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सोनिया का ‘हेराल्ड सिरदर्द’

सोनिया का ‘हेराल्ड सिरदर्द’

मैडम सोनिया गांधी, संसद के भीतर और बाहर क्या हल्ला-गुल्ला चल रहा है, यह सारा देश देख रहा है। संसद के इसी शीत सत्र में आप संविधान के महत्व पर भाषण दे चुकी हैं। मैडम, आप हाल ही में देश के लोगों को यह याद भी दिला चुकी हैं कि आप इंदिरा गांधी की बहू हैं। लोगों को यह भी याद है कि डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जब राष्ट्रपति थे, तब आप देश के प्रधानमंत्री का पद त्याग चुकी हैं। देश को वह भी याद है जब आपने नरेंद्र मोदी को ”मौत का सौदागर’’ कहा था। और समूचा देश यह भी जानता है कि आप अपने प्रिय बेटे राहुल को कांग्रेस नेतृत्व का ताज पहनाने को बेताब हैं। देश के लोगों को यह भी जानकारी है कि आपके दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर कई राज्यों में करोड़ों रुपये के जमीन घोटाले करने के आरोप हैं। मैडम, आप भाग्यशाली हैं कि आपके पास मोतीलाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडीस, सुमन दुबे, सत्यन गंगाराम (सैम) पित्रोदा जैसे गांधी खानदान के वफादार नेताओं की फौज है। पिछले हफ्ते चेन्नई में एक वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री ने तो राहुल गांधी के जूते तक उठा लिये।

मैडम, आप हमारे देश की सबसे धनी राजनैतिक नेताओं में हैं। इतिहास शायद यह भी कभी नहीं भुला पाएगा कि आपकी सास इंदिरा गांधी ने इस देश में इमरजेंसी का काला अध्याय जोड़ दिया। आप बतौर कांग्रेस अध्यक्ष भला इस देश से और क्या चाहती हैं, मैडम! मेरे ख्याल से आपकी आखिरी ख्वाहिश यह होगी कि कांग्रेस का एक मंदिर बनाकर उसमें राहुल की मूर्ति स्थापित कर दी जाए। यह कोई बड़ी बात भी नहीं है, मैडम। आखिरकार भारत ऐसा महान देश है जो सबको अपने में समेट लेता है। भारत के लोग दुनिया में किसी भी सेक्युलर देश से ज्यादा सहिष्णु हैं। करोड़ों लोगों को जैसे इस देश की समृद्ध संस्कृति में अपार आस्था है, वैसे ही करोड़ों लोगों की भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में भी श्रद्धा है क्योंकि इसके साथ महात्मा गांधी का नाम जुड़ा हुआ है।

दरअसल कांग्रेस पार्टी की आज की असलियत जानने में देश के लोगों को कई वर्ष, या कहिए कई दशक लग जाएंगे। और भ्रष्टाचार! हे भगवान, उसकी तो चर्चा ही न करना बेहतर है। अब यह तो सबकी जुबान पर है कि कांग्रेस और भ्रष्टाचार एक-दूसरे के पर्याय हैं और इसके ऐतिहासिक तथ्य मौजूद हैं। इसलिए मैडम, देश की सबसे पुरानी पार्टी होने के नाते आपका यह नैतिक दायित्व होगा कि नेशनल हेराल्ड के मुकदमे को अदालत में चुनौती दें, वरना सब कुछ खुलकर बाहर आ जाएगा।

यूपीए-2 सरकार के कार्यकाल में एनडीए संसद की कार्यवाहियों में बाधा डाला करता और तब कांग्रेस के कई पंडित सुझाव देते थे कि देश का पैसा बर्बाद करना सही नहीं है। अब संसद में गतिरोध पैदा करने की आपकी बारी है। ध्यान रखिए कि देश विपक्ष के इस हो-हल्ले को देख रहा है। हेराल्ड मामले को अदालतों में ही लड़ा जाना चाहिए। आखिर आप संविधान का सम्मान करती हैं। आपको और आपकी पार्टी के नेताओं को भी अदालत के सम्मन का आदर करना चाहिए और बचाव के कानूनी रास्ते तलाशने चाहिए।

