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भाजपा के घोषणा-पत्र में पूर्वांचल की छाया

भाजपा ने लंबी प्रतीक्षा के बाद लोकसभा चुनावों के लिए अपना घोषणा-पत्र जारी कर दिया। घोषणा-पत्र में अर्थव्यवस्था व आधारभूत संरचना को मजबूत करने और भ्रष्टाचार मिटाने पर भले ही जोर दिया गया हो, लेकिन उसे देखकर यह भी प्रतीत हो रहा है कि घोषणा-पत्र का फोकस अखिल भारत नहीं बल्कि पूर्वी यूपी पर ज्यादा है। पार्टी नेताओं ने इसे जारी करते हुए कहा कि घोषणा-पत्र में देश के आर्थिक हालात को सुधारने की योजना बनाई गई है। जहां तक आधारभूत संरचना का सवाल है, विनिर्माण में सुधार महत्वपूर्ण है। साथ ही इसका निर्यातोन्मुखी होना भी जरूरी है। यह अलग बात है कि घोषणा-पत्र का राष्ट्रव्यापी चेहरा दिखाने के लिए भाजपा ने ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ का नारा भी दिया है। भाजपा के घोषणा-पत्र में पूर्वांचल का दर्द उभार कर आना बुरी बात नहीं है। यह भी कह सकते हैं कि न सिर्फ बनारस से नरेन्द्र मोदी चुनाव लड़ रहे हैं, बल्कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह भी पूर्वांचल की धरती के ही रहने वाले हैं। इन सबके अलावा कुछ विवादित मुद्दों को घोषणा-पत्र में शामिल कर भाजपा अपने पुराने तेवर भी कायम करने की कोशिश करती हुई दिख रही है। घोषणा-पत्र में अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण, संविधान से धारा 370 हटाने और समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दों को शामिल किया गया है। इन मुद्दों पर अक्सर विवाद गहराता रहता है। 52 पन्नों वाले इस घोषणा-पत्र में सुशासन और समेकित विकास देने का वायदा है। एक पखवाड़े के विलम्ब से जारी इस घोषणा-पत्र में भाजपा ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए संविधान के दायरे में सभी संभावनाओं को तलाशने के अपने रूख को दोहराने की बात कही है।

घोषणा-पत्र समिति के अध्यक्ष डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने घोषणा-पत्र में शामिल बिंदुओं को तैयार करने की प्रक्रिया का खुलासा करते हुए कहा कि इसके लिए जनता से काफी सुझाव लिए गए थे। भाजपा ने ‘इंडिया इनोवेट्स और इंडिया लीड्स’ का नारा दिया है। घोषणा-पत्र में ई-गवर्नेंस पर जोर दिया गया है। भ्रष्टाचार को रोकने के लिए भी इसमें भाजपा फिक्रमंद दिखी है। इसके अलावा महंगाई घटाने और रोजगार बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। ट्रेड एवं औद्योगिक कॉरिडोर विकसित करने की भी बात शामिल की गई है। यह भी पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बिहार की जरूरत है। तटीय क्षेत्र नेटवर्क का विकास ‘सागर माला’ परियोजना के जरिए किया जाएगा। प्रत्येक गांव और प्रत्येक क्षेत्र तक पानी मुहैया कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है। इसे भी पूर्वी उत्तर प्रदेश की समस्याओं में शुमार किया जा सकता है। ‘कर’ आतंक का खात्मा करने का वादा किया गया है। अल्पसंख्यकों को शिक्षा और उद्योग में अधिक अवसरों पर इसमें बल दिया गया है। मोदी, आडवाणी और राजनाथ की मौजूदगी में यह घोषणा-पत्र जोशी ने जारी किया। इसमें न्यायिक, चुनावी और पुलिस सुधारों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य गारंटी मिशन सहित नई राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति तैयार करने की भी बात इसमें कही गई है। अस्पतालों के आधुनिकीकरण करने और प्रत्येक राज्य में एम्स खोलने का पार्टी ने वादा किया है।

