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दिल, विल, प्यार, व्यार, मैं क्या जानूं रे…

प्यार दीवाना होता है, मस्ताना होता है। उम्र नहीं देखता। रूप-रंग नहीं देखता। बंधनों से परे एक दूसरे को आत्मसात करने वाली ऐसी क्रिया जहां एकाकार होकर प्रेमी-प्रेमिका एक दूसरे के सिवाय किसी की परवाह नहीं करते। कोई भी डोर, दीवार, मर्यादा, परंपरा, नैतिकता लांघ जाते हैं। अल्हड़ता, कामुकता, मादकता, सौंदर्य, एक दूसरे के प्रति चाह सहज, सरल होकर जीन में प्रवाहित होने लगती है। इसलिए प्रेम को अंगारों (समाज की रीतियां-नीतियां, परंपराएं) से दहकता वह दरिया कहा जाता है जहां से मोम के पुतले का प्रेमी, लाख (अत्यंत ज्वलनशील) के बने घोड़े पर सवार होकर प्रेम का भाव लिए गुजरता है।

महाराज उदयन के सामने पलक भर वासोदत्ता आई तो वह घायल हो गए। विख्यात नाटककार भास का अभिनेता उदयन वासोदत्ता के सौंदर्य से रीझकर रीति, नीति परंपरा, सुध-बुध सब खो बैठा। वासो के कटाक्ष से निमग्न दिल ऐसा बींधा कि बोल पड़े – कामदेव के पास तो पांच बाण हैं। छठवां कहां से आकर उन्हें लग गया। उदयन की यह पंक्तियां दिग्गी पर भी सटीक बैठती हैं।

कामेनोज्जैयिनीम् गते मयि तदा कामप्यवस्थाम् गते।

दृष्ट्वा स्वैरमवन्तिराजतनयाम् पंञ्चेषव: पातिता:।।

तैरद्यापि सशल्य मेव हृदयम् भूयश्च विद्धा वयवयम्।

पंञ्चेसुर मदनो यदा कथमयम् षष्ठ: सर: पातित:।।

पत्नी आशा सिंह की फरवरी 2013 में कैंसर की पीड़ादायी बीमारी से मृत्यु के बाद विधुर हुए कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह फिर से दांपत्य के आनंद की तरफ हैं। उन्हें राज्यसभा टीवी की एंकर अमृता राय से प्रेम हो गया है। 67 साल के दिग्विजय ने 43 साल की विवाहित अमृता से खुलकर अपने प्यार का इजहार किया है। अमृता को भी दिग्विजय का प्यार कुबूल है। जानकार बताते हैं कि करीब दो साल से अधिक समय से कांग्रेस महासचिव और राय एक दूसरे में रच-बस रहे हैं। अवसर देखकर पिछले महीने की 10 तारीख को दिग्गी ने अपने इस प्यार का संकेत दिया और 30 अप्रैल आते-आते इंटरनेट से छनकर आई कुछ तस्वीरों ने पूरा राज खोल दिया। इन तस्वीरों के सामने आने पर पहले अमृता झुंझलाई। अपना ई-मेल अकाऊंट हैक किए जाने से तिलमिलाई और दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा में इसकी शिकायत भी दर्ज करा दी। पुलिस इन तस्वीरों को सार्वजनिक करने वाले सूत्र की तलाश में जुटी है, लेकिन अमृता ने पहले थोड़ी ना-नुकुर और फिर बेबाकी से अपना प्यार कुबूल कर लिया। पति से तलाक की अर्जी दाखिल किए जाने और तलाक मिलने के बाद आगे की औपचारिकता (शादी) पूरी करने की जानकारी दी। अमृता के पति और भारतीय जनसंचार संस्थान के एसोसिएट प्रोफेसर आनंद प्रधान ने भी इस रिश्ते को अपनी सहमति दे दी है। दिग्विजय के पुत्र युवराज जयवद्र्धन सिंह ने भी पिता के प्रेम को अपना सहयोग और समर्थन दे दिया है।

