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कला उत्सव कला में फूटा बाल प्रतिभाओं का अनूठा फव्वारा

कला उत्सव  कला में फूटा बाल प्रतिभाओं का अनूठा फव्वारा

नई दिल्ली के राष्ट्रीय बाल भवन में कला उत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बाल कलाओं व संस्कृति की एक राष्ट्रीय सभा बनाई गई थी, जिसमें देश के हर कोने के स्कूली बच्चों ने भाग लिया। यह कार्यक्रम अनोखी छटा बिखेरता भारत की एकता का इन्द्रधनुष बन कर उभरा, जिसमें ३६ प्रदेशों व संघीय क्षेत्रों से आये १५०० से अधिक बच्चों की आभा सिमटी दिखाई दी। कला उत्सव मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी की मौलिक सोच व कल्पना थी, जिसे साकार करने के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ४ सितम्बर को इस आयोजन की वेबासाइट का उद्घाटन कर नैतिक समर्थन व प्रोत्साहन प्रदान किया था। तब उन्होंने ईरानी के इस आयोजन को ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के राष्ट्रीय मुद्दे के साथ जोडऩे का सुझाव दिया था। यही कारण रहा कि इस उत्सव में सभी प्रतिभाओं का प्रदर्शन लगभग इस घ्येय के इर्द-गिर्द घूमता रहा। इस कार्यक्रम का समापन एक उत्साहवर्धक माहौल के साथ हुआ। विभिन्न प्रतिस्पर्धाओं के लिये पुरस्कारों की घोषणा और वितरण भी किया गया। पुरस्कारों का चयन विभिन्न वर्गों के लिये एक प्रतिष्ठित पैनल ने किया।

प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने वाले दलों का चयन एक लम्बी एवं व्यापक प्रक्रिया द्वारा किया गया। जिसमें पहले अलग-अलग प्रदेशों की प्रतियोगिता को स्थान दिया गया। इस कार्यक्रम में विलुप्त हो रही या भूलती जा रही कलाओं को पुन:जीवित करने पर भी विशेष जोर दिया गया।

इस आयोजन का सर्वाधिक आकर्षक बिंदु था लड़के-लड़कियों तथा सक्ष्म एवं विशेष रूप से सक्षम बच्चों को एक ही प्रदर्शन मंच पर बराबरी के स्तर पर प्रतिस्पर्धा में भाग लेने का अवसर देना। यह अपने आप में एक नया पथ प्रदर्शक कदम था। इसी नई सोच का करिश्मा था कि संगीत के क्षेत्र में सभी को पीछे पछाड़ कर प्रथम पुरस्कार पाने वाली दिल्ली की टीम के सभी बच्चे विशेष रूप से सक्षम थे।

रंगमंच श्रेणी में भाग लेने वाली एक विद्यार्थी कद में तो सब से छोटी थी, मात्र ढाई फुट की पर उसने अपने जीवांत व मार्मिक अभिनय प्रदर्शन से सभागार में उपस्थित सभी दर्शकों की आंखों में आंसू ला दिये। एक और बाल कलाकार जिसने ड्रामा में भाग लिया वह थी चंडीगढ़ के स्कूल की ८० प्रतिशत विशेष रूप से सक्षम छात्रा। सभी प्रतिस्पर्धाओं में जितने भी कार्यक्रम प्रस्तुत किये गये वह सभी चित्ताकर्षक थे। मंच पर प्रदर्शित संगीत से सभा में मौजूद सभी लोग झूम रहे थे।

कला उत्सव के शुभारम्भ के समय अपने उदबोधन में कार्यक्रम की प्रणेता मानव संसाधन मंत्री समृति ईरानी ने विद्याथियों का आह्वान किया कि वह कार्यक्रमों में प्रतिस्पर्धा की भावना से भाग लें और अपने प्रदेश सद्भावना की भावना से ओत-प्रोत होकर जायें। उन्होंने आग्रह किया कि अन्य प्रदेशों से आये सभी बच्चे अपने भाईयों-बहनों से मिलें और एक-दूसरे के अनुभवों का आदान-प्रदान करने के लिये इस सुअवसर का पूरा लाभ उठायें।

उन्होंने बच्चों के माता-पिता, अभिभावकों तथा अध्यापकों से भी उपसंवाद किया, जिन्होंने यहां आने के लिये बच्चों को प्रेरित किया, उनमें अपनी कलाओं व संस्कारों के प्रति रूचि पैदा की व उन्हें जीवित रखने के लिये प्रोत्साहित किया। ईरानी ने हर्ष व्यक्त किया कि विभिन्न प्रदेशों से आये छात्र-छात्राओं की मातृभाषा अलग होने के बावजूद उन्हें आपस में संवाद व सम्पर्क में कोई कठिनाई नहीं आ रही। उन्होंने कहा यह तथ्य भारत की भावनात्मक एकता का सबूत है।

हिन्दी में अपने भाषण के बीच-बीच ईरानी अंग्रेजी में भी बोलीं, ताकि अहिन्दी भाषी राज्यों से आये विद्यार्थियों को कोई कठिनाई पेश न आये।

इसके बाद स्मृति ईरानी अलग-अलग प्रदेशों से आये बच्चों से मिलने, उनके साथ फोटो व सेल्फी खिंचवाने में उतनी ही उल्लासित दिखीं जितने कि बच्चे। उसी शाम को ईरानी के सुझाव पर बाल भवन के प्रांगण में पांच स्थानों पर कैम्प फायर का आयोजन किया गया, जिसमें सभी प्रदेशों से आये बच्चों ने बड़ी धूमधाम से हिस्सा लिया और एक दूसरे के संगीत पर नृत्य भी प्रदर्शित किया और गाने भी गाये। उन्माद और उल्लास का यह एक ऐसा क्षण बन गया, जिसे बच्चे पूरी जिंदगी नहीं भूल सकेंगे।

