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संघ पर हमला पंजाब में आगामी हमले की दस्तक तो नहीं?

संघ पर हमला पंजाब में आगामी हमले की दस्तक तो नहीं?

लुधियाना के आर.एस.एस. स्वयंसेवक नरेश चौहान की बहादुरी व सक्रियता की दाद देनी होगी, क्योंकि बिलकुल ही प्रतिकूल परिस्थिति में उन्होंने मौत का सामना किया। यमराज के रूप में उनके सामने दो अनजान युवक थे। जिनमें से एक ने उनको अपने गोली का निशाना बनाना चाहा। लेकिन, जिस काम के लिये चौहान कंपकंपाती ठंड में शहीद मैदान में सुबह 6.25 बजे जा कर खड़े होते थे उसी काम ने उन्हें ऐसा कुछ सिखाया, जिसके चलते वह गोली के प्रहार से खुद को बचा पाये। लुधियाना के आर.एस.एस. शाखा प्रभारी चौहान, पार्क में आर.एस.एस. की शाखा लगाने के लिए खड़े थे। पंजाब के प्रांत प्रचारक किशोर कान्त भी यही कहते हैं कि एक प्रचारक की खुद की बहादुरी ने उन्हें बचा लिया। कहना गैरजरूरी है कि आर.एस.एस. की शाखा के दौरान सनातन व्यवस्था के उसी संस्कार व पराक्रम को स्वयंसेवकों में भरा जाता है, जिसके चलते चौहान अपराधियों के हमले से बच पाए। हालांकि, जब इस संवाददाता ने इस घटना के बारे में चौहान से जानना चाहा तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि घटना के बारे में अपने पदाधिकारियों को बता दिया है और वही इस बारे में बात करेंगे। आर.एस.एस. के संघ चालक बृजभूषण बेदी घटना के बारे में कहते हैं कि पुलिस छानबीन कर रही है।

हालांकि इस घटना की छानबीन के लिए पंजाब में आर.एस.एस. की पृष्ठभूमि और इसके प्रचार की पड़ताल इसलिए जरूरी है कि पिछले साल संघ के वरिष्ठ सदस्य इंद्रेश कुमार ने चंडीगढ़ का दौरा किया था। इतना ही नहीं संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने भी चंडीगढ़ में दो दिनों तक रूक कर पंजाब में आर.एस.एस. की गतिविधियों का मुआयना किया था और कुछ पूर्व नौकरशाहों, प्रोफेशनलों व स्वयंसेवकों से चर्चा की थी। हालांकि, पंजाब में आम धारणा है कि भाजपा के साथ यहां शासन करने वाली पार्टी अकाली दल को कम-से-कम आर.एस.एस. की ये गतिविधियां अच्छी नहीं लगेंगी। जब राजनीतिक गलियारों में चर्चा होने लगी थी कि पंजाब में महाराष्ट्र की तरह भाजपा अकेली चुनाव लड़ेगी, तो राज्य के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कहा था कि गठबंधन टूटने से पंजाब में सामाजिक सौहार्द को नुकसान होगा। अभी पंजाब के खंडूर साहिब विधानसभा क्षेत्र में चुनाव होना है और भाजपा अपने गठबंधन की पार्टी अकाली दल की मदद इस चुनाव में करने के लिए कतई तैयार नहीं है। गौरतलब है कि यह विधानसभा क्षेत्र राज्य के तरणतारन जिले में पड़ता है और जिले के भाजपा अध्यक्ष नवप्रीत सिंह का सीधा कहना है कि वह अकाली दल की गलत नीतियों को चुनाव प्रचार के दौरान उजागर करेंगे।

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बादल यह भलीभांति जानते हैं कि भागवत के पंजाब दौरे के मायने क्या हैं। वह यह भी समझते हैं कि इसका सीधा फायदा भाजपा को ही मिलेगा। यही कारण है कि भाजपा के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष कमल शर्मा भी फायरिंग की घटना को तूल नहीं देना चाहते, क्योंकि इससे दोनों घटक दलों के बीच वैमनस्य और बढ़ेगा और आर.एस.एस. की गतिविधियों पर इसका प्रभाव पड़ेगा। वह सिर्फ इतना कहते हैं कि अभी पुलिस घटना की जांच कर रही है और कुछ भी अभी कहना जल्दबाजी होगी। घटना के पीडि़त नरेश चौहान भी सिर्फ इतना कहते हैं कि इन घटनाओं से आर.एस.एस. पंजाब में और मजबूत बनकर उभरेगा।

PAGE 40-आज पंजाब की बदहाली का सबसे बड़ा संकेत यह है कि नशे को यहां छठे दरिया के रूप में जाना जाता है और इस दरिया का उद्गम नशे की आपूर्ति के लिये बदनाम देशों की सूची गोल्डेन क्रीसेंट में शामिल देश पाकिस्तान में स्थित है। पठानकोट एयरबेस हमले की क्रमश: पड़ताल से तो कम-से-कम यही साबित होता है, क्योंकि कहा यही जा रहा है कि यह हमला पंजाब में ड्रग्स कार्टेल व आतंकी नेक्सस का परिणाम है। यहां यह कहना भी जरूरी है कि पंजाब में आतंकी दौर के दरम्यान भी आर.एस.एस. की शाखा पर लुधियाना में मौजूदा घटनास्थल पर ही फायरिंग हुई थी जिसमें दो स्वयंसेवकों की मौत भी हो गई थी। हालांकि यह कहना गैरजरूरी है कि राज्य में आर.एस.एस. की बढ़ती गतिविधियां सिर्फ अकाली दल को ही नागवार नहीं गुजरती होंगी, बल्कि पाकिस्तान में शरण लिए हुए बब्बर खालसा आतंकी संगठन के सदस्य भी इससे नाराज ही होंगे। मौजूदा घटनास्थल के मुआयने के बाद लुधियाना के पुलिस कमिश्नर परमराज सिंह उमरानंगल ने कहा कि, घटना में 32 बोर की पिस्टल से फायरिंग की गई थी। लेकिन लुधियाना पुलिस कमिश्नर परमराज सिंह उमरानंगल ने जांच के बाद कहा कि गोली जिस पिस्टल से चलाई गई, वह 9 एम.एम. बोर की थी। हालांकि, वही पुलिस अब यह भी कह रही है ऐसा हथियार सिर्फ सुरक्षाबलों के पास होता है। इस हथियार के लाईसेंस आम नागरिकों को नहीं दिये जाते। अब सवाल है कि यह हथियार कहीं पंजाब पुलिस ने तो अपराधियों को उपलब्ध नहीं करवा दिये या कहीं यह पुलिस से छीने गये हथियार तो नहीं थे या कहीं यह अपराधियों को आतंकियों के स्पीपर सेल से तो उपलब्ध नहीं हो गए?

फायरिंग मामले की पुलिसिया जांच तो चलती रहेगी, और चलना भी चाहिये। लेकिन 6,000 करोड़ के सिंथेटिक ड्रग्स रैकेट की जांच का नतीजा जब अभी तक नहीं निकला तो फिर कोई कैसे उम्मीद कर सकता है कि इस घटना की जांच का कोई परिणाम निकल पाएगा? या फिर इस सुस्त व लचर जांच प्रक्रिया का फायदा उठाते हुए अपराधी या आतंकी कहीं फिर से इस तरह के हमले को अंजाम नहीं दे दें? अगर ऐसा ही चलता रहा तो इन गोलियों से जहां एक तरफ सामाजिक तानाबाना छलनी होगा वहीं राज्य में बरकरार अमन भी जख्मी होगा।

लुधियाना से एम.के. प्रमोद

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