घोषणा-पत्र में अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए कर ढांचे में सुधार को जरूरी बताया गया है। टैक्सों के मौजूदा नियमों से लोगों की मुश्किलें बढ़ी हैं। मैनुफैक्चरिंग भी अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है और इसके जरिए ही रोजगार बढ़ेगा। इसे भी पूर्वांचल की समस्या से जोड़कर देखा जा रहा है। देश को बढ़ाने के लिए शिक्षा जरूरी है। हर गांव में नेशनल ऑप्टिकल फाईबर नेटवर्क बिछाया जाएगा। रेलवे का एग्री नेटवर्क तैयार किया जाएगा। यह भी पूर्वांचल की बड़ी समस्या है। हर व्यक्ति को पक्का घर देने का वादा किया गया है। घोषणा-पत्र में कहा गया है कि देश के युवा अभी स्किल्ड नहीं हैं और उन्हें पूरी तरह स्किल्ड किया जाएगा। इसके अलावा हाई स्पीड रेल नेटवर्क तैयार करने की बात कही गई है। महिलाओं की सुरक्षा बेहतर करने का भी इसमें जिक्र है। विज्ञान के क्षेत्र में विकास करने, नदियों को जोडऩे आदि के काम को इसमें शामिल किया गया है। अल्पसंख्यकों को अधिक अवसर देने, योग, आयुर्वेद और होम्योपैथी का विकास करने की बात भी कही गई है। यूजीसी उच्च शिक्षा में सुधार का काम भी करेगा। शहरों और गांवों का फर्क कम किया जाएगा। विकलांगों के लिए नए अधिकार तय होंगे। मदरसों के आधुनिकीकरण का काम करेंगे। मदरसों को केंद्र सरकार पैसा देगी। 9 चरण में हो रहे लोकसभा चुनाव के पहले दिन घोषणा-पत्र जारी करने के लिए उसके विरोधी दलों ने आलोचना की है। ऐसी चर्चा थी कि जोशी द्वारा तैयार किए गए मसौदे के कुछ बिन्दुओं पर मोदी को आपत्ति थी और वर्तमान में प्रचार अभियान में विकास पर मोदी के जोर के मद्देनजर संघ परिवार के पसंदीदा विषये इसमें शामिल नहीं होंगे। जोशी ने राम मंदिर के वायदे के संदर्भ में कहा कि हमने इसे सांस्कृतिक विरासत के खंड में रखा है। उनके लिए जो सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण है, वही उन्होंने कहा है।

घोषणा-पत्र जारी करने में पिछड़ चुकी भाजपा ने पार्टी स्तर पर पूरी भरपाई करने की कोशिश की है। बीच-बीच में पार्टी के अंदर उभरे मतभेद भी पूरी तरह पाट लिए गए हैं। घोषणा-पत्र जारी करते हुए मंच पर पूरा शीर्ष नेतृत्व मौजूद था। राजनाथ के अगल-बगल बैठे लालकृष्ण आडवाणी और नरेंद्र मोदी आपस में बातचीत कर हंसते दिखे। अंत में आडवाणी ने यह कहकर कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाया कि मोदी के बाद अब कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। जबकि, सुषमा ने भाजपा के चुनावी नारों को ही दोहराते हुए कहा कि अच्छे दिन आने वाले हैं। इस दौरान मोदी ने कहा – ‘मैं यह विश्वास दिलाता हूं कि मुझे जो जिम्मेदारी दी जाएगी, उसका पूरा वहन करूंगा। अपने लिए कभी कुछ नहीं करूंगा और बद इरादे से कोई काम नहीं करूंगा।’ जाहिर तौर पर उन्होंने उनको संदेश दिया जो मोदी सरकार बनने पर भेदभाव की आशंका जता रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा का एक ही मूलमंत्र है – ‘सबका साथ, सबका विकास।’ उनका कहना था – ‘हम भारत को वह शक्ति बनाना चाहते हैं, जिसे दुनिया आंख न दिखा सके, बल्कि उससे आंख मिलाना चाहे।’ राजनाथ ने बतौर अध्यक्ष कहा – ‘भाजपा अपने घोषणापत्र को संकल्प-पत्र मान रही है और भरोसा दिलाना चाहती है कि वह अपना हर वादा पूरा करेगी। इसीलिए वही वादा किया है, जो पूरा किया जा सके।’

बहरहाल, भाजपा के घोषणा-पत्र में मुद्दे तो बहुत हैं, पर यदि इसका गहन अवलोकन किया जाए तो पता चलेगा कि यह घोषणा-पत्र अखिल भारत के लिए पूर्वी उत्तर प्रदेश को ध्यान में रखकर बनाया गया है। देश का वही पूर्वी हिस्सा, जहां बनारस भी है और उसी बनारस से भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र चुनाव लड़ रहे हैं। हालांकि विरोधी कह रहे हैं कि मोदी को बनारस में जबर्दस्त चुनौती मिल रही है, लेकिन ऐसा लगता नहीं, क्योंकि धीरे-धीरे हवा अनुकूल होती जा रही है। साथ ही पार्टी द्वारा जारी घोषणा-पत्र में भी बगैर नाम लिए उन मुद्दों की सर्वाधिक चर्चा है, जो समस्याएं पूर्वांचल के लोगों को बेचैन किए रहती हैं। यूं कहें कि इस घोषणा-पत्र के बाद देश की जनता, खासतौर पर पूर्वांचल के लोगों की मोदी से उम्मीदें बढ़ गई हैं।

राजीव रंजन तिवारी

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