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एक खत जो विश्वास के साथ लिखा गया

एक बेचैन बेटी का खत जिसे अब लखनऊ की निर्भया का नाम मिला है। जब बेटी मां बनी तब तक पति की किडनी खराब हो चुकी थी उसे बचाने के लिए अपनी एक किडनी दान कर आसन्न संकट से लडऩे की जद्दोजहद जितना भी चल सकूगी तुम्हारे लिए चलूंगी अभी, एक पग, एक पग ही सही। जानती हूं जब तक चलूंगी। पति के न रहने पर एक बेटा और बेटी के लिए तिनको के सहारे घोसला बुन ही रही थी मैं तभी देह को जबरन भोगने के आतुर लोगों ने अपने जाल में कुछ सपने लेकर लौटती माँ को फास कर उसकी अस्मत को सत्तालोलुप राजनैतिज्ञों को और मतान्ध अर्थ पिशाचों के जगमग शहर राजधानी लखनऊ के एक कोने में तार-तार करने की कोशिश, किकत्र्तव्यविमूढ़ न बनकर बहादुर बेटी ने जियूं या मरू प्रतिरोध का दृढ़ निश्चय भरा हौसला के साथ छल कपट से घन्टों जूझती रही मैं, तब तक जब तक खून की अन्तिम बूंद देह को ताकत देती रही। मेरे हाथों के नाखून कुतर दिये गये ताकि अपनी यातना से त्रस्त दूसरों को न करे लहूलुहान। घटना स्थल की अनचीन्ही-सी जमीन का मंजर और संघर्ष अत्यंत दुस्सह पीड़ा से पैर पटकती धरती पर बिखरा दूर तक खून के कण जो घटना के चार दिन बाद भी आज भी नये लगते है। चीख चीख कर उस दर्दनाख बहेशीपन की कहानी सुनाते है। ऐसी मृत्यु, कोई मुझ पर दया न करे पर मैं दु:खी नही हूं अपना यह विचित्र वध मैं सह रही हूँ बड़े धीरज से….. बात बोलेगी/हम नहीं। भेद खोलेगी/बात ही। पर सूख चुकी उम्मीदों की नदी की तरह यूपी पुलिस ने अपना एक और फरेबी फरमान पेश किया। इस फरमान ने चक्रबातों की मानिंद झंकझोर दिया है पर्दाफाश करके जिस्म पर लगे खूनी धब्बों को देखे बिना पहले मृत नग्न देह को चाक्षुष सुख का साधन बना डाला और फिर भारतीय संस्कृति को बला-ए-ताक रख कर देर रात 12 बजे मृतका का अग्निसंस्कार अपनी मौजूदगी करने का वीरता पूर्ण कृत्य कर विजय होने की दुमदुभी बजा डाली, तुर्रा यह कि अब मेरे द्वारा अपने पति को किडनी दान को ही झूठ सिद्ध करने पर तुले है। जबकि सूबे के सबसे बड़े अस्पताल एसजी पीजीआई के रिकार्ड पर मौजूद है कि 15 अक्टूबर 2011 को मैने किडनी दान की थी, उन्हें क्या परवाह है। बेटी की लम्बी उम्र के लिए प्रार्थना कर रही मांओ की, पत्नियों की, बहनों की प्यार और भावनायें उनकी लिए निर्थक शब्द है। सिर्फ यह एक घटना है जिसके लिए एक गुनहागार चाहिए जो कुछ ही क्षणों को उनकी वीरता को स्वीकार सके। भले ही अदालत की चौखट पर उनकी वीरता कोरी गप्प साबित होकर दम तोड़ दे। विस्मरण ही थौड़ा चैन, दुष्कर्म से तन-मन के रिसते जख्मों को! अवरोध अंतविरोध और प्रतिरोध के मनोविज्ञान में उलझी यूपी सरकार के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उम्र और किडनी पर उठे सवाल पर जांच के आदेश दे दिये हो बावजूद इसके अभी भी सच आना शेष है। मैं प्रतिक्षा कर रही हूं अली सरदार जाफरी की इस नज्म के साथ –

