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चुनावी घोषणा-पत्र : कितने व्यवहारिक?

भाजपा ने देश-विदेश के निवेशकों के लिए बनी नीतियों का पुनर्मूल्यांकन करने, बैंकिंग क्षेत्र में सुधार और बचत के जरिए विकास को मजबूती देने की बात कही है। बैंकिंग क्षेत्र के नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स में कमी लाने के लिए भाजपा मजबूत नियामक बनाने की पक्षधर दिख रही है।

चुनावी घोषणा-पत्र एक ऐसा दस्तावेज है, जिसमें देश और समाज से संबंधित राजनीतिक दलों की नीतियां और उसकी कार्य-प्रणाली का प्रतिबिम्ब झलकता है। इसके माध्यम से राजनैतिक दल, जनता को बताने की कोशिश करते हैं कि विजन के तौर पर उसकी क्या नीतियां और योजनाएं हैं। लेकिन, आश्चर्य की बात यह है कि जिस देश की 26 प्रतिशत आबादी निरक्षर (2011 के आंकड़ों के अनुसार) और केवल 20.68 प्रतिशत लोग अंग्रेजी समझते हों (इंडियन ह्यूमन डेवलपमेंट के 2005 के रिपोर्ट के अनुसार), उस देश में कांग्रेस जैसे राष्ट्रीय दल और ‘आप’ जैसी आम लोगों से खुद को जुड़ी हुई का दावा करने वाली पार्टी अपने घोषणा-पत्र अंग्रेजी में जारी करती हैं। इस मामले में भाजपा को बेहतर इसलिए कहा जा सकता है, क्योंकि इसने अपना घोषणा-पत्र हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में जारी किया है।

राष्ट्र-निर्माण

कांग्रेस ने देश की नींव को मजबूती देने के नाम पर असंगठित क्षेत्र के कामगारों, महिलाओं, युवाओं और किसानों पर ध्यान केन्द्रित किया है। आर्थिक विकास को बढ़ाना, कौशल विकास, महंगाई पर रोक, महिला सशक्तिकरण और बाल कल्याण, अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति का सशक्तिकरण, अल्पसंख्यकों के विकास आदि को उसने अपने वादों में शामिल किया है। ये वही मुद्दे हैं, जिन्हें कांग्रेस अपने घोषणा-पत्र में हमेशा शामिल करती आई है। लेकिन इन क्षेत्रों को विकासोन्मुख बनाने में अब तक वह असफल रही है।

भाजपा ने अपने घोषणा-पत्र में राष्ट्र-निर्माण का आधार भागीदारीपूर्ण लोकतंत्र, सशक्त नागरिक, समावेशी विकास, गांवों में स्तरीय जीवन की सुनिश्चितता, बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता, कृषि के समुचित विकास, कार्यशील युवा, महिला भागीदारी, बेहतरीन सामाजिक संरचना, वैश्विक अर्थव्यवस्था, प्रभावशाली संस्थाएं, पारदर्शी सरकार, सर्वोत्तम संस्कृति के समुचित विकास और वैश्विक स्तर की आकांक्षाओं को माना है। सत्ता में आने पर भाजपा इसे अंजाम तक पहुंचाने में कितनी कामयाब होगी है, यह तो अभी समय के गर्भ में है।

‘आप’ ने नागरिकों को सशक्तबनाने की बात कही है, लेकिन कैसे? उसका जिक्र ‘आप’ के घोषणा-पत्र में कहीं नहीं है। समाजिक सुरक्षा की बात जरूर कही गई है, लेकिन वह समाजिक सुरक्षा क्या होगी, इसका जिक्र भी ‘आप’ के घोषणा-पत्र में नहीं है।

