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दत्तूजी उपलब्ध हैं

दत्तूजी उपलब्ध हैं

प्रधान न्यायाधीश एच. एल. दत्तू जी अगली सेवा के लिए उपलब्ध हैं। यह तो पी.एम.ओ. भी जानता है कि दत्तू जी सौम्य, शालीन और उदारमना हैं। सरकार को जरूरत भी है। एक वफादार, अच्छे, देशहित को आगे बढ़ाने वाले प्रधान न्यायाधीश पद से रिटायर हुए व्यक्ति की। हालांकि केरल के राज्यपाल और पूर्व न्यायमूर्ति सदाशिवम दिल्ली आना चाहते हैं, लेकिन एन.एच.आर.सी पद पर। जबकि पीएम किसी और को चाहते हैं। जस्टिस लोढ़ा इस तरह का ऑफर ठुकरा चुके हैं। ऐसे में देखना होगा कि आगे क्या होता है?



बदलेगा मोदी चेहरा


फिर मंत्रिमंडल में बदलाव की हवा है। हवा काफी तेज है और बता रहे हैं कि, पीएम के लंदन से लौटने के कुछ ही समय बाद इसका एहसास हो जाएगा। हवा के सुरूर में उछाला जा रहा है कि, स्मृति ईरानी की जिम्मेदारी बदलेगी। कुछ बिहारी नेताओं का विभाग बदलेगा। कुछ की एंट्री होगी, लेकिन यह भी सच है कि इसे मोदी के सिवा कोई नहीं जानता।



हक तो यशोवर्धन का


28-11-2015

वैसे नए मुख्य सूचना आयुक्त पर हक यशोवर्धन आजाद का है, लेकिन रस्साकसी किसी और नाम पर चल रही है। सीआईसी विजय शर्मा ३१ दिसंबर को रिटायर होंगे। खबर है दिल्ली के सीपी बीएस बस्सी निगाह गड़ाए हैं। बस्सी वित्तमंत्री खेमें से आते हैं। वहीं यशोवर्धन आजाद सौम्य बने हैं। अब देखना है इसको लेकर गृहमंत्री राजनाथ कौन सा पत्ता फेटते हैं और मोदीजी किसकी सुनते हैं।



आंत का दांत


28-11-2015

भाजपाइयों का नया तर्क सुनिए। नीतीश भले सीएम बन जाएं, लेकिन शासन लालू चलाएंगे। वैसे भी लालू की सीटें जद(यू) से अधिक हैं। दोनों बेटों को भी सेट करना है। लंबे समय से सत्ता और रूआब से दूर हैं, तो अब नीतीश की आंत में दांत गड़ाएंगे। अब भला कौन बताए कि जब अंगूर नहीं मिले तो खट्टे होंगे ही। चलिए, भगवा भाइयों अब इसी से संतोष कर लीजिए।



मैं तो चला लंदन


28-11-2015

बिहार की हार का सारा ठीकरा अमित भाई शाह की तरफ खिसका कर मोदी जी ब्रिटेन जाने की तैयारी कर रहे हैं। १२ नवंबर को पीएम लंदन के लिए उड़ान भर लेंगे। इसके पहले ९ नवंबर को संसदीय दल की बैठक में तुरूप का पत्ता चला जाएगा। पीएम जानते हैं कि, उनके लंदन से लौटने तक आग निकल चुकी होगी। अब, आखिर अमित शाह पार्टी अध्यक्ष हैं तो क्या इतना भी नहीं झेलेंगे।



मोकेम्बो से नहीं छनती


28-11-2015

वित्त मंत्री अरूण जेटली की आजकल मोकेम्बो से नहीं छन रही है। मोकेम्बो यानी किंगमेकर मुकेश अंबानी। सुना है किंगमेकर अपने संवाद के लिए वित्त राज्यमंत्री जयंत सिन्हा का अधिक सहारा लेते हैं। वैसे भी मंत्रालय में शक्ति कांता दास, हंसमुख अधिया काफी प्रभावी हैं। लिहाजा अंबानी जी की गाड़ी को ब्रेक नहीं लगते हैं। मोकेम्बो के बारे में आम है कि, पहले वह कांग्रेस की सरकार जेब में लेकर चलते थे और आजकल मोदी जी की, तो ऐसे में भला जेटली की क्या बिसात।



मोर्चा कौन खोलेगा?


जब से अरूण शौरी को पता चला है कि, वह पार्टी के सक्रिय सदस्य नहीं है, राहत की सांस ली है। इधर बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद खबर है कि, सुब्रामण्यम स्वामी दम भर रहे हैं। शॉटगन आर. के. सिंह पहले से खार खाए हैं। जनरल वी. के. सिंह, नितिन गड़करी समेत आधा दर्जन ८ नवंबर की शाम का ही इंतजार कर रहे थे। इधर खबर आ रही है कि, सुशील मोदी भी सख्त नाराज हैं। अब देखना होगा कि बारूद भरी तोप में पहली चिंगारी कौन भड़काता है?



आडवाणीजी


28-11-2015

सुना है आडवाणी जी फिर भावुक हो गए हैं। इस बार की भावुकता अपने प्रिय नीतीश कुमार को जीत की बधाई देने के बाद उन्हें गले लगाने की है। हो भी क्यों न। पिछले दो साल से समय ऐसा बदला था कि, उनके हनुमान भी नजर चुरा रहे थे। कल जब बिहार चुनाव के नतीजे परवान चढऩे लगे, तो शांत पड़ी फोन की घंटियों ने पूरा चैन हराम कर दिया। बताते हैं कि सवेरे-सवेरे ८ नवंबर को जब मोदी, अमित शाह और प्रकाश जावड़ेकर जन्म-दिन की बधाई देने पहुंचे तो आडवाणीजी बार-बार पीएम को ही देख रहे थे।



तेरा क्या होगा मांझी?


28-11-2015

धोबी का कुत्ता न घर का, न घाट का। मांझी नहीं मझधार है, बिहार का बंटाधार है। जैसे नारे अब भाजपाइयों की जुबान पर हैं। नंद किशोर यादव को भी मांझी दगा पटाखा लग रहे हैं। अब अशोका रोड के एक भाईजान कह रहे हैं कि जो नीतीश कुमार का नहीं हुआ, जिन्होंने उसे सीएम बनाया तो बिरादरी और भाजपा का क्या होगा? यह नाराजगी यूं ही नहीं है। मांझी को ढोल पीटकर लाई थी और निकल गए लड्डू बट्टा सन्नाटा। ऐसे में यह तो होना ही था।



पहले दिवाली, बाद में दीवाला


बिहार की मतगणना शुरू होने के एक घंटे बाद पहला नतीजा आया तो एनडीए आगे था। बस फिर क्या था, भाई लोगों ने आव देखा न ताव पटना कार्यालय पर फुलझडिय़ां छोडऩी शुरू कर दीं। लड्डू के पैकेट भी खुलने लगे, लेकिन जैसे ही ११ बजे भाजपाइयों के चेहरे पर १२ बजने लगे। सुना है चुनाव में कुछ ज्यादा नहीं बस कुछ सौ करोड़ का खर्चा हुआ। महीने भर से अधिक समय तक पांच सितारा होटल, दर्जन भर से अधिक हेलीकॉप्टर कुछ सौ गाडिय़ां बुक रहीं। रहें भी क्यों न जब पीएम २७ और भाजपाध्यक्ष तीन सौ से अधिक पब्लिक मीटिंग करेंगे। २० केन्द्रीय मंत्री डटे रहेंगे।


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