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संबंध ही नहीं बहुत कुछ बढ़ा है

संबंध ही नहीं बहुत कुछ बढ़ा है

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिसंबर के आखिरी हफ्ते में तीन देशों की यात्रा की। वे सबसे पहले रुस फिर अफगानिस्तान और अंत में पाकिस्तान पहुंचे। मोदी के इन दौरों से देश को रक्षा, कूटनीति और मेक इन इंडिया कार्यक्रम के क्षेत्र में बहुत कुछ हासिल हुआ है। साल 2000 से यह बातचीत बारी-बारी से मॉस्को और नई दिल्ली में होती आ रही है। पिछली बार व्लादीमिर पुतिन नई दिल्ली आये थे और अबकी वहां जाने की बारी स्वाभाविक तौर पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की थी। समय के मुताबिक दोनों ही देश एक-दूसरे को रणनीतिक साझीदार मान चुके हैं।

बात सबसे पहले मोदी के रुस दौरे की करें तो भारत और रुस ने अपने सामरिक संबंधों को और गति प्रदान करते हुए विभिन्न क्षेत्रों में 16 समझौतों पर हस्ताक्षर किये हैं। जिसमें भारत में कामोव 226 हेलीकॉप्टर बनाने पर हुआ समझौता होने के साथ ही दोनों देशों के बीच परमाणु ऊर्जा को लेकर भारत में दो जगहों पर 12 रूसी परमाणु रिएक्टर बनाने पर भी सहमति बन चुकी है। दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग से पांचवीं पीढ़ी के अत्याधुनिक जेट फाइटर के विकास पर भी समझौता हुआ है।

भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन के बीच सघन वार्ता के दौरान ‘आतंकी समूहों और इसके निशाने वाले देशों के बीच बिना किसी भेदभाव और अंतर किये’ एकजुट होकर पूरी दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ लडऩे की जरूरत पर बल दिया गया। इसे एक तरह से आतंक को संरक्षण देने वाले पाकिस्तान जैसे देशों के संबंध में देखा जा रहा है। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रुस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के बीच भारत-रूस के बीच 16वें वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद क्रेमलिन में पीएम मोदी ने पुतिन से कहा कि भारत एक भरोसेमंद दोस्त के रुप में रूस को मानता है। दोनों पक्षों ने बातचीत के दौरान व्यापक मुद्दों पर चर्चा की। इसमें आतंकवाद, रक्षा, सुरक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग के साथ-साथ दोनों देशों में आपसी कारोबार एवं निवेश बढ़ाने के विषय शामिल हैं। चर्चा के दौरान लोगों की आवाजाही को आसान बनाने पर भी जोर दिया गया।

मोदी की यात्रा पर प्रमुख समझौते

  • दोनों देशों के नागरिकों और राजनयिक पासपोर्ट रखने वालों की आवाजाही के लिये कुछ श्रेणियों में नियम कायदों को सरल बनाया जाएगा।
  • हेलीकॉप्टर इंजीनियरिंग के क्षेत्र में दोनों देश के बीच सहयोग की योजना।
  • कस्टम मामलों पर सहयोग की योजना।
  • रुसी परमाणु रिएक्टरों का भारत में निर्माण किये जाने पर सहमति।
  • रेलवे सेक्टर में तकनीकी सहयोग पर सहमति।
  • भारत में सौर ऊर्जा प्लांट लगाने और ब्रॉडकास्टिंग के क्षेत्र में सहयोग पर एमओयू।
  • रुस में तेल खनन को लेकर समझौता।
  • रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’

दोनों देशों के बीच हुए 16 समझौतों में एक भारत में कामोव-226 हेलीकॉप्टर के निर्माण का समझौता शामिल है। यह ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत प्रमुख रक्षा सहयोग परियोजना है।

भारत में दो स्थानों पर 12 रुसी रिएक्टर परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भारत और रुस के बीच सहयोग की गति बढ़ रही है। भारत में दो स्थानों पर 12 रुसी रिएक्टर स्थापित करने की दिशा में भी प्रगति हो रही है।

कुडनकुलम परमाणु संयंत्र होगा शुरु

रुसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने कहा कि तमिलनाडु में कुडनकुलम परमाणु संयंत्र की दूसरी इकाई कुछ सप्ताह में सेवा में शामिल हो जायेगी, इसका निर्माण रुस ने किया है और इसकी तीसरी और चौथी यूनिट के लिये वार्ता अग्रिम चरण में है।’

परमाणु क्षेत्र में भी मेक इन इंडिया पर जोर

दोनों देशों ने परमाणु क्षेत्र में मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत भारतीय कंपनियों की सहभागिता के साथ रुसी डिजाइन वाले परमाणु रिएक्टर इकाइयों का भारत में स्थानीय तौर पर निर्माण किये जाने के बारे में एक महत्वपूर्ण समझौता किया। दोनों नेताओं ने कुडनकुलम परमाणु संयत्र परियोजना की दिशा में प्रगति की सराहना की और चालू एवं आने वाली परियोजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी से काम करने पर सहमति व्यक्त की।


