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दुष्कर्म से दहशत

पहली बार पुलिस को घटनास्थल पर पहुंचने के लिए दो घंटे लग गए जहां सैकड़ों ग्रामीण एकत्र हुए थे। युवती का बलात्कारियों के खिलाफ बहादुरी के साथ लड़ाई लडऩे के सबूत उसके फटे कपड़े चीख-चीख कर बता रहे थे। हालंकि अब उसका शरीर पूरी तरह मृत देह में निवस्त्र पड़ा था। शरीर के निजी भागों के अलावा पूरे शरीर पर चोटों से रिसा खून देखने वालों को अंचभित कर रहा था। इस दुख की गाथा को पुलिस ने बड़े ही हल्के ढंग से निपटा देने का दावा किया।

 

लड़कियां, लड़कियां, लड़कियां

शादियां, डोलियां, सिसकियां

बदायूं के गीतकार डा. उर्मिलेश की इन पंक्तियों में वर्णित सिसकियां ही उनका यूपी में शगल बन गया है। प्रदेश की लड़कियों पर होने वाले दुराचार ने पूरे देश को झकझोर दिया है। बदायूं से शुरू हुआ अमानवीय दुष्कर्म का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ऐसा लगता है कि उत्तर प्रदेश में राजनीतिक अस्थिरता का दौर होने के कारण अपराधी बेलगाम हो गये हैं। पूरे प्रदेश में पिछले दो माह में इतनी दुराचार की घटनाएं हुई कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। लेकिन इसकी संवेदनशीलता समझने की बजाय राजनेताओं के बोल सारी सीमाएं लांघते नजर आ रहे है। इन सबके बीच सिसकती लड़कियां चेहरे पर उदासी लिए अपना दर्द को कहे तो किससे कहें, विधानभवन के सामने हाथों पर तख्तियां लिये महिलाएं प्रदेश में रोज बन रही निर्भया को रोकने के लिए पुलिस से संघर्ष कर रही है। ऐसे में बहादुर शाह जफर की पंक्तियां बेबस याद आ जाती हैं-

कहां तक चुप रहूं, चुप के रहे से कुछ नही होता

कहूं तो क्या कहूं, उनसे कहे से कुछ नही होता।

लखनऊ के मोहनलालगंज कस्बे से लगे गांव बलसिंह खेड़ा में 17 जुलाई को युवती का शव मिला था। शव के साथ पुलिस प्रशासन की संवेदनहीनता, खींचे गये नग्न फोटो और सामाजिक नेटवर्किग वेबसाईटों पर इनके प्रसारण के बाद पूरे देश में सनसनी फैल गयी। महिला के निजी अंगों पर गंभीर चोटों के निशान के साथ-साथ शरीर पर गंभीर चोटें निर्भया का दर्दनाक का मंजर बयां कर रही थी। वह भी तब जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन उस दिन इसी क्षेत्र में थे। उनकी सुरक्षा में भारी पुलिस बंदोबस्त तैनात था लेकिन इसके बाद भी घटना स्थल पर पुलिस को पहुंचने में दो घंटे से अधिक का समय लग गया। यह वास्तव में अपने आप में प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल है।

युवती के साथ बलात्कारियों ने पूरी दहशतगर्दी की थी। उसने उनका पुरजोर विरोध किया था। उसके फटे कपड़े इसे बताने के लिए पर्याप्त थे। शरीर के निजी भागों के अलावा शरीर के अन्य हिस्से पर जख्म, खून की धार देखने वालों की संवेदना बेध रही थी लेकिन पुलिस ने इसे बड़े ही हल्के ढंग से निपटाने की कोशिश की। पुलिस ने इस घटना को लेकर जो दावा किया उस पर विपक्ष से लेकर परिवार जन तक विश्वास करने को तैयार नही है। पुलिस की थ्यौरी ने इसे अजीब मोड़ देने की कोशिश की। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) सुतापा सान्याल ने बताया कि आरोपी राम सेवक (38), सुरक्षा गार्ड को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस गार्ड ने ही दो बच्चों की मां के साथ बलात्कार करके उसकी क्रूर हत्या का प्रयास किया है। आरोपी ने महिला के विरोध करने पर उसके निजी भागों को अपने हेलमेट से क्षतिग्रस्त कर दिया था। पुलिस के मुताबिक राम सेवक ने अपना गुनाह कुबूल कर लिया है। पूछताछ में उसने पुलिस को बताया कि महिला के निर्माणाधीन अपार्टमेंट के पास वह रहता था और इस दौरान उसके संपर्क में आया। जब महिला इलाके में फ्लैट ढूंढ रही थी तब उसने उसे राजीव बनकर फोन किया, दोस्ती बनाई और उसके साथ दुराचार की योजना बना डाली।