आर्थिक विकास

आर्थिक विकास एक ऐसा मुद्दा है, जिसका सीधा और तुरंत असर जनता पर पड़ता है। कांग्रेस ने अपने घोषणा-पत्र में विकास दर को 8 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। यह यूपीए के सत्ता में आने के वक्त की दस साल पुरानी भारत की आर्थिक विकास दर है। कांग्रेस ने ‘फिस्कल रिस्पॉन्सब्लिटीज एंड बजट ऐक्ट’ में संशोधन के माध्यम से राजकोषीय घाटे को कम कर, सकल घरेलू उत्पाद के 3 प्रतिशत तक लाने का वादा किया है। आधारभूत संरचना को मजबूती, वित्तीय सुधार और पब्लिक-प्राईवेट प्रार्टनरशिप के आधार पर आर्थिक विकास को गति देने की बात भी कही गई है। शहरीकरण में तेजी, ‘गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स बिल’ में संशोधन, नए ‘प्रत्यक्ष कर बिल’ को बनाने की बात कांग्रेस ने अपने घोषणा-पत्र में कही है। सरकारी अनुदान बांटने का चारा फेंकने से इस बार भी कांग्रेस बाज नहीं आई है। इस अनुदान के लिए वित्तीय स्रोतों के बारे में कहीं कोई जिक्र नहीं किया गया है।

आर्थिक विकास के लिए भाजपा ने अलग से कोई रोडमैप पेश नहीं किया है, बल्कि अलग-अलग सेक्टर के समेकित विकास के जरिए भारत को आर्थिक मजबूती देने की बात कही है। इसमें विकेन्द्रीकरण और जनभागीदारी को बढ़ाना, पिछड़ों का विकास, कृषि का विकास, विनिर्माण, आधारभूत संरचना का विकास, सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को बढ़ावा, निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा, व्यापार, पर्यटन, विज्ञान एवं तकनीक में निवेश के जरिए समेकित और दीर्घकालीन विकास की अवधारणा को सामने रखा गया है। भाजपा ने देश-विदेश के निवेशकों के लिए बनी नीतियों का पुनर्मूल्यांकन करने, बैंकिंग क्षेत्र में सुधार और बचत के जरिए विकास को मजबूती देने की बात कही है। बैंकिंग क्षेत्र के नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स में कमी लाने के लिए भाजपा मजबूत नियामक बनाने की पक्षधर दिख रही है। भाजपा ने प्रत्यक्ष विदेश निवेश की अनुमति सिर्फ उन क्षेत्रों में देने की बात कही है, जहां पूंजी और रोजगार का निर्माण हो सके। साथ ही कराधान में तार्किक सुधार कर उद्योग जगत के साथ-साथ आम लोगों के लिए भी बेहतर वातावरण मुहैया कराने की बात कही है।

‘आप’ आर्थिक विकास से संबंधित अपना कोई भी विजन पेश करने में असफल रही है। आर्थिक विकास को सीधे तौर पर जो प्रभावित कर सकता है, उसमें कालाधन और भ्रष्टाचार की बात ‘आप’ ने कही है। रोजगार, महंगाई को रोकना, स्वास्थ्य आदि की बात भी ‘आप’ ने जरूर की है, जो अप्रत्यक्ष रूप से अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगा, लेकिन उसका पूरा रोडमैप ‘आप’ द्वारा प्रस्तुत नहीं किया गया है। आर्थिक विकास के नाम पर ‘आप’ ने अपने घोषणा-पत्र में सुशासन, सरकार की पारदर्शिता के साथ-साथ वैकल्पिक आर्थिक एजेंडा प्रस्तुत करने की बात कही है, लेकिन वह वैकल्पिक एजेंडा क्या होगा, इसका जिक्र भी ‘आप’ के घोषणा-पत्र में नहीं है।

युवा एवं रोजगार

कांग्रेस ने अपने घोषणा-पत्र में युवाओं के विकास के लिए निवेश पर जोर दिया है। कौशल विकास, 70 नए विश्वविद्यालय एवं नए डिग्री कॉलेजों की स्थापना और उन्हें स्वायत्तता देने की बात कही है। साथ ही ‘राष्ट्रीय शिक्षा अभियान’ और उत्तर-पूर्व एवं जम्मू-कश्मीर के छात्रों के खिलाफ भेदभाव को लेकर कड़े कदम उठाने की बात कही है।

भाजपा ने अपने घोषणा-पत्र में प्रतिभा की पहचान कर उन्हें पुरस्कृत करने, उनके विकास और रोजगार के लिए ‘राष्ट्रीय युवा विकास परिषद्’ की स्थापना, ऋण प्रक्रिया का सरलीकरण, खेलकूद अकादमी की स्थापना, ग्रामीण खेलकूद कार्यक्रम का विस्तार, यूजीसी का पुनर्गठन, समुचित पाठ्यक्रमों का विकास, सीखने के दौरान कमाई की व्यवस्था, हर राज्य में आईआईटी और आईआईएम की स्थापना सहित रोजगार परक कई प्रशिक्षणों और कार्यक्रमों का वादा किया है।

