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मरूस्थल में निर्जलीकरण की शिकार कांग्रेस

सोलहवीं लोकसभा के चुनाव में राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आपातकाल के पश्चात् 1977 में हुए चुनावों की जनता लहर को पीछे छोड़ दिया। इतना ही नहीं, 1984 की सहानुभूति लहर में कांग्रेस की चुनावी जीत की बराबरी का इतिहास दोहराते हुए भाजपा ने सभी 25 सीटों पर शानदार सफलता प्राप्त की है। इस सफलता से मुख्यमंत्री वसुधंरा राजे ने अपना मिशन-25 को पूरा कर नरेन्द्र मोदी के करिश्माई नेतृत्व को सलामी दे दी। चौदहवीं विधानसभा में 200 सदस्यीय सदन में 163 सीटें जीकर भाजपा ने दिसम्बर 2013 में कीर्तिमान बनाया था और अब 2014 में लोकसभा की सभी 25 सीटों पर सफलता का परचम लहराकर कई नए रिकार्ड भी कायम किए हैं।

वर्ष 1977 से चुनाव में जनता लहर के बावजूद समूचे उत्तर भारत में केवल राजस्थान के नागौर संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस के दिग्गज नेता नाथूराम मिर्धा ने सफलता हासिल की थी। लेकिन, इस चुनाव में उनकी पोती कांग्रेस सांसद डॉ. ज्योति मिर्धा को शर्मनाक पराजय का सामना करना पड़ा है। भाजपा ने अपनी स्थापना के बाद 1984 के चुनाव में 23.69 प्रतिशत मत प्राप्त करने के बावजूद, एक भी सीट पर सफलता हासिल नहीं की थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए चुनाव में उपजी सहानुभूति की लहर में कांग्रेस ने तब सभी 25 सीटें अपनी झोली में डाली थीं। अब 30 साल बाद भाजपा ने उसी चुनावी इतिहास को दोहराया है। इन 25 सीटों में से 20 पर पार्टी प्रत्याशियों को ‘लखटकिया’ जीत हासिल हुई है। जयपुर में कांग्रेस सांसद डॉ. महेश जोशी को 5 लाख से भी अधिक मतों से पराजित कर भाजपा के रामचरण बोहरा ने नया इतिहास रचा है।

चुनावी रणनीति और गणित के हिसाब से भाजपा ने उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था और वे पार्टी की अपेक्षा के अनुसार ही कसौटी पर खरे उतरे। नतीजतन, इस बार लोकसभा में राजस्थान से 18 नए चेहरे पहली बार लोकसभा की दहलीज पर पहुंचे हैं। इनमें केवल मनोज राजोरिया (धौलपुर, करौली) तथा सुखवीर जौनपुरिया (पहले जयपुर ग्रामीण अब टोंक-सवाई माधोपुर) से पिछली बार चुनाव लड़कर पराजित हुए थे। शेष सात विजयी भाजपा उम्मीदवारों में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पुत्र दुष्यंत सिंह ने झालावाड़ बांरा से लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की है।

पिछली बार उन्होंने उर्मिला भाया और इस बार उनके पति कांग्रेस के पूर्व मंत्री प्रमोद जैन को 2 लाख 81 हजार मतों से पराजित किया है। अर्जुन मेघवाल (बीकानेर) और देवजी पटेल (जालोर) लगातार दूसरी बार विजयी हुए हैं। निहालचंद (गंगानगर), बहादुर सिंह (भरतपुर) तथा सुभाष बहेडिया (भीलवाड़ा) पूर्व में सांसद रह चुके हैं।

भाजपा से बगावत कर बाड़मेर में भाजपा के शीर्षस्थ नेता पूर्व केन्द्रीय मंत्री जसवंत सिंह की पराजय ने उनके राजनीतिक भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया था, लेकिन वह चुनाव मैदान में उतर गए। इधर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कांग्रेस के पूर्व सांसद कर्नल सोनाराम को पार्टी में शामिल कर टिकट थमाया और वह 84 हजार से अधिक मतों से विजयी हुए। बाड़मेर से कांग्रेस सांसद हरीश चौधरी तीसरे स्थान पर रहे। सीकर में भाजपा से बगावत कर चुनाव लडऩे वाले सुभाष मेहरिया को भी तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा। लेकिन करौली-धौलपुर संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस के लक्खीराम बैरवा सबसे कम 27 हजार मतों से हारे। उन्हें भाजपा के मनोज राजोरिया ने कड़े संघर्ष में हराया। राजोरिया पिछले चुनाव में खिलाड़ी लाल बैरवा से पराजित हुए थे। विधानसभा चुनाव में इस संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस के 5, भाजपा के 2 तथा बसपा के एक विधायक विजयी हुए थे। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बाड़मेर की तरह करौली-धौलपुर सीट को प्रतिष्ठा का मुद्दा बना कर दूसरे चरण के मतदान तक धौलपुर में कैम्प कर चुनावी जीत का खाका तैयार किया था।

