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नई उक्वमीदों का आगाज स्टार्ट-अप इंडिया

नई उक्वमीदों का आगाज  स्टार्ट-अप इंडिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्टार्ट-अप इंडिया का एक्शन प्लान लॉन्च कर स्टार्ट-अप के एक्शन प्लान में खुला माहौल देने की कोशिश की है। स्टार्ट-अप को इंस्पेक्टर राज से मुक्त रखने के लिये बड़ी पहल की गई है। स्टार्ट-अप को 3 साल तक इनकम टैक्स नहीं देना होगा। माना जा रहा है कि ये एक बड़ा स्पोर्ट साबित हो सकता है। स्टार्ट-अप को कैपिटल गेन टैक्स से भी छूट मिली है। स्टार्ट-अप के लिये 4 साल में 10 हजार करोड़ रुपये के फंड का भी ऐलान किया गया है। इतना ही नहीं सेल्फ सर्टिफिकेशन कॉम्पलायंस की व्यवस्था की जाएगी और 3 साल तक स्टार्ट-अप का निरीक्षण नहीं होगा। ये कदम इंस्पेक्टर राज से स्टार्ट-अप को दूर रखने के तौर पर देखा जा रहा है। स्टार्ट-अप को पेटेंट से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार सहायता करेगी और पेटेंट की फीस को 80 फीसदी कम किया जाएगा। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने स्टार्ट-अप का रजिस्ट्रेशन भी आसान बनाने का वादा किया है।

सरकार ने स्टार्ट-अप के लिए कई रियायतों का ऐलान किया है, लेकिन रियायतों के लिए सरकार ने शर्तें भी जोड़ी हैं, जिसके लिए उन्हें हर कसौटी पर खरा उतरना बेहद जरूरी होगा। अब जानते हैं क्या हैं शर्तें? इतना ही नहीं प्रधानमंत्री ने स्टार्ट-अप की सबसे बड़ी मांग को भी पूरा करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा है कि स्टार्ट-अप के बिजनेस को बंद करने के नियम आसान बनाए जाएंगे। हालांकि उन्होंने ये भी दलील दी कि बैंकरप्सी बिल इस वक्त संसद में फंसा हुआ है। प्रधानमंत्री ने स्टार्ट-अप में फंडिंग पर भी जोर देते हुए इसके लिए 4 साल में 10 हजार करोड़ रुपये का फंड देने का ऐलान किया है।

जोखिम के बिना सफलता नहीं मिलती, इस मंत्र के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्टार्ट-अप के एक्शन प्लान का आगाज कर दिया है। प्लान में 3 साल के लिए टैक्स छूट दी गई है। लेकिन टैक्स छूट सिर्फ इनोवेशन वाले स्टार्ट-अप को ही मिलेगी। छूट के हकदार का फैसला इंटर-मिनिस्ट्रियल बोर्ड तय करेगा और छूट के लिए स्टार्ट-अप को इस बोर्ड की मंजूरी लेनी जरुरी होगी। ये छूट 1 अप्रैल से लागू होगी और छूट की रकम का इस्तेमाल डिविडेंट में नहीं करना होगा। यही नहीं कैपिटल गेन टैक्स छूट हासिल करने के लिए भी कुछ शर्तें हैं। मसलन, संपत्ति बेचने से होने वाली आय को उसी साल निवेश करना होगा। ये निवेश सरकार से मान्यता प्राप्त ‘फंड ऑफ फंड्स’ में ही करना होगा। साथ ही स्टार्ट-अप में सीधे निवेश पर भी कैपिटल गेन में रियायत मिलेगी।

अब सवाल ये है कि स्टार्ट-अप बिजनेस कौन होगा, इसके क्या दायरे हैं? तो, सरकार ने इसे भी तय कर दिया है। पहली शर्त ये है कि ये भारत में 5 साल से पुराना न हो और इस दौरान किसी भी वित्त वर्ष में टर्नओवर 25 करोड़ रुपये के पार न गया हो। यही नहीं स्टार्ट-अप का कॉनसेप्ट बिल्कुल नया होना चाहिए या मौजूदा प्रोडक्ट या सर्विस में बड़ा बदलाव लाने वाला हो। सरकार का मानना है कि इन शर्तों के साथ देश में बदलाव की बयार दिखनी तय है।

स्टार्ट-अप के ऐलान से स्टार्ट-अप दिग्गज काफी खुश हैं। उनके मुताबिक सरकार ने स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने के लिए काफी अहम कदम उठायें हैं। पेटीएम के फाउंडर विजय शेखर ने कहा है कि इससे अच्छी पॉलिसी नहीं आ सकती थी। हालांकि वीवर्क के एडम न्यूमैन ने नये स्टार्ट-अप को नसीहत दी कि सिर्फ पैसा कमाने के मकसद से बिजनेस शुरू ना करें। जिस काम से लोगों को प्यार हो उसे ही करें। उन्होंने आगे कहा कि भारत से प्यार करने के लिए भारतीय होना जरुरी नहीं है।