‘आप’ ने अपने घोषणा-पत्र में भी सब के लिए शिक्षा, स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों की स्थापना, कौशल प्रशिक्षण, रोजगारपरक शिक्षा की बात कही है।

वंचित वर्ग का सशक्तिकरण

कांग्रेस ने अपने घोषणा-पत्र में अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों के सशक्तिकरण के लिए ‘अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन बिल 2011’ को संसद में पास कराने की बात कही है। उन्हें शिक्षित करने के लिए देश के हर ब्लॉक स्तर पर नवोदय विद्यालय कीतर्ज पर विद्यालयों की स्थापना का वादा किया है। अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को सरकारी एवं निजी संस्थानों में सरकारी खर्चे पर शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी, खासकर ऐसे छात्रों को जिनके पिता की सलाना आय 6 लाख रूपए से कम है। उच्च शिक्षा के लिए इस वर्ग के सभी छात्रों को ‘राजीव गांधी रिसर्च फैलोशिप’ का विस्तार करने का भी वादा कांग्रेस ने अपने घोषणा-पत्र में किया है। कौशल विकास के लिए इस वर्ग के हर छात्र को 10 हजार रूपए उपलब्ध कराने की बात कही है। स्थानीय निकायों को मजबूत करने के लिए कांग्रेस ने ‘पंचायतीराज (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) कानून 1996’ और ‘वन अधिकार कानून 2006’ को लागू करने का वादा किया है।

भाजपा ने अनुसूचित जनजाति, जाति और आदिवासी वर्ग को प्राथमिकता के आधार पर शिक्षित करने और उन्हें उद्योगपति बनाने की बात कही है। अस्पृश्यता का खात्मा, आवास, स्वास्थ्य, स्किल डेवलपमेंट भाजपा के एजेंडे का महत्वपूर्ण भाग है। इस वर्ग के लोगों के लिए अलग से एक शैक्षिक प्रणाली विकसित करने की बात भी कही गई है। सभी मौसम में चलने लायक सड़कें, ट्राईबल हाट को बढ़ावा, जंगल से निकलने वाले उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था, भाजपा के घोषणा-पत्र का प्रमुख हिस्सा है। आदिवासियों की भाषा और संस्कृति को संरक्षित करने के लिए ‘आदिवासी शोध एवं संस्कृति संस्थान’ की स्थापना भी घोषणा-पत्र का भाग है।

‘आप’ ने अपने घोषणा-पत्र में जाति-प्रथा को पूरी तरह समाप्त करने की बात कही है। वंचित लोगों को आरक्षण और जीवकोपार्जन के लिए मदद देना, बाल्मिकी समाज के लोगों को शिक्षा के लिए विशेष प्रावधान करना ‘आप’ के घोषणा-पत्र में प्रमुखता से शामिल किया गया है। नालों की सफाई करने वाले कर्मचारियों के लिए मास्क, सूट, मशीन और बीमा कराने का वादा भी इसमें शामिल है। आदिवासियों के मसले पर ‘आप’ का घोषणा-पत्र कांग्रेस के घोषणा-पत्र से पूरी तरह समानता रखता है।

महिला सशक्तिकरण एवं बाल-कल्याण

महिला सशक्तिकरण के लिए कांग्रेस ने अपने घोषणा-पत्र में कानूनों में सुधार करने की बात कही है। लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण, उनकी सुरक्षा के लिए सिटीजन चार्टर बनाना, महिला सशक्तिकरण के लिए 30 प्रतिशत राशि पंचायत को हस्तांतरित करने के साथ-साथ सिंगल, तलाकशुदा, विधवा और महिला द्वारा संचालित परिवार को भूमि का अधिकार सुनिश्चित करने की बात कही गई है। यह अलग बात है कि सत्ता में रहने के दौरान कांग्रेस ने इसके लिए पर्याप्त कोशिशें नहीं कीं।

