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डॉन को पकडऩा मुमकिन है!

डॉन को पकडऩा मुमकिन है!

आपने हिंदी फिल्म का वो डायलॉग तो जरूर सुना होगा, डॉन को पकडऩा मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है, लेकिन यह फिल्मी डायलॉग था जो सिर्फ फिल्मों में चलता है। रीयल लाइफ की दुनिया में डॉन को पकडऩा मुमकिन है।

कुछ ऐसा ही हुआ, जब पिछले 25 अक्टूबर को इंडिया के मोस्ट वांटेड छोटा राजन को इंडोनेशिया के बाली एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया गया। इंटरपोल ने छोटा राजन के खिलाफ पहले से रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर रखा था। ऐसे में खुफिया एजेंसियों को जैसे ही यह जानकारी मिली की वो ऑस्ट्रेलिया से बाली पहुंचने वाला है तो वहां पहुंचते ही बाली एयरपोर्ट से उसे गिरफ्तार कर लिया गया। छोटा राजन मोहन कुमार के नाम से बनाये गए फर्जी पासपोर्ट की मदद से सफर कर रहा था। पकड़े जाने के बाद, शुरू में छोटा राजन बाली पुलिस को बेहद शातिर तरीके से अपना नाम मोहन कुमार ही बताता रहा, लेकिन जब पुलिस ने गहनता से पूछताछ शुरू की तो उसने मान लिया की वो ही इंडिया का मोस्ट वांटेड डॉन छोटा राजन है।

सीबीआई और इंटरपोल की कस्टडी में रहेगा डॉन

कभी जुर्म की दुनिया में हुकूमत करने वाले छोटा राजन को अब नई दिल्ली में सीबीआई की कस्टडी में रखा गया है। पहले यह घोषणा की गयी थी कि छोटा राजन को मुंबई के आर्थर रोड जेल स्थित अंडा सेल में रखा जाएगा। उसी अंडा सेल में जहां, कभी मुंबई पर 26/11 के आतंकी हमले को अंजाम देने वाले पाकिस्तानी आतंकवादी आमिर अजमल कसाब को रखा गया था। लेकिन, बाद में यह फैसला बदल दिया गया। नई दिल्ली में हुई हाई लेवल मीटिंग के बाद छोटा राजन के खिलाफ सारे मामलों की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला किया गया। छोटा राजन ने बाली में ही मीडिया से बात करते हुए इस बात का अंदेशा जताया था कि, मुंबई में उसकी जान को खतरा है। उसने यह भी आरोप लगाया था कि, मुंबई पुलिस के कुछ अधिकारी दाऊद इब्राहिम के लिए काम करते हैं। वही आर्थर रोड जेल के अंदर भी दाऊद के गुर्गे उस पर हमला कर सकते हैं। हालांकि मुंबई पुलिस कमिश्नर जावेद अहमद ने छोटा राजन के इन आरोपों को दरकिनार करते हुए कहा कि, इस तरह के आधारहीन सवालों के जवाब देना वे उचित नहीं समझते हैं।

भारत लौटने पर मैं खुश हूं : छोटा राजन

छोटा राजन फिलहाल नई दिल्ली में सीबीआई की कस्टडी में है। सीबीआई के अधिकारी उससे लगातार पूछताछ कर उसके खिलाफ लंबित मामलों की जानकारी लेने के अलावा दाऊद के ठिकाने के बारे में भी गहन पूछताछ कर रहे हैं। वहीं भारत लौटने से पहले बाली में जब मीडिया ने छोटा राजन से पूछा की अब वो दिल्ली जा रहा है, उस पर उसकी क्या प्रतिक्रिया है? इस सवाल के जवाब में छोटा राजन ने कहा कि, वो अपने देश वापस लौट रहा है, इस बात की उसे बेहद खुशी है। अब सीबीआई उसके खिलाफ दर्ज 75 से भी ज्यादा मामलों में उससे पूछताछ करेगी।

छोटा राजन के जुर्म का सफर

छोटा राजन के जुर्म की कहानी मुंबई के उपनगर चेम्बूर के तिलक नगर इलाके से शुरू होती है। छोटा राजन का वास्तविक नाम राजेंद्र सदाशिव निखलजे था। उसने अपनी स्कूल की पढ़ाई तिलक नगर के मराठी मीडिया स्कूल आमची शाला से की थी।