लखनऊ उ.प्र. की राजधानी है और राजधानी में कानून व्यवस्था की स्थिति लगातार चिंता का विषय बनी है। कांग्रेस नेता रीता बहुगुणा जोशी ने भी इस पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रीता के मुताबिक अपराधी को किसी का भी डर नही रहा है। कानून-व्यवस्था की स्थिति इतनी खराब है कि अपराधी बेलगाम हैं और पुलिस हाथ पर हाथ रखे बैठी रहती है। कांग्रेस महिलाओं के साथ होने वाले अत्याचारों पर अब चुप बैठने वाली नहीं है। इसके लिए हम सड़क से संसद तक संघर्ष करेंगे। बलसिंह खेड़ा की बहादुर बेटी की बहादुरी को न्याय दिलाकर रहेंगे।

बलसिंह खेड़ा गांव के प्राथमिक विद्यालय में महिला से हुई दरिंदगी के निशान इतने गहरे हैं कि उसे बरसात भी धो नहीं सकी। बारिश के बाद अब यहां कीचड़ है। हर कदम संभाल कर रखना पड़ता है, लेकिन भीतर पहुंचने के बाद बरामदे व हैंडपंप पर मौजूद खून के धब्बे उस दर्दनाक मंजर को बयान कर रहे हैं। हल्के पड़ चुके खून के धब्बों पर नजर जाते ही मन कांप उठता है। यहां एक कोने पर बनी सीमेंट की बेंच व उसके पास झाडिय़ों में भी खून बिखरा है। हैंडपंप के हत्थे से लेकर बरामदे तक खून के निशान हैवानियत की कहानी कह रहे हैं।

सोशल मीडिया पर छात्र तुषार मिश्र कात्यायन ने अपनी टिप्पणी कुछ इस तरह दी है- जरूर उसकी रूह आखिरी सांस तक लड़ते-लड़ते यही सोच रही होगी। अब जो कियो हो दाता ऐसा न कीजो, अगले जनम मोहे बिटिया न कीजो। बसपा के जोनल कार्डीनेटर आरके चौधरी ने घटना स्थल का निरीक्षण करने के बाद इसकी सूचना पूर्व मुख्यमंत्री मायावती को दी। बदायूं कांड की तरह मायावती भी इस घटना को उतना ही महत्व देगीं। पूर्व सांसद आरके चौधरी ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में जंगल राज कायम होने से प्रदेश में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। कानून व्यवस्था बद से बदतर हो गई है। इसलिए प्रदेश सरकार को तत्काल बर्खास्त किया जाना चाहिए। मोहनलालगंज के निर्भया कांड पर पुलिस के राज फाश पर विपक्ष को यकीन नहीं है। विपक्षी दलों इसे किसी खास बचाने के तौर पर देख रहे हैं। उनका कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इसकी सीबीआई से जांच की मांग कर रहे हैं।

भाजपा प्रवक्ता डॉ. मनोज मिश्र का आरोप है कि पुलिस जघन्य अपराध में ईमानदारी से जांच कर वास्तविक दोषी को दबोचने के बजाए भ्रमित करने की कोशिश कर रही है। ‘निर्भया’ के शव का आननफानन में दाह संस्कार कराया गया और अब दुराचार होने से इन्कार किया जा रहा है। पुलिस की कहानी में झोल साफ नजर आ रहे हैं। मोबाइल बरामद न करना और महिला के शरीर पर चोट के निशान खुद सच्चाई बता रहे हैं। इसलिए सच सामने लाने के लिए सीबीआइ जांच जरूरी है। भाजपा प्रदेश महिला मोर्चा की अध्यक्ष कमलावती सिंह ने कहा कि पुलिस मामले को भटकाने का प्रयास कर रही है जिसका विरोध किया जाएगा। कांग्रेस प्रवक्ता अमरनाथ अग्रवाल ने कहा कि जब मृतका के परिवारीजन पुलिस के खुलासे पर भरोसा नहीं कर रहे हैं तो सरकार को तत्काल सीबीआई जांच की संस्तुति करनी चाहिए। आईजी अमिताभ ठाकुर पुलिस के थ्यौरी से इत्तेफाक नहीं रखते। उन्हें इसमें एक से अधिक व्यिक्तयों की संलिप्तता नजर आती है।

