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”जोड़-तोड़ की राजनीति में हमारा विश्वास नहीं’’ — सतीश उपाध्याय

”मेरी पहली जिम्मेदारी यह रहेगी कि हर कार्यकर्ता को सम्मान देना और संगठन को सुदृढ़ करना। सरकार नहीं, राष्ट्र बनाना हमारा ध्येय है। हम सब कार्यकर्ता हैं और राष्ट्र हमारे लिए सर्वोपरि है। सबको साथ लेकर चलना और समाज में समरसता बनाते हुए अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना भाजपा का मूल उद्देश्य है।’’ हाल ही में दिल्ली के भाजपा अध्यक्ष चुने गए सतीश उपाध्याय ने ये बात उदय इंडिया के संपादक दीपक कुमार रथ के साथ विस्तार से हुई एक चर्चा के दौरान कहीं। प्रस्तुत हैं इस चर्चा के प्रमुख अंश:

अध्यक्ष के रूप में आपके सामने प्राथमिक चुनौतियां क्या हैं?

मेरे सामने निश्चित रूप से कई चुनौतियां हैं। कोई भी नई जिम्मेदारी के साथ तरह-तरह के अवसर मिलते हैं काम करने के और उसके साथ चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है। इन चुनौतियों को अवसर में बदलना और इस काम को एनज्वॉय करना हमारा लक्ष्य होना चाहिए। हमारी प्राथमिकता है दिल्ली में संगठन को मजबूती देना, इकाइयों का बेहतर ढंग से गठित करना और जो कार्यकर्ता पार्टी में काम कर सकते हैं, उनको पार्टी के लिए काम देना। युवाओं के जोश को बरकरार रखना, महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना, एसटी-एससी वर्ग को पार्टी से जोडऩा, वरिष्ट लोगों के अनुभवों का लाभ लेना, अल्पसंख्यक कार्यकर्ता की चिंता करना भी हमारी प्राथमिकता में शामिल है। दिल्ली में तमाम तरीके के प्रवासी आते हैं। यहां उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, कोलकाता, जम्मू-कश्मीर, राजास्थान आदि से कुछ आकांक्षओं के साथ आने वाले प्रवासियों के लिए एक सुरक्षित माहौल दिल्ली में मिले, यही हमारा उद्देश्य है। महिलाओं की सुरक्षा, गुड गवर्नेंस, बेहतरीन छवि वाली दिल्ली प्रस्तुत करना हमारी प्राथमिकताओं में शामिल है।

भाजपा द्वारा सरकार बनाने की मीडिया में चल रही चर्चा पर आपकी क्या टिप्पणी है?

