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कोलेस्ट्रॉल का दुश्मन संतुलित आहार, योगासन व औषधि

कोलेस्ट्रॉल का दुश्मन संतुलित आहार, योगासन व औषधि

आपको शायद नहीं पता कि कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली कुछ शक्तिशाली दवाएं जिनका सेवन दुनिया के अधिकांश लोग करते हैं वे मांसपेशियों में दर्द पैदा करती हैं। उनसे पेशियों व लीवर को हानि होती है। कुछ और ऐसी दवाएं हैं जिनसे कोलेस्ट्रॉल भले ही कम हो जाये, लेकिन ब्लड शुगर और यूरिक एसिड बढ़ जाता है और कुछ दवाएं तो पित्त की थैली में पथरी भी बना देती हैं। दवाओं के सेवन से कोलेस्ट्रॉल का स्तर भले ही नीचे आ जाता है, पर उच्च रक्तचाप की ही तरह उच्च कोलेस्ट्रॉल भी चुपचाप अपने कदम आपकी तरफ बढ़ाता है। अधिकांश लोगों को तब पता चलता है, जब वे अपना रक्त परीक्षण करवाते हैं, इसलिए तुरंत दवाओं को निगलना सही नहीं है। कोलेस्ट्रॉल को सामान्य रखने के लिए हमें अपने दैनिक विधि व्यवस्था (दिनचर्या) में आहार-विहार के नियमों का पालन करना चाहिए। अपने दैनिक जीवन में कुछ बदलाव लायें जैसे – ब्रह्ममुहूर्त में उठें, उषा पान करें, चक्रमण तथा आहार के सामान्य नियमों का पालन करें। नियमित योग व व्यायाम कीजिए और सही खुराक को अपनाइये। पथ्य-अपथ्य, साम्य तथा विरूद्धाहार का विशेष ध्यान रखें। आयुर्वेद में वर्णित स्वास्थ्य-संरक्षण हेतु दिनचर्या, रात्रिचर्या, ऋतुचर्या तथा आहार संबंधी नियमों का पालन करने से कोलेस्ट्रॉल की असामान्य वृद्धि नहीं होती है।

आजकल कुछ लोग कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली कुछ शक्तिशाली दवाएं लेते हैं, परंतु उनके भयंकर दुष्परिणाम होते हैं, जैसे मांसपेशियों व लीवर संबंधी विकारों की उत्पत्ति, पित्ताश्य में अशमरी (स्टोन) बनना आदि। ज्यादातर कोलेस्ट्रॉल व्यक्ति के लीवर में बनता है और शेष व्यक्ति को भोजन से प्राप्त होता है। यह जरूरी है कि आप भोजन में वसा और कोलेस्ट्रॉल को घटाएं। अपने भोजन में सैचुरेटिड  फैट अर्थात मांस, घी, मक्खन व ट्रांस फैट अर्थात बाजार में मिलने वाले खाद्यों व डीप फ्राइड फास्ट फूड में मिलने वाले वसा को सीमित करें। अपने आहार में रेशोदार खाद्य पदार्थों जैसे-लौकी, तुरई, परवल, मेथी, करेला व गाजर इत्यादि की मात्रा को बढ़ाएं। यदि आप का वजन अधिक है तो उसे कम करें। भोजन में कैलोरी, वसा कार्बोहाड्रेट, प्रोटीन का अच्छी तरह से ध्यान रखेंगे तो आपको कुछ ही समय बाद संतुलित आहार के लाभ दिखाई देने लगेंगे। घी, मक्खन जैसे कुछ डेयरी उत्पादों में बिस्कुट पेस्ट्री व कुकीज में सैचुरेटिड फैट होते हैं। ऐसे खाद्यों का सेवन बहुत ही कम मात्रा में करें। यह आपकी सेहत के लिए बेहतर रहेगा। दिन की शुरूआत ऐसे नाश्ते से करें, जिसमें जई का दलिया व विभिन्न प्रकार के फल व सब्जियां हों। चोकर युक्त आटे की रोटी खाने की सलाह दुनिया के सभी डॉक्टर देते हैं, क्योंकि इसका स्पॉज इफेक्ट कोलेस्ट्रॉल को सोख लेता है और पाचन क्रिया में सहयोगी भी साबित होता है। नाश्ते में चोकर युक्त एक-दो रोटी भी ली जा सकती हैं।

नित्य कितना भोजन करें?