पुलिस आंकड़ों के मुताबिक इस साल एक जनवरी से अब तक लखनऊ दुष्कर्म के 23 मामले दर्ज हुए। अलीगढ़ शहर में गूलर रोड़ से सात दिन पूर्व अपहृत दो सगी बहनों की घटना हो या हाथरस जनपद के सिकन्दरा राऊ की घटना या बस्ती के थाना कप्तानगंज में दो बार रेप कर अपराधियों द्वारा पीडि़ता को लगातार धमकी देने की घटना, प्रदेश सरकार हालात से निबटने में पूरी तरह विफल रही है।

प्रदेश सरकार ने महिला सुरक्षा को 1090 हेल्पलाइन के भरोसे छोड़ दिया है। सरकार के पास इस तरह के हादसों से निबटने के लिए कोई कार्य योजना नहीं है।

स्थिति यह भी है कि जिन पुलिस वालों पर सुरक्षा का जिम्मा है उनके भी दामन पर दाग हैं। बदायूं के कटरा सआदतगंज दुष्कर्म कांड में खाकी के दामन पर दाग लगने के बाद भी पुलिसवाले कोई सबक नहीं ले रहे हैं। फैजगंज बेहटा में खाकी को बदनाम करती हुई एक और वारदात उजागर हो गई। कस्बे में एक महिला ने थाने में तैनात सिपाही समेत तीन लोगों पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया है। पीडि़ता सुबह अकेली ही थाने पहुंची, सिपाही का नाम आते ही पुलिस कार्रवाई करने से कतराने लगी। एक महिला होमगार्ड ने महिला थाने में प्रार्थनापत्र देकर यातायात पुलिस के दारोगा पर आठ जून को उसके साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया है। 17 जून, 2014 को प्रदेश की राजधानी लखनऊ के तहसील मोहनलालगंज में रिश्तेदारी में आयी महिला के साथ गांव के एक व्यक्ति ने दुराचार किया। 17 जन, 2014 को रामपुर में दलित छात्रा के साथ दुष्कर्म तथा विरोध पर उसकी फूफेरी बहन की पिटाई की गयी। दिनांक 27 जून, 2014 की रात को जनपद-बदायूं के कटरा सआदतगंज गांव में खेत पर गयी दो चचेरी नाबालिग किशोरियों के साथ दुष्कर्म। उन्हें गांव के ही कुछ दरिन्दों ने अगवा करके दोस्तों के साथ गैंगरेप किया और उनकी हत्या कर लाश गांव के निकट बाग में पेड़ से लटकाकर फरार हो गये। इसी प्रकार से एटा में 15 वर्षीय किशोरी से गैंग रेप, फतेहपुर के लवा थाना क्षेत्र 08 साल की बच्ची से 3 दरिन्दों द्वारा बलात्कार, जनपद -औरैया के दिबियापुर क्षेत्र में एक नव-विवाहिता से सामूहिक दुष्कर्म, जनपद-उरई के कदौरा थाना क्षेत्र में 6 साल की लड़की के साथ दुराचार, जनपद-सिद्धार्थनगर में एक नाबालिक को बाग में ले जाकर गैंगरेप, जनपद-सीतापुर के इमलिया सुल्तानपुर में दवा लेने गयी बी.ए. की छात्रा को 2 बेखौफ दरिन्दों द्वारा अगवाकर दुराचार, जनपद-कुशीनगर में कुबेर स्थान क्षेत्र में किशोरी के साथ गैंगरेप तथा जनपद -गोंण्डा में करनैलगंज मुहल्ले में घर के आंगन में किशोरी को अगवाकर दुराचार करने इत्यादि की घटनाएं प्रमुख है। जब जनता के रक्षक ही भक्षक हो जायेंगे तो उनके प्रति लोगों में भय एवं विश्वास कैसे करेगा? सत्तासीन पार्टी से जुड़े कार्यकर्ता खुले आम गुण्डागर्दी तथा दबंगई कर रहे है। खाकी वर्दी धारी पुंलिस थानों पर बलात्कार की घटनाओं को अंजाम दे रहे है। वर्तमान सरकार के 2 वर्ष के कार्यकाल में प्रदेश में बलात्कार की 2,980 घटनाएं, चोरी की 32,774 घटनाएं, अपहरण-फिरौती की 5,887 घटनाएं, दहेज मृत्यु की 2,568 घटनाएं घटी है जो कि पिछली सरकार के आंकड़ों से बहुत ज्यादा हैं। इससे प्रदेश की जनता में सरकार का इकबाल घटा है। प्रदेश में महिलाओं के उत्पीडऩ एवं बलात्कार तथा प्रतिदिन हो रही हत्या की घटनाओं के कारण प्रदेश में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को लेकर जनता में सरकार के प्रति भारी रोष एवं आक्रोश व्याप्त है। प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति बद् से बद्तर एवं अत्यन्त भयावह हो गयी है। बदमाशों द्वारा प्रतिदिन महिलाओं के साथ बढ़ते बलात्कार तथा उनकी हत्या की घटनाओं को रोकने में सरकार नाकाम हो गयी है। लोगों में पुलिस का भय ही खत्म हो गया है। लोकसभा चुनाव में उ.प्र. से समाजवादी पार्टी की खत्म होती कहानी के बाद जड़विहीन नेतृत्व नकारेपन पर उतर आया है। पेड़ पर लटकते सच ने जता दिया है कि सब कुछ ठीक ठाक नहीं है।