पिछले चुनाव में कांग्रेस 20 सीटों तथा भाजपा चार सीटों तथा भाजपा के बागी डॉ. किरोड़ीलाल मीणा निर्दलीय विजयी हुए थे। तब दस प्रत्याशी एक लाख से अधिक मतों के अंतर से जीते थे। अबकी बार मोदी सरकार के लिए यह संख्या बढ़कर दुगनी हो गई है और जीत का भी कीर्तिमान बना है। जयपुर से पहली बार चुनाव मैदान में उतरे भाजपा के रामचरण बोहरा लगभग 5 लाख 37 हजार मतों के अंतर से जीते हैं। यह राजस्थान में लोकसभा के चुनावी इतिहास का कीर्तिमान है। बाड़मेर से भाजपा के मानवेन्द्र सिंह 2004 में सर्वाधिक 2 लाख 71 हजार मतों के अंतर से विजयी हुए थे। इस बार केन्द्रीय मंत्री तथा जोधपुर के पूर्व राजपरिवार की बेटी चन्द्रेश कुमारी को छात्रसंघ अध्यक्ष रहे भाजपा के नये चेहरे गजेन्द्र सिंह शेखावत ने चार लाख से भी अधिक मतों से हराया है, जबकि पाली से सीरवी समाज के अध्यक्ष पी.बी. चौधरी 3 लाख 99 हजार, राजसंमद से भाजपा के जमीनी कार्यकर्ता हरिओम सिंह 3 लाख 87 हजार, जालोर से सांसद देवजी पटेल 3 लाख 81 हजार से विजयी हुए। ओलम्पिक निशानेबाज राजवद्र्धन सिंह राठौड़ ने भी चुनावी मैदान में अपना पहला निशाना साधकर कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. सी.पी. जोशी को जयपुर ग्रामीण से 3 लाख 32 हजार मतों से पराजित कर दिया। जोशी पिछली बार भीलवाड़ा से चुने गए थे। केन्द्रीय मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास ने भी चितौडग़ढ़ से भाजपा के नये चेहरे चन्द्र प्रकाश जोशी से तीन लाख 16 हजार मतों से मात खायी है। जोशी की तरह ही राहुल गांधी के करीबी केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह को अलवर में महंत चांदनाथ से दो लाख 82 हजार मतों से हार का मुंह देखना पड़ा। राहुल गांधी ने केवल अलवर में रोड शो किया था।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष केन्द्रीय मंत्री सचिन पायलट अजमेर में जल संसाधन मंत्री सावर लाल जाट से एक लाख 71 हजार मतों से पराजित हुए, तो दौसा में केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री नमोनारायण मीणा तीसरे स्थान पर रहे। उनके छोटे भाई तथा राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक हरीश मीणा ने निर्दलीय विधायक डॉ. किरोड़ीलाल मीणा को 45 हजार मतों से परास्त किया। टोंक-सवाईमाधोपुर में उत्तर प्रदेश से कांग्रेस सांसद तथा भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरूद्दीन एक लाख 35 हजार मतों से हारे। नागौर में भाजपा के नए चेहरे तथा राज्य लोकसेवा के पूर्व अध्यक्ष छोटूराम चौधरी ने कांग्रेस सांसद डॉ. ज्योति मिर्धा को 72 हजार मतों से पराजित कर मिर्धा परिवार के राजनीतिक वर्चस्व को उखाड़ फेंका। कांग्रेस के दिग्गज नेता पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्वर्गीय शीशराम ओला से 26 हजार मतों से पराजित हुई भाजपा विधायक संतोष अहलावत ने इस बार ओला की पुत्रवधु राजबाला को 2 लाख 33 हजार मतों से हराकर सूद समेत हिसाब चुकता कर दिया है। सीकर में सुमेधानंद महाराज ने कांग्रेस के पी.एस. जाट को 2 लाख 39 हजार वोटों से हराया। यहां भाजपा के बागी पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुभाष महरिया तीसरे स्थान पर रहे। चुरू में भाजपा सांसद रामसिंह कस्बा के पुत्र राहुल ने कांग्रेस के प्रताप पूनिया को 2 लाख 94 हजार मतों से परास्त किया। कोटा के पूर्व राजपरिवार के कांग्रेस सांसद इज्यराज सिंह को भाजपा विधायक ओम बिड़ला ने 2 लाख मतों से हराया। भाजपा विधायक बहादुर सिंह कोली भरतपुर से निहालचन्द मेघवाल गंगानगर, अर्जुन मेघवाल बीकानेर, अर्जुन मीणा उदयुपर, मानशंकर निनामा बांसवाड़ा से विजयी हुए हैं।

विधानसभा चुनावों की तरह मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने मतगणना के दिन बांसवाड़ा में देवी त्रिपुरासुंदरी के मंदिर में पूजा-अर्जना कर भाजपा की सफलता की कामना की। जयपुर लौटने पर उन्होंने मीडिया से बातचीत में राजस्थान सहित देश में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के लिए आम जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रति विनम्रतापूर्वक आभार व्यक्त किया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए उनकी प्रसिद्ध कविता ‘कदम मिलाकर चलना होगा’ की पंक्तियां सुनाते हुए विधानसभा चुनाव में अपने प्रसिद्ध उद्घोष ‘आओ साथ चलें’ का उल्लेख किया। वसुंधरा राजे ने कहा कि अब कांग्रेस मुक्त भारत बना है

और नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में टीम इंडिया देश की दशा और दिशा बदलेगी। इसके साथ ही केन्द्र सरकार से राजस्थान के प्रति सौतेले व्यवहार से भी छुटकारा मिलेगा। वसुंधरा राजे ने इस जीत को जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं को समर्पित किया।

जयपुर से गुलाब बत्रा

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