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स्वास्थ्यवर्धक केसर

स्वास्थ्यवर्धक केसर

केसर का नैसर्गिक उत्पत्ति स्थान दक्षिणी यूरोप है। यह स्पेन से भारी मात्रा में मुंम्बई आने के बाद है भारत के बाजारों में बिकता है। ईरान, स्पेन, फ्रांस, इटली, ग्रीस, तुर्की और चीन आदि देशों में इसकी खेती की जाती है। हमारे देश में कश्मीर में तथा जम्मू के किश्तवाड़ में इसकी खेती की जाती है। यहां का उत्पन्न हुआ केसर सर्वोत्तम माना गया है।

यह जड़ के नीचे प्याज के समान गांठदार कंद होता है। इसके पत्ते घास के समान लंबे, पतले, पनालीदार और जड़ ही से निकले हुए मूलपत्र हैं इनके किनारे पीछे की तरफ मुड़े हुए होते हैं। अश्विन-कार्तिक में इस पर फूल आते हैं। फूल-एकांकी या गुच्छों में, नीललोहित वर्ण के पत्तों के साथ ही शरद ऋतु में आते हैं। इन फूलों के स्त्री केसर के सूखे हुए अग्रभाग जिन्हें स्टिग्मा कहा जाता है। उन्हें ही केसर कहते हैं। इसमें विशष्टि प्रकार की तीव्र सुगंध रहती है तथा इसका स्वाद सुगंधि तथा कड़वापन लिये हुए होता है।

केसर के पौधे को बीज या उसके कन्द द्वारा लगाया जा सकता है। साधारणत: एक एकड़ भूमि से करीब 50-56 पौंड ताजा केसर प्राप्त होता है जो सूखने पर 10-11 पौंड रह जाता है। सूर्योदय के पहले जब फूल लगभग खिलने को होते हैं तब उनको तोड़ लेते हैं। उसमें से केसर को तोड़कर छलनी से छानकर मंद आंच पर सुखाते हैं। केसर को हमेशा प्रकाशहीन बंद पात्र में रखना चाहिए।

रासायनिक संघटन

केसर में एक स्नेही तेल 8-13 प्रतिशत करीब 9 प्रतिशत उडऩशील तेल, एक रंगहीन कड़वा पिक्रोक्रोसिन नामक ग्लाइकोसाइड एव क्रोसेटिन नामक रंजक द्रव्य का क्रोसिन ग्लाइकोसाइड पाये जाते हैं क्रोसेटिन नामक रवेदार रंजक पदार्थ पाये जाते हैं।

गुण और प्रयोग

  • केसर उष्ण, सुगन्धि, दीपन, पाचन, मन: प्रसादकर, रूचिकर, वण्र्य, वल्य, कामोत्तेजक, विषहीन, मूत्रल एवं वृष्य औषधि मानी जाती है। यह वातनाडिय़ों के लिये शामक है। सुगंन्धित, रंजक द्रव्य के रूप में इसका बहुत व्यवहार किया जाता है।
  • मूत्रघात में 1 तोला केसर मधुयुक्त जल में रात को भिगो कर सुबह उसे पिलाने से लाभ होता है।
  • बच्चो को गर्म दूध में केसर खिलाने से तथा ललाट एवं छाती पर लगाने से सर्दी से सुरक्षा होती है।
  • अतिसार, आघ्मान तथा उदरशूल में इसे खिलाने से लाभ होता है।
  • केसर का लेप बनाकर स्तनों में लगाने से दूध बढ़ता है।

प्रमाण एवं परीक्षण

केसर के बहुमूल्य होने के कारण इसमें अनेक चीजों की मिलावट रहती है इसलिये इसका अच्छी तरह परीक्षण करके ही खरीदना चाहिए।

निम्न परीक्षण के द्वारा आप केसर का परीक्षण कर सकते हैं।

  • सल्फ्यूरिक एसिड में डालने से गहरा नीला रंग उत्पन्न होता है।
  • स्पिरिट में केसर डालने पर स्पिरिट रंगीन हो जाता है, लेकिन केसर के तन्तु अपने प्राकृतिक रंग में ही रहते हैं।

 आयुष शुक्ला

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