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दिलों की दूरी मिटाने की जद्दोजहद

दिलों की दूरी मिटाने की जद्दोजहद

By प्रीति सिंह

भारत में पिछले कुछ दशकों से ऐसा कुछ भी नहीं देखने को मिला जैसा इस बार देखने को मिला। नमोबामा शब्द का सृजन वैश्विक स्तर पर भारत की महत्वकांक्षा को दर्शाता है और उसी के उसके अनुरूप आचरण को प्रदर्शित करता है। नमोबामा शब्द भारत और अमेरिका के विश्व पटल पर बढ़ती निकटता को दर्शाता है।

इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब गणतंत्र दिवस के अवसर पर संसार का सबसे शक्तिशाली व्यक्ति मुख्य अतिथि के तौर पर भारत में मौजूद रहा। और, यकीनन ये भी इतिहास में पहली बार ही देखने को मिला कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने सुरक्षा घेरे से खुद को तकरीबन दो घंटे तक बाहर रखा। ये अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण घटना है। अगर अमेरिका भारत को वैश्विक स्तर पर अपना स्वाभाविक सहयोगी नहीं समझता तो शायद ओबामा कभी भारत नहीं आते। ऐसा माना जाता है कि मोदी के वैश्विक स्तर पर बढ़ते कद के कारण ही ओबामा ने आगे बढ़ कर मोदी से हाथ मिलाया। ये घटना भारत के लिए ऐतिहासिक है।

मोदी ने घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्वास बहाली प्रक्रिया में आए प्रभावशाली परिवर्तन के लिए देश को बधाई दी। मोदी और बराक के बीच बढ़ती नजदीकियों ने कहीं न कहीं चीन की परेशानी को बढ़ा दिया है। हालांकि भारतीय अधिकारी चीन के प्रति सचेत हो गए हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि कुछ चीजों का स्वभाव कभी नहीं बदलता। चीन के स्वभाव से परिचित होने के बाद भी मोदी चीन के साथ समझौते और अपने रिश्ते को नया आयाम देने की कोशिशि तब से करते आ रहे हैं, जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे।

मोदी के अमेरिका के साथ पहले निकटतम संबंध रहे, लेकिन कुछ वक्त बाद रिश्तों में बदलाव हुआ और निकटता दूरियों में तब्दील हो गई। प्रधानमंत्री का पद भार संभालने के बाद एक बार फिर से मोदी की निकटता अमेरिका के साथ बढ़ गई है। उसी के परिणामस्वरूप ओबामा तीन दिवसीय भारत दौरे पर आए। ओबामा के दौरे ने भारत को ही नहीं, दूसरे ताकतवर देशों को भी अपनी क्षमता की अनुभूति करा दी। ऊर्जा समझौते पर अमेरिका के साथ सौदा अपने आप में सकारात्मकता को बयां करता है। ओबामा का भारत दौरा बेहद खास था। गणतंत्र दिवस का समारोह राष्ट्रवादी उत्साह की शानदार पेशकश थी, लेकिन बराक ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल ने इस अवसर पर सम्मलित होकर राष्ट्रीय त्योहार को और रंगारंग बना दिया।

14-02-2015

ओबामा और मोदी का एक-दूसरे से हाथ मिलाना, गले लगना, मुस्कुराहट और हंसी के साथ बात करना उनकी निकटता को दर्शाता है। हैदराबाद हाउस के लॉन में चारों तरफ टहलना, चाय पर चर्चा करना, गंणतंत्र दिवस की परेड के दौरान मंच पर लगातार बातें करना, एक के बाद एक लंबे समय तक एक-दूसरे के साथ वक्त बिताना, इस बात को सुनिश्चित करता है कि दोनों के रिश्तों में काफी सहजता है। दोनों ने दो दिन तक लगातर दुनिया की दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के साझा हितों पर विचार किया। जो लोग इस दौरे के उद्देश्य और प्रतिकात्मकता पर नजर रखे हुए थे उन्होंने भारत-अमेरिकी सिविल न्यूक्लियर डील पर पड़ी धूल को हटाने और देश के आधारभूत ढ़ांचे  में निवेश के बढ़ाने के वादों को भी देखा। भारत के सेक्यूलरिस्ट, जो लगातार ओबामा प्रशासन से मोदी के खिलाफ शिकायत करते रहते थे, उन्होंने भी अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा सिरी फोर्ट ऑडिटोरियम में दिए भाषण से खुश हुए। अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत और अमेरिका के समाज में व्याप्त अनेकता में एकता और किसी भी धर्म को मानने की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को और मजबूत बनाने की जरूरत पर बल दिया।