भारत की महिलाओं की बदकिस्मती है कि, लोकसभा अध्यक्षा, कांग्रेस की अध्यक्षा, राजस्थान, गुजरात, बंगाल, तमिलनाडु, की सीएम व अनगिनत पदों पर महिलाएं हैं, फिर भी अत्याचार रुकने का नाम नहीं ले रहा है। आज भारत को दोबारा पुतली बाई व फूलन देवी जैसी महिलाओं के पीछे छिपे दर्द और उससे उपजी प्रतिकार की गूंज को समझना होगा। कन्या भू्रण हत्या के प्रति महिलाओं की खतरनाक चुप्पी के पीछे उनका अपने अतीत का दर्द ही है। हमारे देश का हाल यह है कि महिलाएं न तो शहरों में और न ही गांवों में सुरक्षित है। महिलाएं रात में बाजार नहीं जाना चाहती। लड़कियां बेहतर शिक्षा के लिए शहरों में रहती है। अगर देर शाम या रात में कोई लड़की सड़क पर दिख जाए तो कई नजरें उन्हें घूरती हैं। न तो शहरों में और न ही गांवों में महिलाएं सुरक्षित हैं। महिलाओं पर अत्याचार आम बात है। हर जगह उन्हें कमजोर मान लिया जाता है। पुरुष प्रधान समाज में उन्हें भी पुरुषों के बराबर चलने के लिए उतना ही स्ट्रांग बनना होगा। उनके समकक्ष चलने के लिए अपने को तैयार करना होगा। हिंसा की शिकार महिलाओं के प्रति पुलिस का रवैया कभी सहानुभूतिपूर्ण नही रहा है। जब भी कोई महिला पुलिस के पास शिकायत लेकर गई, पुलिस ने कोई ध्यान नही दिया। हाल में महिलाओं द्वारा पुलिस में दर्ज कराई जाने वाली शिकायतों में वृद्धि हुई है लेकिन हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने में वह अब भी संकोच करती है।


जस्टिस वर्मा समिति की रिपोट की प्रमुख सिफारिशें


  • रेप और हत्या के मामले में अपराधी को 20 साल कैद की सजा दी जाए जबकि गैंगरेप के दोषियों को आजीवन जेल।
  • महिला को निर्वस्त्र करना, निहारना घूरना, पीछा करना भी अपराध की श्रेणी में रखा जाए।
  • जिन सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं वे संसद के सम्मान को बरकरार रखने के लिए स्वेच्छा से पद त्याग दें।
  • शिक्षा और महिलाओं बच्चों के खिलाफ अन्याय को रोकने के लिए कैग की तरह एक नई संवैधानिक संस्था का गठन हो, जो इनसे जुड़े कानूनों की समीक्षा करे।
  • पुलिस सुधारों को तत्काल लागू किया जाए और पुलिस बलों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाएं।
  • किशोरों के सुधार गृहों को जुवेनाइल जस्टिस (जेजे) एक्ट के अनुसार चलाया जाए। एक्ट के जो काम राज्य सरकारें देखती हैं उन्हें न्याय व्यवस्था देखे।
  • जो अधिकारी रेप के मामले को दर्ज न करे या न्याय दिलाने में देरी करे उसे सजा दी जाए।
  • हर विवाह का पंजीयन हो। मजिस्ट्रेट सुनिश्चित करे कि दहेज का लेन-देन न हुआ हो।
  • न्याय की गुणवत्ता से समझौता किए बगैर न्याधीशों की संख्या बढ़ाई जाए।
  • सरकार तय करे कि कानून और उसका पालन कराने वाली एजेंसियां राजनेताओं के हाथों का खिलौना न बन जाएं।
  • प्रशासन के प्रत्येक स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही तय की जाए।
  • सशस्त्र बलों द्वारा महिलाओं के खिलाफ अत्याचार सामान्य कानून के अंतर्गत लाए जाएं। सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफस्पा) को बनाए रखने पर पुनर्विचार हो।
  • कश्मीर, छत्तीसगढ़ और मणिपुर जैसे हिंसाग्रस्त क्षेत्रों में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की सुनवाई के लिए विशेष आयोग बनें।
  • 80,000 सुझाव मिले जस्टिस वर्मा समिति को।
  • 630 पेज की रिपोर्ट समिति ने सौंपी सरकार को।
  • 29 दिनों में समिति ने तैयार की रिपोर्ट।

