सूची में जुड़े भी हैं। अगर जिलों को देखा जाए तो वाराणसी में 8.48 प्रतिशत फर्जी वोटर पाए गए हैं। लखनऊ 3.7 प्रतिशत फर्जी वोटर पकड़े गए हैं। साथ ही निर्वाचन आयोग इस बात का ध्यान रख रहा हैं कि यदि कोई शहर का मतदाता हैं और ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में भी नाम दर्ज है तो इस बार ऐसे लोग भी अपना वोट गांव में नहीं डाल पाएंगे।

24-10-2015दिखेगा राजनीतिक दलों का दमखम

पंचायत चुनाव पर सभी राजनीतिक पार्टी की नजरें हैं। प्रदेश की हर छोटी-बड़ी पार्टी इस चुनाव को मिशन 2017 के विधानसभा चुनाव का एक महत्वपूर्ण पड़ाव मान रही हैं। सपा और भाजपा ने तो अपनी कमर कस ली है। पंचायत चुनाव से ही विधानसभा 2017 का चुनावी बिगुल बज चुका है, क्योंकि छोटे चुनावों से ही बड़े चुनावों की रणनीति बनायी जाती है। पंचायत चुनावों को लेकर सपा भी बहुत गंभीर है। जनेश्वर मिश्र की जयंती के मौके पर सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने बातों-बातों में अपने कार्यकर्ताओं को और खुद मुख्यमंत्री को सख्त हिदायत दी कि पंचायत चुनाव में कड़ी मेहनत करें। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायतों के बल पर माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने बंगाल की सत्ता पर 34 साल तक राज किया। पार्टी के कद्दावर नेता शिवपाल ङ्क्षसह ने कहा है कि समाजवादी पार्टी जिला पंचायत का चुनाव पार्टी ङ्क्षसबल पर लड़ेगी, लेकिन ग्राम पंचायत चुनाव में नहीं होगा पार्टी का सिंबल।

ओवैसी का पार्टी मैदान में

ओवैसी की पार्टी (एआईएमआईएम) उत्तर प्रदेश में होने वाले पंचायत चुनाव के जरिये अपनी ताकत परखेगी और उसके आधार पर राज्य में 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव की रणनीति तैयार करेगी। उत्तर प्रदेश में चुनाव लडऩे का मंसूबा पालने वाली एआईएमआईएम की बढ़ रही सक्रियता से सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी (सपा) के परंपरागत मुस्लिम वोट बैंक पर खासा प्रभाव पडऩा तय माना जा रहा है। राज्य में करीब तीन करोड़ 60 लाख मुसलमान हैं। अस्सी में से करीब 34 लोकसभा क्षेत्र ऐसे हैं, जहां इनका खासा प्रभाव माना जाता है।

24-10-2015

आम आदमी पार्टी भी मैदान में

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले अपनी दावेदारी मजबूत करने की कोशिश में आम आदमी पार्टी पंचायत चुनाव में हिस्सा लेगी। पंचायत चुनाव के बहाने ‘आप’ उत्तर प्रदेश में अपना आधार मजबूत करेगी।

24-10-2015पंचायत चुनाव में युवा-मतदाता होंगे अहम

राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश भर के मतदाताओं की संख्या को अंतिम रूप दे दिया है। खास बात यह है कि कुल मतदाताओं में 51.5 फीसद 18 से 35 वर्ष के युवा ही हैं। इनमें 28.02 फीसदी पुरुष तथा 23.49 फीसदी महिला मतदाता हैं। इसी तरह 36 से 60 वर्ष की आयु वर्ग वाले 38.5 फीसदी मतदाताओं में 20.39 पुरुष तथा 18.15 फीसदी महिला वोटर हैं। मतदाता सूची में 60 वर्ष से ज्यादा उम्र वाले मात्र 10 फीसदी हैं जिसमें से 4.92 फीसदी पुरुष व महिला मतदाताओं की हिस्सेदारी 5.04 फीसदी है। इस प्रकार स्पष्ट रूप से यह चुनाव युवाओं के कन्धों पर टिका है। भारत निर्वाचन आयोग की वर्ष 2015 की मतदाता सूची में कुल आबादी का 65.1 फीसदी ही मतदाता हैं। जो नये मतदाता जुड़े हैं, उनमें अधिकतर युवा हैं और अगर आंकड़ों पर गौर किया जाये तो 51.5 फीसदी के साथ युवा इन चुनावों में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। यह चुनाव आगामी विधानसभा चुनाव की रिहर्सल कहे जा रहे हैं तो इस प्रकार आगामी विधानसभा चुनाव में भी युवा शक्ति का जोर रहेगा।

पंचायत चुनाव में व्हाट्सएप से लगेगी थानेदारों की हाजिरी

पुलिस-प्रशासन तैयारियों में जुट गया है। शासन की ओर से पंचायत चुनाव में व्हाट्सएप से थानेदार की हाजिरी का आदेश जारी किया गया है। थानेदार अब तक शासन से आने वाले प्रपत्र को थाने में ही बैठकर भर लेते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं कर पाएंगे। शासन ने साफ कह दिया है कि थानेदार मतदान केंद्र पर जाकर ही प्रपत्र को भरेंगे। इस प्रपत्र में 22 बिंदुओं का जिक्र किया गया है, वे थाने में बैठकर नहीं भरे जा सकते। मोबाइल से खींचे गए फोटो ही उनकी उपस्थिति प्रमाणित करेंगे। इनको व्हाट्सएप के जरिए पुलिस कप्तान को भेजना जरूरी होगा। पंचायत चुनाव के लिए पहली बार यह व्यवस्था होगी कि पुलिस बल को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। ए श्रेणी के जवान अति संवेदनशील और बी श्रेणी के संवेदनशील और डी श्रेणी के सामान्य बूथों पर तैनात होंगे।

प्रणय विक्रम सिंह

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