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दिल्ली उच्च न्यायालय की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश

मुझे अत्यंत खुशी हो रही है कि भारत के सबसे प्रतिष्ठित सार्वजनिक कार्यालय, दिल्ली उच्च न्यायालय के इतिहास में पहली बार मुख्य न्यायाधीश एक महिला बनेंगी। हम सब जानते हैं कि आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. रोहिणी की इस पद पर नियुक्ति के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी. सदाशिवम (जो आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश थे) के नेतृत्व वाली सुप्रीम कोर्ट कालेजियम के प्रस्ताव पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपनी स्वीकृति दी थी। यह सही मायने में ऐतिहासिक है। इससे महिलाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा भी मिलेगा।

यह कहने की जरूरत नहीं है कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने कई मोर्चों पर नेतृत्व किया है, लेकिन पिछले कई दशकों से महिला मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति में वह अन्य उच्च न्यायालयों से पीछे रहा है। यह अंतहीन इंतजार अब खत्म हो गया है। अब दिल्ली उच्च न्यायालय में भी एक महिला को मुख्य न्यायाधीश के रूप में शीर्ष स्थान मिलेगा। बेशक, ऐसा शायद पहली बार हुआ है कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने परिसर से पहली बार किसी महिला को मुख्य न्यायाधीश बनने के लिए भेजा था। न्यायमूर्ति लीला सेठ एक लंबे समय तक हिमाचल उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश रही हैं। लेकिन फिर भी दिल्ली उच्च न्यायालय में अब तक कोई महिला मुख्य न्यायाधीश नहीं रहीं।

21 अप्रैल 2014 को जी. रोहिणी ने औपचारिक रूप से दिल्ली उच्च न्यायालय कीपहली महिला मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार ग्रहण कर लिया। अक्टूबर 1966 में स्थापित, 47 वर्ष के इस दिल्ली उच्च न्यायालय के लिए यह एक ऐतिहासिक दिन था। उच्च न्यायालय की महापंजियक संगीता ढींगरा सहगल ने एक चर्चा में कहा कि न्यायमूर्ति जी. रोहिणी आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय की सबसे वरिष्ठतम न्यायाधीश हैं, जो 18 अप्रैल 2014 को दिल्ली पहुंचीं और 21 अप्रैल से औपचारिक रूप से अपना कार्यभार संभाल लिया।

जी. रोहिणी 1955 में पैदा हुईं और दिल्ली उच्च न्यायालय में 40 न्यायाधीशों के बीच वह 10वीं महिला जज हैं। अनुमान है कि अगर सुप्रीम कोर्ट में उनकी पदोन्नति नहीं होती है, तो वह अपेक्षाकृत चार साल की अवधि के लिए इस पद पर रहेंगी। हालांकि उनकी योग्यता और क्षमता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में उनकी पदोन्नति हो जाती है, तो चार साल की अवधि वाले कार्यकाल में कटौती हो सकती है। वर्तमान, सुप्रीम कोर्ट में केवल दो महिला न्यायाधीश हैं। न्यायमूर्ति रोहिणी की नियुक्ति का स्वागत करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय की बार एसोसिएशन ने कहा है कि इस कदम से महिला वकीलों को बढ़ावा मिलेगा और इसके साथ ही महिलाओं को कैरियर के रूप में कानून की शिक्षा करने के लिए प्रोत्साहित भी किया जाएगा। दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव खोसला ने कहा कि– ”महिला मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति से बार को बहुत खुशी हुई है’’। वास्तव में, इस नियुक्तिसे पूरा राष्ट्र खुश है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों मे महिलाओं के खिलाफ अपराधों में हुई वृद्धि के कारण दिल्ली सुर्खियों में रही है। दिल्ली में हुए निर्भया रेप केस ने पूरे देश को हिला कर रख दिया और केंद्र सरकार को महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर सख्त कानून बनाने के लिए मजबूर कर दिया।

राजीव खोसला ने कहा कि– ”हमें गर्व है। बार लंबे समय से लंबित समस्याओं को उनकी सूचना में लाएगी और उम्मीद करेगी कि वह उनका हल निकालें। उदाहरण के लिए, मध्यस्थों, कोर्ट कमिश्नर, रिसीवर की नियुक्ति हमारे लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। बार का लक्ष्य समान अवसर और न्यायिक प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखना है। यह सुनिश्चित है कि उच्च न्यायालय में उनकी मौजूदगी से हमें मदद मिलेगी। उनकी स्वच्छ और बेदाग छवि के साथ शानदार रिकॉर्ड निस्संदेह उनके पक्ष में काम करेगा और दिल्ली उच्च न्यायालय ने खुले दिल से उनका स्वागत किया है।

न्यायमूर्ति रोहिणी आंध्र प्रदेश में विशाखापत्तनम में 14 अप्रैल 1955 को पैदा हुई थीं। वह उस्मानिया विश्वविद्यालय से विज्ञान स्नातक हैं। बाद में उन्होंने आंध्र विश्वविद्यालय के कॉलेज ऑफ लॉ से प्रथम श्रेणी में कानून की डिग्री प्राप्त की।

उन्होंने 1980 में एक वकील के रूप में काम किया। अपने दो दशक के शानदार कैरियर में वह श्रम और सेवा मामलों जैसे सार्वजनिक मुद्दों से जुड़ी रहीं।

एक वकील के रूप में प्राप्त उनके समृद्ध अनुभव से सिर्फ आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ही नहीं बल्कि प्रशासनिक ट्रिब्यूनल और सिविल अदालतों में कार्य करना भी शामिल है। इतना ही नहीं उन्होंने अपनी कलम से लिखित रूप में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन दिखाया है। उन्होंने कानूनी पत्रकारिता में भी शानदार प्रदर्शन किया है। वह आंध्र प्रदेश लॉ जरनल में पत्रकार रही हैं। 1985 में, वह इस पत्रिका की कार्यकारी संपादक बनीं। यह सब उनका कौशल दर्शाता है।

लेकिन यह सब उनके लिए पर्याप्त नहीं था। न्यायमूर्ति रोहिणी आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में एक सरकारी अधिवक्ता भी रही हैं, जहां उनके कौशल समय के साथ दिखाई दिए। इस पद से उनकी बेंच को पदोन्नती दी गई और 25 जून, 2001 को उन्हें एडीश्नल जज नियुक्त किया गया। 31 जुलाई 2002 को उन्हें स्थायी जज नियुक्त किया गया। अपनी ईमानदारी से उन्होंने हमेशा एक स्वच्छ छवि बनाए रखी है और वह कभी किसी विवाद या जांच के दायरे में नहीं रही हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के प्रतिष्ठित पद पर रह कर वह न्याय की तलाश में भटकते लोगों को राहत पहुंचाएंगी।

             (प्रस्तुति: दिब्याश्री सतपथी)

संजीव सिरोही

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