भारत ही नही लगभग पूरी दुनिया में महिलाओं को वासना या सेविका की नजर से देखा जा रहा है। हमारे देश में इज्जत, मान, प्रतिष्ठा और नैतिक जि़म्मेदारी बेचारी महिलाओं के ऊपर डाल दी जाती है। उनके साथ खानपान, शिक्षा, स्वास्थ्य और संपत्ति में हिस्सेदारी, सभी में भेदभाव होता है। आज अगर कोई महिला अपने हक और स्वाभिमान के लिए लड़ती है, तो उसे समाज द्वारा चरित्रहीन करार कर दिया जाता है। अब महिलाओं को खुद संगठित होना पड़ेगा। टॅमिसन-रायटर्स ट्रस्ट लॉ फाउण्डेशन की शोध-रिपोर्ट ने महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित माने जाने वाले देशों में भारत को चौथे स्थान पर रखकर हमें सोचने को मजबूर कर दिया। जिस देश में नारी को देवी का रूप माना जाता है। वहां ऐसे हालात क्यों बन रहे है? देश में हर तीन मिनट पर एक महिला अपराध की शिकार हो रही है। हर 29 मिनट में किसी न किसी महिला के साथ बलात्कार हो रहा है। महिलाओं के साथ होने वाले बालात्कार के मामले में भारत दुनिया के तीन देशों में शुमार है। अमेरिका 93,934, द. अफ्रीका 54,926, भारत 18,359 (समाजसेवी संस्था नई दिशा के अनुसार भारत के आंकड़े अधिक है, किन्तु सामाजिक भय के चलते उजागर नहीं हो पाते हैं।) महिलाओं के प्रति सबसे अधिक अपराध उत्तर प्रदेश में हुए। इन भयावह होते हालातों पर विराम लगाने के लिऐ ठोस कदम उठाने की आवाश्यकता है। पुलिस के भरोसे छोड़कर महिला अत्याचार में परिर्वतन नहीं हो सकता है। समाज के लिऐ भी महिलाओं के प्रति संवेदनशील बनाना होगा। उत्तर प्रदेश समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव की बहू अपर्णा यादव ने बलात्कार के आरोपियों को फांसी दिए जाने का समर्थन किया है। मुलायम ने 11 अप्रैल को मुरादाबाद की रैली के दौरान यह बयान दिया था कि रेप के मामलों में फांसी नहीं होनी चाहिए। लड़कों से गलती हो जाती है और इसके लिए फांसी नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कभी-कभी फंसाने के लिए भी लड़कों पर आरोप लगा दिया जाता है। अभी मुंबई में तीन लड़कों को फांसी की सजा दे दी गई। लड़कों से गलतियां हो जाती हैं, ऐसे कानूनों को बदलने की जरूरत है। द हिंदू की रिपोर्ट को देखें तो 2001-2011 तक के आंकड़े बताते हैं कि देश मे 48338 बहनों के साथ रेप हुए जिसमे मध्य प्रदेश पहले नंबर पर रहा, जहां 9465 रेप हुए। दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र में 6868 और उत्तर प्रदेश में 5449 घटनाए हुईं। इसमें सबसे ज्यादा शिकार गर्ल चाइल्ड रहीं। बच्चों के वेलफेयर के लिए मध्य प्रदेश मे 48 कमेटी बनाई, महाराष्ट्र ने 35 बनाई और उत्तर प्रदेश की सरकार ने 69 चाइल्ड वेलफेर कमेटियों का गठन किया। एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक मुल्क में हर 20 मिनिट पर एक रेप होता है।

एक आश्चर्य और देखिए, जब महिला पत्रकार ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का बढ़ते बलात्कार के मामलों की ओर ध्यान आकर्षित कराकर सवाल पूछा तो उनका जवाब था- ‘तुम तो सुरक्षित हो।’ भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत बाजपेयी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मण्डल राज्यपाल से प्रदेश की बिगड़ती कानून व्यवस्था के संबंध में मिलकर ज्ञापन सौंप चुका है।


समाजवादी सरकार के विरूद्ध इन दिनों सुनियोजित ढंग से दुष्प्रचार हो रहा- प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी


समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने कहा है कि उत्तर प्रदेश की समाजवादी सरकार और जनता के विरूद्ध इन दिनों सुनियोजित ढंग से दुष्प्रचार हो रहा है। प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर तमाम तरह की भ्रामक बातें प्रचारित की जा रही हैं। लोकसभा चुनाव की जीत के बाद से भाजपा भी अपने होश हवास खो बैठी है और उसे भी जल्दी से जल्दी सत्ता हथिया लेने का दु:स्वप्न दिखाई देने लगा है। समाजवादी सरकार द्वारा कानून व्यवस्था के प्रति पूर्ण सतर्कता बरती जाती है। इस पर भी झूठे आंकड़ों के सहारे अनर्गल बयानबाजी कर जनता को बरगलाने की साजिशें चल रही हैं। समाजवादी पार्टी के नेताओं के बयानों को तोड़मरोड़ कर और संदर्भ से अलग पेश कर खराब माहौल बनाया जाता है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मुलायम सिंह यादव के बयानों को इधर कुछ ज्यादा ही गलत ढंग से प्रचारित किया गया है। नेता जी का नाम राष्ट्रीय स्तर पर एक गंभीर, विवकेशील और संतुलित विचार रखने वाले जननेता के रूप में शुमार होता है। महिलाओं को वे अत्यधिक सम्मान देते हैं। दुष्कर्म की शिकार महिलाओं को त्वरित न्याय मिले इसके वे पक्षधर हैं। उनके किसी बयान का आशय कदापि न तो किसी अपराध को कमतर बताना है और नहीं नारी जगत के प्रति अवमानना दिखाना है। भाजपा के कई नेता बसपा नेताओं की तरह कानून व्यवस्था के बारे में गलत बयानियां कर रहे हैं। उनके बयानों में धमकी का पुट रहता है।

यह एक सर्वविदित तथ्य है कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा सूबा है। इसकी जनसंख्या 20 करोड़ के लगभग है। समाजवादी सरकार को जनता ने विशाल बहुमत देकर सत्ता में बिठाया है। मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश को बदहाली से उबारने के लिए विकास के नए एजेंडा को अमली जामा पहनाने का काम कर रही है। अवस्थापना सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। किसानों, नौजवानों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों की जिंदगी को खुशहाल बनाने के प्रयास हो रहे हैं। इस बीच कुछ तत्व अपराधिक गतिविधियों में संलिप्त होकर प्रशासन के लिए चुनौती बन रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव जी की प्राथमिकता में कानून व्यवस्था बनाए रखना है क्योंकि विकास की गतिविधियॉ तभी सफल हो सकती हैं। इसके लिए ऊपर से लेकर नीचे तक प्रशासन को चुस्त दुरूस्त बनाने के निर्देश दिए गये हैं। अधिकारिक स्तर पर अपराधियों पर अंकुश लगा है। मुख्यमंत्री जी के स्पष्ट निर्देश हैं कि असामाजिक तत्वों के प्रति सख्ती बरतनी चाहिए और अपराधियों की जगह जेल होनी चाहिए। जहॉ भी कोई अवांछनीय घटना की कोशिश होती है मुख्यमंत्री स्वंय उसका संज्ञान लेते हैं।


उत्तर प्रदेश में ऐसा प्रतीत हो रहा है कानून व्यवस्था पेड़ पर टंग गई है। प्रदेश अध्यक्ष डा. बाजपेयी ने कहा डी.जी.पी. ए.एल. बनर्जी द्वारा हाल में दिये गये दो बयान अपराधियों का मनोबल बढ़ाने वाले है। मुख्यमंत्री केवल बैठकों की औपचारिकता कर रहे हैं। ऐसा लगता है सपा सरकार प्रदेश में कानून का राज स्थापित नही करना चाहती है? उत्तर प्रदेश के कार्यवाहक महामहिम राज्यपाल ने मोहनलालगंज में हुये रेप कांड पर अपनी टिप्पणी करते हुये कहा है कि ”भगवान भी नही रोक सकते है रेप’’। भारतीय जनता पार्टी, लखनऊ महानगर के अध्यक्ष मनोहर सिंह ने इस टिप्पणी की निन्दा करते हुये कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे राज्यपाल पद की गरिमा घटती है और बहुसंख्यक समाज की भावनाओं को ठेस पहुंची है। राज्यपाल के टिप्पणी की निन्दा करने वालों में मुख्य रूप से पूर्व विधायक सुरेश श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष विनोद तिवारी अप्पू, महामंत्री राकेश श्रीवास्तव, अनुराग मिश्रा अन्नू, मीडिया प्रभारी अवधेश गुप्ता, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अंकुर सिंह है।

