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नई सरकार के लिए, राष्ट्र का कार्य आदेश

भारतीय लोकतन्त्र का चुनाव उत्सव 16 मई, 2014 को चुनाव के आने वाले नतीजों की घोषणा के साथ सम्पन्न होने जा रहा है। चुनाव के लिए विभिन्न राजनीतिज्ञ पार्टीयों (दलों) ने अपने-अपने चुनाव घोषणा पत्र जारी किये। अमुमन ऐसे चुनावी घोषणा पत्रों पर अमली करण न होने से जनता का विश्वास हट गया है। फिर भी इस वर्ष के चुनाव भ्रष्टाचार घटाने, महंगाई का सामना करने और विकास की गति बढ़ाने के मुद्दों पर ही लड़ा जा रहा है।

सरकार किस की बनेगी यह कहना मेरा आशय नहीं है। मतदाता अपने वोट का प्रयोग सभी अवश्य करें, बिना चूक करें और सच्चाई से जांच कर के अच्छे उम्मीदवार को वोट दें।

जनता की आकंाक्षाएं, आशाएं, इच्छाऐं नई बनने वाली सरकार चाहे वो किसी भी दल की या किसी गठबन्धन की हो। एक ही रहेगी। सरकार बनाने वाले दल के बदलने से लोगों की आवश्यकताएं, इच्छाएं या उम्मीदें नहीं बदलेगी।

इसलिए जनता की तरफ से राष्ट्र के लिए एक कार्य करने की सूची एजेंडा यहां पर प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहा हू। ताकि मतदाता भी अपने मत का प्रयोग इन उम्मीदों पर खरा उतरने वाले इन उम्मीदों को पूरा करने वाले दल या उम्मीदवार के लिए ही करें।

जैसा की ऊपर कहा गया है कि महंगाई कम करना, भ्रष्टाचार खत्म करना और विकास की दर को बढ़ाना प्रमुख एजेंड़ा होना चाहिए। विकास का तात्पर्य जी.डी.पी. के बढ़ाने से ही सिर्फ नहीं होना चाहिए। ‘हैपीनेस इंडेक्स’ को भी इस उपलब्धी में पूरा जांचना (गिनना) चाहिए। विकास सर्वोत्तमुखी हो और विकास का लाभ सबसे पहले अन्तिम व गरीब से गरीब व्यक्ति को मिले।

भ्रष्टाचार की बात चली तो सबसे पहले सरकारी अनुदान, समाज कल्याण के लिए, गरीबों के कल्याण के लिए, जनजाति, पिछड़े लोगों के कल्याण के लिए, उनका सरकारी आकंलन 5 प्रतिशत पैसा ही उन तक पहुंचता है, तो सबसे पहले अधिक से अधिक पूरा रूपया नहीं तो 95 पैसे तो उन तक पहुचंना चाहिए। इसलिए आवश्यक प्रशासनिक रिफॉर्म की आवश्यकता है। जन जागरूकता की भी आवश्यकता है। सरकार के साथ-साथ स्थानीय जन सेवक इस बात के लिए जिम्मेदार ठहराए जाने चाहिये। जो जन सेवक उल्टे अधिकारी और ठेकेदारों से मिल जाते है उन पर जनता, सरकार और कानून सभी लगाम कसे। यह एक मात्र बात भी अगर पूरी हो जाती है तो कल्याणकारी कार्य का असर तुरन्त गरीब जनता को आराम दे सकती है।

महंगाई और विकास दोनों एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। विकास से आपूर्ति सप्लाई बढ़ती है, और महंगाई रूक सकती है। अगर सही निगरानी रखी जाये तो विकास और तेज 10 से 12 प्रतिशत की दर की रफ्तार जनता की आशाओं को पूरी करने के लिए आवश्यक है। इसके लिए विकास के रास्ते प्रसाशनिक अड़चने, जनता द्वारा खड़ी की गई मुसीबतें, कानूनी पचड़े आदि का तालमेल ‘सिंगल विन्डो सिस्टम’ से होना चाहिए।

योजना के विकास के अन्र्तगत कृषि, पशुपालन, उद्योग, व्यापार नितियां स्पष्ट हो और एक ही साथ प्रोजेक्ट के सारे विभागों पर क्लीरेन्स/छव्ब् समझी जानी चाहिए, ताकि प्रोजेक्ट इम्पलिमेन्टेशन में किसी तरह की देरी ना हो और उसकी लागत में बढ़ोतरी ना हो। यह भी ध्यान रहे कि एक प्रोजेक्ट से दूसरे प्रोजेक्ट जुड़े होते है। इसलिए चेन इफेक्ट भी विकास की गति को न घटा पायें। यह सावधानी बरतनी है।