कैसे चढ़ा परवान

जानकार बताते हैं कि सिलसिला 2010 में शुरू हुआ। संसद की कैंटीन में पत्रकारिता से जुड़े क्रम में दिग्विजय से मुखातिब हुई अमृता उस दिन भगवा साड़ी में थी। दिग्विजय की आदत है कि वह मन में आई बात बोलने का कोई बहाना ढूंढ लेते हैं। अंदाज भी कुछ ऐसा होता है कि सामने वाला तात्कालिक प्रतिक्रिया की स्थिति में नहीं रहता। उस दिन भी यही हुआ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से दोस्ती भरा बैर रखने वाले दिग्गी ने उसी संघ को निशाने पर लेकर अमृता पर टंट कस दिया – ”आरएसएस ज्वाइन करने वाली हैं क्या?’’ कहते हैं शब्द आए और वक्त गुजर गया, लेकिन मन पर एक छाप छोड़ गया। अमृता के बारे में मीडिया जगत में भी चर्चा है कि वह भली, मिलनसार हैं। सामाजिक, साहित्यिक विषयों में रुचि है। कविताओं में दिलचस्पी रहती हैं। भावुक और कोमल भी हैं। लिहाजा उन्हें दिग्गी का यह तीर कुछ असर कर गया। इसके बाद यह सिलसिला चल निकला। दोनों एक दूसरे का सहयोग करते रहे। संवाद का सिलसिला चलता रहा। फुर्सत के क्षणों में मिलते रहे। अमृता हंसमुख, फनी दिग्गी को गंभीरता की सलाह देती रही और दिग्विजय भी उनके प्रोफेश्न, टीवी टॉक शो की तैयारी में सहायता या गलतियों पर शिकायत करते रहे। चिढ़ाते-बिराते, हंसाते रहे। दिसंबर 2013 आते-आते आपस का नाता पूरी रंगत में आ गया। इस बीच, संवादों का आदान-प्रदान, संदेशों, ई-मेल, फोटो से संवाद, विरह, वियोग, विछोह की बातें सब कुछ हुई। और यह सब होते-होते प्यार…।

क्या है प्यार

प्यार दीवाना होता है, मस्ताना होता है। उम्र नहीं देखता। रूप-रंग नहीं देखता। बंधनों से परे एक दूसरे को आत्मसात करने वाली ऐसी क्रिया जहां एकाकार होकर प्रेमी-प्रेमिका एक दूसरे के सिवा किसी की परवाह नहीं करते। कोई भी डोर, दीवार, मर्यादा, परंपरा, नैतिकता लांघ जाते हैं। अल्हड़ता, कामुकता, मादकता, सौंदर्य, एक दूसरे के प्रति चाह सहज, सरल होकर जीन में प्रवाहित होने लगती है। इसलिए प्रेम को अंगारों (समाज की रीतियां-नीतियां, परंपराएं) से दहकता वह दरिया कहा जाता है जहां से मोम के पुतले का प्रेमी, लाख (अत्यंत ज्वलनशील) के बने घोड़े पर सवार होकर प्रेम का भाव लिए गुजरता है।

कौन हैं अमृता राय

अमृता राज्यसभा टीवी में एंकर हैं। वह इससे पहले एनडीटीवी और जीटीवी से जुड़ी हुई थीं। उन्होंने अपना करियर बीएजी फिल्म्स से शुरू किया था। कुछ समय तक स्टार टीवी (अब एबीपी न्यूज)में भी काम किया है। एनडीटीवी में जाने से पहले वह सीएनबीसी से जुड़ी थी। तब वह राहुल देव के टीम की सदस्य थी। समाज और साहित्य अमृता की रूचि से जुड़े विषय हैं।

कैसे खुला राज

अमृता राय का कहना है कि किसी ने उनके ई-मेल में सेंधमारी की और निजता में यह छेड़ा-छेड़ी की है। इस संदर्भ में उन्होंने दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने आईटी ऐक्ट की धारा 66ए, आईपीसी एक्ट की धारा 509 के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करके जांच शुरू कर दी है। इसके लिए साईबर विशेषज्ञों की भी मदद ली जा रही है।

