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उत्तिष्ठत भारत

उत्तिष्ठत भारत

लगता है कि अब ज्यादा फोकस इस पर हो गया है कि नरेंद्र मोदी क्या नहीं कर रहे हैं, लेकिन यह भी प्रधानमंत्री और उनके मंत्रिमंडल के लिये एक मायने में अच्छा ही है। असहिष्णु सेक्युलरवादी मोदी विरोधी माहौल बनाने और मीडिया की सुर्खियों में छाये रहने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं। लोकतंत्र में विपक्ष का सार्थक भूमिका निभाना हमेशा बेहतर होता है। न कि विपक्ष की भूमिका हमेशा प्रधानमंत्री या देश को बदनाम करने के लिये नकारात्मक माहौल बनाने की हो। मोदी चाहे जो कर लें, कुछ असहिष्णु भारतीय तो उन्हें बदनाम करने में ही अपना दिन-रात खपा रहे हैं। इस हफ्ते मैं रेलवे मंत्रालय में एक वरिष्ठ अधिकारी से मिला। यह अधिकारी तकनीकविद् हैं और नीतिगत फैसलों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने मुझे बताया कि हमारी समीक्षा बैठकों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये प्रधानमंत्री भी जुड़े होते हैं। प्रधानमंत्री को तकनीकी ज्ञान भले न हो पर वे हमेशा यह बताते हैं कि करना क्या है। उन्होंने बताया कि वे और कई वरिष्ठ अधिकारी अपने काम के प्रति गंभीर और सतर्क रहते हैं, क्योंकि हमारे प्रधानमंत्री काफी ‘तेज’ हैं और बखूबी जानते हैं कि काम कैसे करवाना है। इसलिए यही उम्मीद करनी चाहिये कि नई पहल और योजनाओं के साथ देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।

मैं पिछले हफ्ते विज्ञान भवन में स्टार्ट-अप इंडिया कार्यक्रम का भी गवाह बना। वाकई पहली बार लगा कि भारत और सिलिकॉन वैली के युवा दिग्गजों की मौजूदगी से विज्ञान भवन स्फूर्ति और ऊर्जा से भर उठा। हमारे प्रधानमंत्री ने सही ही कहा कि स्टार्ट-अप इंडिया के दौर में सरकार को कम काम करना चाहिये, युवा दिमागों को अधिक काम करने देना चाहिये। इस कार्यक्रम में सरकार के सात सचिव युवा उद्यमियों के सवालों का जवाब देने को तत्पर थे। ऐसा लगा कि सरकार नये रचनात्मक दिमागों की तलाश में गंभीर है।

इस योजना का मकसद उद्यमियों के लिये अनुकूल माहौल तैयार करके उद्यमशीलता को प्रश्रय देना है। देश में बदलाव की भारी लहर बह रही है। तमाम विविधताओं वाले हमारे देश में हर चुनाव में लोग एक स्वर में राजनीतिक स्थिरता, सुशासन और तेज विकास की बातें करते हैं। तीस साल के बाद पहली बार केंद्र में कोई बहुमत की सरकार है। हमारे देश की सवा अरब की आबादी में करीब 80 करोड़ 35 साल तक के युवा हैं। इससे भारत उत्साह और ऊर्जा से भरा हुआ है। युवाओं का जोश और जज्बा ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है। इस ऊर्जा को आगे बढ़ाना ही सरकार की सबसे बड़ी चुनौती है। किसी देश का भविष्य उसका अतीत और वर्तमान तय करता है।

प्राचीनतम सभ्यता वाला देश भारत आज फिर दुनिया भर में चर्चा का विषय बना है। वर्षों पहले भारत समृद्धि और अनोखी उपलब्धियों का देश था। समृद्धि की तलाश में दूर-दराज से लोग इस ओर आ रहे थे। यहां से जो गये, वे भौतिक और आध्यात्मिक समृद्धि की दास्तान लेकर गये। भारत ने राजाओं और विद्वानों दोनों को ही अपनी ओर आकर्षित किया। साहित्य, कला, वास्तुकला के अतीत के गौरव आज भी मौजूद हैं। हमें गौरवान्वित करने वाला प्राचीन साहित्य आज भी हमें भौतिक संसार से अलग ले जाता है। करीब डेढ़ सहस्राब्दि तक भारतीय उपमहाद्वीप दुनिया में सबसे समृद्ध और सुखद स्थान रहा है। हम ज्ञान-विज्ञान में ही आगे नहीं थे, बल्कि प्राचीन भारत अपनी जलवायु और उर्वर भूमि के कारण भौतिक रूप से काफी समृद्ध था। इसी वजह से यहां दुनिया भर से आक्रांता आये और हम कई वर्षों तक विदेशी गुलामी झेलते रहे। लेकिन अब यह बदल रहा है। अब भारत का फिर से उदय हो रहा है। एनडीए सरकार में पिछले 20 महीनों में भारत का जादू एक बार फिर दुनिया के सिर चढ़कर बोलने लगा है। दुनिया सांस रोके इंतजार कर रही है। जानकार भारत को 2035 तक अगली महाशक्ति के रूप में देख रहे हैं। भारत भारी आर्थिक वृद्धि और तेजी से विकसित हो रहे आईटी उद्योग के बल पर भविष्य में मानव पूंजी का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है।

मई 2014 में दिल्ली की गद्दी पर नई स्थायी सरकार आई तो चारों ओर उम्मीद का वातावरण बना, जिससे देश में उत्साह पैदा हुआ। नई सरकार ने जो नई घोषणाएं की हैं, उसमें सबसे अधिक चर्चित मोदी का ‘स्टार्ट-अप इंडिया’ अभियान है। प्रधानमंत्री भारत को उद्यमशीलता के केंद्र में बदलना चाहते हैं और उसके लिए भारी ऐलान किया है। पुराने पड़ चुके नियम कायदों को खत्म करने, लालफीताशाही की जकडऩ कम करने, सरकार को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की पहल वाकई स्वागत योग्य है।

विविध संसाधनों से समृद्ध और समस्याओं से जूझने की अपनी अनोखी विरासत से भारत में जल्दी ही युवा उद्यमियों का बड़े पैमाने पर उदय देखा जा सकता है। लेकिन, इसके लिये हमें तकनीक में महारथ हासिल करनी ही होगी। अपने सपने को पूरा करने के लिये मोदी ने युवा उद्यमियों को आश्वस्त किया कि उनके एजेंडे में सुधारों की गति को तेज करना सबसे ऊपर है। ‘स्टार्ट-अप इंडिया’ कोई फंतासी नहीं है जो भविष्य में कभी साकार होगी, बल्कि यह आज होती दिख रही है। अगर इसे सही रूप में लागू किया जा सका तो देश फिर विकास की पटरी पर दौडऩे लगेगा।

दीपक कुमार रथ

दीपक कुमार रथ

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