एस-400 ट्रिक्वफ’ से कांपेंगे दुश्मन


23-01-2016

सोवियत संघ के विघटन के बाद कुछ वर्षों तक भारत और रुस के संबंधों में बहुत कम रफ्तार से प्रगति हुई लेकिन अब फिर से उनमें पुरानी गरमी लौट आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रुस यात्रा का मेन फोकस मुख्य रूप से आर्थिक और रक्षा क्षेत्र में सहयोग संबंध को और अधिक मजबूत बनाने पर रहा। वहीं मोदी की रुस यात्रा शुरू होने से एक दिन पहले ही भारतीय रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर की अध्यक्षता में रक्षा मंत्रालय की शीर्ष खरीद परिषद ने 40,000 करोड़ रुपये की लागत से रूसी एयर डिफेंस सिस्टम ‘एस-400 ट्रिम्फ’ की खरीद को मंजूरी दे दी थी। यह एयर डिफेंस सिस्टम खास है। रिपोट्र्स के मुताबिक, इसमें 6,000 मिसाइल्स की खरीद भी शामिल है।

भारत रुस से पांच सुपरसोनिक एयर डिफेंस सिस्टम खरीदेगा और चीन-पाक थर-थर कांपेंगे। ‘एस-400 ट्रिम्फ’ वही मिसाइल है जिसे रुस ने आईएसआईएस के आतंक वाले सीरिया में तैनात किया है और जिसके डर से दुश्मन सेना का कोई विमान वहां से नहीं उड़ता है। रूस की सबसे ताकतवार मिसाइल ‘एस-400 ट्रिम्फ’ की हनक दुनिया भर में हैं। ये पलक झपकते ही हमला करने वाले किसी भी टारगेट को जमींदोज कर सकता है। ‘एस-400 ट्रिम्फ’ मिसाइल सिस्टम से भारत को अपने हवाई इलाकों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी, इसका इस्तेमाल भारतीय वायु सेना करेगी। इसके आने से भारत के उत्तर, उत्तर-पश्चिमी और उत्तर-पूर्वी सीमा को जबरदस्त सुरक्षा हासिल होगी। मोदी सरकार ने भारतीय वायु रक्षा की क्षमता को बढ़ाने के लिये ये कदम उठाये हैं।

आइये जानते हैं चीन-पाक को मुंहतोड़ जवाब देने वाली रुस की ‘एस-400 ट्रिम्फ’ मिसाइल की खास ताकत के बारे में।

  • ‘एस-400 ट्रिम्फ’ का सुपरसोनिक एयर डिफेंस सिस्टम 400 किलोमीटर की रेंज में किसी भी टारगेट दुश्मन के एयरक्राफ्ट, फाइटर जेट, स्टील्थ प्लेन, मिसाइल और ड्रोन तक को मार गिराने की क्षमता रखता है। इससे जाहिर है कि भारत के बेहद नजदीक चीन या पाकिस्तान से किसी हमले की हालत में यह रामबाण की तरह बेहद कारगर साबित होगा।
  • माना जा रहा है कि एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम- ‘एस-400 ट्रिम्फ’ को खरीदने के बाद भारत, चीन या पाकिस्तान की ओर से किसी मिसाइल अटैक की स्थिति में मुंहतोड़ जवाब दे सकेगा। भारत ऐसे 10-12 सिस्टम खरीदेगा। इसकी सेवा अवधि 15 साल है।
  • रूस की ‘एस-400 ट्रिम्फ’ डिफेंस सिस्टम में अलग-अलग क्षमता की चार तरह की मिसाइलें और 12 से ज्यादा लांचर मौजूद हैं। यह न्यू जेनरेशन का एंटी एयरक्राफ्ट-एंटी मिसाइल सिस्टम है।
  • ये सुपरसोनिक और हाइपरसोनिक मिसाइलें 120-400 किलोमीटर की रेंज में किसी भी टारगेट को आसानी से मार गिरा सकती हैं।
  • रूसी एक्सपट्र्स का दावा है कि ‘एस-400 ट्रिम्फ’ मिसाइल सिस्टम जमीन से हवा में मार कर सकता है। यह रडार पर पकड़ न आने वाले स्टील्थ मोड के फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट (अमेरिकन एफ-35 फाइटर जेट) को भी मार गिरा सकता है।
  • बी 2 बॉम्बर और एफ-22 को छोड़कर 10 सेकेंड के भीतर दुश्मन एयरक्राफ्ट को बर्बाद कर सकता है।
  • यह एक साथ कई लक्ष्यों को भेद सकता है। इसमें कई रडार हैं।
  • लक्ष्य का पता लगाने की दूरी 600 किलोमीटर है।

एस-400 ट्रिम्फ’ का इतिहास

इस रुसी मिसाइल का निर्माण कार्य 1990 के दशक के उत्तरार्ध में शुरू हुआ। इसका पहला परीक्षण 12 फरवरी 1999 को कपुस्टिन यर से किया गया और साल 2001 में इसे रुस की सेना में शामिल कर लिया गया।

