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सर्वें भवन्तु सुखिन:

शरीर रूपी यंत्र के माध्यम से हमें ईश्वरीय आज्ञाओं का पालन करना चाहिए। प्रभु कहते हैं कि– ”मनुष्य वही करता है जो वह चाहता है। पर होता वही है, जो मैं चाहता हूं। मनुष्य को वही करना चाहिए, जो मैं चाहता हूं। फिर होगा वही, जो मनुष्य चाहेगा।’’ इसलिए परमात्मा द्वारा दिए गए शरीर रूपी यंत्र के माध्यम से हमें ईश्वरीय आज्ञाओं का पालन करना चाहिए। परमात्मा कहते हैं कि– ”मनुष्य को आंखें, सुन्दर व ईश्वरीय सपने देखने के लिए दी गई हैं।’’ इसलिए व्यर्थ की चीजें हम न देखें। किसी भी चीज को देखते हुए हमारा भाव ईश्वरीय होना चाहिए। ईश्वर कहता है कि– ”मनुष्य की आंखें मेरा भरोसा है। तू इसको व्यर्थ की इच्छाओं की धूल से गंदा न कर। तेरे कान मेरी पवित्र वाणी को सुनने के लिए हैं। तेरा हृदय मेरे गुणों का खजाना है। तेरे स्वार्थ रूपी हाथ कहीं मेरे खजाने को लूट न लें।

डॉ. जगदीश गांधी

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