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मोदी के अमेठी वार से क्या राहुल उबर पाएंगे?

नरेंद्र मोदी ने 5 मई को अमेठी में जो मंजर दिखाया, इसके पहले कोई भी नेता वह करने की हिम्मत तक नहीं जुटा पाया था। इसका असर इतना व्यापक था कि वंशवाद के अजेय गढ़ के मिथक के पाए थर्रा उठे। अहंकारी खानदान को भी अपमान का नाटक रचकर मतदान बूथ पर इसका बदला लेने का आह्वान करना पड़ा। यह कैसा नाटक था! इससे गरिमामय तो यह होता कि खानदान की ओर से मोदी के आरोपों का एक-एक कर जवाब दिया जाता। मोदी के अमेठी जाने से खानदान के वफादारों ने यह रोना-गाना भी शुरू कर दिया कि एक-दूसरे के क्षेत्र में पांव न रखने के तथाकथित अघोषित आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया गया। लेकिन मोदी वंशवाद के गढ़ को चुनौती देने पहुंचे तो अमेठी के लोगों ने उन्हें हाथोंहाथ उठा लिया। हाल के दौर में अमेठी में किसी नेता के ऐसे भारी स्वागत की नजीर नहीं मिलती।

भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के लिए ऐसी विशालकाय भीड़ उमड़ी, मानो अमेठी के लोगों की आंखें लंबे समय से मोदी को देखने को प्यासी थीं। चार दिनों से हवा में अटकलें थीं। रायबरेली से सुल्तानपुर, प्रतापगढ़ से अमेठी के राजमार्ग पर मोदी के शो की बातें हर जुबान पर कायम थीं। गांव-कस्बे और घरों की छतों पर भाजपा के झंडे लहरा रहे थे। सड़कों के किनारे चारों ओर भाजपामय हो गया था। मोदी का आकर्षण आसपास के इलाकों से भी लोगों को खींच लाया। नौजवान मोटरसाइकिलों पर भाजपा के झंडे लहराते दौड़ रहे थे। मोदी की सामान्य आम आदमी की पृष्ठभूमि भी राहुल-प्रियंका के सांमती रवैए के विपरीत अपना रंग दिखा रही थी। अमेठी के लिए यह ताजी हवा की तरह था, बदलाव की सुखद बयार की तरह। मोदी ने जब यह कहा कि वे पूछते हैं कि मैं हार गया तो क्या करूंगा तो तुमूल गर्जना उठी। मोदी बोले – ”मेरी चाय की दुकान के बर्तन इंतजार कर रहे हैं। मैं चार बार से मुख्यमंत्री हूं, फिर भी मेरी 90 वर्ष की मां मतदान केंद्र पर जाने के लिए ऑटोरिक्शा किराए पर लेती है। राजनीति लूट के लिए नहीं है। एक आदमी को दो जून की रोटी के लिए भला कितना चाहिए?’’

असल में अमेठी बदलाव के लिए तैयार लगती है इसलिए यह मंजर तो दिखना ही था। लोग खानदानशाही की परदादा से लेकर दादी और पिता तथा भाई की कहानियां सुनते-सुनते ऊब चुके हैं। इसके अलावा अमेठी 15 लाख वोटरों को कुछ भी नसीब नहीं हुआ है। पारिवारिक नौटंकियों के कारण अमेठी तीन पीढिय़ों से आधुनिक भारत का ‘अजूबा’ बना हुआ है। कोई भी खानदान के इस गढ़ की ओर आंख उठा कर देखता नहीं। कोई शिकायत नहीं करता, कोई सवाल नहीं पूछा जाता, कोई खुला विरोध नहीं करता, बस कैमरे के सामने शाही गुणगान होता रहता है। लेकिन धीरे-धीरे सुलग रही नाराजगी को तो बस एक चिंगारी की दरकार थी। मोदी ने वही चिंगारी दे दी है।

बेशक, भारत आगे बढ़ा तो अमेठी कैसे पीछे रह सकता है? अस्सी के दशक के गौरव के दिनों की याद में खोए खानदान को वक्त गुजरने का अंदाजा ही नहीं लग पाया कि भारत अब बदल गया है। असल में मोदी पहले राजनैतिक नेता हैं जिन्होंने जाना कि 21वीं सदी का भारत क्या चाहता है। उन्होंने अमेठी के विशाल खेतों में करीब दो लाख की भीड़ को संबोधित करते हुए मोदी ने अपने भारत के दर्शन को विस्तार से बताया। यह समूची भीड़ शायद इस उम्मीद से जुटी थी कि अच्छे दिन आने वाले हैं।

लोग मोदी की हर बात को गौर से सुन रहे थे। हेलीकॉप्टर को देखकर भीड़ में गर्जना उठी, ”शेर आ गया, देखो देखो वो आया, भारत माता का शेर आया।’’ गौरीगंज के रघुवीर सिंह की दो पीढिय़ां कांग्रेस को वोट देती आई हैं। वे कहते हैं – ”यह आया मर्द, अब तक तो हमने बौनों को ही देखा है।’’ जगदीशपुर के एक दूसरे व्यक्ति कहते हैं – ”वे हमें बिजली, हमारे बच्चों को नौकरी क्यों नहीं दिला पाए?’’ लोग करीब 43 डिग्री तापमान वालीं कड़ी धूप में तीन घंटे से इंतजार कर रहे थे। इस तरह राजा-रानियों, प्रधानमंत्री और प्रतीक्षारत प्रधानमंत्री को वोट डालते आए क्षेत्र में 5 मई का दिन एक नया बिहान लेकर आया था। कहानियों से हकीकत, जकडऩ से आजादी, अनवरत वंचना से आकांक्षा की राह जोह रहे अमेठी के लोग उस शख्स को एक नजर देखने को उतावले थे, जो 2014 के चुनावों का प्रतीक बन गया है, जिसने राजनीति के मुहावरे बदल दिए हैं। देश के केंद्र में एक भारत, श्रेष्ठ भारत का सपना बुनने वाले मोदी ने उन्हें निराश भी नहीं किया।