वैसे तो हर आदमी को पेट भर के भोजन करना चाहिए, लेकिन बीमारी से बचने के लिए भूख से एक रोटी कम खाना ठीक रहता है। मनुष्य की प्रकृति वात, पित्त, कफ प्रधान होती है। भोजन करते समय इसका ध्यान होना चाहिए कि व्यक्ति की प्रकृति क्या है? इससे दोष या विकार को दूर करने में मदद मिलती है। दूसरे यह जान लेना चाहिए कि किस तरह का भोजन आसानी से पच जाता है। कठोर, गरिष्ठ या मिठाई वाला भोजन नहीं पचता तो उसे नहीं खाना चाहिए, क्योंकि यदि जठराग्नि मंद या मध्यम है तो पेट की कोई भी बीमारी हो सकती है।

  • शारीरिक शक्ति को देखकर भोजन करें। यदि शरीर हृष्ट-पुष्ट है तो भोजन अधिक पचेगा और यदि दुर्बल है तो हर तरह का भोजन पचना मुश्किल होगा। इसके अतिक्ति भोजन पचाने में उम्र की भी भूमिका होती है। युवा व्यक्ति की खुराक अधिक होती है। वे गरिष्ठ भोजन भी पचा सकते हैं, पर प्रौढ़ या वृद्ध स्त्री-पुरूष हल्का भोजन ही पचा सकेंगे। वैसे यह आयुर्वेदानुसार वर्णित जठराग्नि, कोष पर भी निर्भर करता है।
  • व्यक्ति को उतना भोजन जरूर करना चाहिए जितने से उसके शरीर में सही मात्रा में ऊर्जा का उत्पादन हो सके।
  • व्यक्ति द्वारा किये गये प्रतिदिन के कार्यों में कैलोरी की जरूरत पड़ती है। यह कैलोरी बराबर खर्च होती रहती है। कैलोरी का खर्च क्षण-क्षण होता है। यहां तक कि आंख झपकने में भी कैलोरी खर्च होती है। इसकी पूर्ति हेतु प्रत्येक व्यक्ति को स्वस्थ रहने के लिए अच्छा, ताजा तथा सुपाच्य भोजन ही करना चाहिए

पथ्याहार:

चिकनाई रहित दूध व इससे बनने वाले पदार्थ, बेसन व शहद के सेवन से कोलेस्ट्रॉल में आशातीत लाभ मिलता है।

विविध रिफाइंड तेलों का प्रयोग कोलेस्ट्रॉल में कर सकते हैं। जैसे सूरजमुखी, कुसुम, मक्का, राईस ब्रान (चावल की भूसी) सरसों, मूंगफली व जैतून के तेल आदि को प्रयोग में ले सकते हैं।

कच्ची व उबली सब्जियां, नींबू का रस तथा सूप इत्यादि का सेवन भी श्रेष्यकर है।

14-02-2016

लो कोलेस्ट्रॉल डाईट चार्ट:

प्रात:राश (प्रात: 7:30 बजे) ठंडे जल में नींबू के रस का सेवन, चिकनाई रहित दूध, दिव्य पेय, आरोग्य खजूर, ओट्स, अंकुरित अनाज, गेहूं का दलिया व फल आदि।

दोपहर का भोजन(12:30 बजे) हरी पत्तेदार सब्जियां, दाल, दही (सप्रेटा दूध से निर्मित), रोटी व थोड़े चावल इत्यादि।

अल्पाहार (अपराह्र 3:30 बजे) सूप, फल तथा लौकी या गाजर का जूस रात्रि भोजन (8:00 बजे) दोपहर के भोजन के अनुसार।

