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गेहूं के ज्वारों से सुधारें सेहत

गेहूं के ज्वारों से सुधारें सेहत

प्रकृति ने अपनी गोद में न जाने कितने प्रकार की जड़ी-बूटियों को मनुष्य के अच्छे स्वास्थ्य के लिए छिपा कर रखा है। इन्हीं में से एक है ज्वारे का रस जो बहुत ही आसानी से उगाया जा सकता है। गेहूं के 8 से 10 इंच के पौधों को ज्वारे कहते हैं। जिन्हें धरती का अमृत, संजीवनी बूटी या ग्रीन ब्लड (हरा खून) भी कहा जाता है। ये तेजी से असर करने वाली महाऔषधि है जो रोग प्रतिरोधक क्षमता के गुणों से भरपूर होती हैं। ये क्लोरोफिल का सर्वश्रेष्ठ स्रोत है। साथ ही इसमें सैकड़ों पोषण तत्व उपस्थित हैं। ज्वारे में विटामिन-डी और बी-12 के अलावा सभी विटामिन (ई-बी 1, 2, 3, 5, 6, 8 और 17-सी-ई तथा के) प्रचुर मात्रा में मिलते हैं। इसमें मौजूद विटामिन- बी17 (लिट्राइल) को आयुर्वेद में कैंसर को नष्ट करने का एकमात्र उपाय मानते हैं। गेहूं के ज्वारे का रस और मानव-रक्त दोनों की रासायनिक संरचना पीएच व क्षारीयता लगभग एक जैसी होती है, इसलिए गेहूं के ज्वारे का रस शीघ्रता से पचता है और रक्त में अवशोषित हो जाता है।

गेहूं के ज्वारे के रस के नियमित प्रयोग से अनिद्रा, त्वचा रोग, वात, प्रदर रोग, बालों के रोग, पीलिया, जुकाम, मोटापा, पथरी, बवासीर, अस्थमा, खट्टी डकार, कब्ज, खून की कमी (एनीमिया), गठिया, कैंसर जैसे रोगों से बचाव होता है। ज्वारे का रस खून को साफ कर जहरीले घटकों को शरीर से निकालने का काम करते हैं। गेहूं के ज्वारे चबाने से गले की खराश और मुंह की दुर्गंध दूर होती है। रस के गरारे करने से दांत और मसूड़ों के इन्फेक्शन में लाभ मिलता है। त्वचा पर ज्वारे का रस लगाने से त्वचा का ढीलापन कम होता है और त्वचा में चमक आती है। इसके रस के नियमित सेवन से तो कैंसर की गांठे तक गल जाती हैं।

ज्वारों का उपयोग

  • गेहूं के ज्वारे के रस के सेवन से शरीर की सुरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) मजबूत होता है।
  • ज्वारे के रस के सेवन से जोड़ों, नींद, त्वचा, मासिक धर्म आदि की बीमारी से निजात मिलता है।
  • ज्वारे के रस का सेवन करने से रक्त की शुद्धि व रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा भी संतुलित होती है।
  • गेहूं के ज्वार को चटनी, सलाद, रस के रूप में, और गेंहू को अंकुरित कर प्रयोग किये जा सकते हैं।
  • विटामिन ई की प्रचुरता की वजह से अंकुरित गेंहू मांसपेशियों, रक्त प्रवाह, आंखों और सांस के लिए बहुत अच्छे माने जाते हैं।
  • गेहूं के ज्वारे के रस के सेवन से ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी, थैलेसिमिया, मधुमेह आदि बीमारियों की रोकथाम होती है।
  • सोराइसिस के लिए अंकुरित गेहूं का तेल व अरंडी का एक-एक चम्मच तेल लें और इसमें 50 मि.ली. सूरजमुखी का तेल मिलाकर त्वचा पर मलने से आराम मिलता है।
  • गेहूं के ज्वारे के रस के सेवन से कब्ज, अल्सर, कोलाईटीस, बवासीर, अम्लपित्त आदि पेट सम्बंधी सभी बीमारियों के उपचार में मदद मिलती है।
  • गेहूं के ज्वारे के रस का सेवन शरीर में रक्त और पोषक तत्वों की कमियों को शीघ्रता से पूरा करता है, तथा शरीर के वजन को संतुलित करता है।
  • रोगी को रोज सुबह-शाम गेंहू के ज्वारे का ताजा रस पिलाने से गंभीर-से-गंभीर रोगों में भी सुधार होने लगता हैं।
  • ज्वारे का रस कैंसर जैसी घातक बीमारी के लिए भी बहुत उपयोगी है। परंतु इसका उपयोग किसी आयुर्वेदाचार्य से जान कर ही करें।

14-11-2015

नोट-

शुरू में गेहूं के ज्वारे का रस पीने से मिचली जैसी परेशानी हो तो कम मात्रा का ही सेवन करें और फिर धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाते जायें। ज्वारे का ताजा रस सामान्यत: 60-120 एम.एल. तक का रोजाना खाली पेट सेवन करना चाहिये। रस निकालकर तुरंत प्रयोग कर लेना चाहिए, क्योंकि तीन घंटे में ज्वारे के रस के पोषक तत्व समाप्त हो जाते हैं। रस लेने से एक घंटे पहले और एक घंटे बाद तक कोई अन्य आहार न लें। आधे घंटे में यह रक्त में घुल मिल जाता है। रस को धीरे-धीरे घूंट-घूंट करके पीना चाहिए और सादा भोजन ही लेना चाहिए। तले-भुने खाने से परहेज करना चाहिए।

प्रीति ठाकुर

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