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हमारा सपना सबको घर

हमारा सपना सबको घर

एक आंकड़े के मुताबिक भारत की कुल आबादी में मध्यम वर्ग और निम्न वर्ग के लोगों की भागीदारी करीब 65 प्रतिशत है। अमीर या अभिजात्य वर्ग तो अपने सिर पर छत की व्यवस्था करने में पूरी तरह से सक्षम हैं, लेकिन मध्यम वर्ग और निम्न वर्ग के लोगों की एक बड़ी आबादी का मकान मालिक बनने का सपना अभी भी अधूरा ही है। क्योंकि, नौकरी या फिर एक तय आमदनी में ही उन्हें अपनी सभी जरुरतों और सामाजिक दायित्वों का निर्वाह करना पड़ता है। हालांकि, मोदी सरकार का सपना साल 2022 तक सभी को आवास मुहैया कराने का है। लेकिन, कुछेक चुनिंदा शहरों में स्मार्ट सिटी बनाने से इस लक्ष्य को कभी हासिल नहीं किया जा सकता है। इसके लिये प्राइवेट रियल एस्टेट के बड़े, विश्वासी बिल्डरों और क्रेडाई के सदस्यों को आगे आना ही होगा। क्रेडाई के पूर्व अध्यक्ष और एनसीआर के शहर नोएडा और ग्रेटर नोएडा में आम्रपाली ग्रुप अब तक लाखों लोगों को अलग-अलग दामों पर आवास और फ्लैट्स मुहैया करा चुकी है। जबकि, इसके कई प्रोजेक्ट्स निर्माणाधीन हैं। इन्हीं सभी मुद्दों को लेकर रियल एस्टेट के क्षेत्र में जाने-माने नाम आम्रपाली ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉक्टर अनिल कुमार शर्मा से विस्तार से बात की उदय इंडिया के वरिष्ठ संवाददाता कुमार मयंक ने। प्रस्तुत हैं बातचीत के मुख्य अंश:

हाउसिंग फॉर ऑल’ के लिये हाल के दिनों में आम्रपाली ग्रुप ने क्या-क्या कदम उठाएं हैं ? मध्यम   और निम्न वर्ग को फ्लैट मालिक बनाने के लिये आप क्या कर रहे हैं?

देखिये, मैं मध्यम वर्ग के लिये कम-से-कम फायदे में ज्यादा से ज्यादा मकान और फ्लैट बनाकर दे रहा हूं। सिर पर अपनी छत के लिये ये वर्ग ही सबसे ज्यादा मुसीबतों का सामना करते हैं। मैंने जितने सस्ते में इस वर्ग के लोगों को नोएडा, ग्रेटर नोएडा में मकान और फ्लैट बनाकर दिये हैं, उतनी कम कीमत पर किसी ग्रुप ने नहीं दिया। निम्न वर्ग के लिये सरकार भी कई योजनाएं लगातार चला रही है। इसके अलावे हमारे पास जो तकनीक और मकान बनाने का प्लांट है, वो एशिया में सबसे बड़ा है। हम 7 दिनों में एक मकान बनाते हैं। अगर किसी को अपनी जमीन पर भी मकान बनाना है तो वे हमसे संपर्क करें, हम उन्हें अपनी तकनीकों के दम पर जल्द-से-जल्द उनका मकान बनाकर उन्हें दे देंगे।

आपने सरकारी विभागों में कार्यरत कर्मियों और सेवानिवृत लोगों को ग्रेटर नोएडा (वेस्ट) में आवास देने के लिये आपनी ‘आदर्श आवास योजना’ की शुरुआत की है। इसकी कितनी कीमत है? क्या इस पर काम शुरु हो चुका है?

आम्रपाली ग्रुप की ‘आदर्श आवास योजना’ एक्सक्लूसिव तौर पर सरकारी नौकरी में कार्यरत और रिटायर्ड लोगों के लिये ही है, क्योंकि उनकी सोच अलग है। वो अपने लोगों और समाज के साथ ही रहना चाहते हैं। इस पर काम शुरु हो चुका है। यह प्रोजेक्ट लेजर वैली के एरोना हाइट्स में है। यह 2 बीएचके और 3 बीएचके का है। इसकी शुरुआत 22 लाख रुपये से रखी गई है। ऐसे लोग मुझ से कई बार इसके लिये अपील कर चुके थे। ऐसे लोगों को बैंकों से लोन मिलने में भी आसानी होगी। इसके साथ ही ‘आदर्श आवास योजना’ में उन लोगों को भी फ्लैट्स मिलेंगे, जिनके माता-पिता सरकारी नौकरी में हैं या फिर रिटायर हो चुके हैं।

क्या आपकी ‘आदर्श आवास योजना’ में निजी क्षेत्र में कार्यरत लोगों को भी आवास मिल सकेगा?

