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”आईएमए का मुख्य उद्देश्य सरकार, डॉक्टरों और मरीजों के बीच विश्वास पैदा करना– डॉ. एस. एस. अग्रवाल

”आईएमए का मुख्य उद्देश्य सरकार, डॉक्टरों और मरीजों के बीच विश्वास पैदा करना– डॉ. एस. एस. अग्रवाल

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. एस. एस. अग्रवाल ने स्वास्थ्य सेवाओं के साथ भारत के हर आदमी, हर औरत और हर बच्चे तक पहुंचने के लिए जो परिप्रेक्ष्य बनाया है, उस पर सविस्तार बातचीत की उदय इंडिया के रिपोर्टर संजय कुमार बिषोयी ने। प्रस्तुत हैं बातचीत के मुख्य अंश:

आईएमए अध्यक्ष के रूप में आप क्या हासिल करना चाहते हैं?

आईएमए का उद्देश्य बड़े पैमाने पर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के समुदायों के लोगों को सुलभ, सस्ती, गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए विशेष जोर देने पर है। इस विरासत को अधिक-से-अधिक ऊंचाई तक ले जाने के लिए मैं प्रतिबद्ध हूं। अत: मैं इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हर संभव प्रयास करूंगा।

स्वास्थ्य मंत्रालय जल्द ही इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सहयोग से देश में प्रमुख स्वास्थ्य समस्याओं के मूल्यांकन और समाधान करने के लिए एक कार्य समूह का गठन करेगा। आप इसे कैसे देख रहे हैं?

सरकार की प्रतिक्रिया इस ओर सकारात्मक है। इस पहल में आईएमए के सभी सदस्यों को शामिल किया जायेगा। वह सरकार के साथ मिलकर संयुक्त रूप से राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में आगे बढ़कर अपना सहयोग देंगे। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा द्वारा प्रस्तावित यह कार्य स्वागत योग्य कदम है। और समाज में जो बुराईयां हैं उनके समाधान के लिए भी आईएमए कोई कसर नहीं छोड़ेगा।

आईएमए अपने सामने आने वाली चुनौतियों को कैसे दूर करेगा?

इस वर्ष के दौरान आईएमए एक मानक प्रबंधन प्रोटोकॉल के साथ सामने आने की योजना बना रहा है। साथ ही डॉक्टरों और संबंधित उद्योग के आत्म-नियमन पर एक श्वेत पत्र तैयार करने की तैयारी कर रहा है।

चालू वर्ष में आईएमए का मुख्य उद्देश्य सरकार, डॉक्टरों और मरीजों के बीच विश्वास पैदा कर काम करने का है।

पंचायती राज वक्त की जरूरत है क्योंकि इसके माध्यम से सरकार, समाज के निचले स्तर तक पहुंच सकती है। लेकिन आईएमए इसके खिलाफ क्यों नजर आ रहा है?

आईएमए क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट और पीसी-पीएनडीटी एक्ट में प्रमुख रूप से संशोधन चाहता है। अधिनियम का जो विचार है, उसके हर स्तर पर देखभाल के न्यूनतम मानकों को प्रदान किया जाना चाहिए। लेकिन पंचायती राज व्यवस्था डॉक्टरों के लिए हर स्तर पर बाधाएं पैदा कर रही हैं। आईएमए रोगियों के समग्र उपचार पद्धति के लिए है।

23-01-2016

योग स्वास्थ्य के नजरिये से बेहतर विकल्प है। आप इस अवधारणा को कैसे आगे बढ़ायेंगे?

हमें बीमारी के इलाज से ज्यादा निरोगी रहने की अवधारणा को बढ़ावा देना चाहिए। इसके साथ ही मन-शरीर चिकित्सा सहित वैदिक चिकित्सा की धारणा से अधिक निरोगी रहने की अवधारणा को बढ़ावा देना चाहिए। सरकार के साथ 2.5 लाख डॉक्टर देश में स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणाली में चमत्कार बनकर उभर सकते हैं।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र जैसे दंतेवाड़ा, कोरापुट जैसी जगहों पर स्वास्थ्य सेवाएं निराशाजनक स्थिति में हैं। ऐसे स्थानों के लिए आप चिकित्सा सेवाओं का विस्तार कैसे करेंगे?

राज्य सरकारों और स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने वाले संगठनों के बीच संवाद की कमी है। स्वास्थ्य के मुद्दों पर एक बार आपसी चर्चा शुरू हो जाये तो इन मुद्दों को आसानी से हल किया जा सकता है। हम देश के हर कोने तक पहुंचना चाहते हैं फिर चाहें वह देश का उत्तर-पूर्वी आदिवासी क्षेत्र हो या राजस्थान और गुजरात के दूर-दराज के क्षेत्र या फिर कश्मीर के आतंकवाद प्रभावित क्षेत्र हों।

दिल्ली और अन्य शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण नागरिकों के लिए बड़ी चिंता का विषय बनता जा रहा है। ऐसे में आप क्या सुझाव देंगे?

प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लोगों को इसके दुष्प्रभावों से अवगत कराया जाना चाहिए। उसके बाद ही वे प्रभावी तरीके से प्रदूषण के खिलाफ लडऩे में सक्षम हो सकेंगे। इस काम के लिए मीडिया और अन्य संस्थानों को भी आगे आना होगा। तभी भारत को प्रदूषण से मुक्त और हरा-भरा बना पाना संभव हो सकेगा।

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