इस संदर्भ में भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी के फर्जी मेल अकाऊंट से भी तस्वीरों के जारी होने के संकेत हैं। गडकरी ने दिल्ली पुलिस की अपराध शखा को जानकारी देते हुए शिकायत दर्ज कराई है कि उनके नाम से तीन फर्जी अकाऊंट चल रहे हैं।

इंटरनेट पर छाए दिग्गी-अमृता

ट्विटर, फेसबुक, गूगल समेत अन्य वेबसाईटों पर दिग्गी-अमृता छाए हुए हैं। दोनों के बारे में जानने के लिए लोगों में दिलचस्पी बढ़ गई है। राज खुलने के दो दिन के भीतर 50 लाख लोगों ने इन्हें सर्च किया और अब यह संख्या एक करोड़ को पार कर रही है।

दिग्गी का कुबूलनामा

मुझे टीवी पत्रकार अमृता राय के साथ अपने संबंधों को स्वीकारने में कोई झिझक नहीं है क्योंकि अमृता और उनके पति आपसी सहमति से तलाक के लिए अर्जी दायर कर चुके हैं। इसका फैसला होने के बाद हम शादी करेंगे।

अमृता राय

मैं अपने पति से अलग हो चुकी हूं और हमने आपसी सहमति के आधार पर तलाक की अर्जी दी है। इसके बाद मैंने दिग्विजय से शादी का फैसला किया है।

जयवद्र्धन सिंह

पिता का दूसरी बार शादी करने का मामला पूरी तरह से उनका निजी मामला है। इसमें मेरा उन्हें पूरा सहयोग और समर्थन रहेगा।

दिग्गी और उनका राघोगढ़

ठिकाना (राघोगढ़) के दिग्विजय सिंह 13 वें राजा हैं और उन्होंने राघोगढ़ की महारानी ढूंढ ली है। 67 साल के दिग्विजय स्क्वैश खेलते थे। वह राष्ट्रीय स्क्वैश चैंपियनशिप में हिस्सा ले चुके हैं। मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बैचलर दिग्विजय राजनीति और समाज का अच्छा रसायन मिलाने में माहिर हैं। वह कांग्रेस के रणनीतिकारों में हैं और जब भी पार्टी या यूपीए सरकार किसी दुविधा में नजर आई दिग्विजय ने अपने अंदाज में राजनीतिक मोर्चा खोलकर रास्ता निकालने का प्रयास किया। इसमें कई बार उनकी आलोचना भी हुई लेकिन वह अपने अभियान से भटके नहीं। चाहे अरविंद केजरीवाल के अण्णा आंदोलन के दौरान राजनीतिक महत्वाकांक्षा पर सवाल रहा हो, या योग गुरू रामदेव या फिर मुंबई में उत्तर भारतीयों पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना या शिवसेना का उत्पीडऩ अभियान, दिग्विजय कभी पीछे नहीं हटे। शिवसेना के स्व. बाला साहेब ठाकरे के पूर्वजों का बिहार से संबंध होने का ताना भी उन्होंने ही दिया था। इसी क्रम में कई बार उनका दांव उल्टा भी पड़ा।


दिग्गी राजा के चेहरे से बरसता नूर


भारत एक पारंपरिक देश है, जहां परंपरा लोगों की भावना से सीधे दिल से जुड़ी है। इस परंपरा में नैतिकता का सर्वोच्च स्थान है। यह नैतिकता चाहे प्रत्यक्ष रूप से धर्म से जुड़ी हुई हो या फिर अप्रत्यक्ष रूप से समाज से, इसके मानदंड को नकारने वाले व्यक्ति को समाज आज भी हेयदृष्टि से देखता है। लेकिन मामला जब महिला-पुरूष संबंधों का हो तो नैतिकता का यह आवरण मर्यादा में बदलकर और भी घना हो जाता है।

