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क्या मुंबई के डांस बार बालाओं के अच्छे दिन लौटेंगे?

क्या मुंबई के डांस बार बालाओं के अच्छे दिन लौटेंगे?

यूं तो पूरी दुनिया में मुंबई शहर की कई पहचान है। शुरु में यह शहर एक बिजनेस सिटी के रूप में उभर कर सामने आया। बाद में फिल्मों की वजह से इस शहर को बॉलीवुड सिटी के नाम से भी जाना जाने लगा। बदलते वक्त के साथ इस शहर में अंडरवल्र्ड की गूंज भी सुनाई दी। वहीं इन सब के बीच इस शहर के डांस बार भी सुर्खियों में रहे। कहते है कि इन डांस बार की वजह से कभी मुंबई की रातें काफी रंगीन हुआ करती थीं। मुंबई के डांस बार में बॉलीवुड की हिट गानों पर थिरकती बार बालाएं और हाथों में जाम लेकर बार बालाओं पर रुपये उड़ाते लोग, डांस बार की खास पहचान हुआ करती थी। लेकिन, साल 2005 में उस वक्त मुंबई के डांस बार पर ग्रहण लग गया, जब महाराष्ट्र के तत्कालीन उप-मुख्यमंत्री आर. आर. पाटिल ने डांस बार पर यह कहते हुए पाबन्दी लगा दी की डांस बार देह व्यापार का अड्डा बन चुके हैं और इस वजह से मुंबई के युवाओं पर गलत असर पडऩे के अलावा अपराध के मामलों में भी इजाफा हो रहा है। डांस बार पर पाबंदी लगाए जाने से उस वक्त डांस बार बालाओं के अलावा बार मालिकों को भी गहरा धक्का पहुंचा था। मुंबई के बार तो खुले रहे, लेकिन इन बारों से डांस गायब हो गए। महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले से जहां डांस बार की रौनक फीकी पड़ गई, वहीं करीब 75 हजार बार बालाओं के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया।

मुंबई के बार एसोसिएशन से जुड़े लोगों ने महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले को पहले मुंबई हाई कोर्ट में चुनौती दी। जिसके बाद मुंबई हाई कोर्ट ने 12 अप्रैल 2006 के अपने फैसले में महाराष्ट्र सरकार के फैसले को असंवैधानिक बताते हुए डांस बार को फिर से खोले जाने की अनुमति दे दी। लेकिन, महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील कर दी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाते हुए सुनवाई के लिये महाराष्ट्र सरकार की अपील को स्वीकार कर लिया। इसके बाद डांस बार मालिकों और महाराष्ट्र सरकार के बीच सुप्रीम कोर्ट में लम्बी लड़ाई चली और सुप्रीम कोर्ट के ने जो फैसला दिया है, उससे डांस बार के मालिकों और बार बालाओं के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई है।

अब इन बार बालाओं का कहना है कि यदि डांस बार खोल दिये जाते है तो उनकी आजीविका की समस्या हल हो जायेगी। गौरतलब है कि साल 2005 में जब महाराष्ट्र सरकार ने डांस बार पर पाबंदी लगाई तो करीब 75 हजार बार बालाएं बेरोजगार हो गईं। इनमें से कुछ ने बार में शराब परोसने का काम शुरू कर दिया। वहीं कई बार बालाओं ने अपना घर चलाने के लिये खाड़ी देशों में चलने वाले होटलों का रुख किया। कुछ बार बालाओं को मजबूरन देह-व्यापार के धंधे में उतरना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से बार बालाओं के चेहरों पर फिर से खुशी लौट आई है। एक अनुमान के मुताबिक मुंबई और इसके आसपास के इलाकों में 700 से ज्यादा डांस बार थे। जिसमें करीब 75 हजार से ज्यादा बार बालाएं काम करती थीं। अब उन्हें लगता है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से उनके ‘अच्छे दिन’ लौट आयेंगे।

