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फिर लौटा जंगलराज

फिर लौटा जंगलराज

By पटना से कफील एकबाल

बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी का कहना है कि जब से जदयू का राजद से गठबंधन हुआ है, तब से राज्य में अपराध की घटनाएं बढ़ी हैं और एक बार फिर जंगलराज लौट आया है। उनके अनुसार नीतीश भले ही कहें कि उनका गठबंधन लालू प्रसाद से हुआ कानून-व्यवस्था से नहीं, लेकिन लालू प्रसाद से कोई भी समझौता कानून व्यवस्था की कीमत पर ही हो सकता है। राज्य में सुरेन्द्र यादव, पप्पू यादव, प्रभूनाथ सिंह, मुन्ना शुक्ला, मनोरंजन सिंह धुमल, अनंत सिंह, सुनील पाण्डेय, हुलास पाण्डेय, पप्पू पाण्डेय, अजय सिंह जैसे आपराधिक किस्म के लोगों को सरकार का संरक्षण प्राप्त हो गया है।

राज्य मे लगातार बढ़ रही आपराधिक घटनाएं इसका सबूत है। पूर्व राज्यसभा सांसद साबिर अली भी इससे सहमति जताते हुए कहते हैं कि बिहार में एक बार फिर जंगलराज लौट आया है। अपहरण, रंगदारी, फिरौती, डकैती, हत्या-लूट आदि की घटनाएं बढ़ी हैं। सरकार पर राजद के मुखिया लालू यादव हावी हैं। सब कुछ उनके इशारे पर हो रहा है। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के प्रियरंजन का कहना है कि राज्य में प्रतिदिन औसतन आधा दर्जन से अधिक आपराधिक घटनाएं हो रही हैं, जिनमें तकरीबन आधी घटनाएं अपहरण एवं हत्या की हंै। अपहरण उद्योग फिर चालू होने लगा है और रंगदारी वसूली जाने लगी है।

भाजपा सांसद रामा देवी ने बताया कि राज्य के एक प्रसिद्ध चिकित्सक ने मुझे यह जानकारी दी है कि आधा दर्जन विख्यात चिकित्सकों से अपराधियों ने रंगदारी की मांग की है। पैसा नहीं देने पर जान से मारने की धमकी मिली है। चिकित्सकों को अलग-अलग तीन बैंकों का एकाउंट नंबर दिया गया है, जिसमें रंगदारी की राशि जमा करने को कहा गया। चिकित्सकों ने राशि जमा भी करा दी है। सुरक्षा कारणों से इन चिकित्सकों का नाम सार्वजनिक करने से रामा देवी ने इनकार कर दिया।

सभी वरदातों का जिक्र करना यहां संभव नहीं है। बतौर बानगी कुछ घटनाओं पर नजर डालें तो राज्य के हालात का अंदाजा लगाया जा सकता है। नारायण एजुकेशन प्वांइट स्कूल के संचालक व मुजफ्फरपुर के बड़े कारोबारी सत्यनारायण प्रसाद एवं उनके चालक मुकेश कुमार का अपहरण आपराधियों ने कर लिया, जिन्हें बिहार-नेपाल सीमा पर सिकटा के पास एक झोपड़ी में तीन महिने रखने के बाद ढ़ाई करोड़ की फिरौती वसूल करने के बाद एक जनवरी को मुक्त किया। सत्यनारायण प्रसाद ने खुद स्वीकार किया कि उन्हें फिरौती लेकर मुक्त किया गया है।

बिहार के पहले मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण बाबू के पौत्र रमेश शंकर सिन्हा के पूर्वी चंपारण में छौड़ादानों स्थित फॉर्म हाउस पर दस जनवरी की रात डकैतों ने भीषण डांका डाला और करीब 80 लाख की संपति, लाईसेंसी रिवाल्वर और बंदूक लूट लिया। इस दौरान उनके आधा दर्जन परिजनों को जख्मी कर दिया। बारह जनवरी को कुछ ही घंटों के अंतराल पर मुजफ्फरपुर में अपराधियों ने चार लोगों की हत्या कर दी। 22 दिसम्बर के दोपहर दो बजे सशस्त्र आपराधियों ने छपरा में इसुआपुर के थानाध्यक्ष संजय कुमार तिवारी को गोलियों से भुन डाला। इसके पहले सिवान में तेजाब कांड के जश्मदीद गवाह राजीव रौशन की गोलीमार कर हत्या कर दी गई थी, जिसमें सिवान मंडल कारा में सजायाफ्ता पूर्व सांसद शहाबुदीन का पुत्र वसामा का नाम आया। सिवान में हुई इस हत्या के बारे में यह जानकारी सामने आयी कि यह हत्यां शहाबुदीन की इशारे पर की गई। इसके बाद यह सनसनीखेज खुलासा हुआ कि सिवान जेल से शहाबुदीन ने 23 लोगों की हिट लिस्ट जारी की थी, जिसमें राजीव रौशन व श्रीकान्त भारती का नाम रहा है। पुलिस अधीक्षक विशेष शाखा ने सिवान के एस.पी., डी.एम., छपरा मुजफ्फरपुर के डीआईजी को गोपनीय पत्र लिख कर कहा है कि सिवान मंडल कारा में बंद पूर्व सांसद मो. शहाबुदीन ने गुप्त रूप से अपने लोगों के बीच 23 लोगों की सूची जारी की है, जिसमे राजीव रौशन एवं श्रीकान्त भारती की हत्या हो चुकी है। अब भाजपा युवा मोर्चा के क्षेत्रीय प्रभारी रविन्द्र यादव की हत्या की साजिश चल रही है। सिवान के सांसद ओमप्रकाश यादव का कहना है कि सरकार का रिमोर्ट कंट्रोल लालू यादव के हाथ में आते ही पूर्व सांसद शहाबुदीन एकबार फिर सक्रिय और बेलगाम हो गये हैं।