छोटा राजन के घर की आर्थिक स्थिति शुरू से ठीक नहीं थी। वहीं जब पिता सदाशिव निखलजे की मिल की नौकरी छूट गई तो परिवार की मुश्किलें और बढ़ गईं। ऐसे में 1980 के दौरान पैसे कमाने के लिये छोटा राजन अपने घर के पास स्थित शाहकार सिनेमा हाल में टिकटें ब्लैक करने लगा। टिकटें ब्लैक कर छोटा राजन छोटी-मोटी कमाई तो कर रहा था, लेकिन उसे लग रहा था की यदि उसे जुर्म की दुनिया में बड़ा मुकाम हासिल करना है तो कुछ बड़ा करना होगा। इसी दौरान राजेंद्र नाम के इस युवा शख्स की मुलाकात राजन माधव नायर से हुई, जो उस वक्त जुर्म की दुनिया में बड़ा राजन के नाम से अपना सिक्का जमा रहा था। राजेंद्र ने बड़ा राजन का गैंग ज्वाइन कर लिया और उसकी सरपरस्ती में अपराध के गुर सीखे। लेकिन, इसी बीच गैंगवार में सितम्बर 1983 में बड़ा राजन का कत्ल हो गया और बड़ा राजन की मौत के बाद राजेंद्र उर्फ छोटा राजन ने उसका पूरा अवैध कारोबार संभाल लिया और तब से अपराध की दुनिया में राजेंद्र का नाम छोटा राजन पड़ गया। जुर्म के रास्ते पर चलते हुए छोटा राजन की दोस्ती मुंबई के डोंगरी से अपराध का सफर शुरू करने वाले दाऊद इब्राहिम से हुई। इस दोस्ती में उस वक्त मुंबई का एक और डॉन अरुण गवली भी शामिल हो गया था। जुर्म की दुनिया की यह तिकड़ी पूरे मुंबई को अपनी गिरफ्त में लेने की तैयारी कर रही थी। लेकिन, इसी बीच साल 1990 में अरुण गवली के बड़े भाई पापा गवली की हत्या हो गई। पता चलता है कि पापा गवली को एक ऐसी महिला से मुहब्बत हो गई थी, जो दाऊद इब्राहिम गैंग की खास मेंबर थी। पापा गवली का यह प्यार दाऊद को रास नहीं आया और उसके इशारे पर ही पापा गवली की हत्या कर दी गई। इसके बाद अरुण गवली अपने बड़े भाई पापा गवली की हत्या को अंजाम देने वालों को मौत के घाट उतारने के बाद गैंग से अलग हो गया, जबकि छोटा राजन और दाऊद पक्के दोस्त बन गए। इसके बाद दाऊद इब्राहिम दुबई शिफ्ट हो गया, वहीं छोटा राजन देश में ही रह कर दाऊद के धंधे को बढ़ाने में जुट गया।

28-11-2015

दोस्ती बदली दुश्मनी में

अब जुर्म की दुनिया में दाऊद इब्राहिम और छोटा राजन की अच्छी दोस्ती हो गई थी। छोटा राजन डी कंपनी में नंबर दो की हैसियत रखता था। कहा जाता है कि हर वारदात को अंजाम देने से पहले गैंग के अंदर हर सदस्य को छोटा राजन की मंजूरी लेनी जरुरी थी। लेकिन, साल 1988 के दौरान जब इस गैंग में छोटा शकील की एंट्री हुई तो छोटा राजन की मुश्किलें बढऩे लगी। गैंग के अंदर छोटा राजन के बढ़ते वर्चस्व से छोटा शकील खुश नही था और वो गैंग के अंदर नंबर दो की पोजीशन हासिल करना चाहता था। अपने मंसूबे में कामयाब होने के लिए उसने छोटा राजन के खिलाफ दाऊद के कान भरने शुरू कर दिये। इस दौरान कुछ ऐसी वारदातों को भी अंजाम दिया गया जिसकी जानकारी छोटा राजन को नहीं थी। इन तमाम मामलों की वजह से दाऊद इब्राहिम और छोटा राजन के बीच दूरियां बढऩे लगीं। ऐसे में जब दिसंबर 1992 में अयोध्या में बनी बाबरी मस्जिद को तोड़े जाने के विरोध में दाऊद इब्राहिम ने मुंबई में बम ब्लास्ट की वारदात को अंजाम देकर बदला लेने का प्लान बनाया तो छोटा राजन ने अपना रास्ता अलग कर लिया और अपना खुद का गैंग बना लिया।

अपना गैंग बनाने के बाद दाऊद इब्राहिम और छोटा राजन एक-दूसरे की जान के प्यासे हो गये। दाऊद किसी भी कीमत पर छोटा राजन को खत्म करना चाहता था। साल 2000 में दाऊद इब्राहिम ने बैंकॉक में छोटा राजन पर जानलेवा हमला भी करवाया। दाऊद इब्राहिम के गुर्गे बड़े ही नाटकीय अंदाज में पिज्जा डिलीवरी ब्यायज बन कर छोटा राजन के घर में दाखिल हुए और वहां ताबड़तोड़ फायरिंग की। इस हमले में छोटा राजन के सबसे करीबी माने जाने वाले रोहित वर्मा और उसकी पत्नी की मौत हो गयी। इस हमले में छोटा राजन घायल तो हुआ, लेकिन वो बच गया। बाद में बड़े ही नाटकीय अंदाज में छोटा राजन बैंकॉक के अस्पताल से पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। वहीं इसके बाद भी एक दूसरे को खत्म करने के लिये छोटा राजन और दाऊद इब्राहिम मुखबरी तो करते है, लेकिन उन्हें इसमें कामयाबी नहीं मिली। दाऊद जहां पाकिस्तान में छिप कर अपनी चाल चलता रहा, वहीं छोटा राजन ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों में अपना ठिकाना बदल कर दाऊद को ठिकाने लगाने की कोशिश करता रहा।

