ब्रेकिंग न्यूज़ 

गुणकारी लौंग

गुणकारी लौंग

इसका वृक्ष मोलूक्का द्वीप में नैसर्गिक रूप से उत्पन्न होता है। झजिबार तथा पेम्बा में इसकी बहुत खेती की जाती है तथा करीब 10 प्रतिशत लौंग की पूर्ति वहीं से होती है। पेनांग, मेडागास्कर, मॉरिशस एवं शिलोंग आदि स्थानों में भी इसकी खेती की जाती है। भारत वर्ष के दक्षिण भारत में अल्पमात्रा में इसकी खेती का प्रयत्न किया गया है। इसके वृक्ष प्राय: 12-13 हाथ ऊंचे और सतेज होते हैं तथा देखने में बहुत सहुावने लगते हैं। पुष्प हल्के नीलारूण रंग के होते हैं।

इस वृक्ष की सूखी हुई पुष्प कलिकाओं को लौंग कहा जाता है। लौंग 10-17.5 मिली मी. लंबी तथा रक्ताम बादाम रंग की होती हैं। इसके नीचे का भाग हाइपन्थियम से बना होता है, वह चौकोर तथा कुछ चपटा होता है तथा नख से दबाने पर उसमें से तेल निकलता है इसके अग्र भाग में दो कोष रहते हैं। लौंग में अत्यंत तीव्र मसालेदार गंध होती है, इसका स्वाद तीखा होता है।

रासायनिक संघटन

15-20 प्रतिशत एक उडऩशील तेल पाया जाता है 85 से 92 प्रतिशत यूजेनॉल (C10H12O2) रहता है। लौंग में टैनिन एवं फाइटोस्टेराल सदृश एक कैरियोफाइलीन नामक गंधहीन स्वादरहित, रंगहीन रवेदार पदार्थ पाया जाता है। इन सब के अतिरिक्त ऑसिटिल यजेनाल, मेथिल सैलिसिलेट, हैनिलिन, करियोफाइलीन तथा फ्यूरोप्ल पाया जाता है।

26-12-2015

गुण और उपयोग

लौंग सुगंधित, पाचक, वातानुलोमक, उत्तेजक, अग्निदीपक, उद्वेष्टनिरोधि, कफ रोग, मूत्रजनन, दुर्गन्धनाशक, श्वेतकणवर्धक है। यह स्थानिक वेदनाहर, वृक्करोपक, एवं वृक्कशोधक है।

लौंग के तेल का उपयोग जावा, सुमात्रा तथा जापान में तम्बाकू को सुगन्धित करने के लिये किया जाता है। विरेचक औषधियों के साथ इसका उपयोग किया जाता है, जिससे मरोड़ न हो। मच्छर से बचने के लिये इसके तेल को सोते समय खुले अंगों पर लगाया जाता है।

  • लौंग के एक हिस्से को 1 तोला की मात्रा में विसूचिका में प्यास की शांति के लिये देते हैं। इससे जी-मचलाना कम होता है वमन कम हो जाता है।
  • अजीर्ण और पेट दर्द में लौंग का फांका चूर्ण खिलाने पर लाभ मिलता है।
  • गले की सूजन एवं श्वास की बदबू में लौंग को भूनकर चूसने लाभ मिलता है।
  • अचानक तेज सिर दर्द हो या आधासीसी का दर्द हो तब 4-5 ग्राम लौंग को पीसकर थोड़ा पानी मिलाकर माथे पर लगाने से लाभ मिलता है।
  • लौंग को हल्का भूनकर उसको चूसते रहने से खांसी में चमत्कारी लाभ होता है।
  • शरीर में कहीं भी नासूर या फोड़ा हो गया हो तो 4-7 लौंग हल्दी के साथ पीसकर लगाने से लाभ होता है।
  • दांत के दर्द में लौंग को दर्द वाले स्थान में दबाने से या पाउडर करके उस स्थान में दबाने से या लगाने से दर्द कम होता है।
  • लौंग का तेल मिश्री पर डालकर या गोंद के साथ मिश्रण के रूप में इसे आंत्रिक शूल में खिलाने पर दर्द शांत होता है।

आयुष शुक्ला

программа шпионprofessional document translation services

Leave a Reply

Your email address will not be published.