महात्मा गांधी कहते थे – ”मेरा जीवन ही मेरा संदेश है।’’ संदेश वही दिया जाता है, जो समाज के लिए उत्कृष्ट हो। गांधीजी का यह कथन किसी व्यक्ति के निजी और सार्वजनिक जीवन के भेद को खत्म करता था। गांधीजी के संपर्क में आने के बाद, उनके ब्रह्मचर्य से प्रभावित होकर जयप्रकाश नारायण संतान-सुख से वंचित रह गए।

दिग्विजय सिंह के टीवी पत्रकार अमृता राय के साथ संबंधों को लेकर सार्वजनिक जीवन सादगी और सदचरित्रता की आशा रखने वाले लोगों को निश्चित रूप से आघात लगा होगा। लेकिन, अगर नैतिकता और अन्य सामाजिक बंधनों की बातों को एक तरफ रखकर, बदलते समाज के दायरे में बात की जाय तो दिग्विजय सिंह ने अपने संबंधों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने का साहस दिखाया है। इसी भारतीय राजनीति के कई शिखर पुरूषों पर महिला-संबंधों को लेकर कई तरह के आरोप लगे, लेकिन वे सार्वजनिक रूप से इसे स्वीकार करने का साहस नहीं दिखा पाए। जवाहरलाल नेहरू, डॉ. लोहिया, संजय गांधी, जॉर्ज फर्नांडिस, कई राजनेताओं पर इस तरह के आरोप लगे, लेकिन न ही इसे स्वीकार करने का साहस नहीं दिखाया। अपनी बेबाकी और राजनीतिक धार के लिए पहचाने जाने वाले दिग्विजय सिंह ने इसे न सिर्फ सहर्ष स्वीकार किया, बल्कि इस रिश्ते को शादी के अंजाम तक पहुंचाने की भी बात कही।

दुनिया में अभी तक कोई ऐसा यंत्र नहीं बन सका है, जिसके माध्यम से किसी के मन की भावनाओं को जाना जा सके, लेकिन प्यार एक ऐसी भावना है, जिसमें सम्मोहन होता है। जिसमें एक-दूसरे के ख्यालों की प्रगाढ़ता होती है, वहीं विचारों की लोच भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। अमेरिका की ख्यात मनोविज्ञानी हेलेन फिशर के अनुसार प्यार की तीन अवस्थाएं हैं। पहली अवस्था में मोह, दूसरी अवस्था लगाव और अंतिम अवस्था गहरे भावनात्मक लगाव से जुड़ा है। इन तीनों ही अवस्थाओं में शरीर में हार्मोन के स्तर में बदलाव आने लगते हैं। लेकिन उम्र के इस पड़ाव पर दिग्गी राजा में कितनी हार्मोनल परिवर्तन हो रहे हैं, यह बात मेडिकल साइंस ही बता सकता है। लेकिन आज दुनिया में बढ़ते भौतिकतावाद और टूटते परिवार के कारण हर व्यक्ति उम्र के हर दहलीज पर भावनात्मक सहारे की जरूरत महसूस करता है। भावानात्मक सहारे की बढ़ती उम्र के साथ और तीव्र होती जाती है। इसे आधुनिक समाज में दूसरे नजरिए से देखा जाता है। कुछ लोग इसे रूढि़वादिता का त्याग मानते हैं, तो कुछ लोग इसे अपनी जरूरतों, चाहे वह शारीरिक हो या मानसिक, के प्रति मुखरता मानते हैं। दिग्विजय सिंह भी विधुर हैं और अमृता राय का भी अपने वर्तमान पति के साथ तलाक की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में दोनों को ही एक मजबूत जीवनसाथी की जरूरत थी, जिसके साथ वे अपनी भावनाओं को साझा कर सकें।

नैतिकता की दुहाई देने वाले लोग दिग्विजय सिंह के इस निर्णय को भले ही अनुचित ठहराएं, लेकिन उनके इस निर्णय से युवा वर्ग के चेहरे पर आई तिरछी मुस्कान दिग्गी राजा के इस निर्णय को स्वीकारोक्ति देने के लिए पर्याप्त है और यह भी बताने के लिए काफी है कि सार्वजनिक जीवन के नाम राजनेताओं के उपर लादे जाने वाले निजी मामलों को वे तरजीह नहीं देते।

