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पौष्टिक तत्वों का खजाना केला

हमारे देश में केले तराई वाले स्थानों एवं वर्षा वाले क्षेत्रों में खूब मिलते हैं। अन्य फलों की अपेक्षा केला बहुत पौष्टिक और गुणकारी होता है, लेकिन बहुतायत में मिलने से आमतौर पर लोग इसके गुणों से अनजान होते हैं। ग्लूकोज (घुलने वाली शक्कर) की मात्रा काफी अधिक होने के कारण इसकी उपयोगिता बहुत अधिक है। यह खाते समय मुंह में ही घुल जाता है तथा अमाशय में पहुंचते ही शरीर का अंश बन जाता है। इससे शरीर को तुरन्त ताकत मिलती है। मांगलिक कार्यों में भी इसकी बड़ी उपयोगिता है। यह धार्मिक कृत्यों तोरण, वेदिका मंडप आदि की सजावट में भी काम आता है।

केले के गुण

  • केले में लगभग 75 प्रतिशत जल होता है। कैल्शियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस, आयरन, आदि इसमें भरपूर मात्रा में होते हैं।
  • रक्त निर्माण में आयरन, मैग्नीशियम तथा तांबा सक्रिय भूमिका निभाते हैं। इसलिए रक्त निर्माण तथा रक्त परिशोधन में केला बहुत सहायक है। केले में कैल्शियम प्रचूर मात्रा में होता है, इसलिए यह अंातों की सफाई के लिए बहुत लाभकारी है।
  • विटामिन ‘डी’ के अलावा अन्य सभी प्रकार के विटामिन इसमें पाए जाते हैं। केले में लगभग 22 प्रतिशत कार्बोहाइ्रेट, दो प्रतिशत प्रोटीन तथा एक प्रतिशत फैट भी होता है।
  • आयुर्वेद के अनुसार पका केला शीतल, वीर्यवर्धक, पुष्टीकर, मांसवर्धक होता है। यह क्षुधा और प्यास के अतिरिक्त नेत्र रोगों तथा प्रमेह को नष्ट करता है।
  • केले का शर्बत खांसी के लिए रामबाण माना जाता है। इसके लिए पके हुए केले को काटकर उसमें चीनी मिला लें और उसे बंद मुंह वाले बर्तन में रखें और उस बर्तन को पानी में डुबो कर पानी गर्म करें। पानी के खौलने पर बर्तन नीचे उतार लें और केले को ठंडा करें। ठंडा होने पर इसे चम्मच में मथ कर एकसार कर लें।
  • आंतों के विकारों में तथा दस्त, पेचिश एवं संग्रहणी रोगों में लगभग 100 ग्राम दही के साथ दो केले सेवन करने से लाभ होता है। गाय के दूध से बनी दही के साथ पका हुआ एक केला सेवन करने से जीभ के छाले ठीक हो जाते हैं।
  • दमे के इलाज में भी केला लाभकारी होता है। इसके लिए कम पका हुआ एक केला लेकर बिना छिलका उतारे उसे बीच में चीर लें। इस चीर में जरा-सा नमक तथा काली मिर्च का चूर्ण भर दें। इस केले को पूरी रात चांदनी में रखा रहने दें। इस केले को आग पर भूनकर सुबह रोगी को खाने के लिए दें।
  • चोट या खरोंच लगने पर चोट वाले स्थान पर केले का छिलका बांधने से सूजन नहीं बढ़ती। केला सभी प्रकार की सूजन को बढऩे से रोकने में लाभकारी है। इसके नियमित सेवन से आंतों की सूजन भी घटती है। आग से जलने पर प्रभावित स्थान पर केले का गूदा फेंटकर मरहम की तरह लगाने से तुरंत आराम आता है।
  • मोटापा बढ़ाने के लिए लगभग 250 मिलीलीटर दूध के साथ दो पके केलों का एक महीने तक नियमित रूप से सेवन करना चाहिए। केला स्वास्थ्यवर्धक होता है। अत: छ: मास के शिशु को अच्छा पका केला मथकर खिलाया जाता है। दिमागी कसरत करने वालों के लिए भी केला उत्तम आहार है।

दिब्याश्री सतपथी

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