नहीं, निजी क्षेत्र में काम करने वालों को ‘आदर्श आवास योजना’ में आवास नहीं मिलेगा। ऐसे ग्राहकों के लिये हमारे पास और कई प्रोजेक्ट्स हैं। जिनमें वो अपना आवास खरीद सकते हैं।

आप बार-बार कहते हैं कि मीडिया के लोग मेरे मित्र हैं। आपको आगे बढ़ाने में मीडिया का बड़ा योगदान है, ऐसे में ‘पत्रकारों’ के लिये कितने सस्ते दर पर आपके यहां आवास उपलब्ध हैं?

बिल्कुल, हमारे पास पत्रकार दोस्तों के लिये भी ‘आदर्श आवास योजना’ के बगल में ही उतने ही दाम में 2 बीएचके और 3 बीएचके के कई फ्लैट्स उपलब्ध हैं। पत्रकारों का हमेशा स्वागत है।

आप बिहार के हैं, वहां आपकी अन्य परियोजनाएं भी चल रही हैं ? आपने वहां से लोकसभा चुनाव भी लड़ा था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आपके अच्छे दोस्त भी हैं, ऐसे में बिहार में भी लोगों को किरायेदार से मकान मालिक बनाने के लिये क्या आपका कोई अफॉर्डऐबल हाउसिंग प्लान है क्या ? अगर हां तो क्या यह एक साल में शुरु हो जाएगा?

हम लोग इसे लेकर सरकार से बात कर रहे हैं। हम उन्हें 10,000 मकानों को बनाने का प्रस्ताव दे रहे हैं। क्योंकि, अभी वहां नई सरकार का गठन हुआ है। इसलिए इसमें करीब एक वर्ष का वक्त लगने की उम्मीद है।

रियल एस्टेट बाजार आजकल मंदी का शिकार है। क्या इसी वजह से आम्रपाली ग्रुप कम फायदा उठाकर भी मकानों को बेचने की रणनीति बनाने को मजबूर हुआ है?

प्रॉपर्टी के दाम बहुत ज्यादा नहीं गिरे हैं। खरीददार कम हो गये हैं, और खरीददारों की संख्या घटने की वजह ये है कि मॉनिटरी पॉलिसी उनको सपोर्ट नहीं कर रही है। उसमें ड्रॉप कट हो रहा है।

रियल एस्टेट सेक्टर में एफडीआई आने से क्या भारतीय रियल एस्टेट कारोबार को कोई खतरा है?

इसका न तो खतरा है न कोई फायदा। क्योंकि, विदेशी कंपनियां तो इक्विटी पार्टनर के रुप में आएंगी और इनका लोन भी महंगा होगा। जबकि, भारत का रियल एस्टेट बाजार आर्थिक रुप से बहुत मजबूत है। यहां सवाल तो यह है कि अगर बैंक हमें 14 प्रतिशत ब्याज पर पैसे देती है और एफडीआई 20 प्रतिशत ब्याज पर पैसे देगी तो उनके पास आखिर कौन जाएगा? इसलिए भारत सरकार को मॉनिटरी पॉलिसी को मजबूत करने के साथ ही रियल सेक्टर और अन्य घरेलू वित्तीय संस्थाओं को भी मजबूत करना चाहिये, इससे ही सभी सेक्टरों को फायदा होगा।

मोदी सरकार की पॉलिसी से रियल एस्टेट सेक्टर से क्या आपको कोई फायदा दिख रहा है?

कोई खास फायदा नहीं है। एफडीआई बड़े-बड़े और काफी लंबे चलने वाले प्रोजेक्ट्स के लिये है। जैसे- रेलवे जिसका 25 साल का प्रोजेक्ट है तो हाइवे का 30 साल का है। ऐसे प्रोजेक्ट्स में एफडीआई लाना बेहतर है। कम समय जैसे कि 4 साल के प्रोजेक्ट के लिये एफडीआई ने 30 प्रतिशत पर पैसा दिया और वो उससे बाहर हो गये तो आखिर में कारोबारी को घाटा ही होगा। एफडीआई से मदद लेने के लिये तभी कोई कारोबारी उत्सुक होगा, जब बैंक उस प्रोजेक्ट को लोन देने में अक्षम हो और बैंक से कम ब्याज दर पर वहां से लोन मिले।

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