सुधीर गहलोत


दिग्गी का परिवार

दिग्विजय चार पुत्रियों (मृणालिनी, मंदाकिनी, मर्दिमा, कर्णिका) और राघोगढ़ के विधायक युवराज जयवर्धन सिंह के पिता हैं। बड़ी पुत्री मृणालिनी की आयु उनकी भावी पत्नी अमृता के लगभग बराबर है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मृणालिनी का विवाह 1992 में राजकुमार रत्नाकर सिंह से हुआ था और मृणालिनी तथा राजकुमार चार पुत्रियों के माता-पिता हैं। युवराज जयवर्धन सिंह भी अभी अविवाहित हैं।

परिवार में उठी विरोध की आवाज

कहते हैं आज बोइए और कल काटिए। अपने प्रेम को लेकर दिग्विजय को भी इसका सामना करना पड़ रहा है। उनकी भयहू (छोटे भाई की पत्नी) रूबीना शर्मा सिंह ने दिग्विजय सिंह पर ताना जड़ दिया है। रूबीना सवाल पूछ रही हैं आखिर उम्र में करीब 23 साल छोटी और गैर राजपूत परिवार की अमृृता राय से दिग्विजय सिंह अब कैसे शादी कर रहे हैं?

दरअसल, 14 जनवरी 2002 को दिग्विजय सिंह के छोटे भाई लक्ष्मण सिंह ने रूबीना शर्मा से दूसरी शादी की थी। जब लक्ष्मण रूबीना को अपनी पत्नी बनाने की प्रक्रिया में थे तो परिवार में उनका जमकर विरोध हुआ था। कहा जाता है दिग्विजय के उकसावे पर लक्ष्मण की बेटी और बेटे ने पिता के दूसरे विवाह का विरोध किया था। यहां तक कि दिग्विजय सिंह ने भी यह कहकर विरोध किया था कि रूबीना लक्ष्मण से करीब 13 साल छोटी हैं। वह राजपूत परिवार से भी नहीं हैं। हालांकि लक्ष्मण ने ऐसे किसी विरोध की परवाह नहीं की। इस समय वह विदिशा सीट से भाजपा की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज के विरूद्ध कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं।

समानता है दिग्गी और लक्ष्मण में

लक्ष्मण और दिग्गी में काफी समानताएं हैं। दोनों प्रेमी हैं। दोनों ने अपनी पत्नियों की मृत्यु के बाद प्रेम विवाह का निर्णय लिया। दोनों की प्रेमिकाएं उनसे उम्र में छोटी, पढ़ी लिखी, अत्मनिर्भर हैं। दु:खद तथ्य यह भी है कि दोनों की पत्नियों को कैंसर जैसी बीमारी से जूझना पड़ा। छोटे भाई लक्ष्मण की पत्नी जागृति सिंह काफी पहले दुनिया छोड़ गईं और दिग्गी की पत्नी आशा सिंह पिछले साल 27 फरवरी को पंचतत्व में विलीन हुई थीं।

लक्ष्मण को भी दिग्गी की तरह हुआ था प्यार

जानकार बताते हैं कि रूबीना शर्मा कैंसर कंसल्टेंट थीं। लक्ष्मण की पत्नी जागृति इस बीमारी से जूझ रही थीं। जागृति की तीरमारदारी के क्रम में रूबीना का लक्ष्मण के घर तक आना-जाना हुआ। रूबीना ने लक्ष्मण का संयम, पत्नी के प्रति सेवा भाव, ख्याल देखा और लक्ष्मण को रूबीना में गुण दिखाई दिए। कश्मीरी पंडित रूबीना लक्ष्मण को भा गई। प्रभावित होने का सिलसिला चल निकला और अंत में दोनों ने शादी का फैसला कर लिया।