भाजपा ने भी अपने घोषणा-पत्र में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की बात कही है। कन्याओं को पढ़ाने के लिए ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के नाम से राष्ट्रीय अभियान चलाने की बात उसके घोषणा-पत्र में शामिल है। ’बालिका समृद्धि’, ‘लाडली लक्ष्मी’, ‘चिरंजीवी’ जैसी योजनाओं की अच्छाईयों को शामिल कर एक व्यापक योजना पर अमल, महिलाओं के पोषण और गर्भाधान का विशेष ख्याल, आईटीआई में महिला शाखा की स्थापना, बलात्कार जैसे संगीन अपराधों के लिए बने कानूनों का कड़ाई से पालन और पीडि़तों को पुनर्वास के लिए सरकारी धनराशि, एसिड हमले की शिकार महिलाओं के लिए सरकारी खर्चे पर ईलाज और सर्जरी, पुलिस में महिलाओं की बढ़ोत्तरी, कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टलों का विस्तार, उनके लिए लघु एवं मध्यम उद्योग की स्थापना, आंगनबाड़ी महिलाओं की पगार में वृद्धि सहित कई तरह की योजनाओं को लागू करने का वादा भाजपा ने किया है।

‘आप’ ने महिला सशक्तिकरण के लिए भ्रूण हत्या पर रोक, सभी क्षेत्रों में महिलाओं की बराबर भागीदारी, हिंसा की शिकार महिला को पूरी सेवा की उपलब्धता और 33 प्रतिशत आरक्षण के अतिरिक्त महिला आयोग को स्वायत्तता देने का वादा किया है।

अल्पसंख्यक कल्याण

कांग्रेस ने अपने घोषणा-पत्र में अल्पसंख्यकों को स्कॉलरशिप देने की अपनी योजना का ही गुणगान किया है। इसके साथ ही कांग्रेस ने यह सुनिश्चित करने का वादा किया है कि शिक्षा ऋण के लिए आवेदन करने वाले किसी भी अल्पसंख्यक को किसी भी सरकारी स्तर पर परेशानी न हो। अल्पसंख्यक उद्यमी को ऋण और कर में छूट देने का प्रावधान, वक्फ बोर्ड की संपत्ति को सुनिश्चित करना, ‘सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा निवारण बिल’ को लागू करना, पिछड़े मुसलमानों को आरक्षण और सच्चर कमिटी की सिफारिशों को लागू करना कांग्रेस के एजेंडे में मजबूती से रखा गया है।

‘आप’ ने अपने घोषणा-पत्र में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा वाले क्षेत्रों के पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई, छह महीने के अंदर जांच पूरी करना, अल्पसंख्यकों के खिलाफ पुलिस उत्पीडऩ को रोकना, दलित मुस्लिमों और दलित ईसाईयों को एससी-एसटी वर्ग के अंदर आरक्षण, निर्दोष मुस्लिम लड़कों को जेल से छुड़ाना, वक्फ बोर्ड संपत्ति को मजबूत करना आदि शामिल किया है। भाजपा ने अपने घोषणा-पत्र में अल्पसंख्यक वर्ग की लड़कियों की शिक्षा पर जोर दिया है। मदरसों का आधुनिकीकरण, धार्मिक नेताओं से बात कर वक्फ बोर्ड को मजबूत करना और आपसी विश्वास बहाली करना उसका प्रमुख उद्देश्य है।

ग्रामीण विकास एवं कृषि

ग्रामीण विकास के तहत कांग्रेस ने अपने घोषणा-पत्र में खाद्य सुरक्षा की अनिवार्यता एवं वृद्ध, विधवा और तलाकशुदा के लिए पेंशन की बात कही है। गांवों का विकास करने के लिए सिंचाई, सड़क, पेयजल सुनिश्चित करने के साथ-साथ पंचायतीराज को पूरी तरह वित्तीय सहायता को सुनिश्चित करने का वादा किया है। इसके लिए अलग से ‘पंचायतीराज आयोग’ की स्थापना की बात भी कही गई है। कृषि क्षेत्र में विकास के लिए सिंचाई क्षेत्रों में बढ़ोत्तरी, पशु चिकित्सा के छात्रों को स्कॉलरशिप, कृषि शोध के लिए वित्तीय आवंटन और न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि करने का वादा कांग्रेस ने किया है।