मोदी का भाषण भी मौके के अनुकूल था। इसमें निजी सलाह से लेकर रणनीतिक आक्रामकता, इतिहास से लेकर वर्तमान, शोषण से लेकर मुक्ति का संतुलित पुट था। खानदान के लिए तय माने जाने वाले इलाके को भी पहली बार लगा कि उन्हें भी कोई अपनी बात कहने, आकर्षित करने और अनुनय-विनय का पात्र मान रहा है। अमेठी के लोगों ने इस गौरव को अनुभव किया और उन्हें लगा कि उनके पास भी विकल्प है और भविष्य में वे महज खानदान का आंगन बन कर नहीं रह सकते। अभी तक अमेठी सिर्फ कांग्रेस के शासक परिवार का साया भर बनकर ही रहा है।

मोदी ने सबसे तीखा हमला गांधी परिवार पर बोला और अमेठी में परिवार को चुनौती देने वाली स्मृति ईरानी को अपनी छोटी बहन बताया। उन्होंने राहुल और प्रियंका को इलाके के दर्जन भर गांवों के नाम भर बताने की चुनौती दी। इस तरह उन्होंने खानदान के दिखावे को तार-तार कर दिया। लोगों ने उनकी हर बात का जोरदार स्वागत किया। शायद यह इलाका इसी निजी स्पर्श का बरसों से इंतजार कर रहा था। मोदी की इस रैली से लोग राहुल-प्रियंका के एक दिन पहले फीके रोड शो की तुलना कर रहे थे, जिसमें लोगों का उत्साह इतना कम था कि कांग्रेसियों को भारी निराशा हुई। इसी वजह से कैमरे सिर्फ राहुल-प्रियंका पर ही फोकस थे, भीड़ नहीं दिखाई जा रही थी।

अमेठी में मोदी ने कहा, भाजपा ने यहां स्मृति ईरानी को राहुल गांधी के लिए समस्या खड़ा करने के लिए नहीं उतारा है। असल में देश के पिछड़ों इलाकों के विस्तृत अध्ययन और उत्तर प्रदेश के पिछड़े जिलों पर ध्यान देने की बात आई तो अमेठी को तत्काल राहत देने की बात महसूस की गई। उन्होंने कहा – ”मैं यहां आपका दुख बांटने, आपके बुरे हाल में आपका साथ देने आया हूं। मैं आपके हालात बदल दूंगा। कांग्रेस के शासकों ने जो काम 60 सालों में नहीं किया, यह सेवक 60 महीने में कर देगा। अगर मैं नाकाम रहा तो 60 महीने बाद मुझसे पूछिएगा। मैं हर पैसे का हिसाब दूंगा। मैं आपका भरोसा नहीं तोड़ूंगा।’’ मोदी ने इसी निजी स्पर्श को अमेठी के लोगों का दिल जीतने का मंत्र बनाया और लोगों को भी यह रास आया।

उन्होंने कहा, कांग्रेस छह दशकों से देश के बड़े हिस्से को अंधेरे और मध्ययुग में रखने में कामयाब हुई है। लोग अपनी छत, बिजली, साफ पीने का पानी, सड़कें, संचार, जीने योग्य स्थितियों के लिए लालायित रहे हैं। बड़े-बड़े वादों और खानदान की ओर से बड़े निवेश के प्रस्तावों के बावजूद अमेठी आज भी मध्ययुग में पड़ा हुआ है। उसकी राह के लिए सिर्फ वीआईपी क्षेत्र का तमगा है। मोदी ने गांधी परिवार पर इसी तरह वार किया।

राजनैतिक वर्ग में लूट के लिए सहमति बना ली गई कि कोई चुनौती नहीं देगा, और लोगों को अपनी बेडिय़ों से आजादी का कोई मौका नहीं मिलेगा। इस मायने में यहां मोदी किसी मसीहा की तरह आए। वे स्वर्ग उतार लाने का वादा तो नहीं करते पर यथासंभव इस इलाके को देश के बाकी हिस्सों की तरह अवसर प्रदान करने का वादा करते हैं। वे अमेठी में चौबीसों घंटे बिजली, किसानों को बेहतर बाजार मुहैया कराने, वैज्ञानिक कृषि, अच्छी सड़कें, पीने का पानी, विश्व स्तर की शिक्षा का वादा करके नए युग के मॉडल जिले का रूप देने की बात करते हैं।

मोदी के विकास का एजेंडा देश की युवा पीढ़ी को लुभा रही है। गुजरात में उनकी सफलता की कहानी बेमिसाल है। बिहार और उत्तर प्रदेश के गांवों में ऐसी कहानियां बड़े चाव से सुनाई जाती हैं कि गुजरात के हर गांव में 24 घंटे बिजली रहती है, वहां दशकों से कृषि में दहाई अंक में वृद्धि हो रही है, साणंद का वाहन उद्योग दुनिया भर में मशहूर है। देश भर के युवा नौकरी के लिए गुजरात का रुख कर रहे हैं। अब मोदी यही सब पूरे देश में करने का वादा कर रहे हैं। बड़ी बात यह है कि उनकी कामयाबियां उनकी बातों पर यकीन करने को बाध्य करती हैं।

अमेठी से आर. बालाशंकर

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