दिग्गी से पहले का साहस

नंदमूरि तारक रामाराव (एनटीआर) तब आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। कद्दावर नेता थे। उनके मंत्रिमंडल में दामाद चंद्र बाबू नायडू भी थे। बेटा विधायक था और तब 70 वर्षीये एनटीआर ने तेलगू भाषा की लेखिका लक्ष्मी पार्वती में रुचि दिखाई थी। संभवत: तब भी डी. पुरंदेश्वरी की उम्र लक्ष्मी के ही बराबर रही होगी। एनटीआर की बेटी और बेटे लक्ष्मी से उम्र में बड़े थे। लेकिन वह लक्ष्मी पर मोहित हो गए। विवाह का फैसला किया, परिवार में उठ रहे विरोध के सुर को नजरअंदाज किया। जब तक एनटीआर जीवित रहे, दोनों साथ रहे। लक्ष्मी को परिजनों की आंच से बचाया लेकिन एनटीआर के अंतिम सांस लेते ही उनके शव यात्रा के वाहन से लक्ष्मी पार्वती को जबरिया परिजनों ने उतार दिया।

शशि थरूर-सुनंदा पुष्कर

दोनों की तीसरी शादी थी। विदेश सेवा की नौकरी के बाद राजनेता बने शशि थरूर को बिजनेस वूमेन सुनंदा भा गई। कश्मीरी मूल की सुनंदा पर शशि का दिल आया और कुछ साल के रोमांस के बाद उन्होंने केरल के अपने गृह नगर पलक्कड़ में 2010 में रीति-रीवाज के साथ विवाह रचा लिया। जबकि तब सुनंदा का बेटा बालिग होने की दहलीज पर था। शशि थरूर की पिछली पत्नियों की संतान भी वयस्क और विदेश में अपने प्रोफेशन में व्यस्त थीं। अहम यह भी है कि तब वह विदेश राज्यमंत्री थे। लेकिन रिश्ता सुनंदा के चेहरे में हंसी नहीं ला सका। सुनंदा को पाकिस्तान की पत्रकार मेहर तरार पर थरूर पर डोरे डालने का शक हुआ। कुछ इसी तरह के तनाव के बीच इसी साल 17 जनवरी को वह दिल्ली के चाणक्यपुरी क्षेत्र के लीला होटल में मृत पाई गईं।

चंद्र मोहन और अनुराधा बाली

चंद्र मोहन हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल के बेटे हैं। तब हरियाणा के उप मुख्यमंत्री थे और अचानक लापता हो गए। सुराग न मिलने पर उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। लेकिन एक वकील जिसे चंद्र मोहन ने राज्य सरकार का उप महाधिवक्ता बनवा दिया था। दोनों ने मीडिया को जानकारी दी कि वह धर्म परिवर्तन करके निकाह कर चुके हैं। चंद्र मोहन अब चांद मोहम्मद और बाली अब फिजा बन चुकी थीं, लेकिन कुछ ही महीने के भीतर अनबन, अलग रहने की खबर आने लगी। बाद में फिजा पंचकुला स्थित अपने आवास पर रहस्यमय परिस्थिति में मृत पाई गई।

मुलायम सिंह यादव और साधना

मुलायम सिंह यादव भी इस मामले में छुपे रुस्तम हैं। 2007 तक सार्वजनिक जीवन में केवल इस पर खुसर-फुसर होती थी लेकिन पहली पत्नी और अखिलेश की मां मालती देवी के मई 2003 में निधन के कुछ साल बाद फरवरी 2007 उन्होंने इस रहस्य से पर्दा उठाया। उच्चतम न्यायालय को जानकारी दी कि उनकी दो पत्नियां थीं जिनमें एक साधना यादव हैं। साधना और मुलायम के ही बेटे प्रतीक यादव हैं।

मुथुवेल करूणानिधि

तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि इस मामले में सब पर भारी हैं। उनके तीन पत्नियां थीं, जिनमें दयालु अम्मल, रजाथी अम्मल अभी जीवित हैं। जबकि पद्मावती अम्मल की मृत्यु हो चुकी है।

