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पहले दोस्ती, फिर दुश्मनी

पहले दोस्ती, फिर दुश्मनी

ठाकुर अमर सिंह का कोई जवाब नहीं है। असल के क्षत्रिय हैं। पहले जोरदार दोस्ती, फिर दमदार दुश्मनी करते हैं। आजकल जया बच्चन के पीछे पड़े हैं। अमर सिंह गए तो थे विंध्यवासिनी मां के दर्शन करने और जब मीडिया ने घेरा तो कह पड़े कि उनके साथ जया बच्चन विदेश गई थीं तो सूअर और गाय दोनों का मांस खाया था। दरअसल जब से सपा से रूखसत हुए हैं तब से ठाकुर साहब जया बच्चन से खफा हैं। अब यह कौन बताये, भईया पहले एक ही थाली में खाते थे, अब थाली के आलू मारकर सिर फोड़ रहे हो।



 

बाद में बाबूगिरी


 

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पीएम मोदी का बड़ा फैसला है। यूपीएससी को पीएम ने केवल परीक्षा लेने की जिम्मेदारी तक सीमित करना शुरू कर दिया है। उन्हीं की पहल पर अब 2013 के पास आईएएस अधिकारियों को पहली तैनाती केन्द्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में और वह भी दिल्ली में दी जा रही है। ऐसा पहली बार हो रहा है और छह महीने बाद ही ये ऑफिसर अपने कैडर के अनुसार राज्यों में जा सकेंगे। क्योंकि, जाएं तो केन्द्रीय परिप्रेक्ष्य का ख्याल रहे। जबकि, पहले कैडर के हिसाब से राज्यों में तैनात होते थे और बाद में प्रतिनियुक्ति पर केन्द्र में आते थे।



 

आओ पश्चिम बंगाल के मांझी


 

31-10-2015

कहते हैं सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली। न मानिए तो मुकुल राय को देख लीजिए। सुना है दीदी के खासमखास मुकुल राय पश्चिम बंगाल में नई पार्टी बना रहे हैं। वह भी दीदी के खिलाफ। कभी दीदी के दुलारे थे। बाद में कांग्रेसी बनना चाह रहे थे। कहीं दाल नहीं गली तो अब पश्चिम बंगाल के जीतन राम मांझी बनने की सोच रहे हैं। उन्हें भरोसा है, कि ऐसा किया तो सीट भले न आए, लेकिन मोदीजी और शाह भाई की कृपा तो बरसेगी ही।



 

गुड़ भी, गुलगुला भी


 

31-10-2015

अपने नीतीश बाबू गुड़ के भी शौकीन हैं और गुलगुले के भी। मजे की बात यह कि जितनी तारीफ वह, उनकी पार्टी और सहयोगी दल उनकी तथा उनकी सरकार की कर रहे हैं, उससे कहीं कम अमित शाह और भाजपा नेता नहीं कर रहे। सरकार विरोधी लहर भी नहीं है। सबके फोकस में लालू भाई हैं। जंगलराज का नगाड़ा बज रहा है। अब कौन बताए कि नीतीश भाई कितने साल एनडीए के साथ थे। क्या पता नतीजे आ जायें तो ‘जंगलराज’ की बजाय ‘बिहार पर राज’ करें।



 

चिट में क्या था मोदीजी?


 

31-10-2015

पीएम मोदी रैली और प्रचार के बाद बस चॉपर पर चढऩे ही वाले थे, कि जिलाध्यक्ष जी ने धीरे से खत थमा दिया। आरएसएस के कार्यकर्ता अध्यक्षजी ने थमाया नहीं की मोदी ने मोड़कर जेब के हवाले किया। खबरची को पता चला है कि पीएम ने उसे एकांत में पढ़ा भी है। जब से पढ़े हैं राज्य के कुछ आला नेताओं को देखते ही भौह चढ़ जाती है। अब इसको लेकर पार्टी के भीतर भी खुसफुसाहट तेज हो गई है। एक साहब का तो दावा है की खत में सांसद आरके सिंह ने जो टिकट बेचे जाने का आरोप लगाया था, वही सब कुछ था। बाकी मोदीजी ही जानें।



 

आडवाणी खाएंगे दो लड्डू


 

31-10-2015

जब बिहार चुनाव के नतीजे आ रहे होंगे, तो आडवाणीजी के घर बधाई देने वालों का तांता लगा होगा। खबर है उस दिन आडवाणी मिलने वाले तोहफे की खुशी में दो लड्डू खाने की तैयारी कर रहे हैं। खाएं भी क्यों न, आठ नवंबर को उनका जन्मदिन है और इसी दिन बिहार चुनाव के नतीजे आने हैं। बिहार चुनाव में उनके दो पुराने प्रिय पासों की प्रतिष्ठा दांव पर हैं। अब चाहे पुराने चेले पीएम मोदी की साख बचे या फिर आडवाणीजी के प्रिय नीतीश, की। लेकिन, इतना तय है कि आडवाणी दो लड्डू ही खाएंगे। एक जन्मदिन का और एक बिहार चुनाव के नतीजे का।



 

राहुल बाबा एक्शन में


 

31-10-2015

राहुल बाबा इन दिनों एक्शन में हैं। पंजाब प्रदेश अध्यक्ष पद जहां बाजवा के पास रहेगा, वहीं अब वही होगा जो राहुल बाबा चाहेंगे। इसके लिए उन्होंने पार्टी पर अपना दबदबा बनाना शुरू कर दिया है। यहां तक की संसद के शीतकालीन सत्रों को लेकर भी गंभीर हैं। वह मोदी सरकार को जवाब देने वाले हैं। इतना ही नहीं साफ कर दिया है, कि जब तक सुषमा आंटी का ललित मोदी प्रकरण में इस्तीफा नहीं हो जाता तब तक कांग्रेस बिलों को पास करवाने में कोई सहयोग नहीं करेगी यानी नो जीएसटी। बाकी मोदीजी जानें।



 

छूट रहे हैं पसीने


 

31-10-2015

पीएम मोदी ने बिहार में दर्जन भर से अधिक कमांडर लगा दिये हैं। अमित शाह ने पूरी गोटी बिछा दी है। रालोसपा, लोजपा, हम भी गदगद हैं। जो मांगते है, शाह भाई की हिदायत पर केन्द्रीय मंत्री पीयूष गोयल हाजिर रहते हैं। बागियों को थामने के लिये राधामोहन सिंह लगे हैं, तो सुशील मोदी भी खुद को पीएम मोदी से कम नहीं समझ रहे। बाकी का काम अनंत कुमार, धर्मेन्द्र प्रधान, राजीव प्रताप रुडी, राजनाथ सिंह, रविशंकर प्रसाद और फलाने-ढमाके के पास है। बताते हैं कि रोज शाम को एसी चालू होते ही पसीना आने लगता है।


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