भाजपा ने ग्रामीण विकास की प्राथमिकता को अपने घोषणा-पत्र में शामिल किया है। इसमें बिजली, पानी, सिंचाई, पेयजल, ब्रॉडबैंड, वितरण प्रणाली में सुधार, स्वास्थ्य सुविधाएं आदि शामिल हैं। कृषि में लाभ को 50 प्रतिशत बढ़ाने, 60 साल से ज्यादा उम्र के किसानों के लिए कल्याणकारी योजनाएं लागू करने, कम पानी से सिंचाई वाली तकनीक को बढ़ावा देने, फसल बोने से पहले मिट्टी परीक्षण की व्यवस्था, एग्रो फूड प्रोसेसिंग कल्चर की स्थापना, ‘ऑर्गेनिक फार्मिंग एंड फर्टीलाइजर कॉपोरेशन ऑफ इंडिया’ की स्थापना, हर्बल उत्पादों को बढ़ावा, कृषि बीमा, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, मुर्गी पालन, बागवानी और फूलों की खेती को बढ़ावा देना भाजपा की प्राथमिकता में शामिल है। इसके अलावा कृषि उत्पादों के भंडारण के लिए गोदामों की स्थापना, बाजार का विकास आदि कई मुद्दों पर भाजपा ने अपना विजन पेश किया है।

‘आप’ ने अपने घोषणा-पत्र में ग्राम सभा को अधिकार देने, ऋण की व्यवस्था, तकनीक का इस्तेमाल, उचित समर्थन मूल्य का निर्धारण, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के साथ-साथ खाद्य प्रसंस्करण के जरिए किसानों का जीवन उन्नत बनाने की बात कही है।

समाजिक सुरक्षा

भाजपा ने समाजिक सुरक्षा के तहत बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों, विकलांगों के लिए कई उपाय करने की बात कही है। दुर्बल बच्चों, खासकर अनुसूचित जन और जनजाति एवं कमजोर वर्ग, विस्थापितों, झुग्गी-झोपड़ीवासियों, फुटपाथ पर रहने वालों पर विशेष जोर देने का वादा किया है। वरिष्ठ नागरिकों को वित्तीय समर्थन, कर लाभ, उच्च ब्याज और वृद्धाश्रमों की स्थापना करने की बात कही है। सबसे बेहरीन बात अपने एजेंडे में भाजपा ने जो कही है, वह यह है कि वरिष्ठ नागरिकों को विविध सरकारी कार्यक्रमों में उनके अनुभव का लाभ उठाने के लिए आंशिक कामगार के लिए योजनाएं बनाए जाने का वादा।

कांग्रेस ने अपने घोषणा-पत्र में समाजिक सुरक्षा पर स्पष्ट नीति नहीं अपनाई है। जो भी वित्तीय मदद की बात कही है, वह भी सिर्फ अनुसूचित जाति और जनजाति तथा अल्पसंख्यकों की गई है। वहीं ‘आप’ ने घोषणा-पत्र में विकलांगों के लिए लागू 3 प्रतिशत आरक्षण को सख्ती से लागू करने की बात कही है। विकलांगों के चिकित्सा और अनुदान की बात भी ‘आप’ ने अपने घोषणा-पत्र में कही है।

संस्थागत सुधार

कांग्रेस ने अपने घोषणा-पत्र में संस्थागत सुधार के तहत चुनाव सुधार, पुलिस सुधार और कानूनी एवं न्यायिक सुधार की बात कही है। चुनावी सुधार के तहत कांग्रेस ने वादा किया है कि विशेष अपराध और महिलाओं के खिलाफ अपराध में शामिल लोगों को चुनाव लडऩे के लिए अयोग्य किया जाएगा। पुलिस व्यवस्था को प्रगतिशील बनाने के लिए उसमें आवश्यक सुधार की जाएगी। न्यायिक सुधार के तहत मानवाधिकार हनन को रोकना और न्यायधीशों की बहाली के लिए विशेष प्रावधान करना, कांग्रेस के घोषणा-पत्र का प्रमुख अंग है।