अभी हमारे सामने सरकार बनाने से संबंधित कोई निमंत्रण आया नहीं है। लेकिन, मेरा मानना है कि दिल्ली को बहुत लंबे समय तक अनिश्चताओं में नहीं रखा जा सकता है, क्योंकि जब तक दिल्ली में चुनी हुई सरकार नहीं होगी तब तक गुड गवर्नेंस नहीं होगी। बिजली, पानी, ट्रैफिक, रोजगार, अस्पतालों में अच्छी सुविधा की कमी, स्कूल-कॉलेज, झुग्गी-झोपड़ी जैसी दिल्ली में तमाम समस्याएं हैं। इन समस्याओं को केंद्र सरकार को दूर नहीं करना है, बल्कि राज्य की चुनी हुई सरकार ही इसके लिए कदम उठाएगी। पिछले लगभग 8-9 महिनों से दिल्ली की गाड़ी पटरी से उतरी हुई है। इसके लिए जिम्मेदार कांग्रेस और आम आदमी पार्टी है, जिन्होंने दिल्ली में सरकार बनाई और सरकार बनाने के कुछ दिन बाद ही जनता को बीच मझधार में छोड़ कर भाग गए। उन्हें तिलक मार्ग से 7 आरसीआर पहुंच कर प्रधानमंत्री बनने की शायद बहुत जल्दी थी। उन्होंने जो दिल्ली के साथ अन्याय किया उससे उन्हें संसदीय चुनावों में तो कोई सफलता नहीं मिली, दिल्ली में उनकी संख्या 7 और 0 पर सिमट गई। अब दुबारा दिल्ली में इस तरह की भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं। दिल्ली के विधायकों, चाहे वो भाजपा के हों, कांग्रेस हों या आप के, उन्हें दिल्ली की जनता की आवश्यकताओं को समझना होगा। क्या दिल्ली को लगातार हर चौथे महिने या हर साल कोई चुनाव देखने चाहिए? क्या चुनाव का बोझ दिल्ली की जनता पर नहीं पड़ेगा? अगर आपके पास कोई विकल्प नहीं है, तो भाजपा चुनाव में जाने के लिए तैयार है। हम चुनाव में जाएंगे और पूर्ण बहुमत के साथ जीत कर दिल्ली में सुशासन के लिए एक बेहतरीन मुख्यमंत्री देंगे। लेकिन, अगर उप-राज्यपाल को लगता है कि कोई अन्य विकल्प है तो भावी चुनाव को टाला जा सकता है। दिल्ली में सरकार बनाने के लिए आम आदमी पार्टी दुबारा प्रयास कर रही है। कांग्रेस के विधायक आसिफ अली ने एक विडियो दिया है, जिसमें उनके साथ सौदेबाजी को दिखाया गया है। केजरीवाल साहब दिल्ली भाजपा के लोगों पर सौदेबाजी का आरोप लगा रहे हैं, 10-20 करोड़की बात कर रहे हैं, लेकिन सब झुठे और बेबुनियाद आरोप हैं। मैं तो आपको कहता हूं कि वह एक निर्माता, निर्देशक, स्क्रिप्ट राइटर और ऐक्टिंग सारे काम केजरीवाल साहब खुद करते हैं। दिल्ली की जनता के बारे में वह लगातार झूठ बोलते रहते हैं। वे कुछ भी कह सकते हैं। इसलिए भाजपा को अगर राज्यपाल बुलाते हैं और सरकार बनाने के लिए कहते हैं तो हम अपने विधायकों से विचार-विमर्श कर आगे का रास्ता तय करेंगे।

अगर सरकार बनाने का निमंत्रण आपको मिलता है तो संख्या बल की बात आएगी …

हम किसी को अलग-थलग नहीं करेंगे। जैसा कि मंैने पहले ही कहा कि हमारे पास संख्या बल है, लेकिन जैसी स्थिति आएगी उसके अनुसार हम सोचेंगे। भविष्य में क्या होगा, इसके बारे में मैं कोई गलत बयानी नहीं करूंगा। लोगों को लगता है कि दिल्ली में चुनाव नहीं हों। कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी को समर्थन दिया था, लेकिन वह भाजपा को समर्थन तो देगी नहीं और ना ही अब आम आदमी पार्टी को देगी। लेकिन विधायकों की सोच अलग है। वे दिल्ली के लिए कुछ करना चाहते हैं। आगे क्या होगा, इस संदर्भ में मैं कोई भविष्यवाणी नहीं कर सकता।

लेकिन दिल्ली से भाजपा सांसद रमेश विधूड़ी ने कहा है कि हमारे पास पर्याप्त संख्याबल है। इस पर आप क्या कहेंगे?

इसका तो जवाब आपको रमेश विधूड़ी जी ही दे सकते हैं, लेकिन जहां तक मेरा मानना है, भाजपा के संपर्क में अभी तक कोई एमएलए टच में नहीं है और ना ही मैंने किसी से बात की है। लेकिन, ऐसी परिस्थिति जब बनेगी तो निश्चित रूप से हम उस पर विचार करेंगे। इसमें कोई दोराय नहीं है।

खबर है कि संघ भी नहीं चाहता कि दिल्ली में भाजपा गठजोड़ की राजनीति में पड़े। दूसरी तरफ भाजपा के विधायकों का कहना है कि वो इतनी जल्दी चुनाव नहीं लडऩा चाहते हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते आपकी क्या प्रतिक्रिया है?

हमारे लिए संघ की राय बहुत महत्वपूर्ण है। हमारे लिए जो भी इस तरह के इनपुट्स आ रहे हैं, इन बिंदुओं पर हम बात करेंगे और बातचीत के बाद परिवार की जो राय बनेगी उसे हम स्वीकार करेंगे। हम सरकार बनाएंगे या नहीं बनाएंगे इस पर निर्णय हम स्थिति के अनुसार निर्णय लेंगे।

शिरोमणि अकाली दल में कांग्रेस और ‘आप’ के कुछ विधायक शामिल हो सकते हैं। आप क्या कहेंगे?

इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। शिरोमणि अकाली दल इस बारे में आपको बेहतर बता सकता है। अकाली दल के साथ हमारा गठबंधन है और यह गठबंधन वर्षों से है, 1963-64 से है। पहला गठबंधन श्यामा प्रसाद मुखर्जी के समय में हुआ था और तब से यह निरंतर जारी है और उनके दल में क्या हो रहा, उनके साथ कौन जुड़ रहा है, इसकी जानकारी वही दे सकते हैं।

अगर आगे बढ़कर कोई आपको समर्थन देता है तो क्या आप समर्थन लेकर सरकार बनाएंगे?

शिरोमणि अकाली दल में कोई आता है और हमको सपोर्ट देता है तो उसके बारे विचार हम जरूर करेंगे। हां होगा या ना होगा उस पर हम जरूर निर्णय लेंगे।

आप’ ने जिन मुद्दों के सहारे दिल्ली में सरकार बनाई, वे मुद्दे आज भी अपनी जगह बरकरार हैं। आज वह बिजली, पानी जैसी समस्याओं को लेकर प्रदर्शन कर रही है। केंद्र में आपकी सरकार है, आप जनता को क्या जवाब देंगें?

इन समस्याओं के कारण ही आज दिल्ली में अनिश्चितता की स्थिति बनी है। ‘आप’ को तो इस बारे में कुछ बोलने का अधिकार ही नहीं है और न ही कांग्रेस को है, क्योंकि दिल्ली की इस हालत के जिम्मेदार वहीं हैं। भाजपा इसके लिए जिम्मेदार नहीं है। दिल्ली की इन समस्याओं को हमने अपने घोषणा-पत्र में इन मसलों को ठीक करने की बात कही है और मैं वित्तमंत्री जी को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने दिल्ली की संवेदनशीलता को देखते हुए यहां की बिजली, पानी की प्रमुख समस्याओं के साथ-साथ बुनियादी ढांचे को ठीक करने के लिए 700 करोड़ रूपए आवंटित किए हैं। इससे विकास को गति मिलेगी।

क्या बिजली दरों की पुन समीक्षा की जाएगी?

बिजली की दर को डीआरसी ने 8.5 प्रतिशत बढ़ाया है। उसमें आपने यह भी देखा होगा कि जो प्रभावी दर हैं, उससे बिजली के कम बिल आ रहे हैं। क्योंकि पावर परचेज के रेट को कम कर दिया गया है। इसके साथ ही 10 पैसे, 15 पैसे की जो बढ़ोत्तरी की गई है, इसकी भरपाई करने के लिए हमने जो 30 प्रतिशत दर कम करने की बात घोषणा-पत्र में कही थी, उसे जब हमारी चुनी हुई सरकार दिल्ली में बनेगी तो उस पर अमल करेगी। लेकिन, जब तक ऐसा नहीं होता तब तक हमने केंद्र सरकार से मांग की है कि विगत वर्षों में दिल्ली में जो सब्सिडी दी जा रही थी, उसे जारी रखा जाए। हमने केंद्र सरकार से मांग की है कि जो मध्यम वर्गीय परिवार है, गरीब लोग हैं या 200-600 यूनिट तक की बिजली का इस्तेमाल करते हैं उन्हें अनुदान जारी रखना चाहिए।

अवैध कालोनियों को लेकर भाजपा की क्या नीति है?

हमारे घोषणा-पत्र में अवैध कालोनियों को अधिकृत करने की बात कही गई है। उनमें बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जाएगा। वहां बिजली, पानी, नाली जैसी समस्याओं को ठीक किया जाएगा। वहां पर रोड बने, वहां विकास के काम हों, यह हमारी प्राथमिकता में शामिल है।

प्रदेशाध्यक्ष बनने के बाद आपकी बनने वाली नई टीम की क्या प्राथमिकता होगी?

मेरी प्राथमिकताएं साफ हैं। उसमें पुराने लोगों का अनुभव, युवाओं के जोडऩा, महिलाओं की भागेदारी, अल्पसंख्यकों की भागेदारी सुनिश्चित की जाएगी।

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