गरीब सीता के घर पे कब तक रहेगी रावण की हुक्मरानी

द्रौपदी का लिबास उसके बदन से कब तक छूटा करेगा

शकुंतला कब तक अंधी तकदीर के भंसवर में फंसी रहेगी

ये लखनऊ की शगुफ्तगी मकबरों में कब तक दबी रहेगी

सरों के ऊपर मुसीबतों के पहाड़ कब तक गिरा करेंगे

बिलखती आंतों को भूख कब तक डसा करेगी

जमी के सीने पे कातिलों के गिरोह कब तक चला करेंगे

खबासते’ कब तलक अहिंसा का रूप धारे फिर करेंगी।

नापाक हरकतें

लखनऊ की निर्भया आप सबकी अदालत में न्याय की गुहार के लिये भेज रही है यह खत।

सरकार ने माना प्रदेश में महिलाओं पर हिंसा बड़ी समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव भले ही अपने बेटे की सरकार के शासन काल में महिलाओं पर हुए अपराधों की संख्या को कमतर माने लेकिन हाल में ही सम्पन्न हुए विधानसभा के बजट सत्र में मुख्यमंत्री की ओर से दिये जवाब में बताया गया है कि 2012 में महिलाओं छेडख़ानी, दुराचार एवं रेप के बादहत्या के 2,655 मामले प्रकाश में आए। इसी वर्ष 18 साल से कम उम्र की लड़कियों के साथ भी 1,434 घटनाएं हुई। इसमें छेडख़ानी की 1,263, रेप के 1,346 तथा रेप के बादहत्या के 40 केस पंजीकृत हुए। वहीं 18 साल से कम की बालिकाओं के साथ भी छेडख़ानी के 469, रेप की 920 तथा रेप के बादहत्या के 45 मुकदमें दर्ज किए। इसी तरह वर्ष 2013 में एक जनवरी से 15 नवम्बर के बीच महिला हिंसा की 3,254 तथा 18 साल की कम उम्र की लड़कियेां के सथ 1,729 घटनाएं प्रकाश्ज्ञ में आयी। इसमें महिलाओं के साथ छेडख़ानी की 1,301, दुराचार की 1,915 तथा रेप के बाद हत्या के 36 मामले दर्ज हुए। इसी दरम्यान 18 साल से कम उम्र की युवतियों साथ 530 छेडख़ानी, 1,160 बलात्कार तथा रेप के बाद हत्या के 39 अभियोग दर्ज हुए। महिला हिंसा पर कार्यवाही की बात करें तो वर्ष 2012 में छेडख़ानी के मामले 1516, दुराचार के 2,087 तथा बलात्कार के बाद हत्या के 73 मामलेां में लोगों के खिलाफ कार्यवाही की गयी। नाबालिग लड़कियेां के मामले में छेडख़ानी में 708, दुराचार में 1,316 तथा रेप के बाद हतया में 73 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गयी। वर्ष 2013 में महिलाओं के साथ छेडख़ानी के 1981, दुराचार के 2,677 तथा रेप के बादहत्या के 53 मामलों में अभियुक्तों को खिलाफ कार्रवाई हुई। इसी तरह 18 साल से कम उम्र की लड़कियों के साथ छेडख़ानी के 781, दुराचार के 1,544 तथा रेप के बाद हत्या के 53 मामलों में कार्रवाई की गयी। सरकार की ओर से बजट सत्र में बसपा विधायक डॉ. धर्मपाल सिंह द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में यह जानकारी दी गयी। यह उत्तर भी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा लिखित दिया गया। इस तरह प्रदेश में महिला उत्पीडऩ की घटनाएं लगातार बढ़ रही है। इन घटनाओं के साथ सरकार द्वारा की गयी कार्रवाई में भी अभियुक्तों की संख्या बढ़ी है।

                (सु.अ.)

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