जरा सोचिए मैडम! यह कैसे हो गया कि राहुल गांधी, ऑस्कर फर्नांडीस और मोतीलाल वोरा (कांग्रेस के कोषाध्यक्ष) ने कांग्रेस की संपत्तियों को एक कंपनी के तहत खरीद लिया? आपकी देश के प्रति जवाबदेही है क्योंकि आप चारों कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारी हैं। आप लोग नेशनल हेराल्ड को ऐसे कैसे खत्म कर सकते हैं? आप कानून की अदालत की लड़ाई राजनैतिक मैदान में लडऩा चाहती हैं। आप बदले की राजनीति का बहाना बनाकर संसदीय कार्यवाहियों को ठप्प करना चाहती हैं।

संसद सबसे पुरानी संस्था और लोकतंत्र का मंदिर है। इसे प्रभावित नहीं होना चाहिए, वरना आपके प्रतिष्ठित खानदान पर भी छींटें पड़ेंगे। ऐसे कई उदाहरण हैं कि यूपीए सरकार ने राजनैतिक फायदे की खातिर विपक्ष को साधने के लिये पद का दुरुपयोग किया। कांग्रेस के लंबे शासन के दौरान सरकार ने कई बार स्वायत्त संस्थाओं का कथित तौर पर दुरुपयोग किया। मैडम, अगर आपको लगता है कि डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी और पीएमओ मिलीभगत से आपको बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं तो आप इसे संसद और देश को ठप्प करने का मुद्दा तो नहीं बनाइए।

यह कुल मिलाकर आपका, आपके बेटे और वफादार नेताओं का निजी मामला है। 1950 का जनप्रतिनिधित्व कानून किसी राजनैतिक दल को कर्ज देने की इजाजत नहीं देता, तो फिर कांग्रेस पार्टी ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड को कर्ज कैसे दिया? पंडित नेहरू ने नेशनल हेराल्ड अखबार की स्थापना 1938 में की थी। इसका प्रकाशन एसोसिएटेड जर्नल्स कंपनी किया करती थी, जो धारा 25 के तहत पंजीकृत है। कंपनी के पास मुंबई और दिल्ली समेत अनेक शहरों में महंगे इलाकों में संपत्तियां हैं। 2008 में घाटे की वजह से एजेएल ने प्रकाशन बंद कर दिया। इसलिए कांग्रेस ने कंपनी को 2010 तक ब्याज मुक्त कर्ज दिया। मार्च 2009 में एजेएल का कर्ज 78.2 करोड़ रु. पहुंच गया और मार्च 2010 तक 89.67 करोड़ रु. हो गया। एजेएल के पास अनेक संपत्तियां होने के बावजूद उसने कांग्रेस का कर्ज नहीं चुकाया। वोरा 22 मार्च 2002 से एजेएल के चेयरमैन हैं।

फिर 2010 में धारा 25 के तहत यंग इंडियन नाम की एक कंपनी बनाई गई जिसके निदेशक सुमन दुबे और पित्रोदा हैं। 13 दिसंबर 2010 को राहुल गांधी भी इसके निदेशक बनाए गए। फिर 22 जनवरी 2011 को सोनिया गांधी भी वोरा और फर्नांडीस के साथ निदेशक मंडल में शामिल कर ली गईं। सोनिया और राहुल दोनों के 38-38 फीसदी शेयर हैं तो वोरा और फर्नांडीस के पास बाकी 24 फीसदी शेयर। 2010 में कांग्रेस ने फैसला किया कि एजेएल के करीब 90 करोड़ के कर्ज को यंग इंडियन के जिम्मे कर दिया जाए। दिसंबर 2010 में एजेएल ने पूरे शेयर यंग इंडियन को 40 लाख रु. में बेच दिए। अब यंग इंडियन की इसी बिक्री को अदालत में चुनौती दी गई है।

दीपक कुमार रथ

дубовий паркетлобановский депутат

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