नीतीश सरकार ने अपने शासन के प्रथम चरण में राज्य में अपराध नियंत्रण में जो कामयाबी हासिल की थी, खासतौर से उसी की बदौलत उसे राज्य की जनता ने प्रचंड बहुमत से जीताकर दुबारा सत्ता सौंपी, लेकिन अपने शासनकाल की दूसरी पाली में वही नीतीश सरकार अपराध नियंत्रण एवं कानून और व्यवस्था की बहाली में लगातार असफल और असहाय नजर आ रही है। जानकारों का कहना है कि केवल पुलिस अभियान चलाने और एसटीएफ के गठन से अपराध नियंत्रण में स्थाई रूप से कामयाबी हासिल नहीं की जा सकती है, क्योंकि सूबे में अपराध ने अपनी जड़ें जमा ली हैं। जानकारों का कहना है कि चुनाव में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से जो लाखों-करोड़ों रूपये नेताओं ने खर्च किए हैं, उनकी भरपाई के लिए नये सिरे से अपराधियों से गठजोड़ करके अपहरण उद्योग के माध्यम से अधिकाधिक कमाई करने की कोशिश की जा रही है।

28 नवंबर को मुजफ्फरपुर से अपराधियों ने प्लाईवुड व्यवसायी अजय कुशवाहा का अपहरण कर लिया और उनके परिजनों से फिरौती की मांगी, लेकिन पुलिस अपहृत की बारामदगी में असफल रही। सूत्रों के अनुसार इस घटना को मोतिहारी के कुख्यात अपराधी मौजेलाल सहनी के गिरोह ने अंजाम दिया, जो पहले से ही जेल में बंद है। पुलिस का कहना है कि अपहर्ताओं ने अपहृत व्यवसायी को पूर्वी चंपारण-नेपाल सीमा के माध्यम से ले जाकर नेपाल में छुपा रखा है। इस वारदात को अंजाम देने वाले गिरोह की पहचान कर लेने का दावा और गिरोह के सरगना समेत कई गुर्गों को पकड़कर पुछताछ करने और लगातार छापामारी करने के बावजूद भी घटना के बाद अपहृत का सुराग लगा पाने में पुलिस लगातार नाकाम रही। अपहृत की बरामदगी के लिए मुजफ्फरपुर एवं पूर्वी चम्पारण जिले की पुलिस ने नेपाल पुलिस से सहयोग भी लिया, लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा। इस घटना के संबंध में पूछे जाने पर पूर्वी चंपारण पुलिस ने बताया कि, ‘अपहरण में प्रयुक्त वाहन की बरामदगी से घटना के तार इस जिले से जुड़े होने का पता चला है, लेकिन अपहरण किस गिरोह ने किया इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है।’

रामगढ़वा बाजार के पास एनएच-28ए से सटे मेसर्स रामनाथ प्रसाद आई ओसी पेट्रोल पम्प के मैनेजर से दोपहर 11:30 बजे बाइकर्स गिरोह ने दस लाख 83 हजार 500 रूपए लूट लिये। मैनेजर जगदीश मिश्रा इतनी रकम लेकर पैदल ही स्टेट बैंक की शाखा में जमा कराने जा रहे थे। पेट्रोल पंप से कुछ ही दूरी पर दो बाइक पर सवार आधा दर्जन सशस्त्र अपराधियों ने उन पर हमला बोल दिया। दहशत फैलाने के लिए अपराधियों ने चार बम फोड़े और कई राउंड फायरिंग की। इस दौरान पांचवां बम एक अपराधी के हाथ में ही फट गया और लोगों ने उसे घायल अवस्था में पकड़ लिया।

