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प्रकृति और सौन्दर्य का खूबसूरत अनुभव-‘एक रंग होता है नीला’

प्रकृति और सौन्दर्य का खूबसूरत अनुभव-‘एक रंग होता है नीला’

यात्राएं मनुष्य के जीवन में ज्ञान अर्जन करने का बेहतर साधन होती हैं। यात्राएं धार्मिक, सांस्कृतिक हों या फिर ऐतिहासिक, वे मनुष्य के जीवन में ज्ञान के भंडार की विस्तारक होती हैं। अनुभव, बोध और वैविध्य का सहज समावेश जीवन को प्रशस्त करता है, यात्राओं के मौके व्यक्ति को सहजता प्रदान करते हैं।

अपनी पुस्तक ‘एक रंग होता है नीला’ लेखिका मीरा सीकरी की यात्राओं का संस्मरण है। पुस्तक में लेखिका ने अपनी यात्राओं का सविस्तार वर्णन किया है। अपनी हर यात्रा को उन्होंने अलग-अलग अध्याय के रूप में प्रस्तुत किया है। पुस्तक में कुल 14 अध्याय हैं। प्रत्येक अध्याय में लेखिका ने अपनी विदेश-यात्रा के अनुभवों और कल्पनाओं को बड़ी ही सहजता के साथ अपने पाठकों के साथ सांझा किया है।

पुस्तक में पहला अध्याय ‘भूलकर भी ब्लैक शब्द का इस्तेमाल न करें’ जिसमें वह नैरोबी-केन्या के अपने भ्रमण के विषय में बताती हैं। तो वहीं दूसरे अध्याय में नियाग्रा फॉल को देखने के बाद उन्हें मध्यप्रदेश के पंचमढ़ी का ‘बी फॉल’ याद आ जाता है जहां पूरे प्रपात की खूबसूरती उसकी मधुमक्खियों जैसी भिन-भिन करती बुंदियों की बौछार में ही थी। लेखिका विदेशी धरती पर मौजूद खूबसूरत स्थानों की तुलना भारत के किसी न किसी खूबसूरत स्थान से करती हैं। इस तरह पुस्तक में न्यूयॉर्क, लॉस- वेगास, ग्रैंड केनियन, मलेशिया, मॉरीशस, पोर्ट ब्लेयर के भ्रमण का जिक्र किया गया है, तो वहीं भारत के खूबसूरत स्थानों लेह-लद्दाख, केरल बैक वाटर्ज, अमरकंटक, पांडिचेरी, भेड़ाघाट, बनारस, हरतोला की खूबसूरती का भी बखान पाठकों को वहां के रमणीय स्थानों को देखने के लिए लालायित कर देने वाला है।

एक रंग होता है नीला

लेखिका : मीरा सीकरी

प्रकाशक : आर्य प्रकाशन मंडल

मूल्य: 180 रु.

पृष्ठ: 104

लेखिका मीरी सीकरी एक संवेदनशील रचनाकार के रूप में जानी जाती हैं। इसलिए स्वाभाविक है कि जब एक रचनात्मक व्यक्ति यात्रा करता है तो केवल भूगोल में प्रवेश या पदार्पण नहीं करता। वह जीवन के न जाने कितने व्यक्त अकथनीय आयामों में यात्रा कर आता है। इस यात्रा संस्मरण में लेखिका देशी-विदेशी स्थलों पर घूमते हुए वहां के तमाम प्रसिद्ध प्राकृतिक वैभव का साक्षात्कार करते हुए और समय के कई सिरों को एक जगह मिलते देख कर एक अनिर्वचनीय आनंद में खो जाती हैं। लेखिका का विचारशील मन जाने कहां-कहां घूम आता है। वह आलोचनात्मक मन भी है और सौंदर्य-प्रेमी भी। पुस्तक में एक जगह लेखिका जिक्र करती हैं कि ‘पोर्ट ब्लेयर की भूमि अपने जख्मों को लाख छिपाने की कोशिश करे, वे छिप नहीं पाते। हालांकि वे जख्म सूख गये हैं, पर उनके दाग यह बता रहे हैं कि यहां की सांस तो सामान्य हो चुकी है, पर उसके साथ निकलती टीस की ध्वनि को सुने बिना आप रह नहीं सकते।’ ये ध्वनियां वही व्यक्ति सुन सकता है जिसके भीतर इतिहासबोध हो। कहना जरूरी है कि लेखिका ने देश और काल का तार्किक साक्षात्कार किया है।

पूरी पुस्तक में लेखिका के वह भावनात्मक अनुभव है जो उनकी जीवन के खास पहलू होने के साथ-साथ खूबसूरत स्मृतियों का हिस्सा भी हैं। लेखिका ने इन यात्राओं को अपने शौक का हिस्सा बनाने के साथ ही ज्ञान और अनुभव का जो संकलन किया है वह वर्णन के योग्य है। सीकरी ने अपने जीवन में तमाम स्थानों का भ्रमण कर अलग-अलग संस्कृतियों का निकटता से अनुभव किया है। जो अपने-आप में एक अलग अनुभव भी है।

प्रीति ठाकुर

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