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आंध्र प्रदेश में कांग्रेस फिर मुश्किल में

चुनावी झटकों के अलावा, आंध्र प्रदेश में अपने नेताओं के घोटालों में बड़े पैमाने पर संलिप्तता के कारण कांग्रेस को गंभीर शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका के फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) की जांच में राज्यसभा सांसद डॉ. के.वी.पी. रामचंद्रराव सहित छह लोग, भारत में टिटेनियम की खानें प्राप्त करने के लिए राज्य और केन्द्र सरकार को रिश्वत देने वाले अंतर्राष्ट्रीय गिरोह में शामिल होने के अपराध में पहले ही फंस चुके हैं। राज्य और केन्द्र सरकार दोनों ही एफबीआई को सौंपने की कानूनी प्रक्रिया में देरी कर उन्हें बचाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा रही हैं।

प्रर्वतन निदेशायल (ईडी) के 1.86 लाख करोड़ रूपए के कोयला घोटाले में ‘मनी लॉड्रिंग’ के कोण की जांच से पार्टी के सामने एक दूसरी समस्या खड़ी हो गई है। ईडी ने केन्द्रीय कोयला राज्यमंत्री दसरी नारायण राव और कांग्रेस सांसद नवीन जिंदल के खिलाफ ‘इन्फोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर)’ दर्ज की है, जो एफआईआर के समकक्ष है। नारायण राव एक प्रसिद्ध तेलगु फिल्म निर्देशक हैं। लगभग 150 फिल्मों का निर्देशन कर उन्होंने देश भर में एक रिकॉर्ड कायम किया है। तेलगुदेशम पार्टी के सत्ताकाल में 2004 के चुनावों में राज्य चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष की हैसियत से पार्टी के चुनाव अभियान में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इन आवंटनों में सीबीआई के संज्ञान के कारण ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट’ के तहत 35वीं स्क्रीनिंग कमिटी के सदस्यों और अधिकारियों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है।

जनवरी के शुरूआत में ईडी ने नवभारत पावर प्राइवेट लिमिटेड, ग्रेस इंडस्ट्रीज, उनके निदेशकों और कोयला मंत्रालय के अनाम अधिकारियों के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉड्रिंग ऐक्ट के संबंधित धाराओं के तहत ईसीआईआर दर्ज की थी। ईडी ने गगन स्पॉन्ग आयरन प्राइवेट लिमिटेड, जिंदल स्टील ऐंड पावर लिमिटेड, जिंदल रियलिटी प्राइवेट लिमिटेड, न्यू देल्ही एक्सिम प्राइवेट लिमिटेड और सौभाग्य मीडिया लिमिटेड सहित कई अनाम लोगों पर मनी लॉन्ड्रिंग की धाराएं लगाईं।

सूत्रों के अनुसार, एजेंसी ने जिंदल की कंपनी द्वारा हैदराबाद आधारित राव की कंपनी को कई स्तरीय लेन-देन की बात सामने आने के बाद ये आरोप तय किए और अवैध मुद्रा का प्रवाह 2008 में राव द्वारा जिंदल को झारखंड में दिए गए कोयला आवंटन में बढ़ता रहा। प्रिवेंशन ऑफ करप्शन ऐक्ट के तहत सीबीआई ने अपने आपराधिक शिकायत में इन कंपनियों और व्यक्तियों के खिलाफ आरोप तय किया। ऐंटी मनी-लॉन्ड्रिंग एजेंसियां, एफआईआर में दर्ज इन फर्मों और व्यक्तियों के खातों के लेन-देन की जांच और उनके चल और अचल संपत्तियों का मूल्यांकन कर रही हंै।

अन्य दूसरी कंपनियां जिनके खिलाफ केस दर्ज किए गए हैं उनके नाम हैं – कॅस्ट्रॉन टेक्नोलॉजी लिमिटेड, झारखंड इस्पात प्राईवेट लिमिटेड, पुष्प स्टील ऐंड माइनिंग प्राईवेट लिमिटेड, ग्रेस इंडस्ट्रीज, आरएसपीएल, ग्रीन इन्फ्रास्ट्रक्चर, हिंडाल्को, बीएलए इंडस्ट्रीज और नवभारत पावर प्राइवेट लिमिटेड।

 

बगावत का मूड?

