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अकेलेपन में भी है आनंद

अकेलेपन में भी है आनंद

हर व्यक्ति अपने जीवन में कुछ करके कुछ पाने की इच्छा रखता है। लेकिन कुछ लोगों को नाम, पैसा, प्रसिद्धि विरासत में ही मिल जाते हैं। ऐसा ही देखने को मिला पुस्तक ‘कथा एक नामी घराने की’ में जो लेखक हृदयेश के द्वारा लिखी गई है। ये पुस्तक 9 कहानियों का संग्रह है, जिसमें लेखक हृदयेश ने अपने जिंदगी के कुछ अनुभवों को लोगों के बीच सांझा किया है। लेखक हृदयेश की कहानियां जिंदगी से, खासकर उस जिंदगी से जिसमें मुक्तिबोध के मुहावरे के अनुसार आदमी जमीन में धंसकर भी जीने की कोशिश करता है। लेखक हृदयेश जब लिखते हैं तो लगता है कि कोई जमीन पर धूल बिछाकर उस पर अपनी उंगली घुमाता हुआ कोई तस्वीर बना रहा है। उनकी अंगुलियों के स्पर्श में ही कुछ खास   होगा कि, आंधियां तक वहां आकर विराम करने लगती हैं और उनकी लेखनी, जिसकी प्रसिद्धि की उन्होंने कल्पना तक नहीं की थी वह शिलालेख बनने के करीब आ जाती है।

12-12-2015ये पुस्तक लेखक हृदयेश की इक्कीसवीं कहानी-संग्रह है। इससे पहले वह कई कहानी संग्रह लोगों को दे चुके हैं जिसमें ‘नया ज्ञानोदय’, ‘वागर्थ’ , ‘समकालीन भारतीय साहित्य’ , ‘आधारशिला’ आदि और भी कई जिनमें ‘अविश्वास’ और ‘सलाम हुजूर’ काफी पहले लिखे गये थे। लेकिन ये लोगों के बीच काफी लोकप्रिय रहीं। लेखक की खासियत है कि उनके लेख में वक्त के साथ आने वाले बदलाव का कोई असर नहीं देखा जाता। लेखक ने बीच-बीच में आने वाले तमाम साहित्यिकआंदोलनों व फैशनों को गुजर जाने दिया, बिना अपने लेखकीय तेवर या प्रकृति में बदलाव के। लेखक पूरी तन्मयता से अपनी जमीन पर टिके रहे। वह एक साथ कई परंपराओं से जुड़ते हैं, क्योंकि प्रत्येक रचनाकर अपने वरिष्ठों, समवयस्कों, यहां तक की अल्पवयस्कों की कृतियों के प्रभाव को अपनी अनबद्धता में सोख लेता है, जैसे पौधों की जड़ें खाद के रस को सोख लेती हैं।

लेखक हृदयेश ने इस कहानी संग्रह में 9 कहानियों को जोड़ा है। जिसमें, ‘शैलनाथ या बैलनाथ’ भी एक है। इस कहानी की धूरी रहे शैलनाथ को उसके स्वभाव के चलते कई नामों से नवाजा गया है, जिसमें कोई उसे खुरूनाथ, सनकनाथ, गुरू घंटालनाथ यहां तक की ‘ए वेरी डिफिकल्ट पज्जल’ तक के नामों से पुकारते थे। शैलनाथ शर्मा की दो बेटियां थीं, जिनकी शादी हो गई थी। एक बेटा था जो अपने काम के बहाने अपने ससुराल में ही रहता था। यानि कि भरा पूरा परिवार होने के बावजूद शैलनाथ पूरी तरह तन्हा जिंदगी ही काट रहे थे। लेकिन, फिर भी अपनी आदतों के अनुसार वे अपना दिन बहुत ही रोचक तरीके से काट लेते थे। वे अक्सर खिड़की के पास बैठ कर लोगों को आते-जाते देखते थे, उनके लिये ये ही मनोरंजन का साधन था। वे अपने खाने-पीने का इंतजाम भी खुद ही करते थे। यानी उनके पास सब कुछ होने के बाद भी कुछ नहीं था, फिर भी वह इस अकेलेपन में अपने लिए खुशी के पल ढूंढ ही लेते थे।

12-12-2015

वहीं दूसरी तरफ पुस्तक की मुख्य कहानी ‘कथा एक नामी घराने की’ में मुख्य नायक ब्रिजमोहन मित्तल हैं जिनका घराना उत्तर प्रदेश में काफी जाने-पहचाने घरानों में शामिल था। मित्तल बतौर अपर डिवीजन क्लर्क सचिवालय में तैनात थे, जिसकी वजह से समाज में उनका ओहदा बड़ा था। पत्नी के स्वर्गवास के बाद उन्होंने घर की देखभाल और खाने-पीने के वास्ते एक नौकर रख लिया था। मित्तल साहब का एक बेटा था जो विदेश में अपनी विदेशी पत्नी के साथ रहता था। मित्तल साहब अपनी बहू से हेमबर्ग में ही मिले थे, लेकिन कुछ वक्त बाद बेटे का पत्नी से तलाक हो गया और उसने दूसरी शादी कर ली थी। मित्तल साहब अपनी दूसरी बहू से तब मिले, जब वह भारत घूमने के लिए आई। इसी दौरान मित्तलजी का स्वर्गवास हो गया। हृदयेश ने अपनी हर कहानी में इंसान के एकांकी होने का एहसास करवाया है। तो वहीं दूसरी तरफ वह ये भी दर्शाते हैं कि, अकेलेपन को भी इंसान रोमांचक तरीके से काट सकता है। अगर व्यक्ति में चाहत हो तो।

प्रीति ठाकुर

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