महाराष्ट्र सरकार अपने फैसले पर कायम

सुप्रीम कोर्ट ने भले ही मुंबई में डांस बार को फिर से खोलने की अनुमति दे दी हो, लेकिन महाराष्ट्र सरकार इस पक्ष में नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि डांस बार को लेकर महाराष्ट्र सरकार अपनी पुरानी भूमिका पर कायम है। साल 2005 में कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की राज्य सरकार ने पांच सितारा होटलों को छोड़ बाकी होटलों के डांस बार पर पाबंदी लगा दी थी। जिसके बाद साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने डांस बार को खोलने के आदेश दिये थे। लेकिन, महाराष्ट्र सरकार ने जून 2014 में विधानसभा में एक कानून पारित कर इस पर प्रतिबंध लगा दिया था। देवेन्द्र फडणवीस का कहना है कि इस कानून को पारित करने को लेकर सभी दल के नेता एकमत थे। उन्होंने कहा कि यह साफ तौर से देखा गया था की डांस बार देह-व्यापार के केंद्र बन गए थे। इन डांस बार से जहां युवाओं पर गलत प्रभाव पड़ रहा था, वहीं कई घर भी बर्बाद हो रहे थे। उनका कहना था कि, यदि सुप्रीम कोर्ट का अंतिम आदेश भी डांस बार मालिकों के पक्ष में आता है तो भी इस बात का सख्ती से पालन किया जाएगा की डांस बार में फिर से अश्लीलता ना हो और यहां किसी तरह के देह-व्यापार को बढ़ावा ना मिले।

महाराष्ट्र सरकार और बार मालिकों में ठनी

महाराष्ट्र सरकार के इस रुख को लेकर डांस बार मालिकों में भारी नाराजगी है। मुंबई डांस बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष मंजीत सिंह शेट्टी कहते है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दे दिया है तो फिर महाराष्ट्र सरकार इस पर रोक कैसे लगा सकती है? उन्होंने कहा कि यदि महाराष्ट्र सरकार इस आदेश का पालन करने से मना करती है तो यह सुप्रीम कोर्ट की अवमानना होगी। बार मालिकों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में महाराष्ट्र सरकार द्वारा डांस बार पर पाबंदी लगाये जाने वाले कानून को खारिज कर दिया है तो फिर इस पर रोक लगाने के लिए नया कानून कैसे लाया जा सकता है? वहीं डांस बार मालिकों के वर्तमान अध्यक्ष भरत सिंह ठाकुर का दावा है कि डांस बार में सिर्फ डांस होता है किसी तरह की अश्लीलता नहीं परोसी जाती है और ना ही देह-व्यापार होता है। ऐसे में सिर्फ आरोप लगाकर महाराष्ट्र सरकार डांस बार पर पाबंदी नहीं लगा सकती।

डांस बार को लेकर राजनीति

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद डांस बार को लेकर राजनीति भी शुरू हो गयी है। कांग्रेस का मानना है कि महाराष्ट्र की भारतीय जनता पार्टी की सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखने में असफल रही है। उनका आरोप है कि यह सब एक रणनीति के तहत किया गया है। वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का कहना है कि बीजेपी- शिवसेना की मिलीभगत की वजह से यह फैसला महाराष्ट्र सरकार के पक्ष में नहीं आया। एनसीपी के प्रवक्ता नवाब मलिक ने आरोप लगाया है कि डांस बार से जुड़े लोगों ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस और शिवसेना के युवा मोर्चा के अध्यक्ष आदित्य ठाकरे से अपनी मांगों को लेकर मुलाकात की थी।

जाने-माने अधिवक्ता मजीद मेमन की राय

इस मामले को लेकर उदय इंडिया ने जाने-माने अधिवक्ता मजीद मेमन से बात की तो उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला आर्टिकल 19 के तहत दिया है। जिसमें संवैधानिक अधिकार के तहत सभी को रोजी रोटी कमाने का हक है। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस क्रम में किसी भी तरह के गैरकानूनी कामों को अंजाम नहीं दिया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ तौर से कहा है कि डांस बार में किसी तरह की अश्लीलता के अलावा देह-व्यापार की शिकायत आती है तो मुंबई पुलिस उस पर कार्रवाई कर सकती है। लेकिन, महाराष्ट्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हुए एक बार फिर इस तरह का कानून लाने पर विचार कर रही है, जिससे डांस बार के नाम पर होने वाले मानव तस्करी के अलावा उनमे चलने वाले अवैध धंधों को रोका जा सके।

जाने-माने फिल्मकार मधुर भंडारकर की राय

बार बालाओं की जिन्दगी पर ‘चांदनी बार’ फिल्म बना कर नेशनल अवार्ड जीतने वाले फिल्मकार मधुर भंडारकर ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि डांस बार पर पूरी तरह से पाबंदी लगाना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि डांस बार में किसी तरह का अवैध काम होता है तो उस पर लगाम लगाने के लिये कानून है जो इस तरह के डांस बार पर कार्रवाई कर सकती है।

मुंबई से लतिकेश शर्मा

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