31-01-2016

उबर के फाउंडर ट्रेविस केलेनिक का भी मानना है कि भारत में काफी मौके है। आज की पॉलिसी के बाद भारत को स्टार्ट-अप हब बनने से कोई नहीं रोक सकता।

महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने स्टार्ट-अप को आगे बढ़ाने के लिए बड़ा ऐलान किया। उन्होंने मुंबई को स्टार्ट-अप कैपिटल बनाने का वादा भी किया। महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई को स्टार्ट-अप कैपिटल बनाने का वादा किया।

उधर नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत का कहना है कि स्टार्ट-अप के लिए इस बार का बजट कई तोहफे लाएगा। एक खबरिया चैनल से खास मुलाकात में उन्होंने कहा कि अभी तक 70 फीसदी एक्शन हो गए हैं और 30 फीसदी एक्शन का ऐलान बजट में हो जाएगा। उन्होंने कहा कि एक साल के भीतर कई ठोस कदम उठाए जाएंगे। इससे स्टार्ट-अप की दुनिया बदल जाएगी। रजिस्ट्रेशन के सवाल पर भी उन्होंने कहा कि बाहर की यूनिट्स भारत में आये औरं इस दिशा में कदम उठाये जा रहे हैं।

क्या है स्टार्ट-अप और क्या हैं आंकड़ें

स्टार्ट-अप, यानि वो बिजनेस जो अभी शुरू हुआ या होने वाला है। ज्यादातर स्टार्ट-अप युवा उद्यमियों ने शुरू किए हैं और इसमें अब भी संभावनाएं बहुत हैं। स्टार्ट-अप के मामले में भारत दुनिया में तीसरे नंबर पर है। 2014 में भारत में स्टार्ट-अप ने 65 हजार लोगों को रोजगार दिया और 2015 में स्टार्ट-अप में 80 हजार लोगों को नौकरी मिली है। एक अनुमान के मुताबिक 2020 तक देशभर में 11,500 स्टार्ट-अप शुरू होने की उम्मीद है और 2.5 लाख नए रोजगार पैदा होंगे। स्टार्ट-अप में 20-30 साल के उम्र वाले उद्यमियों की सहभागिता 42 फीसदी है, तो 31-40 साल के उम्र वाले लोगों की तादाद सबसे ज्यादा 46 फीसदी है। 40 साल के ऊपर के लोगों की संख्या 12 फीसदी के आसपास है। भारत के सबसे ज्यादा 26 फीसदी स्टार्ट-अप बेंगलुरू में हैं, फिर 23 फीसदी दिल्ली-एनसीआर और मुंबई में 17 फीसदी स्टार्ट-अप हैं। पुणे में 6 फीसदी, चेन्नई में 6 फीसदी और हैदराबाद में 8 फीसदी स्टार्ट-अप हैं। एसबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में स्टार्ट-अप की दुनिया की शुरुआत करने वाले की औसत उम्र 28 साल है। दुनिया भर के निवेशकों को ये बात सबसे ज्यादा आकर्षित कर रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में करीब 4200 स्टार्ट-अप हैं और सरकार नई पॉलिसी के जरिये 5 साल बाद यानी साल 2020 तक देश में 11 हजार से ज्यादा स्टार्ट-अप के तैयार होने की उम्मीद कर रही है।

नैसकॉम की साल 2015 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत स्टार्ट-अप के मामले में अमेरिका और ब्रिटेन के बाद दुनिया में तीसरे नंबर पर पहुंच चुका है। स्टार्ट-अप की रफ्तार कुछ ऐसी है कि साल 2014 में 179 स्टार्ट-अप में 14,500 करोड़ का निवेश हुआ, जबकि 2015 में 400 स्टार्ट-अप में करीब 32 हजार करोड़ का निवेश हुआ है। यानि हर हफ्ते करीब 625 करोड़ रुपये।

देश मे स्टार्ट-अप शुरू करने का बेहतर समय है। दुनिया तेजी से बदल रही है। सब कुछ ऑनलाइन हो रहा है। जाहिर है, आपका एक अच्छा आइडिया न सिर्फ बदलाव की वजह बन सकता है, बल्कि लाखों लोगों के लिये रोजगार का अवसर बन सकता है। भारत में स्नैपडील, पेटीएम, फ्लिपकार्ट, ओयो रूम्स और ओला इसके उदाहरण हैं।

स्टार्ट-अप के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना भी आसान बनाया जाएगा। मसलन, कोई भी स्टार्ट-अप वेबपोर्टल या मोबाइल पर अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकेगा। इसके अलावा नए कारोबारी को बिजनेस शुरू करने के लिए किन डॉक्यूमेंट्स की जरूरत होगी, क्या शर्तें पूरी करनी होंगी, यह सब पोर्टल पर मौजूद होगा स्टार्ट-अप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया युवा पीढी के लिये एक बहुत बड़ा अवसर लेकर आई है। स्टार्ट-अप अभियान का मकसद निचले स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा देना है।

नीलाभ कृष्ण

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