राम विलास पासवान-रीना

राम विलास पासवान की पहली पत्नी राजकुमारी देवी हैं। वह अब भी बिहार के खगडिय़ा जिले में रहती हैं। उनसे पासवान की दो बेटियां आशा और उषा हैं। लेकिन 80 के दशक में पासवान का दिल पंजाबी ब्राह्मण बाला और एयर होस्टेस (विमान परिचारिका) रीना शर्मा पर आ गया। 1983 में राजकुमारी से अलग होकर पासवान ने रीना से विवाह कर लिया और अब वह पासवान के साथ साये की तरह रहती हैं।

नारायण दत्त तिवारी-उज्ज्वला

बेटे रोहित शेखर का भला हो जिसने नारायण तिवारी को उनका 60 के दशक का प्यार लौटा दिया। कई दशक बाद उज्ज्वला और तिवारी लखनऊ के आरोही आवास में साथ-साथ रह रहे हैं। रोमांटिक मिजाज के हरफन मौला तिवारी जब गुनगुनाते हैं तो उज्ज्वला भी साथ देती हैं और उनके मुंह से अनायास निकल पड़ता हैं – अच्छा गाती हो। इस प्रेम कहानी का एक दुखांतक पक्ष भी है। 2008 में तिवारी के बेटे शेखर को यह अधिकार पाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। काफी जद्दो-जहद, डीएनए टेस्ट जैसी प्रक्रिया के बाद तिवारी ने शेखर को बेटा माना। उज्ज्वला, तिवारी के जवानी के दिनों का प्यार थी, जिस पर तिवारी पर्दा डालने में सफल रहे। जीवन का अधिकांश हिस्सा उन्होंने अपनी पहली पत्नी सुशीला के साथ गुजार दिया।

यहां भी खूब जली प्यार की आग अमर मणि त्रिपाठी-मधुमिता

उ.प्र. के पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी को भी कवियत्री मधुमिता शुक्ला भा गई। लेकिन एक दिन मधुमिता की उसके ही घर में किसी ने गोली मारकर हत्या कर दी। जांच में पता चला कि वह प्रेग्नेंट (गर्भवती) थी। हत्या के षड्यंत्र का शक अमरमणि और उनकी पत्नी पर गहराया। दोनों को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया और अमरमणि को इस मामले में अदालत ने उम्रकैद की सजा सुना दी।

महिपाल मदेरणा-भंवरी देवी

राजस्थान के कद्दावर जाट नेता पारसराम मदेरणा के पुत्र और राजस्थान के तत्कालीन मंत्री का दिल एक नर्स भंवरी देवी ने जीत लिया। आए दिन वह उस पर लट्टू रहते थे। जबकि महिपाल की पत्नी और बेटियां थीं। ऐसा कहा जाता है कि भंवरी ने महिपाल के साथ अंतरंग संबंधों की सीडी को आधार बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। इसके चलते लोगों ने उसे ठिकाने लगा दिया। इस आरोप में महिपाल की गिरफ्तारी हुई, उन्हें राज्य सरकार के कैबिनेट से भी हटना पड़ा।

गोपाल कांडा-गितिका शर्मा

हरियाणा सरकार के इस मंत्री का दिल एयर होस्टेस पर आ गया। पत्नी के रहते हुए गोपाल ने गितिका का यौन उत्पीडऩ किया। नतीजतन गीतिका ने एक दिन ऊबकर आत्महत्या कर ली। उसने अपने सुसाइड नोट में कांडा को भी इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। फिलहाल कांडा जमानत पर रिहा हैं।

कैप्टन अमरिंदर सिंह-अरूसा आलम

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भी इस कड़ी में शुमार हैं। पाकिस्तान की पत्रकार अरुसा आलम के मुताबिक कैप्टन और वह दोस्त हैं और रहेंगे। कहते हैं कि 2007 में मुख्यमंत्री रहने के दौरान कैप्टन पाकिस्तान गए थे और वहां अरुसा मिल गईं। बाद में अरुसा चंडीगढ़ तक आई और संवाददाता सम्मेलन में कैप्टन से अपनी नजदीकियों का दावा किया। कैप्टन अमरिंदर सिंह विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर के पति भी हैं।

रंजना पाठक

 

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