अपथ्य आहार

  • चिकनाई युक्त दूध व इससे निर्मित उत्पाद।
  • मांसाहार
  • सभी डिब्बाबंद उत्पाद
  • मदिरा तथा वातित पेय
  • पनीर, अचार व चटनी इत्यादि
  • तला-भुना भोजन
  • सैचुरेटिड तथा ट्रांसफैट पदार्थ
  • सूखे मेवे

योगासन से भी कम होता है कोलेस्ट्रॉल

भोजन में बदलाव के साथ ही कोई भी व्यायाम 30 मिनट तक अवश्य ही करें। व्यायाम नहीं कर सकते हैं तो अधिक-से-अधिक शारीरिक गतिविधियां करने का प्रयास करें। जैसे लिफ्ट की बजाय सीढिय़ों का इस्तेमाल करें, बाजार पैदल ही जाएं। पैदल चलने या व्यायाम करने से शरीर में हानिकारक कोलेस्ट्रॉल तो घटता ही है, साथ ही लाभदायक कोलेस्ट्रॉल के स्तर में भी वृद्धि होती है।

14-02-2016

योग हानिकारक कोलेस्ट्रॉल का परम शत्रु है और उसे जड़ से ही नष्ट कर देता है। अगर आपकी इच्छा दृढ़ है और आपको योग पर पूरा भरोसा है तो योग से आपको कई गुना लाभ हो सकता है। इसका नियमित अभ्यास जरूरी है।

  • सर्वांगासन, उत्तानपादासन का अभ्यास करने से कब्ज, गैस, मोटापा आदि दूर होकर भूख बढ़ती है और हानिकारक कोलेस्ट्राल घटता है।
  • पवन मुक्तासन का अभ्यास करने से पेट की बढ़ी हुई चर्बी का नाश होता है और अम्लपित्त, ह्दय रोग, गठिया एवं कटि पीड़ा जैसे रोग दूर होते हैं।
  • दीर्ध नौकासन का अभ्यास करने से ह्दय को बल मिलता है और कोलेस्ट्रॉल भी जलता है। शशकासन का अभ्यास करने से भी ह्दय का बल बढ़ता है।
  • वक्रासन कमर की चर्बी को घटाता है।
  • द्विचक्रासन से भी मोटापा घटता है और हानिकारक कोलेस्ट्रॉल नष्ट होता है। अद्र्ध हालासन, पाद वृतासन से भी अनावश्यक चर्बी जलकर हानिकारक कोलेस्ट्रॉल छंटता है।
  • भस्त्रिका प्राणायाम का अभ्यास करने से त्रिदोष सम होते हैं। रक्त परिशुद्ध होता है तथा शरीर के विषक्त विजातीय द्रव्यों का निष्कासन होता है और हानिकारक कोलेस्ट्रॉल कभी भी बढ़ नहीं पाता है।
  • कपालभाति प्राणायाम करने से ह्दय, फेफड़ों एवं मस्तिष्क के समस्त रोग दूर होते हैं और यकृत में अनावश्यक चर्बी का निर्माण नहीं होता है। उदरगत समस्त रोग इससे दूर होते हैं।
  • अनुलोम-विलोम या नाड़ीशोधन प्राणायम का अभ्यास करने से 72 करोड़, 72 लाख, 10 हजार 210 नाडिय़ां परिशुद्ध हो जाती हैं। कोलेस्ट्रॉल, ट्राई ग्लिसाराइड्स, एच.डी.एल. या एल.डी.एल. आदि की अनियमितता दूर होती है। बेहतर परिणाम के लिए इस प्राणायाम का अभ्यास 5 से 10 मिनट तक अवश्य करें। इसके अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल कम करने संबंधी पतंजलि आयुर्वेद निर्मित औषधियां भी प्रोयगकर्ताओं पर कारगर साबित हुई हैं।

(साभार: योग संदेश)

 

डॉ. प्रत्युष कुमार (एम.डी.आयु.)

असिस्टेंट प्रो.पतंजलि आयु. महाविद्यालय एमव चिकित्सालय

 

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