भाजपा ने अपने घोषणा-पत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के लिए प्रशासनिक, पुलिस, न्यायिक और निर्वाचन सुधार की बात कही है। प्रशासनिक सुधार के तहत जवाबदेही तय करने और मंत्रालयों के तार्किक विलय को शामिल है। न्यायिक सुधार के तहत सबको और समय से न्याय मिलने की बात भाजपा ने कही है। उच्च न्यायालयों में नियुक्ति के लिए राष्ट्रीय न्यायिक आयोग की स्थापना, कठिन कानूनों को आसान बनाना, पंचफैसलों को लागू करना एवं कोर्ट की क्षमता और संख्या में वृद्धि की बात की गई है। पुलिस सुधार के तहत संख्या में वृद्धि, आधुनिक हथियारों की उपलब्धता, बेहतर प्रशिक्षण, खुफियातंत्र की मजबूती को शामिल किया गया है। चुनावी सुधार के तहत लोकसभा और विधानसभा का चुनाव एक साथ कराने का प्रयास करने की बात कही गई है।

‘आप’ ने भी अपने घोषणा-पत्र में पुलिस और प्रशानिक सुधार की बात कही है, लेकिन उसका नीतिगत जिक्र नहीं किया है।

विदेश नीति

कांग्रेस ने अपने घोषणा-पत्र में विदेश नीति के तहत जलवायु परिवर्तन के लिए वैश्विक माहौल तैयार करने, परमाणु प्रसार को रोकने, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा, सीमा पार आतंकवाद को रोकना शामिल है। सुरक्षा परिषद् में भारत की स्थाई सदस्यता का प्रयास भी इसमें शामिल किया गया है। बातचीत के जरिए चीन के साथ सीमा विवाद को सुलझाना, पाकिस्तानी भूमि से आतंकवाद का खात्मा, सार्क देशों के साथ सहयोग बढ़ाना, श्रीलंका में तमिल अल्पसंख्यकों की हितों की रक्षा के लिए प्रयास करना और अफगानिस्तान के साथ अपने संबंधों को प्रगाढ़ करना कांग्रेस के घोषणा-पत्र का महत्वपूर्ण भाग है।

भाजपा ने वैश्विक संबंधों को प्रगाढ़ करने, आतंकवाद तथा तापवृद्धि पर वैश्विक मंच पर आमराय बनाने, दक्षेस एवं एशियान मंचों को मजबूत बनाने के साथ-साथ अन्य समूह देशों के साथ संवाद बढ़ाने को अपने एजेंडे में शामिल किया है। भाजपा ने राजनयिकों की संख्या बढ़ाने और उन्हें सशक्त करने, अपनी जमीन से उजड़े हिंदुओं को आश्रय देने को प्राथमिकता दी है। जबकि अप्रवासी भारतीयों की पूंजी को देशहित में प्रयोग करने पर उसका विशेष जोर है।

‘आप’ ने अपनी विदेश नीति में आतंकवाद के खिलाफ जीरो-टोलरेंस नीति अपनाने की बात कही है। आतंकवादियों को सजा देने के लिए द्विपक्षीय और बहुपक्षीय प्रयास, पड़ोसियों के साथ विश्वास बहाली, चीन से होने वाली घुसपैठ को रोकने के लिए प्रयास करना सहित लगभग वही मुद्दे हैं, जो कांग्रेस ने अपने घोषणा-पत्र में शामिल किए हैं।

आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा

आंतरिक और बाह्य सुरक्षा को लेकर कांग्रेस ने अपने घोषणा-पत्र में कुछ खास नहीं कहा है, सिवाय सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ाने के। भाजपा ने आंतरिक सुरक्षा के लिए आतंकवाद प्रतिरोधी तंत्र को पुनस्र्थापित करने का वादा किया है। राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में सुधार कर खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान की जिम्मेदारी उसे देने की बात कही है। खुफिया एजेंसियों को राजनीतिक दखलअंदाजी से बचाने का प्रयास किए जाने का भी वादा भाजपा ने किया है। माओवादियों से निपटने के लिए राज्य सरकारों के साथ योजना बनाने की बात कही गई है। बाह्य सुरक्षा से निपटने के लिए भाजपा ने अधिकारियों की बहाली, रक्षा उपकरणों की खरीद, संगठनात्मक सुधार, ‘राष्ट्रीय नौवहन प्राधिकरण’ की स्थापना, सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण, सीमा प्रबंधन की समीक्षा, घुसपैठ रोकने के लिए दंडात्मक उपाय, सशस्त्र बल न्यायाधिकरणों की कार्यकुशला सुनिश्चित करने का संकल्प अपने घोषणा-पत्र में किया है। ‘आप’ ने अपने घोषणा-पत्र में पुलिस सुधार और उसके आधुनिकीकरण की बात कही है। सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून में सुधार और सुरक्षा बलों द्वंरा महिलाओं के खिलाफ यौनिक अपराधों पर कठोर दंड की बात कही है। ’आप’ ने सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रूख अपनाने का वादा किया है। नक्सली समस्या से निपटने के लिए कोई स्पष्ट राय रखने बजाय ‘आप’ ने इससे राजनीतिक हस्तक्षेप के जरिए निपटने की बात कही है।