सबसे पहले सरकार को आते ही बजट पेश करना होगा और बजट के द्वारा वित्तनीति, मुद्रानीति, व्यापार, उद्योग की नीति को काफी कुछ दिशा मिल जाती है। हालांकि ये सभी नीतियां पूर्नविचार और संशोधन के साथ जितनी जल्दी हो सके घोषित होनी चाहिए।

देश में नये कर न लगाये जाये। जीएसटी लागू हो, सीएसटी, एंट्री टैक्स खत्म हो, सरकार सभी काम पारदर्शिता और ईमानदारी से करे। अधिकतर देखा गया है कि सरकार कर घटने वाली बातें भूल जाती है और नये करो की बातों को बढ़ा-चढ़ा कर लागु कर देती है।

मुद्रा स्थिति और महंगाई की वजह से करों कि छूट खासकर आयकर में कर योग्य आय की सीमा 5 लाख से ऊपर कर दी जानी चाहिए। भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए यह आवश्यक है कि कर वसूल करने वाले और कर निर्धारण करने वाले अधिकारियों के आदेशों पर अपील करना सुगम, सरल और शीघ्र तय होना चाहिए।

काले धन एवं विदेशों से काले धन वापसी के लिए 25-30 प्रतिशत कर पर ‘ऐमन्स्टी स्कीम’ तुरन्त प्रभावी करे। यह कदम काफी समय से लम्बित है। कर दाताओं की शिकायत दूर करने का रास्ता अगर सुगम और सरल नहीं है, और शीघ्रता से न्याय नहीं मिलता है तो निश्चित रूप से नीचे के अफसरों से लेन-देन कर के व्यक्ति छूट जाना चाहता है। सम्पूर्ण न्याय प्रणाली में भी शीघ्र रिफॉर्म की आवश्यकता है। न्याय सुगम हो, सस्ता हो, शीघ्र हो तभी ठीक है।

सरकार कर न बढ़ा कर अपने खर्चें घटाये, फिजूल खर्ची बन्द कर दें। अनावश्यक स्टॉफ को पुर्न-स्थापित न करें। नई भर्ती कम करें। नई भर्ती बिल्कुल घटायें। ताकि प्राईवेट सेक्टर को आवश्यक मानव साधन मिल सके। प्रत्येक विभाग की समीक्षा हो। कम्प्यूटर से काम होने से कर्मचारियों की संख्या हर विभाग में घटनी चाहिये। जगह की आवश्यकता घटनी चाहिए। उत्पादक्ता बढऩी चाहिए। कामचोरी, गैर जिम्मेवारी, सुस्ती, मस्ती न हो।

सरकार को स्वास्थ्य सेवाएं, सेना और रक्षा के मामलों पर ग्रामीण विकास, शिक्षा और समाज कल्याण का बजट बढ़ाना चाहिए। शिक्षा के क्षेत्र में, ग्रामीण विकास के क्षेत्र में, स्वास्थ्य सेवाओं में, सड़क परिवहन, इन्फ्रास्ट्रकचर्स, एयरपोर्ट, बन्दरगाह, नई सुविधाओं के स्तर और विकास दोनों बढ़ाये जाने चाहिए। सरकार फिजूल खर्ची के साथ-साथ, अपने विभागों में घूसखोरी, कामचोरी खत्म करे। तभी जनता को राहत मिलेगी।

पिछले पांच वर्षों से सरकार कई मजबूरियों और वातावरण की वजह से अनिर्णयता की शिकार रही। इसलिए नई सरकार के लिए जल्द अच्छा काम करने के लिए हर एक विभाग में कैरी फॉरवर्ड बैकलॉग ढ़ेर सारा मिलेगा। पेन्डिग़ मामले जल्दी तय किये जाए, और विकास के कामों को गति मिले। अगर सक्षम नेतृत्व मिला और सरकार में गठबन्धन की मजबूरियां कम से कम रही तो शायद ये अवश्य सम्भव हो सके।

अपराध, बलात्कार और असुरक्षा का भाव पूरे देश में जग जाहिर है। कई राज्य में बहुत ही अधिक चिन्ताजनक है। इसलिए पुर्न पुलिस रिफॉर्म के लिए आवश्यक बतानी पड़ रही है। तभी कानून व्यवस्था और आवश्यक सुरक्षा नागरिकों को दे सकेंगे।

विदेशनीति और रक्षानीति दोनों ही काफी ढ़ीली पड़ी है। कई कारणों से उन्हें चुस्त और दुरूस्त करना आवश्यक है। देश चौतरफा घिरा हुआ है। पड़ोसी महाशक्ति ने चारों और अपना मोहपाश व जाल फैला कर भारत के पड़ोसी देशों को अपनी तरफ कर लिया है। हमें इन पस्थितियों को शीघ्र बदलना होगा। बुद्धिमानी से, चतुराई से, चाणक्य जैसी सोच से। सेना, नौसेना और वायुसेना को अधिक प्रभावी और आवश्यक से अधिक आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित करना होगा। विदेशनीति और रक्षा प्रक्लोपों में रिफॉर्म चाहिऐ।