एशिया में किशोर उम्र के बलात्कारी

भारत के पड़ोसी बांग्लादेश सहित छह देशों में बलात्कार करने वालों में किशोर उम्र के लड़के भी शामिल हैं. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट बताती है कि इन देशों के लोग सेक्स को अपना अधिकार मानते हैं, जबरन ही सही.एशिया प्रशांत देशों में 10,000 लोगों से पूछताछ के आधार पर तैयार की गई यूएन की रिपोर्ट उसी दिन जारी की गई, जिस दिन भारत की एक अदालत ने दिल्ली गैंग रेप में चार आरोपियों को दोषी करार दिया है। सर्वे में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के बारे में पुरुषों की सोच पूछी गई। सर्वेक्षण के नतीजे चौंकाने वाले हैं। इन पुरुषों की उम्र 50 साल से कम है। सर्वे में पता चला है कि लगभग 50 प्रतिशत पुरुषों ने अपने करीब किसी महिला के खिलाफ हिंसा की, जिसमें कई बार यौन हिंसा भी शामिल थी. संयुक्त राष्ट्र ने इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करते हुए बताया कि बांग्लादेश, कंबोडिया, चीन, इंडोनेशिया, श्रीलंका और पापुआ न्यू गिनी में करीब 10,000 पुरुषों से सवाल किए गए. शोध का विषय है, कुछ पुरुष महिलाओं के खिलाफ हिंसा का इस्तेमाल क्यों करते हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है।


आजकल के हालात को देखते हुए अपने बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए कम उम्र में ही उन्हें जागरूक करें। जरूरत की चीजें सूची :


  • अपनी बेटियों को चेतावनी दें कि वह किसी के गोद में न बैठे चाहे वह घर का आदमी क्यों न हो।
  • बच्चे दो साल की उम्र या उससे बड़ा हो जाए तो उसके सामने तैयार न हों।
  • किसी भी बड़े या वयस्क को अपने बच्चे को ‘मेरी पत्नी’ या ‘मेरा पति’ बोलने की अनुमती न दे।
  • जब आपका बच्चा खेलने के लिए बाहर जाए तो उस पर कड़ी नजर रखें कि वो किस प्रकार के खेल खेल रहे हैं क्योंकि आजकल बच्चे यौन उत्पीडऩ के शिकार बन रहे हैं।
  • अपने बच्चों पर उन लोगों के घर जाने के लिए जोर न डाले जहां उन्हें सहज महसूस न हो और अगर बच्चा खासकर किसी वयस्क के घर जाने की बार-बार जिद करता है तो उस पर विशेष रूप से चौकस रहें।
  • अगर बच्चा अचानक से सहम जाए तो उससे कई प्रश्न करें कि कहीं वह यौन उत्पीडऩ का शिकार तो नहीं हुआ।
  • ध्यान से बड़ों को सेक्स के सही मुल्यों के बारे में शिक्षित करें। अगर आप नहीं करेंगे तो समाज उन्हें गलत मुल्य सिखा सकता है।
  • यह आपके लिए एक सलाह है कि बच्चों के लिए को भी चिज जैसे कार्टून आदि लाने से पहले एक बार खुद उसे जांच ले।
  • इस बात का विशेष ध्यान रखें कि आपने अपने केबल नेटवर्क पर ‘पेरेंटल लॉक’ लगाया है और अपने दोस्तों को भी इस बारे में जानकारी दें।
  • अपने तीन साल के बच्चे को अपने काम और निजी भागों को साफ रखना सिखाएं और साथ ही उन्हें चेतावनी दें कि किसी को भी अपने निजी अंगों में हाथ न लगाने दें।
  • वह चीजें (जैसे फिल्म, गाने, दोस्त या परिवार) जिनसे बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़े उसे बच्चे से दूर रखें।
  • अगर बच्चा किसी की शिकायत करता है तो चुप न रहें, उस पर सख्त कदम उठाएं।


