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खराब फार्म और अनफिट खिलाड़ी क्या बचा पाएंगे विश्व कप?

खराब फार्म और अनफिट खिलाड़ी क्या बचा पाएंगे विश्व कप?

By सौरभ अग्रवाल

क्रिकेट मैदान से ज्यादा दिमाग में खेला जाता है। लेकिन, दिमाग में तैयार रणनीति को मैदान में सफलतापूर्वक संचालन करने में न सिर्फ खिलाड़ी का फॉर्म में होना बल्कि फिट होना भी जरूरी होता है। और बात जब विश्व कप की हो तो हर टीम अपने सर्वश्रेष्ठ खिलाडिय़ों को ही मैदान में उतारना चाहती है। ऐसे में अगर टीम के कुछ खिलाड़ी फिटनेस व फॉर्म की समस्या से जूझ रहे हों तो टीम के लिए खासी परेशानी पैदा हो जाती है। भारतीय टीम के साथ भी कमोबेश यही स्थिति बनी हुई है। ऑस्ट्रेलिया दौरे पर खिलाडिय़ों के निराशाजनक प्रर्दशन और दौरे के दौरान चोटिल होने की वजह से विश्व कप में भारत के जीत के समीकरणों में प्रभाव पड़ा है।

भारतीय टीम को विश्व कप का आगाज 15 फरवरी को ऐडिलेड में चिर प्रतिद्वंदी पाकिस्तान के साथ करना है। भारत विश्व कप में पाकिस्तान से कभी नहीं हारा है। दोनों ही देशों के लिए यह मैच किसी फाईनल की तरह ही होता है। ऐसे में भारतीय खिलाडिय़ों का फॉर्म और फिटनेस से जूझना कहीं पाकिस्तान के लिए संजीवनी न साबित हो। हालांकि, कप्तान धोनी और कोच डंकन फ्लेचर दोनों ही यह मानते हैं कि टीम विश्व कप में अच्छा प्रर्दशन करेगी।

भारत को पाकिस्तान, वेस्टइंडीज, आयरलैंड, जिंबाब्वे, दक्षिण अफ्रीका और यूएई के साथ पूल बी में रखा गया है। दोनों ही पूल में से चार-चार टीमें अगले राउंड में प्रवेश करेंगी। ऐसे में भारत का दूसरे राउंड में पहुंचना लगभग तय है। ऐसे में भारत के  पास सिर्फ तीन मैच यानि क्र्वाटर फाईनल, सेमी फाईनल और फाईनल जीत विश्व कप बचाने का सुनहरा मौका है। भारत के पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ का भी मानना है कि प्रारूप के अनुसार सभी बड़ी टीमें क्र्वाटर फाईनल खेलेंगी। ऐसे में विश्व विजेता बनने के लिए आप को सिर्फ तीन अच्छे दिन चाहिए।

भारत क ी परेशानी केवल फॉर्म या फिटनेस से जूझते खिलाड़ी ही नहीं हैं। भारतीय गेंदबाजी हमेशा से गले की हड्डी रही है और अंतिम ओवर्स में तो गेंदबाज जी जान से रन लुटाते हैं। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अभ्यास मैच में भारतीय गेंदबाजों ने अंतिम दस ओवर्स में 100 से अधिक रन लुटाए। भारतीय गेंदबाजों को देखकर यह नहीं लगता कि पिछली गलतियों से वे कुछ सीखते हैं। भारत के पास (उमेश, शामी, मोहित और भूवि सरीखे) तेज व स्विंग गेंदबाजी करने वाले गेंदबाज तो हैं, लेकिन ये सभी कुछ समय से दिशाहीन और अनियंत्रित गेंदबाजी कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में हो रहे विश्व कप में गेंदबाजों की भूमिका अहम रहेगी। ऐसे में भारतीय गेंदबाजों को जल्द ही गेंदबाजी में सुधार ला अच्छा प्रदर्शन करना होगा।

28-03-2015

वहीं विश्व कप के लिए चुनी गई टीम में कुछ खिलाडिय़ों के सिलेक्शन को लेकर भी टीम मैनेजमेंट काफी दबाव में है। गौरतलब है कि टीम में स्टुअर्ट बिन्नी को युवराज के स्थान पर तरजीह दी गई है। लेकिन, अब तक के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर वे अपने सिलेक्शन को सही साबित कर पाने में विफल ही साबित हुए हैं। वहीं कोच डंकन फ्लेचर का मानना है कि इन परिस्थितियों (ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड) में भारत को एक ऐसे ऑलराउंडर की जरूरत है जो मध्यम तेज गति से गेंदबाजी कर सके  और बिन्नी को इसी उम्मीद से टीम में लिया गया है।

गेंदबाजी के साथ-साथ भारत को अपनी बल्लेबाजी में भी खासा सुधार लाना होगा। शिखर धवन से लेकर विराट कोहली, रैना और धोनी सभी खराब फॅार्म से गुजर रहे हैं। रोहित ने ट्राई सीरीज के पहले मैच में शतक तो जड़ा, लेकिन उसके बाद वे चोटिल हो गए। वहीं रहाणे एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं जो कुछ फॉर्म में हैं, लेकिन उनकी सबसे बड़ी परेशानी छोटे स्कोर को शतक में न बदल पाना है। निचले क्रम में भी जडेजा और अश्विन भारतीय उपमहाद्वीप के बाहर काफी समय से रनों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हाल ही में संपन्न हुई ट्राई सीरीज में तो भारत पॉवर प्ले ओवर्स का भी लाभ नहीं उठा सका। इतना ही नहीं भारत ने इस दौरान हर मैच में लगभग एक से चार तक विकेट भी गंवाए।

परिस्थितियां और परेशानियां कैसी भी हो विश्व विजेता बनने के लिए विश्व विजेता की तरह खेलना पड़ेगा और भारत इस प्रतियोगिता में अपना खिताब बचाने के लिहाज से उतरेगा। ऐसे में भारत को जल्द ही अपनी समस्याओं से पार पाना होगा और समय रहते लय में आना होगा। बल्लेबाजों व गेंदबाजों दोनों को अपनी जिम्मेदारियां समझ कर अच्छा प्रदर्शन करना होगा। उम्मीद है भारत एक बार फिर से साल 2011काकरिश्मादोहराकरतीसरीबारक्रिकेटविश्वविजेताबनेगा।

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