हिन्दू डॉन की छवि पेश करने की कोशिश

दाऊद इब्राहिम से अलग होने के बाद छोटा राजन ने अपनी छवि हिन्दू डॉन के रूप में पेश करने की कोशिश की। मुंबई में हुए सीरियल ब्लास्ट को अंजाम देने वाले दाऊद के खिलाफ उसने मोर्चा खोल दिया। मीडिया से जब भी वो फोन पर बात करता, वो इस बात का जरूर जिक्र करता था कि उसकी लड़ाई आतंकवाद के खिलाफ जारी रहेगी। बाली में भी गिरफ्तार होने के बाद उसने मीडिया से कहा की जेल में जाने के बावजूद उसकी लड़ाई आतंकवाद के खिलाफ जारी रहेगी। छोटा राजन ने यह चाल भारत के हिन्दुओं के बीच अपनी अच्छी छवि कायम करने के लिहाज से की है। लेकिन, मुंबई पुलिस की फाइलों में उसके खिलाफ कई गुनाह दर्ज है और उसे अपने गुनाहों का हिसाब देना ही होगा।

क्राइम जर्नलिस्ट जे. डे. की हत्या का आरोप

मुंबई पुलिस की फाइल में यूं तो अंडरवल्र्ड सरगना छोटा राजन के खिलाफ 75 से भी ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज है। उनमें से एक मामला मुंबई के जाने-माने सीनियर क्राइम रिर्पोटर ज्योतिर्मय डे यानी जे.डे. की हत्या करवाने का भी है। जून 2011 में क्राइम जर्नलिस्ट ज्योतिर्मय डे की हत्या दिनदहाड़े मुंबई के पवई इलाके में गोली मारकर की गई थी। जांच में यह पता चला कि, जे. डे. की हत्या छोटा राजन के इशारे पर की गई थी। आरोप यह लगा कि, जे. डे. छोटा राजन के खिलाफ दाऊद इब्राहिम को गोपनीय सूचनाएं दे रहा था और इसी वजह से उसने जे. डे. की हत्या करवाई। हालांकि छोटा राजन मीडिया से हुई बात में इस आरोप से इंकार करता रहा है की जे. डे. की हत्या में उसका कोई हाथ है।

28-11-2015

किडनी की बीमारी से परेशान है डॉन

अंडरवल्र्ड डॉन छोटा राजन के पकड़े जाने को लेकर कई तरह की चर्चाएं है। कुछ लोगों का कहना है कि, छोटा राजन ने खुद एजेंसियों से संपर्क कर आत्मसमर्पण किया है, वहीं सबूत बताते है की इंटरपोल द्वारा जारी रेड कॉर्नर नोटिस की वजह से छोटा राजन को बाली से गिरफ्तार किया गया। एक जानकारी यह भी मिल रही है कि, छोटा राजन किडनी की बीमारी से काफी परेशान था और वो अपना किडनी ट्रांसप्लांट करवाना चाहता था, जिसके लिए उसने मुंबई में अपने परिवार से भी बात की थी। इसके बाद मुंबई में छोटा राजन को किडनी डोनेट करने के लिये एक आदमी की भी तलाश पूरी हो चुकी थी। योजना के मुताबिक छोटा राजन मुंबई आकर अपनी किडनी ट्रांसप्लांट करवाना चाहता था। हालांकि, इस तरह की चर्चाओं की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

अब दाऊद को पकडऩे का बढ़ा दबाव

अंडरवल्र्ड सरगना छोटा राजन की गिरफ्तारी के बाद अब इंडिया के दूसरे सबसे मोस्ट वांटेड डॉन दाऊद इब्राहिम को पकडऩे का दबाव भारत सरकार पर बढ़ गया है। मीडिया ने इस बारे में जब देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह से पूछा तो उन्होंने कहा कि, इस बारे में कोशिशें चल रही हैं, लेकिन अभी इंतजार करना होगा। स्थिति को देखते हुए यह लगता है कि, दाऊद को पकडऩा भारत सरकार के लिए आसान काम नहीं है। खुफिया सूचनाओं के मुताबिक छोटा राजन की गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान में दाऊद की सुरक्षा बढ़ा दी गयी है और उसे एक तरह से भूमिगत कर दिया गया है। पाकिस्तान सरकार हर संम्भव कोशिश कर रही है कि, उसके गुनाहों पर पर्दा पड़ा रहे। लोकसभा चुनाव के दौरान एक निजी चैनल से बात करते हुए उस वक्त बीजेपी की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने कहा था कि, दाऊद को पकडऩा भी उनके एजेंडे में शामिल है। लेकिन, जिस तरह से पाकिस्तान ने अपने देश में दाऊद को संरक्षण दिया है, उससे यह लगता है कि, फिलहाल दाऊद भारत सरकार की पकड़ से कोसों दूर है।

लतिकेश शर्मा

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