महिला हिंसा पर सरकार संवेदनहीन

जबान में तल्खी और बस एक सवाल..कि कब तक महिला हिंसा पर सरकार संवेदनहीन बनी रहेगी? प्रदेश सरकार होश में आओ…गुंडागर्दी नहीं चलेगी, बढ़ रहे हैं हत्या और बलात्कार..फिर भी क्यों चुप है सरकार के नारे लगाते हुए भाजपा महिला मोर्चा की सैकड़ों महिलाओं ने विरोध जुलूस निकाला, नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर अपनी नाराजगी दर्ज कराई। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (एडवा), भारतीय महिला फेडरेशन, भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन, आली, सहयोग, हमसफर सहित कई संगठनों की महिलाएं परिवर्तन चौक पर जमा हुई। यहां पर एडवा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाषिनी अली के नेतृत्व में एक विशाल विरोध जुलूस निकाला गया, सुभाषिनी अली ने प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अगर जल्द ही सरकार ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। एडवा की प्रांतीय अध्यक्ष मधु गर्ग ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि प्रदेश कानून व्यवस्था कायम रखने में सरकार पूरी तरह विफल रही है। समाजसेविका पूनम तिवारी ने कहा कि बलात्कारी को फांसी होनी चाहिए।


अन्य देशों में बलात्कार के लिए सजा


पूरी दुनिया में बलात्कार जैसे घृणित अपराध के लिए कड़ी सजा सुनाई गई है। विभिन्न देश और उनकी सजा की सूची :

  • संयुक्त अरब अमीरात – तुरंत मौत की सजा और 7 दिनों के भीतर फांसी
  • इरान – त्वरित 24 घंटे के भीतर फंसी / पत्थर मार कर मृत्यु
  • अफगानिस्तान – 4 दिनों के भीतर सिर में गोली मार कर तत्काल मौत
  • चीन – कोई परीक्षण नहीं होता, अगर चिकित्सकीय द्वारा बलात्कार साबित होता है तो मौत की सजा दी जाती है।
  • मलेशिया – मौत की सजा
  • मंगोलिया – मौत के रूप में परिवारिक बदला
  • इराक – आखरी सांस तक पत्थर मार कर मौत
  • तालिबान – पहले हाथ और पैर काट दिए जाते हैं और फिर पत्थर मार कर गोली मार दी जाती है।
  • पोलैंड – सूअरों के पास फेंक कर मौत
  • भारत – समझौता, सोच-विचार, परीक्षण, रिश्वत, अमीर परिवार के बच्चे, दुव्र्यवहार और शर्मिंदगी और कभी-कभी कोई कार्रवाई नहीं।

भारत में इस घिनौने अपराध के लिए कोई सजा नहीं है। हमे इन सब देशों से सीखना चाहिए ताकि हमारे यहां भी हालात सुधर सके।


यूपी थानों की नियुक्ति में जातीय पक्षपात

उत्तर प्रदेश में शासनादेश दिनांक 07 जून 2002 द्वारा प्रदेश के प्रत्येक जिले में 50: थानाध्यक्ष सामान्य जाति, 21: अनुसूचित जाति (एससी), 2: अनुसूचित जनजाति (एसटी) और 27: अन्य पिछड़ी जाति (ओबीसी) सहित मुस्लिम वर्ग से तैनात किये जाने के निर्देश हैं, किन्तु प्रदेश पुलिस इस अनिवार्य प्रावधान का स्पष्ट उल्लंघन कर रही है और खास कर यादव जातिविशेष की तरफ झुकी दिखती है। आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर द्वारा डीजीपी कार्यालय से प्राप्त सूचना के अनुसार उत्तर प्रदेश में कुल 1447 पुलिस थाने हैं. अत: शासनादेश के अनुसार 724 सामान्य जाति, 303 एससी, 30 एसटी और 420 ओबीसी तथा मुस्लिम थानाध्यक्ष तैनात होने चाहिए। इसके विपरीत फरवरी 2014 में सामान्य जाति के 597, एससी के 120 तथा एसटी का केवल 1 अधिकारी तैनात है. इसके विपरीत 614 थानों पर ओबीसी तथा 102 पर अल्पसंख्यक, अर्थात कुल 734 थानाध्यक्ष तैनात हैं. यह संख्या कुल थानों के 50: प्रतिशत से अधिक है और सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरक्षण के सम्बन्ध में नियत उपरी सीमा से भी अधिक है बलात्कार की घटना के लिए कुचर्चित हुए बदायूं सहित नोएडा, हापुड़, संभल, फतेहगढ़, मऊ, गोंडा और प्रतापगढ़ में एक भी एससी, एसटी थानाध्यक्ष नहीं थे इसमें पिछड़े वर्ग में एक बड़ा प्रतिशत यादव थानाध्यक्षों का है, जैसे मेरठ में 28 में 9, वाराणसी में 25 में 7, झांसी में 26 में 12, बांदा में 18 में 5, कासगंज 11 में 3 और बरेली में 30 में 10।

लखनऊ से सुरेन्द्र अग्निहोत्री

 

 

 

 

 

 

 

 

 Малий Владиславначальник отдела логистики

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