बताते हैं कि अपराध के क्षेत्र में वर्चस्व रंगदारी एवं ठेकेदारी को लेकर आपराधिक वारदातों को ताबड़ तोड़ अंजाम दिया जाता रहा है। वार्चस्व की लड़ाई में लाशें बिछाई जाती हैं और कम से कम समय में अधिक दौलत कमाने की लालच में बेरोजगारी का दंश झेल रही युवा पीढ़ी इस गिरोह का ‘मोहरा’ बन जाती है। बताते हैं कि अपहरण समेत दूसरे अपराध कई बड़े नेताओं एवं कई भ्रष्ट पुलिसकर्मियों की आय का प्रमुख स्रोत है। भारत-नेपाल खुली सीमा नीति का फायदा भी अपराधी जमकर उठाते रहे हैं। आपराधिक वारदातों को अंजाम देकर कुख्यात अपराधी नेपाल में छुप जाते हैं तथा वहीं से अपने गिरोह का संचालन करते हैं। छोटेलाल सहनी, मुन्ना सिंह जो अब मारे जा चुके हैं, अपने गिरोह का संचालन लंबे अरसे तक नेपाल से करते रहे थे। प्रोफेसर रत्नेश आनंन्द कहते हैं, ‘अपराध अब व्यवस्था का हिस्सा बन चुका है। युवा पीढ़ी में शिक्षा और संस्कार की कमी है। अगर युवाओं में शिक्षा और संस्कार होंगे तो वे पढ़ाई-लिखाई और करियर बनाने की तरफ ध्यान देंगे, लेकिन इसकी जगह विलासिता की  चीजों के प्रति युवाओं में आर्कषण बढ़ता जा रहा है। इसे पूरा करने के लिए युवा अपराध की दुनिया में कदम रख रहे हैं। समाजसेवी संजय कुमार ओझा कहते हैं, ‘आज के नौजवानों को वैसे अपराधी जो अपराध करके बड़े ठेकेदार और नेता बन गए  हैं आकर्षित करते हैं। अपराधियों-बाहुबलियों की जीवन- शैली, मंहगी गाडिय़ां, कपड़े, उनके आगे-पीछे रहनेवाले चमचे युवाओं को आर्कषित करते हैं। अपराध की दुनिया का काला सच उन्हें नजर नहीं आता। इसलिए वे अपराधियों, तस्करों के गिरोह से जुड़कर वे शानदार जीवनशैली गुजारना चाहते हैं। अपराध उन्हें कम समय में ज्यादा दौलत कमाने का एक मात्र रास्ता नजर आता है।’

अपराध नियंत्रण में पुलिस की अपनी परेशानी है। पुलिस-प्रशासन सुविधाओं की कमी का रोना-रोती है। गाडिय़ों के रख-रखाव एवं ईधन के साथ ही स्टेशनरी समानों के नाम पर पुलिस को मिलने वाली सरकारी राशि अपर्याप्त है। ऐसे में गाडिय़ों के रख-रखाव एवं ईधन की व्यवस्था करने के लिए पुलिस को कई मामलों में कम्प्रोमाईज करने पर मजबूर होना पड़ता है। फिर प्रत्येक थाना का अपना खर्च भी है जो सरकार मुहैया नहीं कराती है। नेशनल क्राईम रिकॉड्स ब्यूरो की 2010 की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस का आईपीसी के तहत मामले निष्पादित करने का राष्ट्रीय औसत 72.3 फीसदी है, जबकि बिहार में यह 50.5 फीसदी है। आरोपपत्र दाखिल करने में राष्ट्रीय औसत 79.1 के विपरीत बिहार में 77.2 फीसदी है। कोर्ट में मामलों के निपटारे में भी बिहार राष्ट्रीय औसत से 5 फीसदी पीछे है। सजा दिलाने का राष्ट्रीय औसत 40.7 फीसदी है, जबकि बिहार में यह 16.2 फीसदी है। एक पुलिस की चुनौतियां बढ़ रही हैं वही बिहार में पुलिस की संख्या पर्याप्त नहीं है। राज्य की 10.38 करोड़ की आबादी के लिए 85,167 पुलिसकर्मी हैं। इस अनुपात को ठीक करने के लिए राज्य सरकार ने 2015 तक पांच हजार सब-इस्पेंक्टर समेत पचास हजार पुलिसबल नियुक्त करने का फैसला किया है। अपराध से संबंधित उपलब्ध आकड़ों के विषय में पूछे जाने पर राज्य के डीजीपी  कहते हैं, ‘आकड़े थोड़ा बहुत उपर-नीचे होने से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि अब संगठित अपराध में कमी आई है। पहले राज्य में संगठित तरीके से फिरौती के लिए जो अपहरण होते थे, उनमें कमी आई है। अपहरण के पीछे निजी दुश्मनी भी एक बड़ा कारण है।’

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