ऐसा लग रहा है कि हर क्षेत्र में मौजूदा कानून अप्रभावी है। नियम व्यवस्था बदलने की आवश्यकता है। सुधार करने की आवश्यकता है। अभी तक जितने मुद्दे गिनायें उन सब में रिफॉर्म की आवश्यकता बताई गई है। जो बाकि रह गये, गिनाने पर उनका भी लगभग ऐसा ही हाल है। प्रशासनिक रिफॉर्म, एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म अति आवष्यक है।

अभी तक गिनायें सभी रिफॉर्म को लागू करने के लिए सबसे पहले चुनाव प्रणाली और पार्टी तन्त्र के रिफॉर्म आने चाहिए। राजनीतिक पार्टीयां अपने स्वार्थ में निर्णय लेती हैं। पार्टी अधिकारी और जनप्रतिनीधि अपनी खुदगर्जी में लग जाते है। इन प्रवृतियों को रोकना होगा। पार्टी तन्त्र में पारदर्शिता और लोकतान्त्रिक व्यवस्था होनी चाहिए। अपराधी तत्वों, आवंछित तत्वों को उन्हें कानून कहे या न कहे स्वयं जिम्मेवार पार्टी की तरह उन से बचना चाहिए। देश को उन से बचाना चाहिए। चुनाव और पार्टी तन्त्र में रिफॉर्म की अनेक बाते है, जो जगजाहिर है। पार्टीयां, नेता और राष्ट्र के चिंतक सब जानते हैं। आवश्यकता है गैरराजनीतिज्ञ लोगों को जन-जागरण के द्वारा इन सुधारों को लागू करने के लिए दबाव बनाना। ये सुधार मूलरूप है। चुनाव प्रक्रिया और पार्टी तन्त्र सुधार सबसे पहले लागू हो। तभी आवश्यक रिफॉर्म का कार्य करने की ढील खत्म हो सकती हैं।

चुनाव तन्त्र और संसद प्रणाली में एक आवश्यक सुधार यह होना चाहिए कि राजनीतिक पार्टीयां किसी भी हालत में अपराधी, आवंछित व्यक्तियों को स्वार्थ या दबाव में मौका न दें। ऐसा करना दायित्वहीनता में गिना जाना चाहिए। ऐसी पार्टीयों की मान्यता रद्द होनी चाहिए। राज्यसभा और राज्य के ऊपरी हाऊस (ऊपरी सदन) को रूठे हुए राजनीतिज्ञों के लिए या बचे हुए राजनीतिज्ञों के लिए शरणाग्रह नहीं होना चाहिए।

वास्तव में राज्य सभा या ऊपरी सदन एक तरह से विद्ववत परिषद् होते है। उसमें एक भी व्यक्ति राजनीतिज्ञ नहीं होना चाहिए। तभी ये सुनिश्चित हो सकेगा कि राजनीतिज्ञों के दृष्टिकोणों के लिए किए गए निर्णय, निष्पक्ष, सही और सच्चे है या नहीं। ऐसी अनेक बाते है जिनकी चर्चा इस आलेख में सम्भव नहीं है। ऐसी सब बाते सम्बन्धित अधिकारी, जनप्रतिनीधि एवं प्रशासनिक तथा न्यायपालिका को भी मालूम है। आवश्यकता है उन पर निर्णय लेकर शीघ्रता से बिना कथनी करने के अन्तर किये लागु करना है। नई सरकार को क्या करना चाहिए। किसी की भी, कैसी भी सरकार बनें उनकों राष्ट्र की आवश्यकताओं की जानकारी में किसी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए। अगर कमी है तो इच्छाशक्ति और आवश्यक संगठन की स्वीकृति की। सभी पेङ्क्षन्डग मामले जल्दी से क्लीयर करें। विकास को गति दें। महंगाई को रोकें। भ्रष्टाचार को रोकें। कल्याणकारी योजनओं को आगें बढ़ाये। कल्याणकारी योजनाओं में छीजत घटायें। सरकार फि जूल खर्चें घटायें। अपना खर्चा घटायें। बजट घाटा घटायें। नये कर न लगाये। हर एक विवाद का जल्दी से जल्दी रिफॉर्म करें। नई सरकार के सामने के लिए राष्ट्र का आदेश है:-

रिफॉर्म- रिफॉर्म – रिफॉर्म

रिफॉर्म से ही देश बदलेगा और जन-जन की आशायें पूरी हों। सरकार वही चलेगी जो गरीब की सुनेगी, सही बदलाव लायेगी।

                                    डॉ. रिखब चन्द जैन

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