ब्रेकिंग न्यूज़ 

हार की वजह बेदी नहीं: सतीश उपाध्याय

हार की वजह बेदी नहीं: सतीश उपाध्याय

दिल्ली विधानसभा चुनावों में भाजपा की करारी हार की नैतिक  जिम्मेवारी दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने अपने ऊपर ली है। प्रदेश की राजनीति में हुए इस बदलाव पर उदय इंडिया की संवाददाता प्रीति ठाकुर ने सतीश उपाध्याय से व्यापक संदर्भ में बात की। प्रस्तुत है कुछ प्रमुख अंश :

 

दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव के परिणामों के बारे में क्या कहेंगे?
इसका वर्णन करना बहुत मुश्किल है। किसी ने सोचा नहीं था कि इस तरह के परिणाम दिल्ली में सामने आयेंगे। जो परिणाम दिल्ली विधानसभा चुनाव में देखने को मिले हैं, निश्चित रूप से यह हम लोगों के लिए काफी चिंता का विषय है। हमें इस पर सोचने की आवश्यकता है।

माना जाए कि मोदी लहर खत्म हो गया है…
मुझे नहीं लगता कि मोदी लहर खत्म हो गई है या उसका असर कम हो गया है। अभी आठ महीने पहले दिल्ली में लोकसभा के चुनाव हुए थे। हमने सारी सातों सीटों पर अपनी जीत दर्ज कराई, चार राज्यों के चुनाव हुए वो भी हमने जीते। दिल्ली में एक विचित्र प्रकार की परिस्थिति है। इन परिस्थितियों में कई बार जीत या हार होती है। इसे मोदीजी की कार्यशैली से नहीं जोड़कर देखा जा सकता। ये दिल्ली का चुनाव है। इसलिए बेहतर होगा कि हम इसे एक राज्य से ही जोड़कर देखें, न कि मोदीजी से।

क्या आपको लगता है कि आआपा के खिलाफ नकारात्मक प्रचार से भी भाजपा को नुकसान हुआ है?
मेरा मानना है कि पार्टी का केजरीवाल की पार्टी के लिए जो नेगेटिव कैंपेन हुआ ये अपने आप में एक विषय है। कई और भी ऐसे विषय हैं जिन का विश्लेषण करने की जरूरत है। इसमें किसका नुकसान हुआ और किसका नहीं हुआ इस पर निश्चित रूप से हम विचार करेंगे। उसके बाद कुल नुकसान का भी हम आंकलन करेंगे।

चुनाव में हार के लिए आप किसे जिम्मेदार मानते हैं, केन्द्रीय नेतृत्व को या सीएम पद की प्रत्याशी किरण बेदी को?
मैं दोनों में से किसी को इसके लिए जिम्मेदार नहीं समझता। ना ही मैं किरण बेदी को इसके लिए जिम्मेदार मनता हूं और न ही केन्द्रीय नेतृत्व को। ये तो एक सामूहिक जिम्मेदारी है दिल्ली बीजेपी की, जिसमें सब लोगों ने मिलकर चुनाव लड़ा और जो वंछित परिणाम आने चाहिए थे वो परिणाम नहीं आये। इसके लिए अगर किसी की नैतिक जिम्मेदारी है तो वो नैतिक जिम्मेदारी प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते मैं अपनी मानता हूं।

दिल्ली में अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशियों की बड़ी संख्या है। काफी बड़ा वोटबैंक हैं इनका। क्या इनका वोट भी भाजपा के लिए नुकसानदायक साबित हुआ है?
दिल्ली में झुग्गी बस्तियों में रहने वालों का एक बड़ा वर्ग है। इन्हें केजरीवाल साहब  सपने दिखाने में कामयाब रहे। केजरीवाल ने उनसे जिस तरह की बातें कीं, उनसे जिस तरह के वायदे किये, शायद उसका असर इस वर्ग पर जरूर पड़ा होगा, जिसकी वजह से उन्होंने आम आदमी पार्टी को वोट दिए हैं। झुग्गी-झोपड़ी वालों का भाजपा को वोट न देना निश्चित रूप से चिंता का विषय है।

झुग्गी-झोपड़ी वालों को आपने नियमित  करने के विषय में अपने कुछ सोचा है?
वो तो निश्चित रूप से पार्टी की नीति है कि जहां पर झुग्गी है, वहां पर डवलेपमेंट होना चाहिए। उनके मकान बनने चाहिए और हर सुविधा उनको मिलनी चाहिए। उनके लिए अस्पताल और स्वच्छ शौचालय होने चाहिए।

क्या आपको लगता है कि इस बार जनता ने विकास के बजाय सरकार की ओर से मिलने वाली फ्री सेवाओं को ज्यादा तव्वजो दिया है?
ये तो है। जिस तरह के वायदे आम आदमी पार्टी ने किये हैं, उसके अनुसार वाई-फाई, पानी, बजली, अस्पतालों में ईलाज, शिक्षा ये सब मुफ्त होगा। इस तरह के जितने भी वायदे उन्होंने किए हैं ये सभी बातें जनता को बहुत अच्छी लगती हैं और अकर्षित भी करती हैं। अब उनकी सरकार बन गई है तो हमारी शुभकामनाएं हैं कि वो अपने वायदों को पूरा करें।

किरण बेदी के आने के बाद पार्टी में अंदरूनी तौर पर भारी असंतोष देखने को मिला। क्या इस वजह से भी पार्टी कार्यकत्ताओं ने पार्टी के लिए काम नहीं किया?
मैं नहीं मानता कि उनके आने से पार्टी को किसी तरह का कोई नुकसान हुआ है। पार्टी की इतनी बड़ी हार हुई है तो इन सब मुद्दों पर विचार करना बहुत जरूरी है। देखना पड़ेगा क्या-क्या कारण रहे हैं।

पार्टी की आगे की क्या रणनीति रहेगी?
भाजपा की आगे की नीतियां हैं। एक चुनाव हार जाने से संगठन समाप्त नहीं हो जाता। संगठन तो अविरल चलने वाली प्रक्रिया है। संगठन को आगे बढ़ाना, कार्यकर्ताओं के उत्साह को बढ़ाना और आगे की रणनीति बनाकर पार्टी को आगे बढ़ाना हमारी प्राथमिकता है।александр лобановский биографиярейтинг seo компаний

Leave a Reply

Your email address will not be published.