मोदी कहते हैं कि वो राजनीति के मैदान में नए हैं, लेकिन उनमें चीजों को पाने की ताकत और व्यक्तिगत उत्साह पिछले सात से आठ महीनों में भारत के हितों को साधने में सहायक सिद्ध हुआ है। चाहे वो अमेरिका, जापान, ऑस्टे्रलिया, चीन हो या अन्य दूसरे देश। मोदी ने कहा – ”मैं इस क्षेत्र में नया हूं, लेकिन अपने सीमित अनुभवों के आधार पर मैं कह सकता हूं कि दो देशों के बीच के संबंध कागजी कॉमा और फुल स्टॉप पर कम निर्भर करते हैं। दो देशों के संबंध उनके नेताओं की घनिष्ठता पर निर्भर करती है।’’ किसी भी देश के बीच हुए करार को गति इस आधार पर मिलती है कि दोनों देशों केराजनयिकों को एक-दूसरे को समझने का कितना मौका मिलता है। दोनों देशों के राजनयिकों के संबंधों के समीकरण कैसे हैं, ये सबसे महत्वपूर्ण बात है। मोदी जब अमेरिकी राष्ट्रपति को उनके पहले नाम बराक कहकर पुकारते हैं तो भारतीय राजनयिक दल हैरत में पड़ जाता है। मोदी कहते हैं – ”जब मैं और ओबामा कैमरे की पहुंच से बाहर होते हैं तो एक-दूसरे को काफी करीब से जानने की कोशिशि करते हैं। मैं और बराक अपनी दोस्ती को साझा करते हैं। हम दोनों के बीच ऐसा खुलापन फोन पर बात करने पर भी हमें काफी सुविधाजनक महसूस कराता है। मेरे और बराक के बीच संबंधों के ऐसे समीकरण हमें एक-दूसरे के काफी नजदीक लाते हैं। इसकी वजह से वॉशिंगटन और दिल्ली बहुत करीब-सी लगती है, अमेरिका और भारत के लोगों में भी नजदीकी नजर आती है।’’

14-02-2015

एक दक्ष राजनीतिज्ञ के तौर पर मोदी ने 66वें गणतंत्र दिवस पर नारी शक्ति के विषय को चुना। कुछ वक्त पहले ही उन्होंने हरियाणा में ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान की भी शुरूआत की है, जो कि लड़कियों के गिरते ग्राफ और महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर शुरू किया गया था। दिल्ली में गणतंत्र दिवस के मौके पर उन्होंने महिलाओं को आगे बढऩे और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने की कामना की और कहा की देश की महिलाएं भी अपने सपनों को साकार करने के लिए आगे बढ़ें। विंग कमांडर पूजा ठाकुर को 25 जनवरी पर ओबामा के सम्मान में सेना की त्रि-सेवा रक्षक के तौर पर आगे आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर नौ सेना, वायु सेना और अर्धसैनिक बालों को राजपथ पर आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

इसके बाद एक के बाद एक झाकियां निकलीं, जिसमें भारतीय नेवी में शामिल महिलाओं की झांकी भी शामिल थीं। इसे भारतीय नौसेना और नारी शक्ति के नाम से निकाला गया। गणतंत्र दिवस के मौके पर राजपथ पर किया गया प्रदर्शन मोदी की रचना का ही हिस्सा था, लेकिन उन्होंने इसे बड़ी दक्षता के साथ पेश किया। उन्होंने भारत की तीनों सेनाओं की महिलाओं की झांकी निकालकर ये दर्शा दिया कि उन्हें देश की महिलाओं और बेटियों पर बहुत गर्व है।

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