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अऊरी तेजस्वीया के छक्का

अऊरी तेजस्वीया के छक्का

राजद सुप्रीमो को प्रशांत किशोर का सुर अखरने लगा है। मीडिया से लेकर जद(यू)तक किशोर को ही हीरो बता रही है, जबकि लालू का दिल जानता है कि कैसे उन्होंने बिहार चुनाव को झेला। वह तो थे, बेटवा तेजस्वी भी कम नहीं था। ऊ अपनी पूरी टीमवे लेकर सोशल मीडिया पर छक्का पर छक्का जड़ रहा था। तभी तो लालू भाई ने खुश होकर उसे एक तरह से उत्तराधिकारी बना दिया है। अब इसे कोई समझ ही नहीं रहा है।



सुषमा आंटी खामोश


12-12-2015

सुषमा आंटी फिर खामोश हो गईं हैं। विदेश मंत्री का कोई बयान कान पड़े काफी दिन हो गया है। जबकि इधर विदेशी मामलों में लगातार सक्रियता बढ़ रही है। नेपाल में भी उथल-पुथल का दौर चल रहा है। बताते हैं सुषमा आंटी जान- बूझकर लो-प्रोफाइल की रणनीति अपनाने के लिए सुषुप्तावस्था में चली गईं हैं। काम पूरा करती हैं, लेकिन आवाज मंच पर नहीं आती। वैसे भी संसद का शीतकालीन सत्र आना है और कांग्रेस उपाध्यक्ष बलिदान चाहते हैं। लिहाजा खामोशी में ही भलाई है।



घबराई टीम शाह


12-12-2015

बिहार चुनाव के बाद से ही टीम शाह में एक खलबली देखी जा रही है। खलबली का कारण भी है। संघ प्रमुख मोहन राव भागवत और भैयाजी जोशी का मानना है कि भाजपा और केन्द्र सरकार में जान डालने के लिए अमित शाह का स्थान परिवर्तन होना चाहिए। वहीं अनंत कुमार, राम माधव और संघ के दुलारे दत्तात्रेय होसबोले उन्हें हर हाल में बचाने की मुहिम में हैं। नितिन गडकरी भी इन दिनों सहयोगी बन रहे हैं। इसी बीच शाह को गुजरात का सीएम बनाए जाने की भी चर्चा है। जबकि डैमेज कंट्रोल में माहिर शाह अभी गोटी फिट कर रहे हैं। शाह तो मोदी के हैं, इसलिए उन्हें चिंता भी नहीं है। वह तो तेरा तुझको अर्पण क्या लागत है मोरा के मूड में हैं।



7 दिसंबर का जलवा


12-12-2015

साल 2015 सात दिसंबर के लिए भी जाना जाएगा। इस तारीख का सुरूर अब लुटियन जोन पर भी चढऩे लगा है। 29 नवंबर से ही कृष्ण मेनन मार्ग की रौनक काफी बढ़ जाएगी और 5 दिसंबर, 7 दिसंबर, 9 दिसंबर तक इसका सुरूर छाया रहेगा। वित्त मंत्री जेटली अपने पुराने मित्र मोदी के साथ-साथ कश्मीर से कन्याकुमारी और जोशी-आडवाणी से लेकर राहुल गांधी तक को साध रहे हैं। आखिर साधें भी क्यों न बेटी की शादी जो ठहरी।



राहुल की रेस


12-12-2015

अरूण शौरी की थ्योरी है कि भाजपा ने बिहार चुनाव से कांग्रेस को जिंदा कर दिया है। सुना है अब राहुल बाबा फिर से रेस लगाने लगे हैं। जीएसटी को लेकर वह कई वरिष्ठ कांग्रेसियों की बात सुनकर चुप्पी साध ले रहे हैं। वहीं पंजाब में भीतरी घमासान थामने के लिए आर-पार के मूड में आ गये हैं। उनके मित्र कनिष्क सिंह फिर सक्रिय हैं और सोनियाजी हर बड़े मुद्दे पर राहुल से राय लेने की सलाह देने लगी हैं। सुना है इन सभी बदलावों के पीछे राहुल को बिहार के सीएम नीतीश कुमार को साध लेने की रणनीति को जा रहा है। वहीं वरिष्ठ कांग्रेसी भी मानने लगे हैं कि भाई कुछ भी हो पप्पू इधर समझदार हो गया है।



केजरी-लालू मिलन


12-12-2015

अपने केजरी भाई जैसे ही पटना के गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचे लालू भाई ने लपक लिया। केजरी न केवल लालू से गले लिपट गए बल्कि, हाथ को हाथ में लेकर हवा में उछाला, एकता दिखाई। भाई लोग टीवी पर चमक रही तस्वीर देखते ही रह गए। अब भला कौन बताए कि आखिर यही तो केजरीवाल का राजनीति शास्त्र है। तभी तो वह इंडिया अगेंस्ट करप्शन और चारा घोटाले का मिलन करा रहे थे।



बदरूद्दीनजी


12-12-2015

बदरूद्दीनजी की पूंछ बढ़ गई है। बढ़े भी क्यों नहीं। उनकी पार्टी लोकसभा चुनाव 2015 में असम में तीन सीटें जीतने में सफल हो गई थी। अब भाजपा उन्हें पकडऩा चाह रही है तो मछली की तरह फिसल रहे हैं। अमित शाह को भरोसा है कि वह हाथ में चिकना मोबिल लगाकर भी ऐसी मछली पकड़ लेते हैं। असदुद्दीन ओवैसी, जीतन राम मांझी को बिहार में लांच करके उन्होंने इसे साबित भी कर दिया है। लेकिन, अभी बदरूद्दीन हाथ नहीं आ रहे। शाह चाहते थे कि वह पटना शपथ ग्रहण समारोह में न जाएं, लेकिन बदरूद्दीन ने चौका दिया। शाह चाहते हैं कि बदरूद्दीन की पार्टी असम में 34 फीसदी मुसलमानों को रिझाने के लिए अकेले चुनाव लड़े। अब देखिए आगे क्या होता है?



स्वामियों से सिरदर्दी


12-12-2015

दो स्वामियों ने भाजपा की सिरदर्दी बढ़ा दी है। एक हैं सुब्रह्मण्यम स्वामी जो आए दिन कोई न कोई शिगूफा छोड़ देते हैं। अभी कुछ दिन पहले मीडिया की नासमझी का आनंद लेते हुए जेएनयू का वीसी बन रहे थे, तो एक बार फिर पुराने ढर्रे पर लौट आए हैं। राहुल गांधी की नागरिकता का सवाल उठा दिया है। एक तरफ रणनीतिकार संसद का शीतकालीन सत्र निकालने की कसरत कर रहे हैं तो दूसरी तरफ स्वामी जी की गुगली जारी है। दूसरे हैं स्वामी रामदेव, योग गुरू से बड़े व्यवसायी में बदल रहे बाबा रामदेव जब चाहते हैं कानून का मजाक उड़ा ले रहे हैं। पहले उनके भाई ने पतंजलि फूड पार्क में फायरिंग करवाई और अब बाबा ने बिना सरकारी मंजूरी लिए ही ‘आटा नूडल्स’ उतार दिया। ऊपर से बाबा की मोदी से नाराजगी और नखरे भी।


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