कोयला घोटाले में ईडी द्वारा आरोप तय करने के दो दिन पहले और सीबीआई के एफआईआर में नाम आने के बाद, दसरी नारायण राव ने अपना 70वां जन्मदिन मनाया। इस मौके पर उन्होंने कांग्रेस हाईकमान को विद्रोही अंदाज में चेतावनी दे दी। यद्यपि लगभग 2 वर्षों तक जब इस तरह के आरोप राजनीतिक गलियारों में गुंज रहे थे, तब वे शांत रहे, लेकिन पहली बार उन्होंने खुद को निर्दोष बताया है।

उन्होंने अपराधभाव से मुक्त स्वर में कहा – ”ये निर्णय अकेले मेरे द्वारा नहीं लिया गया। इसमें कई आईएएस अधिकारी और प्रक्रिया के विभिन्न चरण शामिल थे। लेकिन एक मंत्री होने के नाते अंतोगत्वा मैंने त्यागपत्र दिया।’’ उन्होंने सारा दोष प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह पर मढ़ते हुए कहा कि कनिष्ठ मंत्री होने के नाते अगर उन्होंने कोई गलती की होती तो प्रधानमंत्री उन्हें बाहर का रास्ता दिखा देते। उन्होंने कहा – ”संसदीय लोकतंत्र में सबकुछ प्रधानमंत्री के मेज पर जाकर ठहर जाता है। मेरा विश्वास है कि सत्य एक दिन जरूर सामने आएगा। लोग हंसते हैं, जब वे सुनते हैं कि दसरी नारायण राव ने 2 करोड़ रूपए की रिश्वत ली है।’’

राव पर आरोप है कि कोल ब्लॉक्स के आवंटन में लाभुकों के साथ मिलकर उन्होंने स्क्रीनिंग कमिटी को प्रभावित करने की कोशिश की। उनका बयान पूर्व कोयला सचिव पी.सी. परख द्वारा जारी किए गए अपने संस्मरण के अगले दिन आया, जिसमें भ्रष्टाचार में लिप्त अपने मंत्रियों पर नियंत्रण रखने में प्रधानमंत्री के असमर्थ होने का आरोप लगाया गया है। राव ने कहा – ”परख किताब लिखें या फिल्म बनाएं, मुझे कोई समस्या नहीं है। लेकिन… उन्होंने यह गलत आरोप लगाया है कि मेरे सचिव ने पैसे की मांग की। परख का आरोप है कि जब उन्होंने बिडिंग का प्रस्ताव रखा, मैंने इंकार कर उनके साथ सहयोग नहीं किया। कुछ व्यवहारिक मुद्दे थे, कुछ राजनीतिक समस्याएं थीं, इसलिए हमने इन मुद्दों को सामने रखा। यदि मैं गलत था तो प्रधानमंत्री को मुझे बाहर का रास्ता दिखा देना चाहिए था।’’

कांग्रेस पर दोष

कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ नारायण राव के असंतोष के पीछे राजनीतिक कारण हैं। वाई.एस. जगमोहन रेड्डी द्वारा हाल ही में बनाए गए वाईएसआर कांग्रेस में कई विधायकों के जाने के कारण, सरकार को बचाने के लिए के. चिरंजीवी की प्रजा राज्यम पार्टी का कांग्रेस में विलय के बाद, उन्हें कांग्रेस में बहुत शोहरत मिली थी। दसरी और चिरंजीवी दोनों की कपु समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, जो मतदाता की हैसियत से काफी महत्व रखते हैं। कांग्रेस ने राज्यसभा का सदस्य बनाने के बाद चिरंजीवी को पार्टी की गतिविधियों में शामिल करने की बहुत कोशिश नहीं की। बाद में चिरंजीवी को कैबिनेट मंत्री बनाया गया। पार्टी द्वारा तिरष्कृत किए जाने से गुस्साए राव ने कहा कि कांग्रेस ने उनका जरूरत के अनुसार इस्तेमाल किया और समस्या में कभी साथ नहीं दिया। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश में कांग्रेस उनके कारण दोबारा सत्ता में आई। लेकिन मैं किसी का सहयोग नहीं लूंगा और निर्दोष साबित होउंगा। उन्होंने धमकी देते हुए यह भी कहा कि अगर उन्होंने मुंह खोला तो पार्टी के कई नेताओं के चेहरे बेनकाब हो जाएंगे।

हैदराबाद से चौधरी नरेन्द्र

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