ब्रेकिंग न्यूज़ 

आखिर बच्चे अपने तो आहार विदेशी ञ्चयों?

आखिर बच्चे अपने तो आहार विदेशी ञ्चयों?

बच्चों की बढ़ती उम्र में उनके लिए न्यूट्रिशंस बहुत जरूरी होते हैं। लेकिन आज कल के बच्चे जंक फूड की तरफ ज्यादा अकर्षित होते हैं। जिसका सीधा असर बच्चों की सेहत और उनके दिमाग पर पड़ता है। अभिभावकों को बच्चों में खाने-पीने की अच्छी आदतें शुरू से ही डालनी चाहिए। अगर बच्चों में शुरुआत से खानपान की सही आदतें पैदा हो जायें तो ये पूरी जिंदगी बरकरार रहती हैं। फिर अगर बच्चों की डाइट सही हो, तो इससे बच्चों को एनर्जी मिलने के साथ ही उनका दिमाग भी शार्प होता है। बच्चों को एनर्जी की बहुत ज्यादा जरूरत होती है, क्योंकि वे अपनी ग्रोइंग एज में होते हैं। अगर इस स्टेज पर कोई कमी रह जाये, तो इससे उनकी ग्रोथ पर गहरा असर होता है। बच्चों में मेटाबॉलिज्म रेट बहुत ज्यादा होता है और एज बढऩे के साथ धीरे-धीरे यह कम होने लगता है। बड़ों की तुलना में बच्चों की फिजिकल ऐक्टिविटी ज्यादा होती है। इसलिए उनके लिये संतुलित आहार बहुत जरूरी होता है। एक बच्चे को बड़े की तुलना में प्रोटीन की जरूरत ज्यादा होती है। यह न सिर्फ टिशूज को रिपेयर करने के लिए जरुरी होता है, बल्कि परफेक्ट ग्रोथ के लिये भी इसकी जरूरत होती है। बच्चों के आहार में 50 प्रतिशत सलाद, सब्जियां व मौसमी फल होने चाहिए। साथ ही फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, वसा, फास्फोरस और सभी तरह के मिनरल्स होने चाहिए। बच्चों के लिये नाशता बहुत जरूरी है, क्योंकि रात के खाने के बाद सुबह तक उनके शरीर को न्यूट्रिशंस की जरूरत हो जाती है। इसलिए रात भर की लंबी अवधि के बाद नाश्ता बहुत जरूरी है।

सुबह का नाश्ता है जरूरी

  • फ्रूटस चाट, अंकुरित दालों की चाट, ड्राई फ्रूट्स की चाट या वेज सेंडविच बनाकर बच्चों को नाश्ते में देना अच्छा विकल्प है।
  • मैदा से बनी चीजों को नाश्ते में शामिल नहीं करनी चाहिए। आटा, मल्टी ग्रेन या ब्राउन ब्रेड का ही प्रयोग नाश्ते में करना चाहिए।
  • कम फैट वाली चीजें ही बच्चों को नाश्ते में दें।
  • नाश्ते में फास्ट फूड को स्थान नहीं देना चाहिए क्योंकि इनमें कैलोरीज अधिक होती है और फाइबर्स न के बराबर। जबकि पेट के लिये फाइबरयुक्त भोजन बहुत जरूरी है।

कैसा हो बच्चों का संतुलित भोजन

कार्बोहाइड्रेट- यह शरीर के साथ ही दिमाग के विकास के लिये भी जरूरी है। इस बात का ख्याल रखें कि बच्चों का नाश्ता हल्का और पौष्टिकता से भरपूर होना चाहिए। नाश्ते में कार्बोहाइड्रेट से भरपूर भोजन शामिल करना चाहिए। ताकि बच्चों का शरीर चुस्त-दुरूस्त रहे।

वसा- वसा एशेंसियल फैटी एसिड का खजाना होता है। अनसैच्युरेटेड फैट बच्चों को दें। जैसे- सरसों का तेल, मूंगफली का तेल, सोयाबीन का तेल, तिल का तेल आदि जबकि सैच्यूरेटेड फैट से कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है।

प्रोटीन- प्रोटीन बढ़ते बच्चों को प्रतिदिन देना चाहिए। जैसे- दालें, फलियां, सोयाबीन, पनीर, दूध, दही आदि डेयरी प्रोडक्ट्स इसके प्रमुख स्रोत हैं।

आयरन- आयरन की कमी बढ़ती उम्र में एनीमिया की वजह बन सकती है। आयरन हरी पत्ते वाली सब्जियों, अनाज, फलियों और ड्राई फ्रूट्स आदि से प्राप्त होता है। बच्चों के खाने में इन्हें जरूर शामिल करें।

कैल्शियम- हड्डियों की ग्रोथ बढ़ती उम्र में होती है। इस समय एक दिन में 1,300 मिग्रा. कैल्शियम की आवश्यकता होती है। इसकी पूर्ति के लिए दूध, पनीर, दही, केला व अन्य डेयरी उत्पाद ग्रहण करना जरूरी है।

जिंक- यह बढ़ते बच्चों की ग्रोथ के लिए बहुत आवश्यक है। दालें, पनीर और दूध आदि से इसे आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। बच्चों के भोजन में इन चीजों को अवश्य शामिल करना चाहिये।

बच्चों के लिये शारीरिक श्रम जरूरी है। अत: बच्चों को टीवी या वीडियो गेम की बजाय बाहरी खेल के लिये प्रोत्साहित करना चाहिए। इससे बच्चों की फिजिकल ग्रोथ ठीक से होती है। साथ ही खाना भी ठीक से पचता है और उन्हें नींद भी ठीक से आती है। नींद ठीक से लेने से शारीरिक ही नहीं बल्कि, मानसिक विकास भी समुचित रूप से होता है।

प्रीति ठाकुर

кубок федерации по теннисуTopodin отзывы

Leave a Reply

Your email address will not be published.