विभिन्न प्रदेशों से उत्सव मे भाग लेने आये विद्यार्थियों और विभिन्न गुटों ने भारत के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी, उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा सभापति मुहम्मद हामिद अंसारी एवं लोकसभा अध्यक्षा सुमित्रा महाजन से भी भेंट की।

कला उत्सव के समापन पर मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी ने नोबल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी, पद्म विभूषण से सम्मानित लेखक रस्किन बॉड, पद्मश्री प्राप्त नृत्यांगना सोनल मान सिंह की उपस्थिति में माननीय जजों का निर्णय सुनाया। उस वक्त पूरा हॉल तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंज उठा।

उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुये कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि विद्यार्थियों को किसी हीरो या रोल मॉडल को ढूंढने की आवश्यकता नहीं है- ”तुम सभी अपने रोल मॉडल हो’’। उन्होंने कहा कि यदि कला व कलाकार की ताकत भारत के बच्चों को एकता के एक मंच पर ला सकती है तो उन्हें कोई शक नहीं कि भारत की बेटियां न केवल सुरक्षित व सुशिक्षित होंगी, बल्कि वह दुनिया में किसी से कम नहीं रहेंगी।

सोनल मान सिंह ने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वह अपने आप में आत्मसम्मान की भावना को जागृत करें। अपना एक सुनिश्चित लक्ष्य बनायें व उसे प्राप्त करें। उन्होंने आह्वान किया कि वह मानवता की सेवा के लिये काम करें।

अपने समापन भाषण में ईरानी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कला उत्सव को नैतिक संरक्षण देने के लिये धन्यवाद किया, जिस कारण इतना बड़ा आयोजन सफल हो पाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री महोदय ने इस उत्सव को राष्ट्रीय एकता और हमारी सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और ”बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’’ के पावन उद्देश्य की प्राप्ति में बच्चों को जोडऩा चाहा था, जिसमें हम सफल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कला उत्सव हमारे राष्ट्र का गौरव है। इसके माध्यम से सारे भारत से आये स्कूल के बच्चों को एक साथ मिलकर भारत की उच्च संस्कृति व सांस्कृतिक धरोहर की यात्रा में शामिल होने का अवसर मिला है। उन्होंने विश्वास जताया कि जिस प्रकार भारत ने विज्ञान और तकनीक में उत्कृष्ठता प्राप्त की है, उसी प्रकार हम सांस्कृतिक क्षेत्र में भी अपना डंका बजाएंगे। उन्होंने बच्चों का आह्वान किया कि वह ‘एक संविधान व एक राष्ट्र के अंतर्गत एक लक्ष्य एवं एक जीवन का सिद्धांत अपनायें। हम राष्ट्रीयता व भारत की उच्च संस्कृति के संरक्षक बनें। कला उत्सव ने स्कूली छात्रों को राष्ट्रीय स्तर पर एक मंच प्रदान किया है, जहां उन्हें अपनी प्रतिभा और कला की उत्कृष्ठता दर्शाने का अवसर मिला है।

ईरानी ने जजों का निर्णय भी सुनाया जिसके अनुसार दृष्य कला में प्रथम पुरस्कार अण्डमान निकोबार को, दूसरा पुरस्कार संयुक्त रूप में दिल्ली व हरियाणा को और तृतीय पुरस्कार तमिलनाडु को मिला।

संगीत में प्रथम विजेता रहा दिल्ली, दूसरा छत्तीसगढ़ और तीसरा स्थान संयुक्त रूप में असम व महाराष्ट्र को मिला।

रंगमंच में हरियाणा को मिला पहला पुरस्कार, असम को दूसरा और महाराष्ट्र को तीसरा पुरस्कार।

नृत्य श्रेणी में प्रथम स्थान पाया असम ने, दूसरे स्थान पर रहा दादरा नगर हवेली और तीसरे पर कर्नाटक।

ट्रॉफी के साथ प्रथम पुरस्कार विजेता टीम को मिले सवा लाख रूपये, दूसरे को ७५ हजार और तीसरे को ५० हजार रूपये।

ईरानी ने जीतने वाले सभी प्रदेशों को पुरस्कार भी बांटे और बधाईयां भी दीं। प्रदेशों से आये सभी प्रतिभागियों को राष्ट्रीय कला उत्सव में भाग लेने का सर्टिफिकेट भी दिया गया। कार्यक्रम के बीच-बीच पुरस्कृत संगीत एवं नृत्य की कृतियों से दर्शकों का मनोरंजन भी किया गया।

प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत की गई उत्कृष्टता ने इस नये-नवेले कला उत्सव को राष्ट्रीय स्तर प्रदान कर दिया है। कार्यक्रमों की विशिष्टता ने सिद्ध कर दिया है कि प्रस्तुतियां चाहे बच्चों की रही हों, पर यह बच्चों का खेल कतई नहीं था। अब यह कला उत्सव एक बार होने वाला समागम नहीं है, इसे वार्षिक बनाया जा रहा है। कोई आश्चर्य नहीं होगा कि कल को यह कला उत्सव यदि राष्ट्रीय बाल कला उत्सव का स्थान प्राप्त कर ले और उतना ही गौरवशाली बन जाये जैसे कि कई अन्य विधाओं में राष्ट्रीय पुरस्कारों को प्राप्त हैं।

अम्बा चरण वशिष्ठ

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