‘आप’ ने मीडिया सुधार के तहत पेड न्यूज के नाम पर मीडिया को कानूनी जाल में फंसाने का एजेंडा भी रखा है। जबकि भाजपा ने केन्द्र-राज्य के संबंधों में सुधार के तहत पूर्वोत्तर, जम्मू-कश्मीर और आंध्र-तेलंगाना पर विशेष फोकस करने की बात कही है। सत्ता का विकेन्द्रीकरण, व्यवस्था में सुधार के लिए जवाबदेह प्रशासन, ई-गवर्नेंस आदि को भाजपा ने अपने घोषणा-पत्र में जगह दी है। भाजपा ने उद्योग जगत, विनिर्माण, व्यापार, आधारभूत ढांचे के विकास, पर्यावरण के साथ-साथ पर्यटन को बढ़ाने को मुख्य रूप से शामिल है। रोजगार वृद्धि में सहायक पर्यटन उद्योग कांग्रेस और ‘आप’, दोनों के घोषणा-पत्र से गायब है। भाजपा ने ऊर्जा विकास, पर्यावरण और तकनीक के लिए अलग दृष्टिकोण पेश करने के साथ-साथ ‘हिमालय’ और ‘गंगा’ के लिए विशेष योजना बनाने की बात कही है, जिस पर कांग्रेस और ‘आप’ का ध्यान नहीं गया। राम मंदिर, समान नागरिक संहिता और अनुच्छेद 370 को हटाने सहित रामसेतु के संरक्षण को अपने घोषणा-पत्र में स्थान देते हुए इसे अपना मूल मुद्दा बताया है। सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण का कांग्रेस और ‘आप’ के कोई मुद्दा नहीं है।

सबसे महत्वपूर्ण बात, जो भाजपा, कांग्रेस और ‘आप’ के एजेंडे से गायब है, वह है मानव तस्करी की शिकार या वेश्यावृत्ति में फंसी महिलाओं के पुनर्रूद्धार, उनके पुनर्वास, उनके बच्चों की परवरिश और उनके लिए शिक्षा की। इस मुद्दे पर किसी दल का न कोई एजेंडा है और न ही कोई नीति। साथ ही इस दुनिया में अकेला रह गए वृद्धों के लिए भी किसी दल के पास कोई योजना नहीं है। सड़कों पर भीख मांगकर, फुटपाथ पर सोने को मजबूर ऐसे लोग की नजरअंदाजी विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र कहे जाने वाले भारत के लिए व्यथित करने वाला है।

इस बार के आम चुनावों में घोषणा-पत्र सबसे पहले जारी करने का श्रेय कांग्रेस को भले ही जाता हो, लेकिन उसके घोषणा-पत्र में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिसके आधार पर उसे अगले 5 सालों के विजन-पत्र के तौर पर देखा जाए। कांग्रेस ने अपने पिछले 10 सालों की उन नीतियों को ही आगे बढ़ाने का प्रयास किया है, जिसमें वह असफल रही है। ’आप’ ने अपने घोषणा-पत्र में उन सभी मुद्दों को छूने की कोशिश की है, जो ऊपरी तौर पर नजर आते हैं, लेकिन उसे बेहतर बनाने के लिए अपनी नीतियों को विस्तार देने में असफल रही है। भाजपा का घोषणा-पत्र लुभाता जरूर है, लेकिन इस लागू करने में वह कितना कामयाब होगी, यह समय की बात है।

सुधीर गहलोत

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