भारत से पहले चीन ने भी ‘एस-400 ट्रिम्फ’ एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम खरीदने के लिये रुस के साथ एक साल पहले 3 अरब डॉलर की डील की थी। चीन को अगले एक वर्ष के अंदर यह मिसाइल हासिल हो जाएगी। भारत को भी जल्द ही मिलने की आशा है। इसके बाद बढ़ेगा भारत देश के जवानों का हौसला और दुश्मन कांपेंगे थर-थर।


रूस में तेल खनन को लेकर समझौता

रुस तेल और प्राकृतिक गैस के मामले में बहुत समृद्ध है और भारत इस मामले में उसके साथ आपसी हितों पर आधारित संबंध बनाना चाहता है। पूरी दुनिया में अमेरिका और चीन के बाद भारत ही तेल और गैस का सबसे अधिक आयात करता है और उसकी अर्थव्यवस्था इस आयात पर बहुत कुछ निर्भर करती है।

आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त लड़ाई पर जोर

दोनों नेताओं के बीच वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में आतंकवाद पर चिंता व्यक्त करते हुए दोनों पक्षों ने इस वैश्विक बुराई के खिलाफ संयुक्त लड़ाई पर जोर दिया गया, और इस संबंध में चुनिंदा और दोहरा मापदंड नहीं अपनाने की बात कही गई।

सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन

पुतिन ने बताया कि रुस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के प्रयासों का पुरजोर समर्थन करता है। पुतिन ने कहा कि भारत इसके योग्य और मजबूत उम्मीदवार है जो इस विश्व निकाय में स्वतंत्र और जिम्मेदार पहल को आगे बढ़ा सकता है।

भारत-रुस हैं एक-दूसरे की जरुरत

असल में भारत और रुस दोनों को ही एक-दूसरे की जरुरत है। भू-राजनैतिक दृष्टि से आज भी उसे रुस की मदद की जरूरत है क्योंकि अमेरिका का पाकिस्तान और उसके द्वारा प्रायोजित भारत विरोधी आतंकवाद के प्रति कोई स्पष्ट नजरिया विकसित नहीं हो पाया है। इस दृष्टि से रुस हमारा स्वाभाविक दोस्त है और इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रुस यात्रा का महत्व स्वत: स्पष्ट भी होता है।

ऐसे समय में जब रुस पर अमेरिका और पश्चिमी देशों ने आर्थिक प्रतिबंध लगाये हुये हैं और तेल के दामों में भी गिरावट आई हुई है। इन दोनों के कारण उसकी अर्थव्यवस्था के लिये यह काफी मुश्किल समय है। ऐसे में भारत द्वारा रक्षा उपकरणों की खरीद उसके लिये बहुत महत्व रखती है। उक्रेन संकट के कारण पश्चिमी प्रतिबंधों से रुस की अर्थव्यवस्था को भारी झटका लगा है। पुतिन भारत के साथ आर्थिक रिश्ते और बढ़ाना चाहते हैं। इसके बदले भारत भी यूरेशियाई देश में तेल और गैस दोहन परियोजनाओं में शामिल होने में गहरी दिलचस्पी दिखा रहा है। दोनों देशों के बीच मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार करीब 10 अरब अमेरिकी डॉलर है और दोनों ही पक्ष इसे अगले 10 वर्ष में 30 अरब डॉलर तक ले जाने का इरादा रखते हैं।

रुस की दो दिवसीय यात्रा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 दिसंबर की सुबह पड़ोसी देश अफगानिस्तान का एक दिवसीय दौरा किया। इसके बाद अफगानी राष्ट्रपति अशरफ गनी और भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच हुई मुलाकात में आपसी सहयोग बढ़ाने, क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा समेत तमाम मुद्दों पर बातचीत हुई। पीएम मोदी ने राजधानी काबुल में भारत के सहयोग से निर्मित अफगान संसद के नये भवन का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने अफगान संसद को संबोधित किया और संसद परिसर में स्थित अटल ब्लॉक का भी उद्घाटन किया। भारत सरकार ने युद्ध पीडि़त अफगानिस्तान से दोस्ती और एकजुटता दिखाने के लिये अफगानी संसद के निर्माण का काम 2007 में शुरू किया था। इस भवन का डिजाइन मुगल और आधुनिक स्थापत्य कला पर आधारित है। इसका गुंबद एशिया का सबसे बड़ा गुंबद होगा।

पीएम मोदी ने अफगान संसद में कही ये अहम बातें

  • अटल जी ने 11 साल पहले करजई साहब के साथ पार्टनरशिप में इस प्रोजेक्ट का सपना देखा था।
  • हम इस बात से बेहद प्रभावित हैं कि आपने इस इमारत का नाम अटल ब्लॉक चुना है।
  • लोगों की अपेक्षा पूरी करेगी ये अफगान संसद।
  • बुलेट को बैलेट से हराना होगा।
  • अफगानिस्तान का हमदर्द है भारत।
  • शहीद अफगान सुरक्षाबलों के 500 बच्चों को स्कॉलरशिप।
  • अफगानिस्तान में शांति से पूरे क्षेत्र की तरक्की।

कुमार मयंक

 

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